Negative aspects of HOMOEOPATHY MEDICAL SYSTEM ; होम्योपैथी चिकित्सा विग्यान के नकारात्मक पहलू


” Homoeopathic medical system is not safe and should not be adopted more in Britain and Homoeopathy should be withdrawn from National Medical Service.” इस तरह के सम्वाद मुझे कई साल से मिलते चले आ रहे है / अभी पोलैन्ड के किसी होम्योपैथी के चिकित्सक ने कुछ माह पहले एक ई-मेल भेजी थी, जिसमे उसने कहा कि अब उनके देश में होम्योपैथी की दवाओं पर प्रतिबन्ध लगाया जा रहा है / कुछ सालों से ब्रिटिश सरकार भी इसी तरह के प्रतिबन्ध लगाने पर विचार कर रही है लेकिन इसे कुछ समय के लिये जीवन दान दे दिया गया है / लेकिन सवाल यह है कि कब तक ? अमेरिका और यूरोप तथा विश्व के लगभग सभी देशों मे Homoeopathy की बहुत दुर्दशा है / भारत एक अपवाद स्वरूप इसलिये छूटा है क्योंकि यहां Democracy है और इस देश का सम्विधान हर विधा, हर विग्यान, हर व्यक्ति को विकास करने की अनुमति देता है / बाकी शायद ही कोई देश हो जहां पर होम्योपैथी को प्रैक्टिस के काबिल समझा गया हो / प्रैक्टिस तो दूर की बात है होम्योपैथी की दवायें तक वहां नहीं मिलती /

This is a case of LEUCODERMA, which was treated by some Homoeopathic Physicians. The Patient narrated that , when the Leucoderma single spot was in a shape  of  25 paise , he consulted a Homoeopathic Doctor and during the Homoeopathic treatment the single spot became more in circumference, then he introduced dye on the spot to cover the whiteness, but again it spread. He came to me for consultation and that time have taken this photograph. Although he have not taken my treatment, he only came to me for ELECTRO HOMOEO GRAPHY ; EHG HomoeopathyScan examination, Homoeopathy Whole Body Scanning system, recommended by a Homoeopathy Doctor.

This is a case of LEUCODERMA, which was treated by some Homoeopathic Physicians. The Patient narrated that , when the Leucoderma single spot was in a shape of 25 paise , he consulted a Homoeopathic Doctor and during the Homoeopathic treatment the single spot became more in circumference, then he introduced dye on the spot to cover the whiteness, but again it spread. He came to me for consultation and that time have taken this photograph. Although he have not taken my treatment, he only came to me for ELECTRO HOMOEO GRAPHY ; EHG HomoeopathyScan examination, Homoeopathy Whole Body Scanning system, recommended by a Homoeopathy Doctor.

इसका सबसे बडा कारण है , इस चिकित्सा विग्यान की Credibility / इस चिकित्सा विग्यान के जनक डा० हाहनेमान [ जर्मन भाषा में हैनीमेन को हाहनेमान उच्चारित करते है ] स्वयं विवादों के घेरे में बने हुये थे , जब से उन्होंने होम्योपैथी के सिद्दान्तों और इसकी प्रैक्टिस शुरू की थी / बहुत कम लोगों को पता होगा कि डा० हाहनेमान क्या थे ? सही बात यह है कि डा० हाहनेमान चिकित्सा विग्यान की डिग्री लेकर रोजी रोटी कमाने निकले तो वे अपने परिवार को चिकित्सा अभ्यास की कमायी से जब वे सव जरूरी मुहैया न करा सके तो उन्होंने इसके साथ दो काम और पकड़ लिये / पहला डा० हाहनेमान कई भाषाओं के जानकार थे अत: वह translaterian job करने लगे , अधिकतर वह English से German language में translation करते थे / दूसरा उनको केमिस्ट्री का अच्छा ग्यान था और इस तरह वे कुछ केमिकल बनाकर फार्मेसियों को दिया करते थे / यह उनका उस समय का काम था , जब उनको होम्योपैथी चिकित्सा का दूर दूर तक का आभास तक नहीं था / यह तो उनकी एक पकड़ समझ में आ गयी जब वे कलेंस की लिखी मटेरिया मेडिका [Cullen;s Materia medica] का अन्गरेजी भाषा से जरमन भाषा में अनुवाद कर रहे थे /

इसके बाद ही जब उन्होने बहुत से एक्सपेरीमेण्ट किये, तब जाकर होम्योपैथी चिकित्सा विग्यान का उदय हुआ / यह सच है कि यह काम उन्होने उस समय किया, जब उनकी उम्र ढल चुकी थी और उनके जीवन में बुढापा दस्तक दे चुका था / उनके परिवार के कुछ सदस्यों की मौत हो चुकी थी और उनके बच्चे शादी करके उनको छोड़ कर चले गये थे / ऐसे crucial समय में उन्होने होम्योपैथी को विकसित किया, यह नहीं भूलना चाहिये / यह सच है कि तत्कालीन चिकित्सकों ने उनकी और उनके इस विग्यान की बहुत आलोचना की, यह सब वह कैसे सहते होन्गे, इसका केवल हम अन्दाजा लगा सकते है /

बहरहाल यह उनके व्यक्तिगत जीवन की बातें है और इससे होम्योपैथी के performance से कुछ भी लेना देना नहीं है / हम यहं होम्योपैथी की क्रेडिबिलिटी की बात कर रहे है / उसके performance की बात कर रहे है /

इस बात से किसी को इन्कार नही होना चाहिये कि जब कोई व्यक्ति होम्योपैथी का इलाज कराने के लिये जाता है तो इलाज कराने वाले इन्सान को कोई भरोसा या विश्वास नहीं रहता कि अगर वे होम्योपैथिक दवाये ले रहे हैं तो उनकी तकलीफ ठीक भी होगी या नही, यह सन्शय उनको हमेशा बना रहता है, जब कि तुलनात्मक तौर पर एलोपैथी या आयुर्वेद या यूनानी या प्राकृतिक चिकित्सा कराने वाले रोगी को भरोसा रहता है कि उसकी तकलीफ अवश्य ठीक होगी / होम्योपैथी के प्रति अविश्वास की भावना सबसे अधिक है जो इस चिकित्सा का सबसे कमजोर हिस्सा है / जब चिकित्सा लेने मे शन्का बनी हुयी है तो विश्वास तो पहले ही खत्म हो गया, फिर क्रेडिबिलिटी कहां बची ?

अब आगे देखिये होम्योपैथी के चिकित्सकों का हाल ? होम्योपैथी के मेडिकल कालेजों की बहुत खराब स्तिथी है / देश का कोई भी होम्योपैथी का मेडिकल कालेज चाहे वह किसी भी स्तर का हो, सब के सब below standard  की पढाई करा रहे है / जितने भी graduates  है वे अधिकान्स्तया स्तरहीन होम्योपैथी के विग्यान को समझते है / इसका कारण है, होम्योपैथी की शिक्षा के बुनियादी सिध्धान्त, जो हाहनेमान द्वारा प्रतिपादित किये गये लेकिन ये सिध्धान्त किस प्रकार समझे गये, यह सोचने का विषय है /

हाहनेमान ने होम्योपैथी के बारे मे विश्व को जानकारी अपने एक लेख Medicine of Experiences द्वारा दी , जिसमे उनका बहुत शुरुआती अनुभव और निष्कर्ष इस बात का दिया गया था कि कुनैन की जड़ी को खाने के बाद उनका क्या अनुभव रहा और उस अनुभव से उनका क्या मत बना ?

य़ही मेडिसिन आफ इक्स्पीरियन्स के सारे contents बाद में ORGANON को लिखने की बुनियाद बनीं / हाहनेमान ने जब सबसे पहले Organon of Medicine लिखी होगी तो शायद उनको इस बात का अन्दाजा नहीं होगा कि उनको अपनी ही स्थापित की गयी थेयोरी में बहुत बार परिवर्तन करने पड़ेन्गे / हुआ भी यही, डा० हाहनेमान एक सिध्धान्त पर टिक न सके और हर बार बार उनके सिद्धान्त बदलते चले गये / नतीजा यह हुआ कि उनको आलोचनाओं का शिकार होना पडा , यह शायद हाहनेमान का स्वभाव होगा जो किसी “जिद” से कम तो आन्का ही नही जा सकता / मेरे विचार से हाहनेमान का यही सनक भरा जिद्दी स्वभाव , जो शायद इस बात से भरपूर होगा कि वे जो सोच रहे है, वही सही है, इस तरह के किये गये परिवर्तन को सही और उचित उनके अपने दृष्टिकोण के हिसाब से ठहराते होन्गे /

नतीजा यह निकला कि एक थेयोरी से दूसरी और दूसरी से तीसरी और इससे भी आगे जो भी हुआ उससे होम्योपैथी का फायदा कम और नुकसान ज्यादा हुआ /

कालान्तर मे जहां जहां भी होम्योपैथी प्रयोग मे आयी वहां वहां मुस्किले भी साथ आयीं /

कई बाते ऐसी है जो होम्योपैथी को एक कमजोर चिकित्सा विग्यान साबित करती है /

१- निदानात्मक ; होम्योपैथी का निदानात्मक विग्यान बहुत कमजोर है / निदान से मतलब रोग निदान से है और औषधि निदान से भी /

२- आधुनिक चिकित्सा विग्यान से इसका co-relation  भी ब-मुश्किल है /

३- औषधि चयन के पश्चात potency निर्णय का कोई भरोसा नहीं / मदर टिक्चर से लेकर 50 LM होगी या कुछ और हमेशा विवाद का विषय रहा है /

४- Pathophysiological और Pathological Basis of diseases का advance level पर क्या और कैसे निदान होगा या चिकित्सा की जायेगी, इसके लिये कुछ भी स्पष्ट नहीं है ?

५- बीमारियों के Management के लिये यथा पथ्य , परहेज, आहार, व्यवहार, दिनचर्या, रितु चर्या आदि के बारे मे होम्योपैथी मौन है या स्पष्ट नहीं है / जैसा कि आयुर्वेद बताता है /

होम्योपैथी चिकित्सा विग्यान मे बहुत सी कमियां है, जिन्हे दूर करने की जरूरत है / लेकिन यह करेगा कौन ?

अगर होम्योपैथी को बचाना है तो इसे प्राचीन स्वरूप को बचाते हुये आधुनिक रूप देना होगा /

 हम हो हल्ला मचा कर जिन्दा नही रह सकते /लेकिन हो यही रहा है कि हम हल्ला मचा कर जिन्दा रहने की कोशिश कर रहे है, होम्योपैथी के सभी विभागों  मे राजनीति अधिक है और काम बिल्कुल कम यानी होम्योपिथिक राज्नीति ९९ प्रतिशत और एकाडेमिक काम केवल एक प्रतिशत /

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