रीढ की हड्डियों के रोगों में हो रही बढोतरी : Increasing SPINAL CORD DISEASE CONDITIONS


पिचले कुछ सालों में मैने रीढ के रोगों में हो रही बढोतरी को देखा है । मुझे यह महसूस होता है कि यह बढोतरी कई कारणॊं से होरही है । कुछ प्रमुख कारण यह हो सकते हैं ।

१- उठने बैठने सोने आराम करने के पोस्चर में अनावस्यक तनाव रीढ की हड्डियों की ओर तनाव पैदा होना

२- लम्बी दूरी की यात्राओं का रोजाना लम्बे समय तक बैथे रहने या खड़े होने की स्तिथी में तय करना

३- कार, मोटर साइकिल या वहनों का लमबे समय तक ड्राइव करना

इनके अलाव भी बहुत से करण समझ मे आये है जिनमे कम्प्यूतर मे ज्यादा देर तक काम करने, रीढ की हड्डी में गिर जाने या किसी एक्सीडेन्ट से चोट लग जाने, या अन्य किसी कारण या बीमारी से रीढ में कोई तकलीफ पैदा होने से

और भी वजहें हो सकती है ।

मुझे अधिकतर इस बीमारी से ग्रसित मरीज जो भी मिले , उनकी उम्र २० साल से लेकर ४५ साल की उम्र वाले मिले । इसमे से कै ऐसे थे जिन्होने बिस्तरा पकड रखा था ।

ऐसे सभी मरीज एलोपैथी कि दवायें ले रहे थे जिनमें केवल पेन किलर्स, विटामिन की गोलिया और जरूरत से ज्यादा स्टेरायद ले रहे थे । यह सब दवायें लेते लेते जब इन दवाओं का असर खतम हो गया और इन प्रेस्क्रिप्सन से भी आराम मिलना बन्द हो गया तब बहुत खराब हालात में ऐसे मरीज हमारे पास इलाज के लिये आये ।

हमने इन सभी मरीजों का ई०टी०जी० परिक्शण किया और तदनुसार उनके पूरे शरीर के अन्गों में कहांकहां व्याधियां व्याप्त है और कौन कौन से अन्ग कितना काम कर रहे है ? शरीर में त्रिदोष की क्या स्तिथि है इतयादि इत्यादि बातों को सोच समझ्कर जब इलाज किया गया , तब जाकर लगभग १५ दिन बाद ऐसे मरीजों को आराम मिलना शुरू हुआ ।

हम ऐसे मरीजों के साथ कम्बाइन्ड चिकित्सा का उपयोग करते हैं । जिसमे आयुर्वेद, होम्योपैथी, य़ूनानी दवओं के साथ साथ एलोपैथी के पेन किलर्स का उपयोग करते है, ताकि मरीज को दर्द बिल्कुल न हो और उसे दर्द क अहसा हो तो न के बराबर । कुछ दिनों बाद पेन किलर्स छूट जाते है और मरीज धिरे धिरे आयुर्वेद या होम्योपैथी या पर अधारित हो जाते है। हम इन मरीजों को मैग्नेट थेरप्य, अकूपन्क्चर, प्राक्रतिक चिकित्सा, फीजियोथेर्रेपी, पन्चकर्म आदि का उपयोग करते है ।

हमारा मानना है कि रीड़ की बीमारियों में यदि प्ररम्भिक अवस्थाअमें इलाज ले लिया जाय तो एन्काइलोसिन्ग स्पान्दिलाइटिस जैसी तकलीफें भी दूर की जा सकती हैं ।

लेकिन यह तभी सम्भव है जब इलाज करने वाल चिकित्सक चिकित्सा कर्य में निपुण हो ।

हम नब्बे दिनों के बाद या जब जरूरत होती है तब रोगी के रोग की स्तिथि कि मानीटरिंग ई०टी०जी० परिक्षण से लगतर करते रहते है जिससे इलाज बहुत सटीक , सही और प्रभाव्शाली हो जाता है और किसी प्रकार कि गलती होने की सम्भावना न के बराबर होती है ।

सर्जरी से बचें Avoide Surgical Interventions

रीढ की हड्डियों की बीमारियो में सर्ज्ररी न करायें तो अछ्छा है । जब तक कि बहुत महत्व पूर्ण स्तिथि न आ जाये तब तक नये और कुछ पुराने हो गये रोगों में सर्जरी न करायीं तो अच्छा होगा । मैने बहुत से रोगियों को देखा है कि  वे रीढ की सर्जरी कराने के बाद एक्दम अपन्ग हो गये और फिर उनका सारा जीवन बिस्तरे पर ही लेटे लेटे बीता और कोई भी औषधिया उनको आराम नहीं दे सकीं । ईसलिये बेहतर यही है कि बहुत सोच समझ कर सर्जरी के बारे में विचार करें ।

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5 टिप्पणियाँ

  1. मेरी रीढ़ की हड्डी और पैरो की नसों में बहुत अधिक पैन होता है । मैंने mri भी करवा ली और डॉ से पूछा तो उन्होंने बोला की आपके रीढ़ की हड्डी के 2 छले गीस (L4,L5,S1) कर बहार आ गए है । सर्जरी करवाओ ।

    मैं सर्जरी नहीं करवाना चाहता मुझे पता है सर्जरी सफल नहीं है ।

    अभी मैं acupressure ले रहा हूँ । वहाँ मुझे बोला सर्जरी की जरुरत नहीं ।आप ऐसे ही ठीक हो जाओगे। 14 दिन हो गए कभी सही रहती है कभी दर्द होता है ।

    क्या करू ?

    जल्दी सुझाव दीजिए । मैं अकाउंटेंट का कार्य करता हूँ । 1 माह से bed पर हूँ ।

    ——- REPLY ——-

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  2. Sir reed ki haddi me tumor ( spinal tumor ) hain
    9 chemotherapy ho chuki hain par aaram nahi hain
    Pain bahut jayada hora hain ,kabhi kabhi marphin se control nhi hora

    Please give suggestions on ungent basis
    Himanshumani72@gmail.com
    8004169884

    ………..reply by Dr DBBajpai………..jo ilaj kara rahe hai usake saathsaath AYURVEDA AYUSH ka bhi ilaj karaye to jyada behatar hoga

    ——- REPLY ——-

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    आप हमारे द्वारा ठीक किये जा चुके मरीजो से सम्पर्क कर सकते है /you can directly make conversation to our patient, who have been treated by us.
    Please remember that EVERY PATIENT HAS ITS OWN REMEDY BASES ON THE EXAMINATION CONCLUSION AND THE REMEDIES DIFFERS FROM PATIENT TO PATIENT THAT MEANS ONE PATIENT MEDICINE CANNOT SUIT TO OTHER SIMILAR COMPLAINTS PATIENT AND MAY HARM SERIOUSLY EVEN TO DANGER TO LIFE. So donot presserise below given patient number asking for remdies.
    Disease condition……contact person…………mobile number
    1- Leucoderma>>>>>>RAJESH>>>>>>>>>9717759899
    2- Leucoderma>>>>>>Anil >>>>>>>>>>> 9452528904
    3- Leucoderma>>>>>>Rakesh >>>>>>>> 9415039517
    4- Leucoderma >>>>> . Manjhi ..>>>>>>>..7275465838
    5- Epilepsy >>>>>>— Shashi Kumar >>>9934219731
    6- Epilepsy———Sahib Singh————9871478336
    7- Epilepsy ———- Pandey ————–9926521182
    7-[a] Epilepsy—— K. Manjhi————9752974404
    8- Fistula ———–Kumar ————— 9919477058
    9- H.I.V.———– Kumar ————–8877362655
    9-[a] H.I.V.——- Bhaijaan———–8624890177
    10- Body GLANDS—Mohan ———- 9973308564
    11- Spinal Cord—–Hoshiyar Singh — 9812560221
    12- Incurable Disease–Ritesh ——– 9997629280
    13- Incurable disease-Sandeep ——- 9829612990
    14- Cancer————–Manish ———7607857989
    15- A.V.N. Avascular Necrosis-Danish - 9026938052
    मोबाइल द्वारा रोगियो से सम्पर्क करने वाले लोगो से अनुरोध है कि वे ऊपर बताये गये मरीजो के नम्बर पर सम्पर्क करके रोगियो को अनावश्यक बाते पूछ्कर परेशान मत करें / बहुत से लोग बताये गये नम्बरो पर फोन करके दवाओ के बारे मे जानकारी करने का प्रयास करते है / ऐसे लोगो को सावधान किया जाता है कि हर मरीज का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण से प्राप्त रिपोर्ट को आधार करके उसके व्यक्तिगत और चरित्रगत बातो को ध्यान करके दवाये लिखी जाती है / एक जैसे रोगो की दवाये रोगी के मिजाज और उसकी ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण से प्राप्त डाटा से बदल जाती है / एक मरीज की दवा दूसरे मरीज को कभी सूट नही करती है उल्टे तकलीफ बहुत भयानक तरीके से बढ जाती है / इसलिये ऐसी गलती मत करें /
    Please note that we have NO BRANCH anywhere in the country and outside of the country / देश अथवा विदेशों मे हमारी कोई भी ब्रान्च किसी भी शहर मे नही है / सभी परीक्षण मशीनो द्वारा किये जाते है और कनक पालीथेरापी क्लीनिक एवम रिसर्च सेन्टर, ६७ / ७०, भूसाटोली रोड, बर्तन बाज़ार,कानपुर शहर, उत्तर प्रदेश, भारत के अलावा दूसरी किसी भी जगह पर ऐसी सुविधा उपलब्ध्ध नही है /
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