दिन: जून 12, 2010

ज्वर की आयुर्वेद चिकित्सा Treatment of Fever in Ayurved Medical System


Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedSacan recording of the traces of  a patient suffering from Chronic Fever with Severe Allergy on Face and itching in whole body.Lower seven traces are in deppressed condition and also upper four traces are not well elevated. Lower four traces are not in straight line and in haphazered status.

Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedSacan recording of the traces of a patient suffering from Chronic Fever with Severe Allergy on Face and itching in whole body.Lower seven traces are in deppressed condition and also upper four traces are not well elevated. Lower four traces are not in straight line and in haphazered status.

आयुर्वेद मं ज्वर यानी बुखार यानी Fever की चिकित्सा के बारे में कहा गया है  कि ज्वर समस्त रोगों का राजा है  
और यह जीवन काल में जन्म के समय और मत्यु के समय तथा यदा कदा परिस्तिथियों के उतार चढाव कए साथ साथ  तक बना रहता है /
                     
आयुर्वेद बताता है कि जवर किन परिस्तिथियों में शरीर में पैदा होते है और उनकी वजहें क्या क्या हो सकती है /   
यह एक आश्चर्य जनक तथ्य है कि जिस रोग के बारे में हमारे आयुर्वेद्ग्यों ने हजारों हजार साल पहले observe   
कर लिया था और इन सबके बारे में लिपिबद्ध कर लिया था, उसे आज आधुनिक चिकित्सा विग्यान सही ठहरा   
रहा है /                    
आयुर्वेद की निदान ग्यान करानेवाली पुस्तक ”माधव निदान” मे ज्वर विषयक जानकारी पढने से तो यही साबित होता है /
फर्क सिर्फ इतना सा है कि माधव निदान में जितना वर्णन रोग के बारे में बताया गया है , वह केवल सूत्र रूप में है  
और उस समय के आयुर्वेद विग्यानियों नें जितना ग्यान ज्वर रोग निदान द्वारा प्राप्त किया था वही सब पूर्ण रूप से   
वर्णित किया गया है /                  
                     
‘भाव प्रकाश” नामक ग्रन्थ,  जिसे प्रसिद्ध आयुर्वेदग्य आचार्य भाव मिश्र ने compose  किया है, ने अपने ग्रन्थ में ज्वर रोग का 
निदान, कारण , चिकित्सा और बचाव के उपायों का बहुत सटीक और कभी भी न फेल होने वाले नुस्खों , दवाओं  
पथ्य , परहेज आदि बता कर कैसा भी ज्वर हो, उन सबकी चिकित्सा बतायी है /        
                     
मैने बुखार के  रोगियों का इलाज करके यह अनुभव किया है कि बुखार का इलाज करने के साथ साथ मरीजों को     
जो अन्य बीमारियां होती हैं, वे भी ठीक हो जाती हैं /            
                     
माधव निदान में जितना भी ज्वर के बारे में कहा गया है, उसे पढकर बहुत हैरानी होती है कि आज के चिकित्सा वैग्यानिक                             
जितने भी बुखारों का परिचय करा रहे हैं, वे सबके सब हजारों साल पहले ही बता दिये गये हैं /    
                     
हां, एक बात का फर्क जरूर है कि माधव निदान या भाव प्रकाश में जितना भी जवर क वर्णन दिया गया है वह केवल परिचय सवरूप में है
अगर आज के अध्धयन के हिसाब से देखें तो / अन्यथा प्राचीन काल के हिसाब से जितना बताया गया है , वह निदान ग्यान के हिसाब से परिपूर्ण
लगता है /                  
                     
आज के विग्यान के द्रष्टि कोण से रोगों के बारे में अध्ध्यन Pathophysiology और Pathological evaluation के द्रष्टि कोण 
को ध्यान में रखते हुये करते है / जिसमें  Bacteriology का स्थान सर्व प्रथम है /      
                     
लेकिन आयुर्वेद में जवर का निदान चिकित्सा ग्यान आयुर्वेद के सिध्धान्तों को ध्यान में रख कर किया गया है / आज भी यही निदान ग्यान 
और चिकित्सा ग्यान  ज्व र सम्बन्धित बीमारियों के आरोग्य के सन्दर्भ में उतना ही सटीक और कार्गर है जितना के प्राचीन काल में 
रहा होगा /                  
                     
मै सन १९६६ से चिकित्सा कार्य कर रहा हूं / ज्वर के रोगियों की चिकित्सा में मै महासुदर्शन चूर्ण, महा ज्वरन्कुश रस, 
त्रिभुवन कीर्ति रस, आनन्द भैरव रस , कई प्रकार के ज्वर नाशक काढा Herbal Tea आदि आदि का उपयोग करता हू / 
ज्वर की चिकित्सा में मुझे शत प्रतिशत सफ़लता मिली है, बुखार कैसा भी हो किसी भी बीमारी के expression की वजह से हो तो 
भी ज्वर की चिकित्सा करने से मुख्य रोग के साथ साथ जवर का भी शमन हो जाता है /