दिन: दिसम्बर 16, 2010

दर्द से राहत और आराम और आरोग्य देने वाली चाय / हर्बल टी ; दर्द चाहे कैसा भी हो ?


मै इस ब्लाग के पाठकों को हमेशा चिकित्सा विग्यान के बारे में निहायत ईमान्दारी से अपने अनुभव और आब्जर्वेशन से जो भी ग्यान प्राप्त होता है, उसे ही बताने का प्रयास करता हू / मै वही बताता हू , जो कड़े परीक्षण के उपरान्त अनुभव प्राप्त होते है /

दर्द से राहत और आराम के लिये ज्यादातर लोग एलोपैथी की दर्द निवारक या दर्द दूर करने वाली दवाओं का सेवन करते रहते है / इन सभी दर्द निवारक दवाओं के बारे मे कई पिछले ब्लाग-पोस्ट में बता चुका हूं /

इस ब्लाग पोस्ट में मै आप सभी को एक दर्द निवारक चाय के बारे मे बता रहा हू जिसके पीने से [१] सभी तरह के दर्द में आराम मिल जाती है [२] दर्द दूर होने के साथ साथ मूल रोग में भी आरोग्य प्राप्त होता है / [३] दर्द जल्दी जल्दी वापस नहीं होता है [४] दर्द में स्थायी फायदा हो जाता है और फिर जब तक similar circumstances न हों, तब तक तकलीफ दुबारा नही आती /

मुझे कई दशक पहले cervical spondylitis, arthritis, musculo-skeletal से सम्बन्धित तकलीफें हुयी थी / जब यह तकलीफें होती थी तो मै homoeopathy या ayurved की दवा खाता था जिससे दर्द में आरम मिल जाती थी / ” दवा मलो और काम पर चलो” वाला हाल था / धीरे धीरे मुझे अधिक दर्द होने लगा और कभी कभी इतना तज दर्द होता कि न तो आयुर्वेदिक दवा काम करती और न होम्योपैथी की, जब तेज दर्द से राहत न मिले तो मै एक खुराक Pain killers की खा लेता था, जिससे कुछ मिनटॊ मे आराम मिल जाती थी /

थोड़े दिनों बाद यह हाल हो गया कि आयुर्वेद की और होम्योपैथी कि दवायें दर्द दूर करने में नाकाम साबित होने लगी और मुझे फिर और घूम फिर कर फिर pain killers लेने पड़ जाते / धीरे धीरे मुझे अनुभव हुआ कि मेरा काम बिना पेन किलर्स के नही चलने वाला है / मुझे जल्दी जल्दी पेन किलर्स खाने की आदत पड़ गयी / प्रैक्टिस और अनुसन्धान का कार्य बाधित न हो इसलिये मुझे यह सब करना पड़ रहा था /

एक दिन मैने विचार किया कि यह सब ठीक नहीं है, क्योन्कि पेन किलर्स लेने से लीवर और गुर्दे तथा हृदय रोग होने की सम्भावना बनी रहती है, इसलिये बेहतर यही होगा कि दर्द दूर करने के लिये कोई दुसरा सुरक्षित रास्ता निकाला जाय /

मैने आयुर्वेद के कई फार्मूलों पर विचार किया / मुझे व्यक्तिगत तौर पर अपने स्वयम के प्रयोग के लिये आयुर्वेदिक औषधियॊं में क्वाथ और आसव बहुत पसन्द है / यह मेरी पहली च्वाइस होती है / इसलिये मैने विचार किया कि क्वाथ ज्यादा ठीक होगा, इसलिये ग्रन्थो मे क्वाथ को ढून्ढना शुरू किया / मुझे लगा कि “दश्मूल क्वाथ” से कुछ बेहतर रिजल्ट मिल सकते है / मैने दशमूल कवाथ का प्रयोग करना शुरू किया / इससे कुछ लाभ मिला लेकिन मुझे लगा कि इसमे कुछ कमियां है / मैने विचार किया कि , यदि इसी फार्मूले मे अन्य दर्द निवारक दवाये मिला दी जायें तो शायद और बेहतर रिजल्ट मिले / मैने इसमें “रास्ना” एक हिस्सा मिला दिया / इसके बाद भी मुझे सन्तोष नही हुआ और इसमे एक भाग “निर्गुन्डी” मिला दी /

मेरा क्वाथ बनाने का तरीका आयुर्वेद मे बताये गये तरीके से बिल्कुल अलग है / मै एक या दो चम्मच उक्त जड़ी बूटीयों का मॊटा दरदरा चूर्ण लेता हू / एक कप पानी मे यह दरदरा चूर्ण डालकर एक उबाल तक गरम करता हूं / फिर इसमें कभी मै शक्कर या बिना शक्कर के गुन्गुना छानकर पी लेता हू /

शुरु शुरू में जब मुझे ज्यादा दर्द रहने लगा तब मै इसका काढा बनाकर दिन मे तीन चार बार पीने लगा / इससे मुझे बहुत राहत मिली और मेरा दर्द दूर होकर सामान्य अवस्था में आ गया / मेरा गले में कालर लगाना छूट गया और इस कालर को गले में बान्धने से जो परेशानी पैदा हो रही थी उससे छुटकारा मिल गया / मै अपने घर की सीढियां नही चढ पाता था तथा घुटनों मे बहुत दर्द होता था, वह सब दूर हो गया /

यह अनुभव प्राप्त करके मैने इसी क्वाथ को अपने मरीजों को देना शुरू किया जिनको इसी तरह की तकलीफे थी / मुझे यह देखकर बहुत खुशी हुयी कि सभी मरीजों को इससे लाभ हुआ / मै इस फार्मूले को अभी भी अपनी प्रक्टिस में उपयोग करता हू /

बहुत से मरीजों ने बताया कि उन्होने अन्य कई दूसरी बीमारियों में इस क्वाथ का उपयोग किया है, जिनसे उनको आरोग्य प्राप्त हुआ है / मै इस्का डाटा सन्कलित कर रहा हूं और उपयुक्त समय पर बताने का प्रयास करून्गा /