महीना: अक्टूबर 2010

OBESITY ; A case of OBESITY treated on the line of the findings of ETG AyurvedaScan ; Patient’s weight reduces from “102” KILLOGRAMS to “72” KILLOGRAMS ; A detailed study of the case


पिछले साल फरवरी माह मे एक १६ साल का लड़्का अपने मोटापे का इलाज कराने हमारे केन्द्र में आया, जिसका वजन एक सॊ दो किलो [102 Kilo] था / लड़्के के साथ उसके माता पिता भी थे /

This is the first ETG AyurvedaScan record.

मरीज का उस समय का फोटॊग्राफ , जब वह हमारे पास अपनी चिकित्सा कराने आया था/ यह फोटॊ फरवरी २००९ की है , जब इस मरीज का वजन १०२ किलो था /

नीचे दिया फोटॊग्राफ उस समय का है, जब उसकी चिकित्सा की गयी और उसका वजन ७२ किलो तक आ गया है / यह फोटॊ नबम्बर २०१० की है /

This is the second ETG AyurvedaScan record.

इस मरीज के दूसरे और अन्य एलोपैथिक चिकित्सकों द्वारा किये गये इलाज के दरमियान , कराये गये पैथोलाजिकल परीक्षण की रिपोर्ट्स /

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This is the  third recorded on the 30th October 2010.

लड़्के के मातापिता उसके मोटापे से परेशान थे / उन्होने पहले तीन साल तक कानपुर के नामी गिरामी एलोपैथी के चिकित्सकों से इलाज कराया, जिसका उनको कोई फायदा नहीं मिला, बल्कि इलाज करते करते उसका वजन और अधिक बढ गया / लड़्के के माता पिता आयुर्वेद और होम्योपैथी का इलाज कराना नहीं चाहते थे, क्योकि उन्को इन चिकित्सा पद्ध्यतियों पर विश्वास नहीं था /

जब तीन साल से अधिक एलोपैथिक चिकित्सा का प्रयोग कर चुके और उससे कोई लाभ नही मिला और उनके पास कोई अन्य उपाय नहीं बचा और एलोपैथिक चिकित्सा से उनका विश्वास डगमगाने लगा ्तो “मरता क्या न करता वाली स्तिथि मे आ गये /

उनके एक रिश्ते दार ने सलाह दी कि आयुर्वेदिक इलाज कराना चाहें तो डा० डी०बी० बाजपेयी के पास चले / कोई और रास्ता जब नहीं बचा तो हमारे पास आ गये /

जब हमारे पास आये तो हमने सलाह दी कि पहले एक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परिक्षण कराये तभी पता चलेगा कि शरीर के अन्दर क्या गड़बड़ हो रही है ? बिना इसके पता नही चलेगा कि शरीर का कौन सा भाग बवाल पैदा कर रहा है /

लड़्के का ई०टी०जी० परिक्शण किया गया जिसकी findings नीचे लिखी हुयी है /

[यह रिपोर्ट समय के अभाव के कारण अधुरी है और पूरी नहीं है / इस मरीज की रिपोट तथा अन्य तथ्य समय समय पर प्रस्तुत किये जायेन्गे]

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ऐसा क्यॊं है?


पिछले कई महीनों से कानपुर शहर में वाइरल बुखार का प्रकोप बना रहा / इस तरह के वाइरल इन्फेक्सन हर साल बरसात के मौसम में होते ही है / पिछले ४० साल से मै वाइरल इन्फेक्सन का इलाज करता चला आ रहा हूं / वाइरल इन्फेक्सन हर साल अपना मिजाज बदल देता है, अपनी पहचान बदल देता है, अपने प्रभाव को कभी बहुत नरम और कभी बहुत गरम बना लेता है / यानी कभी इस वाइरल का प्रभाव फैटल होता है और कभी तकलीफ्देह और कभी साधारण तकलीफ देकर जल्द ही छोड़ देता है / ऐसा मेरा अनुभव रहा / सबसे सुखद बात यह रही की , पिछले ४० साल में वाइरल बुखार का एक भी रोगी मेरे इलाज से मरा नही और सबके सब ठीक और आरोग्य प्राप्त करके, स्वस्थ्य होकर गये और आज भी जिन्दा है /

एलोपैथी चिकित्सा के मुकाबले में मेरे द्वारा आयुर्वेदिक और होम्योपैथी दवाओं द्वारा इलाज किये गये रोगी जल्दी और सुरक्षित ठीक हुये / यह मै इसलिये कह रहा हूं क्योंकि मै रोजाना अखबारों में प्रकशित खबरें पढा करता हूं कि ” आम जनता महीनों से बुखार से पीड़ित है और बुखार ठीक नहीं हो रहा है “, यह सब पढकर जब मै अपना अनुभव देखता और समझता हूं तो मै इस सोच में पड़ जाता हू कि जब हमारे पास बुखार से निपटने के लिये “बेहतर” उपाय मौजूद है तब यह स्तिथि क्यों है ?

मैने आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवाओं का उपयोग किया है / किसी किसी रोगी में बुखार न बढने पाये और यदि मरीज चाहता है कि बुखार बढने से उसे तकलीफ होगी , तो मै उसे Paracetamol tab केवल बुखार का जोर कम करने के लिये कहता हूं / चिकित्सक और चिकित्सा का उद्देश्य ही यही है कि रोगी को उसकी तकलीफ से राहत दिलाई जाय और रोगी के शारीरिक कष्टॊं को दूर किया जाय, चाहे जो भी उपाय करना पड़े /

फिर ऐसा क्यॊ है कि वाइरल बुखार से निपटने के लिये जब बेहतर उपाय उपलब्ध है तो लोग क्यों मर रहे है और तकलीफ भोग रहे है ?

UNKNOWN VIRUS FEVER ; KANPUR city is under Viral attack ; कानपुर शहर वाइरल बुखार की चपेट में


In daily news coverage, newspapers are intimating that Kanpur city is affected under the Viral attacks of unknown origin.

I have said earlier about the Viral infection of my one of the previous post and mentioned the treatment of the same.

Now what is happening in this fever. The features, sign, symptoms and syndromes  are mentioned   below;

1- High grade temperature, from 102 to over
2- Pain in whole body
3- Pain in joints
4- Pain in muscles , causing crippled ness in walking and motion
5- Rashes red colors in skin
6- Headache
7- Nausea and Vomitting
8- Other symptoms according to the feeling of patient

I have treated  patient of Viral infection from very beginning to advance level and those patients, who were treated unsuccessfully by allopathic medicines and then as a result patient came to me for the treatment.

My findings are ;

1- Those patient , who came for treatment at the beginning of the fever , just after the exposure, got cure after two to four days time limit by use of Ayurvedic and Homoeopathic medicines.

2- Those patient , who took Allopathic medicine for few days and not cured/relieved, shifted  their treatment to Ayurveda /Homoeopathy, took 15 days for recovery, with safety of life.

Ayurvedic Medicines are used ;
1- Mahajwarankush Ras
2- Anand Bhairav Ras
3- Mrityunjay ras
4- Maha Suudarshan vati
5- Tribhuvan Kirti Ras

Each one tablets [all five, single dose] are given 3 to 4 hourly with plain water/ tea/ warm water/ tulasi-adarakh tea/honey daily recovered the fever and their symdromes, within one to two days.

Homoeopathic “Anti-biotic Mother tincture” mentioned in earlier posts, are used, in those patients, who is not willing to take the Ayurvedic medicines.

Besides this, to prevent from raising the temperature, off and on “Paracetamol Tablets 500 mg”  is used to prevent from high temperature, if raises from 102 to above. Donot use PARACETAMOL , if temperature is 102 or below.

With this, plain and cool water cloth packs on forehead is used , when raising of temperature for minimising intensity.

The safe recovery is assured without any risk, but it takes time at least for two weeks depending upon the intensity of the depth of the infection.

Take small bit of food and drinks in short as well as long interval for preventing weakness.

Do not panic mentally with this disease condition. Have faith on your doctor and treatment.

आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक दवा खाने से वाइरल बुखार ठीक हो जाता है /

मेरे विचार से यह एक तरह का वही पुराना वाइरस है, जिसने अपना पुराना स्वरूप बदल कर इस साल फिर से नया रूप बनकर वापस लौट आया है / इस नये बैक्टीरिया के रूप में मीजल्स, मलेरिया, डेन्गू और टाइफाइड इन चार बीमारियों का एक साथ मिष्रण है , जिसके कारण मरीजॊं में इस चार बीमारियों के सिन्ड्रोम्स मिलते है /

यही कारण है जिसकी वजह से एलोपैथिक की दवायें बीमारी को काबू करने में असफल साबित हो रही है /

Estimation of the tendency of HIGH or LOW Blood Pressure, by using Electro Tridosha Graphy ETG AyurvedaScan system


Newly invented Ayurveda Medical Science technology ETG AyurvedaScan have privilege to estimate the patents tendency of , whether Patient is having Low or High blood pressure , the estimation solves the treatment problem more easy in concerns to Ayurvedic physician.

ETG system has fixed a range level of BLOOD PRESSURE in between 100 to 160 mm/ Hg of SYSTOLIC nature and 60 to 90 mm/Hg of DIASTOLIC nature.

Systolic blood pressure is according to ETG AyurvedaScan, is fixed 130 mm/Hg., while DIASTOLIC pressure is fixed 75mm Hg level for estimation purposes.

It is observed in patients that , when ‘d’ and ‘e’ waves are elevated positively in lead no.15 upper to 12 e.v., it shows the higher tendency of BLOOD PRESSURE, that means the blood pressure is above to 130 mm /Hg level , shows tendency of higher raising of Blood pressure. When the above said waves going towards the negative side , it shows the LOW BLOOD PRESSURE tendency.

It is also observed , when ‘k’ wave is well elevated upto normal limit with ‘d’ and ‘e’ waves , patient have almost near to NORMAL LIMIT of BLOOD PRESSURE.

The estimation of BLOOD PRESSURE helps clinician for better and accurate management and treatment for quick recovery because ETG AyurvedaScan provides data of the other organs for consideration in view of treatment and selection of appropriate Ayurvedic or Homoeopathic medications.

Observation of the ETG AyurvedaScan data shows that HIGH BLOOD PRESSURE patients are also suffering with the other anomalies of the vital organs with their PATHOPHYSIOLOGY respectively and as a result of HIGH BLOOD PRESSURE.

TONIC REMEDIES of Homoeopathic Medical system ; होम्योपैथी टानिक दवायें


Homoeopathy has observed many medicines for use in specific conditions. Often used and experienced by the Homoeopaths, the following medicines are used as a TONIC REMEDIES for specific disease conditions.

HEART TONIC – Crateagus Oxycantha Q

LUNG TONIC – Aspidosperma Q

OLD AGE TONIC – Avena Sativa Q

CHILDREN TONIC & APPETISER – China, Hydrastis, Chelidoneum, Gentiana Lutea all in Q

SEXUAL TONIC – Damiana Q, Sabal Serruleta Q, Ashvagandha Q

General dose of these rmedies are 5 to 20 drops to be taken according to need once a day or several doses a day, depending upon the condition of the user.

होम्योपैथी चिकित्सा विग्यान में कुछ ऐसी दवायें हैं जिनका उपयोग टानिक के लिये  करते है / इन कुछ दवाओं का उपयोग यहां बताया गया है /

१- हृदय टानिक – क्रटेगस आक्सी मदर टिन्क्चर

२- फेफड़ो के लिये टानिक – एस्पीडोस्पेर्मा मदर टिन्क्चर

३- बृद्धा वस्था के लिये टानिक –  एवेना सटाइवा मदर टिन्क्चर

४- बच्चो के लिये टानिक और भूख बढाने वाला – चायना, हाइड्रास्टिस, चेलीडोनियम, जेन्सियाना लूटिया मदर टिन्क्चर

५- सेक्सुअल अथवा सेक्स की इच्छा बढाने वाला-  डैमियाना, सैबाल सेरूलेटा, अश्वगन्धा मदर टिन्क्चर

इन्की खुराक पान्च से बीस बून्द तक की है / सादे पानी में मिलाकर दिन में एक या दो बार पीना चाहिये /

ETG AyurvedaScan publicity campaign in Hindi Language Daily AMAR UJALA COMPACT, Kanpur edition daily newspaper ; अमर उजाला काम्पैक्ट दैनिक हिन्दी भाषा के समचार पत्र में ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की पब्लीसिटी कैम्पेन


Latest developed Ayurveda Science diagnosis technology “ETG AyurvedaScan” is widely accepted by the mass. To communicate about the use and benefits of the ETG technology the larger areas of the personals, we have launched the publicity campaign in AMAR UJALA COMPACT Hindi Language Daily Newspaper.

The Advertisement is below.

कान्पुर शहर से प्रकाशित दैनिक अमर उजाला काम्पैक्ट हिन्दी भाषा का प्रमुख अखबार है / इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की जन सामान्य के बीच  बढती हुयी लोक प्रियता को और अधिक लोगों तक सम्वाद पहुचाने के लिये अखबार के इस माध्यम द्वारा इस आयुर्वेद की पहली और अकेली परीक्षणक  तकनीक का प्रचार और तदनुसार प्रसार किया जा रहा है / यह पब्लीसिटी कैम्पेन मन्गल्वार और शुक्रवार दो दिनों मे हर हफ्ते होगी /

इससे पहले कानपुर से प्रकशित दैनिक जागरण में ई०टी०जी० का विग्यापन किया जा रहा है , जो हर हफ्ते सोमवार और शुक्रवार को प्रकाशित होता है /