महीना: फ़रवरी 2011

A case of Chronic THROMBOCYTOPENIA ; Reduced Platelet production ; Treated successfully by Ayurvedic medicines on basis of the findings of Electro Tridosha Graphy; ETG AyurvedaScan Report


This is a case of an Allopathic physician aged 60 years, who suffered from Viral Dengue hyperpyrexia and allied syndromes like Muscular-skeletal joints and articulation problems in August, 2006. He took allopathic medicines for his ailments, which relieved his Dengue problem but he suffered from joints and other syndromes.

After Blood pathological examination , this came in his notice that his platelets counts became down upto 15 thousands, a normal count is 1 lack 50 thousands to 4 lack 50 thousand, that created an agony to physician. His Hemoglobin became 6 mg% and for that he required to transfuse blood. He was advised to take 40 milligrams STEROID daily. He was admitted SGPGI Lucknow for three months. The practice of treatment was in run throughout four and half years.

One patient of mine asked the Physician, that Dr DBBajpai is treating patient on the basis of the findings of a newly invented technology ETG, if he desire for Ayurvedic treatment, he should go to Dr Bajpai and consult him.

The physician came to me and narrated his all story, I suggested him to go for an ETG examination.

The following wordsheet will provide all the data.

On the basis of the data, it is concluded that the patient is having , three main problems;

1- Bowel’s pathophysiology is present
2- Hepatospleenomegaly is present
3- Blood anomaly is present

The following Ayurvedic medicines were prescribed;

a- Kutajghan vati one pills
b- Arogyavardhini vati one pills
c- Gandhak Rasaayan one pills

To be taken Morning and Evening one dose daily with plain water

d- Sarivadyaasav 20 milliliters with equal quantity of water after Lunch and after Dinner

Patient was advised to carry treatment 90 days continuous.

On 6th January 2011 , pt came and told me that he is not taking STEROID from last two months and his swelling of whole body is vanished and other syndromes are relieved. His Blood platelets count is now 80 Thousand and he is feeling well than before.

I advised him to carry similar medicines for again 60 days. I told him that medicines will be changed after second ETG AyurvedaScan findings.

Comments; Ayurvedic treatment based on the findings of ETG AyurvedaScan is always fruitful and result oriented, which we have experienced after treating thousands of cases in our practice.

ई०टी०जी० आधारित एक आरोग्य प्राप्ति का केस ; रक्त की प्लेट्लेट्स का अत्यधिक कम हो जाने की बीमारी ; A case of 15000 Fifteen Thousand PLATELETS Blood counts


यह केस एक एलोपैथी के ६० साल की उम्र के चिकित्सक का है, जिनको साढे चार साल पहले अगस्त, सन २००६ में “वाइरल डेन्गू बुखार” हुआ था / इनका कई माह तक एलोपैथी का इलाज चला, जिससे डेन्गू बुखार तो चला गया लेकिन जोड़ो और मान्स्पेशियों का दर्द तथा दूसरी शिकायतें बनी रही /

रक्त की जान्च करने पर पता चला कि इनके रक्त की प्लेट्लेट्स १५ हजार और हीमोग्लोबिन ६ मिलीग्राम प्रतिशत तक पहुन्च गया है / इस हालत में इनको रक्त चढवाना पड़ा और चिकित्सकों ने इनको ४० मिलीग्राम स्टेरायड प्रतिदिन लेते रहने के लिये कहा / लगभग चार साल से रक्त चढवाने और Steroid खाने का सिल्सिला चल रहा था / SGPGI, Lucknow मे तीन माह भर्ती रह कर इलाज करवाया लेकिन हालात में कोई सुधार नहीं हुआ /

किसी मरीज ने इन डाक्टर साहब को आयुर्वेद की नई आविष्कृत की गयी तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के बारे मे बताया / दिनान्क ०६ अक्टूबर २०१० को यह चिकित्सक महोदय मेरे पास consultation के लिये आये / मैने उनसे कहा कि आपको एक ई०टी०जी० परीक्षण करना पड़ेगा तभी पता चल पायेगा कि आपके शरीर के अन्दर क्या गड़्बड़ी है /

उनका परीक्षण इसी दिन किया गया जिसमें निम्न फाइन्डिन्ग्स आयीं /

[१] त्रिदोष ; [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]

कफ १३४.३१ ई०वी० प्रतिशत
पित्त १११.०९ ” ”
वात ६३.५६ ” ”

[२] त्रिदोष भेद ; [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]

{सभी मान ई०वी० में e.v. means ETG value}

भ्राजक पित्त १४५.८७
लोचक पित्त १०४.८६
पाचक पित्त ८५.५५
साधक पित्त ८३.९४
अवलम्बन कफ ७८.०५
रन्जक पित्त ७६.१९
रसन कफ ७१.४४
उदान वात ६९.५९
श्लेष्मन कफ ६४.१७
व्यान वात ५९.२२
समान वात ४०.१५

[समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]

[3] सप्त धातुये ; [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]
मेद १२२.१३
मान्स १२०.९३
रस ११४.८०
शुक्र १११.१३
मज्जा १०८.३४
रक्त १०५.८२
अस्थि १०४.५३

[४] शरीर में व्याप्त कार्य विकृति Pathophysiology और विकृति Pathology की उपस्तिथि की स्तिथियां [समस्त पैरामीटर्स की सामान्य वैल्यू 95 e.v. से लेकर 99 e.v. तक]
Autonomic Nervous system 157.14
Thoracic region/spine/cage 140.00
Body Fat 122.13
Liver/Pancrease/spleen 117.50
Metabolism 114.00
Blood Anomalies 105.80
Skin ailments 106.00
Thyroid pathophysiology 61.67
Spleen pathophysiology 60.00
Thymus pathophysiology 57.14
Liver pathophysiology 54.00
Epigastrium pathophysio 46.00
Abdomen/Intestines/colon 44.00
Prostate pathophysio 37.21
Intestines pathophysiology 35.56

[5] रोग निदान / Diagnosis of disease conditions
a- Blood anomaly
b- Bowel’s pathophysiology
c- Colon Inflammatory condition with swelling and hardness
d- Dull mental behaviour
e- Enlarged Liver with poor function
f- Hormonal anomalies
g- Pancreatic pathophysiology
h- Renal anomalies
i- Spleenomegaly ? Hepatospleenomegaly
j- Swelling in whole body

ई०टी० जी० आधारित रोग निर्धारण और औषधियों का चयन

रोगी जब परामर्श और चिकित्सा व्यवस्था के लिये आया तो ई०टी०जी० रिपोर्ट के आधार पर निष्कर्श निकाला गया कि इस रोगी को “कफ़ज पित्तज” व्याधि है / त्रिदोष भेद में यही बात सामने आयी /

सप्त धातुयें भी सामान्य से अधिक की ओर अपना झुकाव दर्शा रहीं है / इसका अर्थ यह निकला कि इस रोगी का मेटाबालिज्म की प्रक्रिया अधिक की ओर और तेज है / यह मरीज की Pathological condition को इन्गित कर रहा है /

इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी की पुरी रिपोर्ट का अध्ध्यन करने के पश्चात conclusion में तीन बातें समझ में आयी/

१- मरीज की आन्तों में सूजन है यानी Bowel’s Pathophysiology है /

२- यकृत और प्लीहा दोनों का बढा होना

३- रक्त की दुष्टि यानी Blood Anomaly

उक्त निष्कर्ष को ध्यान में रखते हुये इस मरीज को निम्न औषधियां prescribe की गयी /

अ- कुटज घन वटी १ गोली ; आन्तों की सूजन और विकृति के लिये
आरोग्य वर्धिनी वटी १ गोली ; यकृत प्लीहा के विकार के लिये
गन्धक रसायन १ गोली ; रक्त दुष्टि के लिये

सभी गोलियां एक साथ सुबह और शाम दिन में दो बार सादे पानी से खाने के लिये निर्देशित किया गया /

ब- सारिवद्यासव २५ मिलीलीटर बराबर पानी मिलाकर दोपहर और रात भोजन करने के बाद ; सप्त धातुओं की पुष्टि के लिये

रोगी से कहा गया कि वह इन सब दवाओं को लगातार ९० दिन तक सेवन करे , बाद मे प्रामर्श करे /

दिनान्क ०६ जनवरी २०११ को मरीज दिखाने आया / उसके सारे शरीर की सूजन एक्दम ठीक थी / मरीज रोजाना ४० मिलीग्राम steroid खाता था, वह अब उसने खाना बन्द कर दिया है , क्योंकि उसको steroid खाने की अब जरूरत नही लगी / उसका platelets count १५ हजार से बढ कर ८० हजार हो गया है, सामन्य तया शरीर में platelets की सन्ख्या रक्त में १ लाख पचास हजार से लेकर ४ लाख तक होती है / उसे बार बार हर पन्द्रह दिनों में रक्त चढवाना पड़्ता था, वह दो महीने से नही करना पड़ा / जो अन्य तकलीफें थी जैसे शरीर में फुन्सियां निकलना और शरीर में काले चकत्ते पड़ना, वह सब ठीक है /

चिकित्सक महोदय से मैने कहा कि आप अभि यही दवा खाते रहिये और मार्च २०११ में एक दूसरा ई०टी०जी० परीक्शण करा ले, उसके बाद जो भी फाइन्डिन्ग्स आयेंगी , तदनुसार दवा परिवर्तन कर दिया जायेगा /

Comments; आधुनिक चिकित्सा विग्यान में इस बीमारी  के इलाज के लिये केवल Steroid दवा के अलावा अन्य कोई दूसरी दवा है ही नहीं / सभी को पता है कि Steroid  का उपयोग शरीर के लिये कितना खतरनाक है / आयुर्वेद के इलाज के लिये ई०टी०जी० तकनीक आधारित चिकित्सा हमेशा फायदा देती है / 

हस्त मैथुन यानी हाथ का सहारा लेकर लिन्ग घर्षण कराकर जबरन वीर्य पात कराने की प्रक्रिया


शायद ही इस दुनिया का कोई व्यक्ति हो , जिसने अपने जीवन काल में हस्त मैथुन न किया हो / हस्त मैथुन की क्रिया दुनिया के सभी नर और नारियों मे व्याप्त है / यह आदि काल से चला आ रहा मानव स्वभाव है , जो अनन्त काल तक चलेगा /

ऐसा क्यो होता है, यह एक विचारणीय विषय है ? फिर भी यह कहा जा सकता है कि ऐसा इसलिये होता है कि आज के नवजवानों में सेक्स के प्रति कुछ अधिक ही जागरुकता देखने में आती है / हमें अपने बचपन के दिनों की याद है , जब हम गांव में रहते थे और हमारे साथ मोहल्ले और टोले की बड़ी लड़्कियां साथ साथ खेलती रहती थी और हम सभी सेक्स के बारे में कोई विषेश ग्यान नहीं रखते थे / उस समय न हमे समाचार पत्र पड़ने को मिलते थे / न सन्चार के दूसरे साधन थे जैसे रेडियो, सिनेमा इत्यादि / यह सब शहर के लोगों तक ही सीमित था और इसे एक विशेष वर्ग ही उपयोग करता था / १६ या १७ साल की उम्र तक हमे सेक्स के बारे मे बहुत कम जानकारी थी /

आज स्तिथी बिलकुल उलट है / सभी जगह प्रचार माध्यम उपलब्ध है चाहे वह गांव हो या शहर, समाचार पत्र, मैग्जीन, टी०वी०, रेडियो, इन्टर्नेट सभी जगह उपलब्ध है / शिक्षा का भी बहुत प्रचार और प्रसार हो रहा है / मेरे गांव के क्षेत्र में मीलों मील एक भी डिग्री कालेज नहीं था, आज हालात यह है कि कई दर्जन डिग्री कालेज शिक्षा दे रहे है / गां व गांव शिक्षा का प्रसार है / पहले फैशन नहीं था, स्वयम को खूबसूरत दिखाने की कोई हॊड़ नहीं थी / आज सब एक दूसरे से ज्यादा खूबसूरत दिखना और दिखाना चाह्ते है / यह सब समय के परिवर्तन की बात है /

यह सब परिवरतन होन्गे तो लजिमी है कि इसका असर भी होगा / जैसे सभी क्षेत्रों में विकास हुआ, सेक्स के क्षेत्र में भी लोगों की जानकारियां बढने लगी है और जिस बात को छुपाकर जानने की चेष्टा की जाती थी , आज वह खुले आम उपलब्ध है / इसे जब चाहे तब देख सकते है / ईन्टर्नेट पर तो ऐसी बहुत सी साइटे है जिनमे लाखों और करोड़ो सम्भोग करने की वीडियोज है जिन्हे देखकर सेक्स के प्रति लोग अपनी अपनी व्यक्तिगत धारणायें बना लेते है /

हस्त मैथुन करने की प्रेरणा ऐसे ही मिलती है / पुरूषों मे हस्त मैथुन की आदत सबसे ज्यादा होती है / इसका कारण है पुरूष किसी स्त्री को देखकर बहुत शीघ्र उत्तेजित हो जाते है, जबकि महिलाओं में ऐसा नही होता / पुरूषों का शीघ्र उत्तेजित होना एक प्राकृतिक फेनामेना है , जो उनके आटोनामिक नरवस सिस्टम, एन्डोक्राइनल सिस्टम, एज फैक्टर, मान्स्पेशियों की क्षमता, उनके स्वभाव आदि पर आधारित होता है / यही सब मिलकर सेक्स भावना का उदय करती है /

किशोरावस्था में कुदरती तौर पर शरीर की प्रत्येक अन्ग की विकास करने की प्रवृति होती है /इसी अवस्था में हार्मोन सिस्टम के अधिक सक्रिय होने के कारण मस्तिश्क मे सेक्स की प्रक्रिया को उत्तेजित करने वाले तत्व शारीरिक अन्गों को अति उत्तेजित करते है, जिससे सेक्स करने की इच्छा अधिक बलवती होती है / सेक्स के लिये कुदरती माध्यम तो स्त्री की योनि ही है और इसी माध्यम यानी योनि से ही मिलन करके सेक्स का कार्य सम्पूर्ण होता है , लेकिन जब यह माध्यम उपलब्ध नहीं होता तो लोग दूसरा माध्यम ढून्ढ लेते है जिनमे गुदा मैथुन या हस्त मैथुन या अन्य माध्यम जिनसे किसी न किसी तरह से वीर्य पात कराया जा सके और सेक्स की उत्तेजना को शान्त किया जा सके /

इसीलिये आयुर्वेद में वीर्य की रक्षा करने के लिये निर्देश दिये गये है ्कि किस तरह से वीर्य की रक्षा करनी चाहिये / आयुर्वेद मे वीर्य ्की रक्षा करने के लिये क्यों कहा गया है ? इसके पीछे कारण है /

वीर्य सुरक्षित करने के लिये आयुर्वेद ब्रम्ह्चर्य से रहने के लिये आग्या देता है / इसीलिये जब जीवन के चार हिस्से किये गये तो एक हिस्सा यानी पहला हिस्सा ब्रम्ह्चर्य के लिये ही स्थापित किया गया है / वीर्य आयुर्वेद के अनुसार सप्त धातुओं की एक धातु है जो शरीर को धारण करती है यानी शरीर के सार भाग को सुरक्षित करके शरीर को स्थापित करती है / यही शरीर को ओज प्रदान करता है / इसके नष्ट होने से शरीर की कान्ति, बल, याद करने की क्षमता, शरीर के प्रतिदिन के क्रिया कलाप आदि सब कमजोर हो जाते है /

इसलिये हस्त मैथुन की आदत से हमेशा बचना चाहिये / जिन्हे यह आदत हो उनको चाहिये कि वे अपनी शादी जल्दी करें और सुखमय जीवन का आनन्द प्राप्त करें / जो शादी नहीं कर सकते बे ब्रम्ह्चर्य ब्रत का पालन करें /

 ऐसे लोगों को सोचना और विचार करना चाहिये कि “जिस वीर्य को लिन्ग से बाहर निकालने के लिये कितने आनन्द का अनुभव होता है, यदि उसी वीर्य को उसी स्थान पर रहने दें तो शरीर को कितना आनन्द मिलेगा “/

बहुत से मरीज या रोगी अपनी बीमारी और तकलीफ के बारे में सही सही और ईमान्दारी से नही बताते


इसे मनुष्य की प्रवृति कहें या उसके मन का भय या उसके मन में अपनी बात कहने के लिये उपयुक्त शब्द न मिल पाने और एक्स्प्रेसन न कर पाने की क्षमता या उसको सच सामने आ जाने का डर या उस वास्तविकता को छुपाने का प्रयास जिसे वह जानना नहीं चाहता आदि कुछ बातें है जो आये दिन हम चिकित्सकों के सामने समस्यायें खडी कर देते है / अधिकान्स मरीज अपनी बीमारी के बारे मे सही बात नहीं बताते है, वे बहुत बातें जो चिकित्सा कार्य के लिये और औषधियॊं के चुनाव के लिये सबसे ज्यादा जरूरी होती है उनको तक छुपा जाते है और जब तक सही बात सामने आये तब तक समय की बर्बादी के साथ मरीज भी रोग के आक्रमण से अछ्छा खासा तकलीफ भुगत चुका होता है /

अभी कुछ माह पहले मेरे दवाखाने में एक सज्जन अपनी पत्नी के साथ परामर्श के लिये आये और अपनी तकलीफ बताई कि उनको चर्म रोग हो गया है / उन्होने अपना पैर दिखाया और बताया कि यहां से लेकर यहां तक दाने निकलते है फिर पानी सा निकलता है जो बहुत चिप्चिपा सा होता है / मैने पूछा कि कितने दिनो से है तो उन्होने बताया कि यह दो तीन दिन से है / इलाज के बारे मे मैने पूछा तो बताया कि एक tube किसी डाकटर ने लिखी थी, वही लगा रहा हू / मैने फिर पूछा कि कॊई खाने वाली दवा ली / जवाब मिला नहीं / इससे पहले आपको क्या क्या बीमारियां हुयी यह सवाल पूछने पर उत्तर दिया कि “कोई खास नहीं” /

यह महज एक इत्तिफ़ाक था कि उसी समय मरीज के थोड़ा आने के पहले मेरे एक चिकित्सक मित्र मुझसे कुछ बात करने आये थे / चिकित्सक मित्र बडे ध्यान से उसकी skin तथा eruptions और discharges देख रहे थे और मेरे और मरीज के बीच हो रहे सम्वाद को बहुत ध्यान से सुन रहे थे / जब मै इतनी प्रारम्भिक जानकारी मरीज से हासिल कर चुका , तब मै अपने मित्र की तरफ़ मुखातिब हुआ / हम दोनो ने एक दुसरे को देखा और हम दोनों मुस्करा पड़े /

इस मरीज को मेरे एक इलाज करा रहे मरीज ने भेजा था , जो उनका रिश्तेदार था / जब वह दवाखाने आया तो उसने मुझे उनका reference दिया और बताया कि अमुक ने मुझे आपके पास भेजा है जो आपसे इलाज करा रहे है / यह कानपुर शहर के एक सेटेलाइट टाउन से आये थे /

मैरे चिकित्सक मित्र ने मुझसे पूछा कि “बास, आपकी क्या समझ में आया” / मैने कहा ” बास, अभी सब समझते है, थोड़ा बैठिये”/ हलाकि मेरे चिकित्सक मित्र बहुत जल्दी मे थे और उनको भी कहीं जाना था, लेकिन मैने उन्हे थोड़ी देर के लिये रोक लिया /

हम दोनो ही इस बात पर एक मत हो गये कि यह skin disorder कोई साधारण या तीन दिन के भीतर का किसी भी सूरत पर नहीं हो सकता है / हम दोनो इस बात पर agree हुये कि जिस तरह के स्किन प्राब्लम है और इस तकलीफ के फीचर्स है, वह डायबिटीज के रोगियों मे ही होते है /

यह महज एक सन्योग था कि एक दूसरे डाक्टर अपनी दवाये लेने आ गये, मैने कहा , पहले इनका मामला समझो, दवा तो बाद मे मिलेगी/
हम दोनो चिकित्सकों ने उनको सब बताया / उन्होने भी देखा और कहा कि आप लोग सही है, यह मरीज डायबिटीज का रोगी है और यह अभी सही बात बता नहीं रहा है, इसको बास आप probe करिये अभी सब सच सामने आ जायेगा /

अब तक यह एक academic matter बन चुका था , जो हमारे ग्यान को challenge कर रहा था / यहां पैसे या फीस लेने का सवाल ही खत्म हो गया था / यहां सवाल सही और सटीक निदान के लिये निदानात्मक ग्यान और हम डाक्टरों की निदानात्मक क्षमता का था / इसलिये लम्बे समय तक हमने मरीज से पूछ्ताक्ष की , इस जद्दोजिहद मे मरीज आखिर मे सच बताने पर मजबूर हुआ /

मरीज ने जो भी बताया उसका सार यह निकला कि उसको पिछले १५ साल से डायबिटीज है , पहले वह antidiebetic medicines लेता रहता था लेकिन उससे इसको लाभ नहीं मिला और बाद मे उसको ४० य़ुनिट इन्सुलीन लेनी पडी जो अभी भी चल रही है / उसको यह skin problem पिछले एक साल है और अब यह ठीक नही हो रही है / ईलाज के बारे मे बताया कि वह शहर के एक नामी गिरामी डाक्टर का इलाज करा रहा है लेकिन उससे उसको कोई लाभ नही हुआ /

सच हम दोनों चिकित्सकों के सामने आ चुका था / मेरे डाक्टर मित्र चले गये / मैने मरीज से कहा कि आप उन्ही डाक्टर के पास जाइये जिसका इलाज करा रहे है /

सही बात यह है कि मै ऐसे किसी मरीज का इलाज नहीं करता और इलाज करना नापसन्द करता हूं जो बीमारी का सच छुपाते है, चाहे वह किसी भी कारण से हो /

जो मरीज अपने चिकित्सकों से सही बात नहीं बताते, वे रोग भुगतते रहते है और हमेशा गलत इलाज के शिकार होते है / जब इलाज गलत होगा तो असल बीमारी तो ठीक नहीं होगी उलटे कई नई गम्भीर बीमारी पैदा हो जाती है, तब शिकायत करते है कि बीमारी नहीं ठीक हुयी और जैसे जैसे दवा खाते रहे बीमारी और अधिक बढ्ती चली गयी /

Season of Viral Infection, Mumps, Chicken pox, Measles, Typhoid and Exposure of Infections


After Makar sankranti and upcoming of Basant season in India, brings many diseases like Mumps, Small pox, chicken pox, Measles and other infectious disease condition.

Every year , this is the season of these disease condition. Typhoid fever is very common in this season naturally, so is of the other disease condition.

In my practice , I received few cases of mumps, measles and exposure of infections. This is a start of the problem from last few days.

A case of bilateral Mumps of a nine year old is cured by Ayurvedic medicine within five days.

This is start of the season and every physician should careful to meet these anomalies. .

                 

“Dr. DBBajpai, you write very wrong English, which is unable to understand “ says an E-zine editor ; आन लाइन ई०जीन के एक सम्पादक ने कहा, “डा० डी०बी० बाजपेयी, आप अन्ग्रेजी भाषा बहुत गलत लिखते है /”


I do agree with the version of the editor of e-zine magazine that I write very incorrect and wrong English language. I accept it and thanks to editor.

Let me say something in this connection. First of all, English is not my mother tongue, nor I born in any mainland of the English spoken country. I should clear that my mother tongue is BAISAVARI, which is spoken in the region of UNNAO areas upto RAIBAREILLY. In my childhood I learnt Urdu and Muria language in village primary school. When I came to KANPUR, it was HINDI language, which was taught in Municipal school at 50s.

Secondly Doctors are only doctors and not a literary person, who have a huge vocabulary of the language in their mind and using an appropriate word while writting.

Thirdly, it is not necessary that every doctor or surgeon have a capability to express his experiences in scientific research language. Doctors are practical in their knowledge because what they directly apply their knowledge in treating patient, can not exactly translate in the words. The expression could be in crude language, which may be said unscientific in view of others.

Fourthly it is the doctor’s calibers and practical experiences that whole world is enjoing the best health providing sectors. Which makes a base for other scientific investigations?

Some also says that I am also poor in HINDI language. I do agree that I am not very perfect in case of langauge either in English or in Hindi.

I leave on to you all readers, how you evaluate my expression of language?

हृदय के मुख्य रोग के साथ अन्य बीमारियों से ग्रसित एक रोगी का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के समय-अन्तराल मे रिकार्ड किये गये ट्रेसेज


एक ३५ साल के रोगी को सान्स फूलने के साथ साथ अन्य तकलीफे है, दिनांक २९ जून २००९ को उसने अपना ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण कराया था / ई०टी०जी० जान्च मे जब रिपोर्ट आयी तब उसे पता चला कि उसे हृदय रोग है , इससे पहले सभी समझ रहे थे कि इसको सान्स फूलने की बीमारी है / यह रोगी सिगरेट और बीड़ी बहुत पीता है /

मैने इसका इलाज ई०टी०जी० की रिपोर्ट से प्राप्त आन्कड़ों पर आधारित होकर किया है, जिसके परिणाम बहुत अच्छे मिले और कुछ महीनों के इलाज के बाद यह रोगी अपने को स्वस्थ्य महसूस करने लगा और शारीरिक मेहनत का काम करने लगा, जो पहले नहीं कर पाता था / मेरे मना करने के बाद भी उसने यह कहकर दवा बन्द कर दी कि अब वह स्वस्थ्य है /

कई माह बीत जाने के बाद उसको फिर सान्स फूलने की तकलीफ हुयी / उसका दुबारा ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण दिनान्क ३१ जनवरी २०११ को किया गया / यह रिकार्ड किया गया ट्रेस रिकार्ड नीचे दिया गया है /

आप सभी लोग दोनों ट्रेस रिकार्ड को देखिये आपको पता चलेगा कि रिकार्ड किये गये ट्रेस मे कहां कहा अन्तर आया है /

हमने अध्ध्य्यन मे पाया है कि सभी शारीरिक विद्युतीय परिवर्तन प्रत्येक व्यक्ति की अलग अलग होती है और एक दूसरे से बिल्कुल नहीं मिलती / यह परिवर्तन मानव शरीर के अन्गों और बनावट द्वारा emmitted किये गये इलेक्ट्रिकल मैग्नेटिक सिगनल और ई०टी०जी० मशीन द्वारा इन सिग्नलों को रिकार्ड करके पेश किये गये ट्रेस के साथ प्राप्त होते है / मानव शरीर में विद्युत का पैदा होना एक कुदरती फिनामेना है जो आयन परिवरतन और मेटाबालिजम प्रक्रिया द्वारा प्राप्त होते है /

A case of CARDIOVASCULAR ANOMALIES ; Trace records shows the changes in Electrical behaviour of Human body


A patient consulted me on 29th  June 2009. On the day I recorded his ETG AyurvedaScan. The treatment of the anomalies founded were treated by me . I have given him Ayurvedic treatment. His first trace record shows like under;

After a long gap, patient came for another ETG AyurvedaScan test, on 30th January 2011. The trace record is given below;

See and observe here the traces for comparison, many changes are seen in traces that shows the changed electrical behaviour of the human body.

 

Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan examines the whole body in view of determination of Ayurvedic fundamentals presence, including diagnosis of disease problem’s existence.

 ETG system is based on the principals of the Electrical activities and electrical behaviours of the human body , generated by ion exchanges and body metabolic activities. Studies shows that every organ of the body is emitted electrical impulses according to their strength and health condition.

In the above mentioned case, it is very clear , when see and observe comperatively, appearance of changes in many leads shows that changes comes after treatment, whatever the treating system Ayurveda, Unani, Yoga and nature cure, Sidhdha or Homoeopathy etc etc.