दिन: नवम्बर 18, 2010

डायबिटीज का एक केस ; जिसे ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की फाइन्डिन्ग्स पर आधारित होकर इलाज करने से आरोग्य प्राप्त हुआ


          

एक रोगी जिसकी आयु ४५ साल है, दिनाक २१ जून सन २०१० को क्लीनिक में उपस्तिथि हुआ /

इस रोगी ने बताया कि उसे ५ साल से डायबिटीज की शिकायत है / इस रोगी का खाना हजम नहीं होता है और अपचन की शिकायत बनी रहती है और Digestion ठीक नहीं है / पेट में वायु बनती है और हमेशा गुड़्गुड़ाहट बनी रहती है / खट्टी डकारे आती है / पाखाना ३ या चार दिन बाद होता है लेकिन जब पाखाना होता है तो कई बार पतला पतला लेई जैसा होता है / एक बार में पेट साफ नहीं होता है /

यह रोगी सुबह १० यूनिट और शाम को छह यूनिट इन्सुलीन ले रहा है / इसके साथ खून की शक्कर कम करने के लिये एलोपैथिक डाक्टर द्वारा सुझाई गयी anti-diabetic medicine का भी सेवन कर रहा है /

दवा न खाने पर इस रोगी की खून में सुगर ३०० से अधिक हो जाती थी / जिस समय यह रोगी इलाज के लिये आया था / उस समय इसका वजन 48.5 Kilogram निकला है /
हमारे यहा इलाज कराने के लिये आने वाले रोगियों को पता रहता है कि मै उन रोगियों को ETG AyurvedaScan examination की पहले सलाह देता हू, जिनकी बीमारी पुरानी हो चुकी होती है / इस रोगी को चूकि पान्च साल से तकलीफ थी, इसलिये इस मरीज ने सबसे पहले यही कहा कि आप पहले ETG परीक्षण कर ले और उसके बाद ही दवा करें /

[मरीज का ट्रेस रिकार्ड, जिसमे ळिवर,आन्त,पैन्क्रियाज,सर्कुलेटरी सिस्टम की anomalies दर्ज की गयी है ]

ETG AyurvedaScan परीक्षण करने के बाद , इस रोगी में निम्न बीमारियों के समूह लक्षण पाये गये /

१- Bowels Pathophysiology
२- Colon Ascending inflammation, hardness with swelling
3- Epigastritis with inflammation and hardness
4- Excited mental emotional behaviour
5- Eyes and ENT anomalies
6- Frequent micturition
7- Hormonal anomalies
8- Inflammatory and Irritable bowel syndromes
9- Renal anomalies
10- Pancreatic pathophysiology
11- Rapid pulse
12- Tendency of Diabeties

यहा पुरी रिपोर्ट के कुछ अन्श दिये जा रहे है, जिनसे सभी को पता चल जयेगा कि इस रोगी के शरीर में कितनी कितनी intensities अन्गो और प्रतयन्गों में उपस्तिथि रही /

* Brain and Autonomic Nervous System 198.43 e.v.
* Thyroid 111.11 e.v.
*Epigastrium 60 e.v.
*Large Intestines 55.56 e.v.
*Prostate 52.84 e.v.
*Urinary Bladder 134.34
*Renal anomaly 65.33 e.v.
* Liver 42.00 e.v.
* Heart Pressure 132.86 e.v.
* Sinus nasal 77.78 e.v.
* Heart Rate 95 per minute
* Combined Liver, Spleen, Pancreas anomalies 85 e.v.
* Combined Abdomen/Intestines/ Colon anomalies 55.56 e.v.

आयुर्वेदिक मत के अनुसार इस मरीज का डाटा निम्न प्रकार का प्राप्त हुआ /

प्रकृति ;

VATA 76.07 e.v.
PITTA 62.00 e.v.
KAPHHAA 89.14 e.v.

त्रिदोष ;

VATA 62.66
PITTA 81.51
KAPHHA 117.19

त्रिदोष भेद ;

Praan Vata 86.75
Saman vata 76.07
udaan vata 88.33
apan vata 85.75
vyaan vata 85.06

pachak pitta 85
ranjak pitta 62
sadhakpitta 91
lochak pitta 92
bhraajak pitta 113

shleshaman kaphha 89
snehan kaphha 98
rasan kapha 88
kledan kaphha 86
avalamban kapha 111.43

सप्त धातु;

Ras 91.20
Rakta 85.70
Mans 91.42
Med 85.96
Asthi 101.30
Majja 99.10
Shukra 85.33

पुरीष 85
मूत्र 86
स्वेद 109.07

Oj ओज 46.8 [Normal; 48 ]
Sampurn Oaj सम्पूर्ण ओज; 63.2 [Normal; 84 – 100]

मरीज के मौजूदा रोग और उसकी तकलीफ की व्याख्या ई०टी०जी०रिपोर्ट से प्राप्त डाटा के आधार को देखकर, यह विचार किया गया कि इसे आयुर्वेदिक दवा दी जाय /

[१] पहला विचार यह बना कि मरीज की बड़ी आन्त कि कार्य क्षमता कम हो रही है, जिसके कारण उसे hard constipation की तकलीफ हो रही है /

[२] मरीज को inflammatory & irritable bowel condition होने के कारण पतले दस्त और आम जाने की शिकायत हो रही है /

[३] लीवर/ पन्क्रियाज/ प्लीहा के साथ साथ गुर्दॊ कि कार्य क्षमता मे कमी आ रही है /

[४] अधिक धड़कन यह इन्गित करती है कि आटॊनामिक नरवस सिस्टम और सर्कुलेटरी सिस्टम सामान्य नहीं है /

[५] ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन के परिक्षण द्वारा निर्धारित मरीज की “प्रकृति” जन्म से ‘कफज और पित्तज’ प्रकार की है /

[६] ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के परीक्शण द्वारा मरीज के वर्तमान मे “त्रिदोष” की उपस्तिथी ‘कफ़ज और वातज’ निकली है /

[७] सप्त धातुओं का अन्कलन किया गया /

औषधियों का चयन ;

इस रोगी को कुटज घन वटी, आरोग्य वर्धिनी वटी, पुनर्नवा मन्डूर के साथ साथ सारिवद्यासव पीने के लिये दिया गया /

इसे बीच बीच में लवण भास्कर चुर्ण, हिगुआस्टक चूर्ण, त्रिफला चूर्ण , गन्धक वटी और गन्धक रसायन आवश्यकतानुसार दी गयी /

मरीज बीच बीच में अपना रक्त सूगर का परीक्षण कराता रहा / १५ दिन बाद उसने इन्सुलीन का उपयोग बद कर दिया / एक माह बाद उसने सभी anti-diabetic medicines बद कर दीं / अब वह पूरी तरह से ठीक है और हमारे द्वारा दी जा रही दवाइयों का सेवन कर रहा है /

वर्तमान में मरीज की सुगर एक्दम सामान्य है और उसका स्वास्थय भी पहले से बेहतर है /

निष्कर्ष;  Conclusion;

इस केस के उपचार के पश्चात यही निष्कर्ष निकलता है कि ETG AyurvedaScan रिपोर्ट पर आधारित होकर आयुर्वेदिक इलाज करने पर अवश्य ही सफ़लता मिलती है / पहली बात यह है कि इलाज करने मे सही दिशा का पता चल जाता है / दूसरा यह कि सही दिशा से सही दवाओं का चुनाव हो जाता है और इसमें कोई गल्ती होने की सम्भावना समाप्त हो जाती है /  तीसरा मरीज के treatment aur management मे सटीक सुविधा हो जाती है / चौथा यदि पन्चकर्म करते है तो मरीज की पन्चकर्म करने में क्या step  लेने चाहिये और किस बात की सावधानी बरतनी चाहिये/

इससे पहले और वर्तमान में डायबिटीज के रोगियों का  /इलाज सफ़लता पूर्वक किया जा चुका है और वर्तमान मे किये जा रहे है और नित्य नये रोगी इलाज हेतु आ रहे है / ई०टी०जी० आधारित चिकित्सा शरीर के सभी प्रकार के रोगों में फलदायक है , चाहे रोग का कोई भी नाम क्यों न दिया गया हो /

Advertisements