दिन: अप्रैल 26, 2011

शास्त्रोक्त सिद्ध औषधियां ; लौह, मन्डूर


ऐसी बहुत सी बीमारियां है, जिनका इलाज सिवाय आयुर्वेद के और किसी भी चिकित्सा विग्यान में नहीं है / आयुर्वेद शास्त्रों में ऐसे ऐसे योग दिये गये है, जिनके उप्योग करने से और रोगियों को आराम मिलने से या रोग मुक्त होने से , जब परिणाम देखने को मिलते है, ये चिकित्सा के सकारात्मक परिणाम बहुत ही आश्चर्य पैदा करने वाले होते है /

लेकिन इसके लिये यानी चिकित्सा के सकारात्मक परिणाम प्राप्त करने के लिये बहुत परिश्रम की आवश्यकता होती है / ऐसे फलदायी परिणाम के लिये वैद्य को आयुर्वेद शास्त्र की गहरी और ठोस जानकारी होना चाहिये / निदान ग्यान में निपुणता और गहरी पैठ होनी चाहिये तभी शाश्त्रोक्त सिद्ध औषधियों से हमेशा ऐसे परिणाम मिलने की सम्भावना रहती है, जैसा कि हमारे आयुर्वेद के मनीषियों ने अनुभव करके लिपिबध्ध किया है /

आयुर्वेद की आधुनिक निदान ग्यान की तकनीक Electro Tridosha Graphy ; ETG AyurvedaScan के द्वारा आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्तों का आन्कलन तथा शरीर मे व्याप्त रोगों का निदान बहुत सरलता से और सटीक तरीके से हो जाता है / लम्बे समय तक रिसर्च करने और इस तकनीक पर आधारित होकर इलाज करने से अवश्य सफ़लता मिलती है, ऐसा अनुभव किया गया है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन रिपोर्ट पर आधारित निदान की गयी बीमारियों के इलाज के लिये कई आयुर्वेदिक शाश्त्रोक्त योग हजारों मरीजों पर आजमाये गये है / ऐसे योगों का उपयोग मरीजों पर किया गया है और परिणाम बहुत सकारात्मक रहे /

हलांकि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की फाइन्डिन्ग्स पर आधारित रोग निदान और बीमारियों के उपचार के लिये विशेष प्रकार की आयुर्वेदिक दवाओं का फार्मूलेशन्स किया गया है / इसका कारण यह है कि जिस तरह से वात, पित्त या कफ के अलावा त्रिदोष भेद, सप्त धातुओं का अन्कलन, मल और अग्नि का आन्कलन करके उनकी इन्टेन्सिटी लेवल की जब तक एप्रोच करने वाली प्रभावशाली दवा की मात्रा नहीं होगी, रोगी को रोग मुक्त होने मे कठिनाइयां आयेन्गी / इसलिये विषेश रूप से तैयार की गयी ये दवायें जब शास्त्रोक्त औषधियों से मिलकर शरीर पर असर दिखाती है तो शाश्त्रोक्त दवाओं के प्रभाव की उपयोगिता समझ में आती है /

अधिकतर निम्न शास्त्रोक्त दवायें उपयोग में ली जाती है ;

अवस्था एक – हाइड्रो मस्कुलोसिस यानी सजल मान्सपेशियां अथवा मान्स्पेशियों मे अतिरिक्त पानी का एकत्र होना /

अभी तक “हाइड्रो मस्कुलोसिस” बीमारी के बारे मे चिकित्सा बिग्यान के किसी भी चिकित्सक को इस बात का ग्यान नही था कि यह क्या बीमारी है ? यह तो आयुर्वेद की आविष्कृत की गयी आधुनिक युग की नवीन्तम तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन विधि द्वारा खोजा गया रोग और निदान दोनों ही इसकी देन है /

आयुर्वेद की नई तकनीक ईलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन ने इस बीमारी का निदान ग्यान आविष्कृत किया है / इस बीमारी मे शरीर की मान्सपेशियों में अतिरिक्त पानी एकत्र होने लगता है / यह सुजन या ड्राप्सी से अलग किस्म की बीमारी है / मरीज यह समझता है कि उसका शरीर मोटा हो रहा है और उसकी सेहत दुसरे को देखने वालों को बहुत अच्छी लगती है / चेहरे पर चमक और हाथ पैरो तथा शरीर की त्वचा बहुत चमक्दार दिखाई देती है / रोगी गोल मटॊल और मोटा दिखाई देता है, लेकिन उसके दम अन्दर से नहीं होती है / रोगी बहुत जल्दी थकता है और कोई भी मेहनत का काम नही कर पाता है / ई०टी०जी० परीक्षण द्वारा ही इस बीमारी का निदान किया जा सकता है / इस बीमारी का निदान किसी और परीक्षण द्वारा फिल्हाल सम्भव नही है /

आधुनिक चिकित्सा विग्यान के सभी परीक्षण सामान्य निकलते है और एलोपैथी का चिकित्सक कहता है कि मरीज को कोई बीमारी नहीं है, जबकि मरीज का कहना होता है कि उसे तकलीफ है /

जैसे ही Hydro Musculosis बीमारी का निदान हो जाता है , वैसे ही उसकी दवा का चुनाव भी हाथॊं हाथ हो जाता है / इस बीमारी मे शास्त्रोक्त औषधि “पुनर्नवा मन्डुर” का चुनाव बहुत उपयोगी सिध्ध हुआ है / “पुनर्नवा मन्डूर” की दो गोली दिन मे दो बार देने से हाइड्रो मस्कुलोसिस तो ठीक होती ही है, इसके साथ की दूसरी anomalies भी सही हो जाती है /अधिकतर यह बीमारी महिलाओं मे अधिक पायी गयी है, लेकिन पुरुष भी इस बीमारी से ग्रसित देखे गये है, परन्तु इनकी सन्ख्या महिलाओं की तुलना में कम होती है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परिक्षण के दवारा जैसे ही Hydro-musculosis बीमारी का निदान हो जाता है, इसकी सटीक दवा भी “पुनर्नवा मन्डूर” का निदान स्वाभाविक तौर पर हो जाता है / यह Mandur category की दवा लम्बे समय देने से यह रोग ठीक हो जाता है /

अवस्था -दो ; सम्पूर्ण शरीर का शोथ ; Swelling of whole body

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण से बहुत से रोगियों के बारे मे पता चलता है कि वे शरीर की सम्पूर्ण सूजन से परेशान हैं / मरीजों को इसका ग्यान ही नहीं होता के उनके शरीर के एक या अनेक हिस्सों मे सूजन कम या अधिक मात्रा में उपस्तिथी है /

जब ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का परीक्षण और इसकी traces का अध्ध्य्यन करने के बाद यह निदान हो जाता है कि मरीज को सारे शरीर की सूजन की शिकायत है, तो उसी समय “शोथारि लौह” पुरूषों के लिये और “शोथारि मन्डुर” महिलाओं के लिये औषधि चुनाव हो जाता है /

शोथारि लौह अथवा मन्डूर देने से सम्पूर्ण शरीर का शोथ दूर हो जाता है / इसके साथ साथ मरीज का Blood pressure भी सामान्य हो जाता है / रिसर्च मे देखा गया है कि शरीर में व्याप्त यह सूजन दूसरी प्रकार की सूजन से एक्दम अलग होती है जैसा कि लीवर या किडनी फेलर बीमारी में देखने में आती है / इस तरह की सूजन शरीर के electrolytic imbalance and mineral defficiency के कारण होती है /

“शोथारि लौह अथवा मन्डूर” के उपयोग से इस तरह के शोथ ठीक हो जाते है /

कुछ अन्य लोह और मन्डुर का उपयोग निम्न रोगों में बहुत आशुफलकारी अनुभव किया गया है /

[अ] यकृत प्ळीहारि लौह ; जब लीवर के साथ प्लीहा की विकृति हो तो इसे प्रयोग करना चाहिये / अधिकतर इस लौह को डायबिटीज के रोगों में उपयोगी पाया है / पैन्क्रियाज की विकृति में इसे उपयोग करने पर अच्छे परिणाम मिले है /

[ब] महाश्वासादि लौह ; इसे फेफड़ॊं से सम्बन्धित विकारों में उपयोग करते है / लेकिन इसे श्वांस और दमा से समबन्धित विकारों में विषेश रूप में उपयोग करते है /

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