महीना: मई 2011

LEUCODERMA CURE of a Medical Student [Allopathy] ; ETG AyurvedaScan report based AYURVEDIC Treatment relieved her other complaints including VITILIGO


 
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An Allopathy Medical student consulted me for her LEUCODERMA problem on 6th February 2011. I recorded her ETG AyurvedaScan and the treatment was given her on the basis of the findings of the ETG report. The same day a Photo of the one part of the VITILIGO was taken by me for record purposes. The following PHOTO shows the anomaly.

She was having white patches on both the Lower Extremeties and some smaller ones on her back , Torso and her genital parts etc etc

See, observe and compare the PHOTOS taken after a few months period.

This Photo was taken on 6th February 2011 on her first visite to clinic. This is the Right Lower Extremity -  Right Leg white patches

This Photo was taken on 6th February 2011 on her first visite to clinic. This is the Right Lower Extremity - Right Leg white patches

COMPARE PHOTO RIGHT LEG White PATCHES from below PHOTO;

This Photo was taken on  29th May 2011 on her follow-up visite to clinic. This is the  RIGHT  Lower Extremity -  Leg white patches, see the changes in color of white patches

This Photo was taken on 29th May 2011 on her follow-up visite to clinic. This is the RIGHT Lower Extremity - Leg white patches, see the changes in color of white patches

 LEFT LEG Comparison ;

This Photo was taken on 6th February 2011 on her first visite to clinic. This is the  Left  Lower Extremity -  LEFT Leg white patches

This Photo was taken on 6th February 2011 on her first visite to clinic. This is the Left Lower Extremity - LEFT Leg white patches

This Photo was taken on 29th MAY 2011 on her follow-up visite to clinic. This is the  LEFT  Lower Extremity -  Leg white patches, see and compare the changes in colour of white patches

This Photo was taken on 29th MAY 2011 on her follow-up visite to clinic. This is the LEFT Lower Extremity - Leg white patches, see and compare the changes in colour of white patches

 
CONCLUSION; Leucoderma and all disease conditions can be well treated with expertise way, if the AYURVEDIC Treatment is taken after ETG AyurvedaScan findings. Cure can be asured af all the bodily ailments, whatever they may be lebelled or nomenclature.
 
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HORMONAL ANOMALIES ; Cure is possible by AYUSH therapies ; ETG AyurvedaScan based treatment cures all types of THYROID and other ENDOCRINES disorders


Hormonal system of Human body is an essential part of our daily activities. Metabolism, assimilation, digestion, strength, Blood pressure, regulation of Glucose and sugar, mental and emotional behaviours etc etc are dependent upon the good health and normal functioning of Endocrinal systems, which is also known as HORMONAL system.

Most of the people’s donot know about the treatment of the Endocrinal systems in other therapeutic systems prevalent in INDIA. General public knows that Modern western medicine have only answer for the treatment of ENDOCRINAL complaints, but this is not true.

AYURVEDA and Homoeopathy and UNANI system of medicine have grace to treat the ENDOCRINAL DISORDERS successfully.

By the advent of the AYURVEDA scanning system “ETG AyurvedaScan”, now it is possible to pin point problem of the individual patient, at the root level, from where the problems are generated. The ETG system provides the data of the various VISCERAS, including Autonomic Nervous system and others essential parameters , which are used in the ANALYSIS, SYNTHESIS, CONCLUSION of the problems and finally to translate the data in treatment and management.

Our studies show that ETG based treatment of the ENDOCRINES anomalies are always successful to root out the problems as well as to minimize the tendency of the disorders.

अनावश्यक “सर्जिकल आपरेशन” से बचाव करिये ; अगर आपको सलाह दी जाती है कि आप अपनी बीमारी का इलाज सर्जरी से …………………!!!!!


अनावश्यक “सर्जिकल आपरेशन” से बचाव करिये ; अगर आपको सलाह दी जाती है कि आप अपनी बीमारी का इलाज सर्जरी से कराये, तो कम से कम तीन सर्जन या एक्स्पर्ट से सलाह लें, साथ ही अन्य “आयुष” चिकित्सा पध्यतियों को भी आजमाये ; यह जरूरी नहीं कि जिस बीमारी के लिये आपको सर्जरी की सलाह दी गयी है, उसका कोई इलाज नहीं है / ऐसी बहुत सी बीमारियां है, जिनका इलाज भले ही आधुनिक चिकित्सा विग्यान में न हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिये कि अब केवल सर्जरी के अलावा दुसरा कोई रास्ता बचा ही नहीं है ? यही गलत सोच विचार यदि दूर कर लिया जाय और दूसरी चिकित्सा पध्यतियां यानी “आयुष” चिकित्सा पध्यतियों का सहारा लिया जाय तो बहुत सी ऐसी बीमारियां है, जिनका इलाज सफ़लता के साथ किया जा सकता है /

ऐसा नहीं है कि मै सर्जरी द्वारा किये जा रहे रोगों के इलाज के खिलाफ कह रहा हूं, मैने मेडिकल कालेज में सर्जरी की पढाई की है और मेडिकल कालेज के अस्पताल के सर्जिकल वार्ड आपरेशन थिएटर में सर्जरी की प्रैक्टिस की है /

यहां मै कुछ ऐसे रोगों के बारे मे बता रहा हूं , जो बिना आपरेशन के दवाओं द्वारा ठीक किये जा सकते है और इस प्रकार से अनावश्यक सर्जरी से बचा जा सकता है /

ऐसे रोगों की लिस्ट बहुत लम्बी हो सकती है, लेकिन इन्डीकेशन के लिये मै यहां कुछ रोगों का जिक्र कर रहा हूं /

१- सभी तरह की गान्ठे / एडीनाइड्स, लिम्फ ग्रन्थियां आदि
२- गुर्दे की पथरी
३- गाल ब्लैडर से सम्बन्धित तकलीफें जैसे cholecystitis, Cholelithiasis, Sludge आदि
४- य़ूटेरस से सम्बन्धित विकार , जिनमें Menopausal तथा Fibroids या अन्य तकलीफॆं

यहां केवल कुछ बीमारियों के उदाहरण दिये गये है, जिनमें अधिकतर सर्जरी करा लेने की सलाह दी जाती है /

इनमें से कुछ तकलीफे ऐसी होती है , जिनके लिये सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है / कुछ माह तक आयुर्वेद या होम्योपैथी या यूनानी या प्राक्रतिक चिकित्सा का समन्वित इलाज कराने से आरोग्य प्राप्त हो जाता है /

अभी एक ताजा उदाहरण ऐसे ही आरोग्य का प्रस्तुत कर रहा हूं /

एक मुस्लिम महिला के आरोग्य का एक ताज़ा उदाहरण प्रस्तुत है / इसे आपरेशन कराने की सलाह दी गयी थी / यह मुस्लिम महिला उत्तर प्रदेश के बाराबन्की जनपद की रहने वाली है और लखनऊ मे अपना इलाज करा रही थी /

जब इसे आराम नहीं मिला तो यह मेरे पास आयीं / पिछ्ले साल यानी अक्टूबर २०१० के पहले हफ़्ते मे यह दिखाने के लिये कान्पुर आयी / बाराबन्की से कान्पुर की दूरी लगभग १२० या १३० किलोमीटर है /

इस महिला ने अपने मेडिकल रेकार्ड दिखाये जिनमे अल्ट्रा साउन्ड, खून की जान्चे , पेशाब की जान्चे , एक्स रे आदि थे / महिला ने बताया कि उसकी शादी के आठ साल हो चुके है और उसके कोई बच्चा नहीं पैदा हुआ है / अल्ट्रा साउन्ड से पता चला कि बच्चेदानी में गान्ठे है और फ़ैलोपियन ट्यूब बन्द है / उसको दोनो गुर्दों मे छोटी छोटी पथरियां है और एक गुर्दे में सूजन है, जिसकी वजह से उसे पेशाब में जलन और दूसरी तकलीफॆ है / उसको माहवारी ठीक नहीं होती , जब लेडी डाक्टर की दवा खाती है तो ठीक होती है और जब बन्द हो जाती है तो फिर वही हाल हो जाता है / उसको digestive system से सम्बन्धित तकलीफे थी /

महिला ने बताया कि कई लेडी डाक्टरों को दिखाया और सबने यही कहा कि बीमारी ठीक कराना चाहती हो तो आपरेशन करा डालो /

लेकिन यह महिला आपरेशन कराने के लिये तैयार नहीं हुयी /

वह अपनी बीमारी का इलाज कराने आयी थी / मैने उसके सारे scans और दूसरे परीक्शण रिपोर्ट देखी और उससे कहा कि आपरेशन कराने की कोई जरूरत नहीं होगी /

मैने उसको Uterus anomalies, menstruation anomalies, Fibroids के लिये आयुर्वेदिक दवाये और गुर्दे की पथरी के लिये होम्योपैथिक दवाओं का समन्वित इलाज देने का फैसला किया /

महिला को सलाह दी गयी कि तीन / चार माह बाद आकर दुबारा दिखा जाय /

मई २०११ के पहले हफ्ते में महिला अपने पति के साथ दुबारा दवा और सलाह के लिये आयी / उसे कमर में दर्द हो रहा था / मैने उसका परीक्शण किया , लेकिन परीक्षण के बाद मुझे लगा कि यह दर्द न तो उसको गुर्दे की वजह से है और न ही आन्त या दूसरी सूजन के कारण / मैने उसको सलाह दी कि एक अल्ट्रा साउन्ड का परीक्षण करा लें तो स्तिथि साफ हो जायेगी /

महिला का Ultra sound परीक्षण किया गया / उसकी रिपोर्ट जब पुरानी अल्ट्रा साउन्ड की रिपोर्ट से मिलायी गयी तो बहुत आश्चर्य हुआ /

इस महिला के सभी फाइब्रोईड ठीक थे / गुर्दे की बहुत सी पथरियां घुल करके साइज में छोटी हो गयीं थीं और उनकी सन्ख्या भी बहुत कम हो गयी थीं /

सबसे आश्चर्य जनक और चौन्काने वाली बात यह थी कि उस महिला को १२ हफ्ते की preganancy निकली और भूण बिल्कुल स्वथ्य अवस्था में है, ऐसा रिपोर्ट में है /

इस महिला के शादी के आठ साल बाद हुयी प्रेग्नन्सी से मुझे सुखद आश्चर्य हुआ / मैने महिला के पति से कहा कि वह अब किसी अच्छे लेडी डाख्टर को लखनऊ में जाकर दिखाये और उनका इलाज करे /

मेरे प्रक्टिस के वर्षॊं में यह INFERTILITY CASE का पान्चवां ऐसा मामला है , जिसमें मरीज किसी दूसरी बीमारी के इलाज के लिये आया था /

IF SUGGESTED for a Surgical Operation ; Adopt Ayurvedic and Homoeopathic Treatment ; A Lady PREGNENTED after 8 years of her marriage, declared INFERTILITY case


If your physician, suggest you for a surgical operation of your complaints, donot materialise the idea of surgery atonce.

I am not talking here for those surgical conditions, which requires immediate attention or in emergency surgery becomes necessary in case of trauma / accidents and so on..

There is so many conditions , which donot require immediate surgery, which may be  some og the followings ;

1- Glands
2- Stones Renal and Gall Bladder
3- Uterus aoomalies including infertility, fallopian tubes blockages
4- Fibrosis fibroids

So many conditions are founded for surgical interventions, in which many of them donot require immediate surgery.

Among  these cases, most of the conditions are treatable successfully by Ayurvedic medicines and Homoeopathy including   other AYUSH therapies and  are helpful for total cure of these conditions.

A very latest case of a female from Distt; BARABANKI shows the unnecessary surgical intervention. Last year 2010 in the month of October a MUSLIM lady consulted me for Fibroids in her Uterus , detected after Ultrasonography examination. With this she ULTRASONOGRAPHY SCAN shows that she is aslo  having bilateral kidney stones in big number of variuous small sizes. Prevoiusly and presently She was taking Allopathy  treatment of a lady doctor from Lucknow for her INFERTILITY problems because she have no issue after of Eight years of her marriages duration. Her Husband and she also very anxious for a children. The Allopathic doctor advised her to remove her Uterus because of number of presence of Fibroids and other hormonal problems and also said her that she will never be concieved / pregnent . She refused for OPERATION. She came from Barabanki to Kanpur for consultation. Barabanki is about 120 kilomwters away from Kanpur.

I examined her and told her that she should not go for any surgical intervention,  if she will go for any surgical treatment, there is no gaurantee of PREGNANCY in future. My experince since many years, that if any female goes for any minor or major surgical intervention for example D & C [dilation and curretion] and other processess, PREGNANCY is impossible or difficult in these cases, so I warned her and I prescribed combined medicine for her RENAL STONE and Uterus problems. For renal stone I prescribed a combination of Homoeopathic mother tinctures and for Uterus , Fibriods, Hormonal anomalies etc , I prescribed AYURVEDIC MEDICINE.

I asked the lady that she shuld carry the treatment atleast for FOUR months and after that she can consult me again.

She visited my clinic on 01st May 2011 with the complaint that she is having continuous pain in her weist at right side.

After thorough examiantion, I concluded that the pain is no more related to Renal system, nor it is Intestinal / colon pain.

After going thorugh all examination procedure, in conclusion I suggested her for an repeat ULTRASOUND examination of whole abdomen, because previously ultrasound was one year old. I thought that a fresh U/s examination is necessary to see the changes in one year duration.

She went for U/s scan and she showed me report , which was very amazing;

“in report many Reanal stones were melted in size and in numbers, her fibroids were gone and was no traces of any FIBROIDS in her UTERUS but the most wonderful thing happened and that was ” a preganancy of 11 weeks and the embryo condition is normal in function and in size and and in progress inside the UTERUS”.

I told her husband that he should go back to his home and consult any Gyneacologist either in BARABANKI or in LUCKNOW.

This is perhaps 5th case of   late preganancy in my practice life., when patient came for the treatment of some other disease condition but as a result sudden pregnented.

Conclusion;

My Experience with these cases are related to the concept of AYURVEDA or other AYUSH therapies, which advocates that  WHOLE BODY should be treated in any disease condition, because human body is a SINGLE UNIT  and should not be divided in parts or organs.

कोलायटिस यानी बडी़ आन्त की बीमारी


बड़ी आन्त को इग्लिश भाषा में कोलन कहते है / जब इस कोलन में सूजन आ जाती है तो इसे कोलायटिस कहते है / यह एक बहुत प्रचिलित बीमारी है और प्राय: विश्व के सभी देशों के मानव इस बीमारी से ग्रसित होते रहते है /

यह कई तरह की होती है जैसे साधारण कोलायटिस, म्यूकस कोलायटिस, अल्सरेटिव कोलायटिस, इन्फ्लेमेटरी कोलायटिस आदि आदि /

इसमे बड़ी आन्त मे दर्द, सूजन, ऐठन, पाखाना जाने के पहले या दर्मयान या बाद में आन्तों मे दर्द, बार बार पाखाना जाने की इच्छा आदि आदि लक्षण पाये जाते है / हल्का बुखार, भोजन न करने की इच्छा, भूख का कम लगना , अच्छा खाना खाने के बाद भी कमजोर होते जाना आदि लक्शण कोलायटोस के होते है /

आयुर्वेद मे इस बीमारी को जड़ से दुर करने के लिये औषधियां तथा अन्य साधन उपलब्ध है /

औशधियों मे पर्पटी कल्प के अलावा Gastro Intestinal tract पर असर कारक बहुत सी औषधियां है, जिनके कुछ माह तक उपयोग करने से यह बीमारी जड़्मूल से चली जाती है /

दुग्ध आहार अथवा मठा का आहार ४० से ६० दिन तक करने से भी कोलायटिस समाप्त हो जाती है /

चिकित्सा करने के बाद जब मरीज बिल्कुल ठीक हो जाये तो उसे कुछ दिनों तक परहेजी भोजन करना चाहिये /

COLITIS ; A totally rootout curable disease condition


Colitis is a very common disease condition and the majority of the population of the world is suffering with this condition.

The colitis is a disease condition of the LARGE INTESTINES in general but sometimes SMALL INTESTINES are also involved in specific disease conditions like Tuberculosis and other infections like coli, cocci etc.

The problem is mostly seen in every age group but most prominent in youngesters and middle aged persons.

Yougers are also involved with this problem.

Colitis disease condition is divided in several stages; [1] Semi Acute [2] Acute [3] Chronic [4] Long Lasting etc. Inflammaetary Colitis, Ulcerative Colitis, mucous colitis etc are the conditions of this disease.

In AYURVEDIC MEDICAL SYTEMS , Colitis is a totally rootout curable disease condition. I have cured many many cases of the colitis successfully and even today treating the similar conditions.

Ayurveda have a lot of formulea of treating this condition.

DUGDHA KALP and MATHTHA KALP procedure is adopted for severe and incurable condition of COLITIS, where all medicines failed and are not reacting properly in patient.

RAS KALP with the prohibition of diet is a sure shot treatment of COLITIS.

Many medicines are used in the treatment of COLITIS, but among them PARPATI of defferent mades are used for the treatment according to the disease condition, among them RAS PARPATI, PANCHAMRIT PARPATI, VIJAY PARPATI, SWARN PARPATI are famous for their actions on entire COLON and Gastro Intestinal tract and is very beneficial, if used with or without KALP including prohibition of diet.

COLITIS is a totally curable in AYURVEDA.