महीना: सितम्बर 2010

ETG AyurvedaScan Publicity campaign in Daily JAGARAN Hindi Language newspaper ; देश में हिन्दी भाषा के सबसे अधिक पढा जाने वाले अखबार दैनिक “जागरण” में ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की पब्लीसिटी कैम्पेन


आयुर्वेद की पहली और अकेली तकनीक इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ; ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन को देश की जनता के बीच बढती हुयी लोकप्रियता और इसके प्रचार और प्रसार तथा देश के प्रत्येक नागरिक को इस बहु उपयोगी तकनीक के बारे में जानकारी देने के लिये अखबार के माध्यम से सभी को सन्देश देने के लिये अभियान छेड़ा गया है / प्रस्तुत है इस प्रसारित विग्यापन की एक झलक /

अखबार मे यह विग्यापन प्रत्येक शुक्रवार और सोमवार को सप्ताह में दो दिन प्रकाशित होता है /

We have started publicity campaign in Daily Jagaran Hindi language newspaper for introducing to each and every person of this country about the only Ayurvedic examination technology Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan system and its availability. The publicity is going on and the Ayurveda lovers is happy for the availability of this technology for the treatment and research purposes in large numbers.

Daily JAGARAN publicity Ad

The advertisement is published in Friday and Monday Kanpur issue in a week two times.

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STEROIDS ; the MEDICINE creating unwanted PHYSICAL & MENTAL problems


The medicine steroid is a fast acting, life saving and a medicine of trust in emergency treatment and management and of first choice.

The use of steroid is beneficial in the acute emergent cases and the results are quite satisfactory and that is the reason the physician all over the world use this medicine.

Besides having a wonderful curing capacity of this medicine, the over use of this medicine is causing many physical and mental problems. Day to day I see often many cases, where over use of this medicine , caused patient in such a pitiable stage, where there is no way left for help from other medical systems.

Many Doctors use heavy doses of steroids in one day about 2000 mg to 10,000 milligramms and over than it, for months and years. There prescriptions show, how they are using this medicine in plenty ?

Contra-indication of this drug shows that over use of this medicine is harmful for every system of human body and therefore it is instructed to use the medicine carefully.

Heavy doses of this medicine causes a serious health problem like Kidney anomalies, Blood anomalies, Slin problems, Liver & GIT disorders, disturbed metabolism and many more pathophysiological and pathological satges as a side effect of this drug.

These unwanted side effects troubles to patient and in fact , when they are not relieved or cured by the Allopathic physician, naturally the patient will go to other system’s practitioners.

This is crucial stage for other systems practitioners. The reason is, it is understood by the other systems , that Allopathic medicine suppresses the physiological phenomenon of a disease condition and thus their physiological cycle becomes incomplete. This incompletion disturbes the metabolic function of the body and thus affect the path of cure. Therefore as a result produces unwanted symptoms and syndromes and the medicine creates a new disease condition.

Day to day every AYUSH practitioner is facing this problem. The only way is in the hand of the AYUSH practitioner that they should continue the steroid along with their own medicine as a replacement therapy and slowly and gradually withdraw the steroid. Because patient beomes habituate with the potency of steroid and sudden withdraw of steroid may cause problem.

Therefore withdraw steroid therapy slowly and gradually and this is the safest way for patient treatment without any risk.

वास्तविकता और सच्चाई की बात यह है कि steroids लम्बे समय तक लगातार देने से या खाते रहने से शरीर के अन्दर ऐसे परिवर्तन हो जाते है, जिनके कारण अगर रोगी कोई अन्य चिकित्सा पध्यति का इलाज कराना चाहे तो उसके लिये मुसीबतें ही मुसीबतें खड़ी हो जाती है / यह एक सच्चाई है और इसे स्वीकार किया जाना चाहिये /

मैने अपने और दूसरे चिकित्सकों के मरीजों का बहुत गहरायी के साथ अध्य्यन किया है और यही पाया कि steroid का लम्बे समय तक उप्योग करने वाले मरीज एक ऐसे सन्कट में घिर जाते है जिसका जल्दी निवारण करने का कोई उपाय नहीं है /

आधुनिक चिकित्सा के चिकित्सक केवल अपने चिकित्सा विग्यान के बारे में जानते है / उन्हे दूसरे चिकित्सा विग्यान के बारे में बहुत अधिक जानकारी नही होती है / इसलिये वे मरीजों से कह देते है कि इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, जबकि दूसरे चिकित्सा विग्यान या चिकित्सा पध्यतियों में उनका इलाज होता है / यह चिकित्सकों का गैर जिम्मेदाराना पेशेवर व्योहार है / इसे रोका जाना चाहिये /

हम चिकित्सक जो भी चिकित्सा व्यव्साय कर रहे है, आखिर वह किसके लिये है ? हम जो भी कर रहे है, वह सब मरीजों के लिये कर रहे है, रोगी व्यक्ति के लिये कर रहे है / यह तो बेईमानी की बात हुयी कि हम सही बात मरीजों से न बतायें और वह अपनी जिन्दगी का साथ इसी गफलत में छोड़ बैठे /

डेन्गू, वाइरल बुखार, इन्फेक्सन, इन्फ़ेक्टिव स्वास्थय समबन्धित शारीरिक समस्यायें


पिछले ४५ साल से अधिक हो चुके है, मै हर साल बरसात के दिनों में यानी जुलायी माह से लेकर दीपावली तक, इन्फ़ेक्सन से प्रभावित मरीजो का इलाज करता चला आ रहा हू / कभी यह मलेरिया की शक्ल मे होता है, कभी यह डेन्गू का चेहरा पहन लेता है, कभी यह कन्जन्क्टीवाइटिस की शकल अख्तियार कर लेता है, कभी मेनिन्जाइटिस का रूप धर लेता है, कभी यह इन्फ़ेक्टिव या वाइरल हिपेटाइटिस बन जाता है, कभी यह डायरिया बन जाता है /

वाइरस जो ठहरा , थोडा मूडी है, इसलिये यह अपने मूड के हिसाब से अपना चोला भी बदल देता है / नाक में अगर अड्डा बनाया तो साइनुसाइटिस पैदा कर दी या इन्फ़्लुएन्ज़ा जैसे लक्षण दिखा दिये / दिमाग मे अड्डा बनाया तो मेनिन्जाइटिस के रूप पैदा किये / पेट मे हमला बोला तो डायरिया या हिपेटाइटिस या कोलायटिस / खून के भीतर घुसा तो वाइरल बुखार पैदा कर दिया /

यानी कहने का मतलब यह कि जरासीन है , आदमी मिला, उसके भीतर घुसे, क्मजोर पुर्जा देखा, बस वही अड्डा जमा लिया और लगे बढाने अपनी ताकत / हर सेकन्ड मे दूना जो होते है , यही इनकी सबसे बड़ी शरारत और फ़ितरत है /

मरता क्या न करता, इन्सान के पास अब चारा क्या बचा, जब उसे तकलीफ होने लगी ?

लीजिये, तकलीफ का इलाज बता रहा हू / मै पिछले ४५ साल से इन्फ़ेक्सन की तकलीफॊ मे नीचे लिखा होम्योपैथी का फार्मूला आजमा रहा हू और कभी भी फेल नही हुआ / आप भी आज्माइये /

CHIRAYATA Q
KALMEGH Q
TINOSPORA CARDIFOLIA Q
AZADIRACHTA INDICA Q
CEASALPEANIA BONDUSELA Q

यह पाच दवाये बराबर बराबर क्वान्टिटी मे ले और एक साथ मिलाकर मिक्सचर बना ले / इस मि्श्रण का एक चम्मच चार चम्मच पानी में मिलाकर ३ या ४ घन्टे के अन्तर से देना चाहिये /

अगर तकलीफ या इन्फ़ेक्सन का जोर ज्याद लगे तो इस मिश्रण में ECHINESIA Q की ५ से १० बून्द अलग से मिला ले /

उक्त मिश्रण सभी तरह के वाइरस, बैक्टीरिया, फन्गस या पैरासाइटिक इन्फ़ेक्सन को अवश्य ठीक कर देती है /

यह तो हुयी होम्योपैथी की बात, अब लीजिये आयुर्वेद का फार्मूला /

महा सुदर्शन घन वटी १ गोली
महा ज्वरान्कुश रस १ गोली
आनन्द भैरव रस १ गोली
मृत्युन्जय रस १ गोली

इन चारों गोलियों को अदरख और तुलसी की पत्तियों की चाय के साथ देना चाहिये / अगर चाय न पसन्द करे तो गुन्गुने पानी से दवा लेना चाहिये / सामान्य चाय के साथ भी ले सकते है / ३ या ४ घन्टे के अन्तर से दवा की मात्रा दें / एक दो दिन में बुखार या इन्फ़ेक्सन ठीक हो जाता है / अगर इसके साथ पतले दस्त आ रहे हों तो इसके साथ एक या दो कुटज घन वटी मिलाकर दें /

मै हर वर्ष यही फार्मूला उपयोग करता हू, इस साल भी वर्तमान में यही फार्मूला आजमा रहा हू / इसमे मुझे शत प्रतिशत सफ़लता मिली है / सब लोग इसे आजमा कर देखे /

When all LABORATORY TESTS and X-RAY, ULTRASOUND, CT SCAN and MRI SCAN becomes NORMAL, but patient says , he is sick and feeling physical and mental problems………..


Often we see , in our daily medical practice, that many patient comes with their records of pathological examination and scans , earlier done by their family physician recommendation, which are showing the normal condition of the patient.
After these scans and pathological reports, which shows normal parameters of these patient, it is natural to observe that in fact patient is not having any complaint and is totally fit.
Some patient becomes very furious after saying by their attending / family physician / consultants that they are fit and healthy and have no complaints over all according to the reports they have. Contrary patient says that he is feeling this and that trouble and complaints and no body understand my problems to which they are suffering, even then their Doctor says , you are fit. Patient says that I am feeling death like pain and doctor giving me medicine, which just after taken , I sleep much more and my mind did not work, nor think, I am becoming mad.

This happens in our daily practice, but what to do in these cases ?

As you all know that I always suggest to my patient for an ETG AyurvedaScan examination.
When I suggest for an ETG AyurvedaScan examination and after doing their scan, the condition becomes clear that patient is in actually having the complaints of the concerned systems.
What happened, as I have observed and studied, that the modern western medicine system’s laboratory tests are based on the Pathological conditions. If we see any scanning system, say for example Ultra sound scan, this scan is a very important diagnostic equipment for modern days medical practice and no doubt it helps a lot to physician. The data of Ultra sound is belongs into two categories. [1] It provides the shape, size of the scanned organs, whether they are in normal limit or enlarged or smaller that normal limit [2] it provides the hardness, glands, deposits, clots, pus, any foreign substance etc inside the organs scanned.
Apart from these two pathological conditions, Ultra sound with its limitations is not able to provide, how much organ is functioning and that is known as “PATHOPHYSIOLOGY” or pathophysiological conditions.
Those patients, who says that they are not well feeling, in facts , are suffering from Pathophysiological conditions and that’s why they say that they are sick.
ETG AyurvedaScan system records the pathophysiological conditions as well as Pathological anomalies upto some extent and thus treatment based on the line of the findings of the ETG is always result oriented, which we have observed since many years.

The patient gets definite cure or relieved in which we have seen that all the pathological examination and scans were normal, but patient complaints always for their unhappy physical condition.