महीना: जुलाई 2011

बरेली जनपद, उत्तर प्रदेश में डा० डी०बी० बाजपेयी ; Dr DBBajpai is visiting BAREILLY, Uttar Pradesh


बरेली जनपद, उत्तर प्रदेश में डा० डी०बी० बाजपेयी का दिनान्क ४ अगस्त २०११ दिन बृहस्पतिवार और ५ अगस्त २०११ दिन शुक्र वार को आने का कार्यक्रम है /

Dr DBBajpai is visiting BAREILLY, Uttar Pradesh on 4rth August, 2011, Wenesday and on 5th August, 2011, Friday.

HEPATITIS ; Liver related disorders ; condition curable by AYURVEDIC treatment हिपेटाइटिस और लीवर से सम्बन्धित रोगों का इलाज आयुर्वेदिक चिकित्सा से सम्भव


HUMAN LIVER AND OTHER RELATED ORGANS

HUMAN LIVER AND OTHER RELATED ORGANS

यकृत अथवा लीवर से सम्बन्धित जटिल से जटिल रोगों और इस अन्ग से सम्बन्धित बहुत से रोगों के निदान का ग्यान प्रचीन आयुर्वेद के चिकित्सकों को था / लीवर से सम्बन्धित रोगों का पता महर्षियों को था और निदान तथा रोग का वर्णन निदान ग्यान से सम्बन्धित आयुर्वेद की चिकित्सा विग्यान की पुस्तकों में इनका वर्णन किया गया है जिनमें कामला, पान्डु, हलीमक आदि आदि रोगों को बताया गया है /

हलीमक रोग का वर्णन बहुत कुछ Cirrhosis of Liver या इस जैसी स्तिथियों से मिलता जुलता है /

बहुत सी ऐसी बीमारियों का इलाज आयुर्वेद में है और लीवर से सम्बन्धित रोगों के इलाज के लिये सैकड़ो और हजारों योग दिये गये है जिनका उपयोग करके HEPATITIS और ऐसे ही लक्षणों से युक्त बीमारियों का उपचार किया जा सकता है /

पेट की गैस यानी गैस बनना जोर जोर से डकारें आना अथवा Flatulence या Wind formation in Stomach या Eructations



इस बीमारी से सभी लोग जानकारी रखते है / ऐसा शायद ही कोई व्यक्ति हो जिसे कभी न कभी पेट की गैस की शिकायत न हुयी हो / भले ही यह साधारण सी बीमारी लगे , लेकिन इसको साधारण बीमारी की तरह समझने की भूल भी नहीं करनी चाहिये /

इस बीमारी के अध्ध्यन करने के बाद यह धारणा बनी कि इसके पैदा होने के क्या कारण होते है ?

१- सबसे पहला कारण “मन्दाग्नि” नामक रोग समझ में आया है / यानी जिसकी पाचक अग्नि कमजोर होती है, उनको यह तकलीफ बहुत होती है / जब भोजन पचाने का सिस्टम कमजोर हो तो अग्नि मन्द होती है / अपच की वजह से पेट में गैस बनती है /

२- दूसरा कारण पेट में अधिक “अम्ल” या “अम्ल पित्त” नामक रोग होने से गैस बहुत बनती है /

३- पित्त की थैली में पथरी या पित्त की थैली की सूजन होने से गैस बहुत बनती है /
४- लीवर यानी यकृत की क्रिया यदि असामान्य हो या लीवर की pathophysiology present हो /
५- Chronic Colitis या बड़ी आन्तों की सूजन हो या बड़ी आंतों के दूसरे विकार उपस्तिथि हों /
६- भोजन के कुछ तत्व यथा Protein, Carbohydrates अथवा Fat का पाचन ठीक से न होता हो, कोई मेटाबालिक समस्या हो /
७- मानसिक विकार हो, अन्ग्जायटी न्यूरोसिस आदि कोई मानसिक रोग हो /
८- पाचन सन्सथान से सम्बन्धित रोग हों यथा pancreatitis, hepatospleenomegaly या कोई अन्य रोग

इस रोग से मरीज को बहुत घबराहट, तेज तेज और जोर की आवाज से गैस मुख द्वारा निकलना, पेट का फूलना, या जल्दी जल्दी Flatus या हवा का गुदा द्वारा निकलना या जोरों की अवाज के साथ वायु का पास होना जैसे लक्षण होते है /

इलाज नहीं करने से यह तकलीफ बहुत परेशान करती है, इसलिये खान्पान में परहेज बहुत जरूरी है / चिकित्सा में मूल रोग की चिकित्सा करने से आराम मिल जाती है / रोग के लक्षणों का शमन होने से यह नहीं समझना चाहिये कि पेट की गैस की तकलीफ समाप्त हो गयी है /

इसे साधारण बीमारी नहीं समझना चाहिये / अगर लगातार पेट की गैस की बीमारी उग्र रूप धारण करे तो फिर Ultrasound,Pathological test या ETG AyurvedaScan जैसे परीक्षण कराना चाहिये और फिर जैसी बीमारी का निदान हो वैसा उपचार करना चाहिये /

साधारण बीमारी के लिये आयुर्वेदिक चूर्ण हिन्गुआस्टक बहुत फायदे मन्द है / शन्ख वटी या महाशन्ख वटी भी फायदा करती है / कब्ज न रहने दें, कब्ज से यह तकलीफ और ज्यादा बढती है /

BLOOD PURIFIERS of Ayurveda Medical Science



Impurities of Blood or presence of toxines in Blood stream was first detected by the Ayurvedicians hundreds and thousands years ago.

It looks very mysterious, how the olden time practitioners of Ayurveda observed that the blood impurities cause many ailments and produces different types of ailing conditions.

Even tooday medical practitioners see hese ailing conditions and observe it in their patients in a very easy way. But it looks stranguous to Ayurvedic practitioners, how their OLDEN PRACTITIONERS had detected these Blood impurities, which causes many ailing conditions.

It seems that the Fundamental Principles of Ayurveda were established after a careful scrutiny of the years and years observations by the Master Practitioners, which confirmed the role of [1] Atiology [2] Pathophysiology [3] Pathology in the sense of diagnosis,treatment and management of the sick individual.

Ayurvedicians observed that the AGNI [ digestive fire] when mal-functioning, then digestion becomes poor and thus undigested food produces many unwanted substances, which are not suitable to health. These unwanted sunbstances are called AAMA in Ayurveda and in modern medical science “toxins”.

AAMA disturbes RAS DHATU, this is the first stage of the assimilation of the food according to Ayurveda and this RAS substances are converted into RAKTA DHATU, that means “Blood”.

When Toxine contained BLOOD runs in blood stream, it canl cause many ailments and of various types and can affect any system of the human body.

To treat these conditions, Ayurvedicians formulated BLOOD PURIFIERS ofvarious kinds, containing herbs, minerals, animal substances etc etc.

Use of any Blood purifier can cure the ailments caused by any toxins of any nature.

RAKT SHODHAK KWATH / MAHA MANJISTADHI KWATH are the best blood purifier of AYURVEDA among the thousands of thousands blood purifiers formulae.

Nutraceutical remedy for Pulmonary ; Laryngopharyngotracheal ; Respiratory anomalies ; श्वसन सन्सथान से सम्बन्धित सभी रोगों के लिये आयुर्वेद की न्यूट्रास्यूटिकल खाद्य-औषधि



श्वसन सन्सथान से सम्बन्धित रोगों के लिये हजारों बार परीक्षित किये गये खाद्य औषधि को बनाने का तरीका तथा इसके उपयोग के बारे में बता रहा हूं / यह प्रयोग उन रोगियों के लिये है जो दवायें खाते खाते ऊब चुके है और चाहते है कि ऐसा उपाय कोई हो जिससे दवा न खानी पड़े और तकलीफ भी दूर हो जाये /

२ या ३ खजूर, ५ मुनक्का, १ या २ चम्मच कच्ची हल्दी, १ चम्मच अदरक का पेस्ट, शक्कर स्वादानुसार लेकर इसे एक उबाल तक पका ले / पकाने के बाद इसे गुन्गुना ठन्डा होने दें, पिर इसे मसल लें और इसे एक मोटी छन्नी से छान लें /

ईसे गुन्गुना रहते पी लेना चाहिये /

उपरोक्त बतायी गयी सामग्री में बीमारी के हिसाब से अन्य औषधीय द्रव्य मिलाये जा सकते है /

१- खान्सी के लिये इसमें “अडूसा” का पाउडर एक या दो या तीन या अधिक आवश्यकतानुसार मिला सकते है / चाहे जैसी खान्सी हो इससे उपयोग से ठीक हो जाती है /

२- श्वांस, दमा, इसनोफीलिया, गले की खरास, आवाज का अवरुद्द हो जाना, गले का चोक हो जाना आदि तकलीफों में ” भारन्गी, गुलबनफ्सा, मुलहठी” तीनों बराबर बराबर लेकर मोटा चूर्ण करलें / यह चूर्ण एक या दो चम्मच इस उपरोक्त फार्मूले में मिला लें और बतायी गयी विधी से पकाकर कर उपयोग करें /

३- श्वसन सन्सथान के कैन्सर में “गुर्च” की शाखा का २ इन्च का ताज टुकड़ा लेकर कुचल लें और इसमें मिलाकर पका ले / इससे बढने की गति कम होगी तथा रोग के उपद्रव से शान्ति मिलती है /

४- जो लोग नपुन्सक है, शीघ्र पतन की बीमारी से ग्रसित है, जिनके लिन्ग में उत्तेजना नहीं होती , जो लोग वीर्य की कमी से पीड़ित हैं, इसमें आधा दूध और थोड़ी मलाई मिलाकर पीयें /

इसे दिन में तीन या चार बार पी सकते हैं / बीमारी से ग्रस्त लोगों के लिये यह हल्का टानिक है और इसे सभी लोग उपयोग कर सकते है /

NUTRACEUTICALS of AYURVEDA ; आयुर्वेदिक औषधि-युक्त खाने वाले पदार्थ



आयुर्वेद में ऐसे योग कई हजार की सन्ख्या में है, जिनमें खाने वाले पदार्थों के साथ साथ औषधि देने की व्यवस्था की गई है / आधुनिक अन्ग्रेजी भाषा मे इसे Nutraceuticals न्यूट्रास्यूटिकल्स कहते है / यह दो अन्ग्रेजी के शब्द Nutrition तथा Pharmaceutical से मिलकर बना है / Nutraceutical खाद्य पदार्थ तो अभी अभी ज्यादा वर्ष नहीं हुये है, मेडिकल में चलन आये हुये, लेकिन आयुर्वेद में यह सब हजारों सालों से चला आ रहा है /

गुर्दों की खराबी या गुर्दों की बीमारी से सम्बन्धित रोगों में आयुर्वेद बताता है कि पुनर्नवा, पाखाण भेद, कुल्थी की दाल, वरूण की छाल से काढे अथवा रस से पकाये गये चावल खाने से गुर्दों की बीमारी से लाभ और अरोग्य प्राप्त होता है /

श्वसन सन्स्थान से सम्बन्धित रोगों मे हल्दी, दालचीनी, जावत्री, अडूसा, खजूर, मुनक्का, अदरख आदि को मिलाकर पकाया गया दूध या खीर खाते रहने से श्वांस, कास आदि फेफड़ॊं दे समब्न्धित रोग दूर होते है और आरोग्य देते है /

ह्रूदय रोग में अर्जुन, अडूसा, वच, खुरासानी अजवायन से सिद्ध दूध या अन्य भोज्य पदार्थ खाते रहने से उक्त बीमारियों मे आरोग्य प्राप्त होता है /

आयुर्वेद में ऐसे हजारों की सन्खया मे nutraceuticals योग दिये हुये है जो आदि काल से अब तक रोगोपचार में वही उत्तम स्थान रखते है जितना उनका पहले था या अतीत में रहा है /

मै अपने मरीजों को nutraceutical लेने की सलाह देता हूं / इससे सबसे बडा फायदा यह है कि औषधि का जब भोजन पदार्थॊं के साथ पाक होता है तो औषधियों के गुण भोजन के पदार्थो से मिलकर आरोग्य प्रदान करने में तेजी लाते है / दूसरे बहुत से रोगी दवा खाने से परहेज करते है , इस प्रकार से तैयार किये गये भोज्य पदार्थ रोगी खा भी लेते है और उनको आरोग्य भी मिलता है /

दिन भर आराम करने वालों और खटिया तोड़ने वालों हराम खोरों के लिये बुरी खबर


 

हिन्दी दैनिक “राष्ट्रीय सहारा ” कानपुर दिनान्क ६-७-२०११ के अन्क में प्रकाशित खबर हराम खोरों और दिन भर खटिया और पलन्ग तोड़ने वालों के लिये बुरी खबर है /

नीचे प्रकाशित खबर पढिये और अपनी जान बचाने का खयाल करें /

                                     

USE of PAIN KILLERS ; can spoile your VITAL Organ


Read and follow this report published in the reputed medical magazine BRITISH MEDICAL JOURNAL about the intake of PAIN KILLERS ingredients IBUPROFEN and ASPIRIN. These medicinal ingredients may cause “IRREGULAR HEART BEATS” followed by “HEART ATTACK”.

Read the report published in Hindi Language daily newspaper RASTRIYA SAHARA on 6-7-2011.

    

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की डाटा शीट और मरीज के रोगॊं का निष्कर्ष


ई० टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की तकनीक से मरीज की तकलीफों को किस प्रकार से conclude किया जाता है और उस conclusion पर किस प्रकार से आयुर्वेदिक दवाओं का चुनाव किया जाता है, यह एक तरह से आयुर्वेद के लिये वर्तमान समय में एक mechanical system की तरह की वैद्यों के लिये सहायता है, जो चिकित्सा कार्य में निपुणता और ठोस और सटीक सफल परिणाम प्रदायक है /


आयुर्वेदिक चिकित्सक के सामने समस्या यह होती है कि , वह मरीज की तकलीफ को किस angle से देखता है / मरीज द्वारा बतायी गयी एक साथ सभी बातें याद करना और उन्को विचार करके action लेना, चिकित्सक के लिये आसान काम नहीं है / आज का समय ऐसा है कि कोई भी आयुर्वेदिक चिकित्सक अष्ट विधी या दश विधि को follow करके शायद ही रोग का निदान करता हो /
ऐसे में आयुर्वेदिक चिकित्सा का क्या सही निदान होगा और ऐसे निदान से क्या सही औषधियो का चुनाव हो सकेगा, इसमे हमेशा सन्देह बना रहता है /

आयुर्वेद का “नाड़ी परीक्षण” भी अब लुप्त होता जा रहा है / जो कर भी रहे हैं , वह सिवाय ढोन्ग और बेवकूफ बनाने के अलावा कुछ भी नहीं है / आयुर्वेद के सिद्धान्त बहुत आसान नहीं है, इसे जैसा समझा जाता है / त्रिदोष जैसे जटिल विषय को मरीज के अन्दर कितना व्याप्त है और उसकी कितनी intensity मौजूद है , यह समझ लेना बड़ा दुरूह कार्य है / यह तो आयुर्वेद के मौलिक सिद्धान्त का एक टुकड़ा मात्र है / प्रकृति परीक्षण, त्रिदोष-भेद परीक्षण, सप्त धातु परीक्षण, वातादिक दोषों से प्रभावित सप्त धातु, मल, ओज, अग्नि, श्रोतो दोष आदि आदि चरकोक्त निदानात्मक विषय बहुत जटिल और आयुर्वेदिक चिकित्सक के लिये आशु निर्णय बाधित साबित होते है / इतने निदानात्मक Data एक साथ प्राप्त करना किसी भी आयुर्वेदिक चिकित्सक के लिय एक असम्भव जैसी बात है /

लेकिन ETG AyurvedaScan system द्वारा अधिकान्सत: यह सब डाटा एक साथ प्राप्त हो जाते है और इस प्रकार यह सिस्टम आयुर्वेदिक चिकित्सकों को निदानात्मक सहायता पहुचाता है, जो आयुर्वेद के चिकित्सक के लिये चिकित्सा कार्य मे अति आवश्यक बिन्दु है /

बरसात के दिनों मे होने वाले “डायरिया” अथवा पतले पानी ऐसे दस्तों या पखाने या मल की तकलीफ


बरसात के दिनों मे पानी के खरब होने के कारण सबसे अधिक होने वाली यह तकलीफ है / इसमे पतले दस्त होने लगते है जो पानी जैसे होते है /

यह बड़ी आन्त की बीमारी है, जब बड़ी आन्त पानी नहीं सोख सकती तब खाया हुआ भोजन पतले दस्त के स्वरूप में बाहर निकलने लगता है /

एक या दो या तीन पतले दस्त हों, तो सावधान हो जाना चाहिये / अगर यह दस्त पेट में मरोड़ और दर्द के साथ हों और पेट में वायु गुड़्गुड़ाने लगे तो तुरन्त उपचार शुरू कर देना चाहिये /

क्या करें;

१- सबसे पहले उबला पानी पीना चाहिये, इसे फिल्टर कर लें तो और अच्छा है /

२- भोजन में फलों का जूस जिसमें ग्लूकोज अथवा शक्कर मिली हो, मीठा हो उसे थॊड़ा थोड़ा करके पीना चाहिये / पेप्सी अथवा ठ्न्डे पेय पदार्थ भी पी सकते है, लेकिन ध्यान करें यदि पतले दस्त के साथ बुखार हो तो यह प्रयोग मत करें /

३- भोजन भूख लगने पर ही करें / ठोस आहर लेने से बचें /

दवायें ;

१- अदरख का रस एक चम्मच, प्याज का रस एक चम्मच, लहसुन का रस १/४ चम्मच, सेन्धा नमक के साथ तीन तीन घन्टे मे गुन्गुना पीना चाहिये /

२- मेथी, अजवायन, तेज पत्ता का कढा बनाकर और उसमे हीन्ग १०० मिलीग्राम डालकर सेन्धा नमक आवश्यकतानुसार मिलाकर दिन में चार चार घन्टे से गुन्गुना पी लेना चाहिये /

३- अगर उक्त काढों मे सुखे बेल या कच्चे बेल का गूदा २५ ग्राम मिला लें तो दस्त फौरन रुक जाते है /

४- आयुर्वेदिक दवा ; कूटज घन वटी २ से चार गोली गुन्गुने पानी से खाने से दस्त रुक जाते है /

परहेज में बेल का मुरब्बा, खिचड़ी खाना चाहिये /

यदि बुखार हो तो साथ में बुखार की भी दवा खाना चाहिये /