“गणपति बप्पा “ ; गणेश चतुर्थी और इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का महत्वपूर्ण सन्योग


 
GANESH CHATURTHI ke pavitra avasar par sabhi desh vashiyoM ko SHUBH    KAAMANAAYE 
 
                               Devadhidev sabaki kaamanao ki purti kare
 
बात सन २००४ की है / यह गणेश चतुर्थी का दिन था / देवाधिदेव गणेश जी की पूजा और वन्दना का समाज में माहौल था /
 
दिन के १२.३० और १ बजे के बीच का समय होगा / मै अपनी क्लीनिक में आराम से बैठा हुआ कम्प्यूटर में डिश टी० वी० के टेलीकास्टों को देख रहा था /

“आज तक” टी०वी० चैनल, गणेश महोत्सवों से सम्बन्धित समाचारों का प्रसारण मुम्बई से सीधा दर्शकों को दिखा रहा था / प्रसारण को कवर करने वाले एन्कर ने एक विशेष बात यह कही कि ” ऎसी लोगों की मान्यता है कि आज के दिन शुरू किये जाने वाले कार्य अवश्य पूरे होते हैं “/

यह बात मेरे मष्तिष्क में बैठ गयी / National Innovation Foundation, Ahamdabad की सन २००४ की National level प्रतियोगिता में मैने दो entry भेजी थी / पहली वाली entry ‘पेन्टास्केल आयुर्वेदिक दवाइयों द्वारा किये गये क्लीनिकल ट्रायल’ से सम्बन्धित थी और दूसरी entry ‘शन्खद्राव आधारित औषधियों और उनके क्लीनिकल ट्रायल’ से सम्बन्धित था /

मै तीसरी entry के तौर पर इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी / ग्राम की entry भेजना चाहता था, लेकिन यह समझ कर विचार त्याग दिया कि इसकी script लिखने में बहुत समय लगेगा और पैसा भी / इसकी शोध सामग्री जुटानी भी आसान नहीं था / इसलिये यह विचार किया कि इसे सन २००६ की प्रतियोगिता मे भेजून्गा /

लेकिन आज तक टी०वी० चैनल के एन्कर की बात सुनकर मै बहुत motivated हुआ और मैने विचार किया कि इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी / ग्राम की इन्ट्री National Innovation Foundation की 2004 प्रतियोगिता में भाग लेने के लिये मुझे भेज देना चाहिये /

जैसे ही यह विचार मेरे दिमाग में कौन्धा, मैने तुरन्त ही देवाधिदेव गणेश जी का स्मरण किया और उनका नाम लेते हुये एक कागज लेकर मैने ई०टी०जी० से सम्बन्धित preamble / introductory statement पहले एक कागज में रफ लिखा / फिर जो कुछ भी लिखा था उसमें सन्शोधन करके बाद मे सब फेयर करके लिखा /

इस फेयर की गयी कापी का पृष्ठ नीचे दिया हुआ है /

देवाधिदेव गणेश जी को मन ही मन में प्रार्थना करके और उनको ईलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक को समर्पित करके बार बार प्रार्थना की कि देवाधिदेव गणेश जी महाराज आयुर्वेद की इस पहली और अकेली तकनीक को इतना श्रेष्ठ बनाने का आशीर्वाद दें , जिससे यह निदान ग्यान और चिकित्सा का वही स्तर प्राप्त करे जैसा आदिकाल से आज तक आयुर्वेद विग्यान को  प्राप्त हुआ है /

 हर्ष की बात है कि देवाधिदेव श्री गणेश जी महाराज ने मेरी यह कार्य पूरा किया / मेरी विनती सुनी और भारत सरकार ने इसका परीक्षण किया और इसे उपयोगी पाया /

 मुझे सबसे बड़ी चिन्ता इस बात की है कि मै इस तकनीक के प्रचार और प्रसार के लिये और सभी वैद्यों और चिकित्सकों के उपयोग के लिये एक स्वतन्त्र आधुनिक सुविधाओं से युक्त ई०टी०जी० मशीन के निर्माण कार्य को करना चाहता हूं ताकि सभी चिकित्सकों को इस मशीन की उपयोगिता और उपयोग करने का मौका मिले / दु:ख की बात यह है कि अभी तक जितने भी प्रयास किये है , उनमें मुझे कोई सफ़लता नहीं मिली है /

 आज गणेश चतुर्थी का दिन है , मै देवाधिदेव से प्रार्थना और अर्चना करून्गा कि “देव मेरे ऊपर कृपा करिये कि मै सभी चिकित्सकों को इस वर्ष आधुनिक कम्प्य़ूटराइज्ड ई०टी०जी० मशीन Latest Ultra modern Computerised ETG Ayurveda Scanner Machine का निर्माण करके चिकित्सा कार्य हेतु  उपलब्ध करा सकूं” /

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