महीना: सितम्बर 2011

हृदय रोगों के मरीजों के लिये एक आयुर्वेद तथा दूसरा होम्योपैथी का दिल को मजबूत करने वाला टानिक


दिल की बीमारी के मरीज बनना अच्छी बात नहीं है / आदि काल से हृदय रोग होते रहे है, आज के महौल में हो रहे है और आगे भी होते रहेन्गे / यह सिल्सिला चलता रहेगा /

मानसिक तनाव इस बीमारी का एक कारण सभी चिकित्सक बताते है / “तनाव” तो हमेशा और हर युग और हर समय में रहा है / ऐसा कौन सा समय सुरक्षित कहा जा सकता है जब मनुष्य के व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक परिवेश में तनाव न रहा हो / चाहे वह राजा महाराजाओं का समय रहा हो या कोई अन्य समह और काल / मानसिक तनाव के बहुत से कारण होते है / किसी एक कारण को फिक्स नहीं किया जा सकता कि तनाव का यही एक मुख्य कारण है /

यह कहा जाता है कि जीवन शैली के बदलाव के कारण ह्रूदय रोग पनपते है, यह आज की बात नहीं है / प्राचीन काल में राज दरबारों में, धनी मानी लोगों के यहां, वैवाहिक तथा अन्य समारोहों में शाम को सजी हुयी महफिलें देर रात तक चलती रहती थीं और उसी अनुसार लोगों की दिन चर्या होती थी / यही सिलसिला आज भी जस का तस चल रहा है लेकिन उनका स्वरूप बदल गया है /

Cut section of HEART with their identity

Cut section of HEART with their identity

यह सही है कि हृदय रोगों के निदान ग्यान में Diagnosis के लिये आज हमारे पास् बहुत से मशीनी साधन उपलब्ध है जो पहले नहीं थे / लेकिन इतना सब होते हुये हृदय रोग जस के तस है बल्कि उनकी सन्ख्या बढती चली जा रही है / यह विचारणीय विषय है कि इसका क्या कारण हो सकता है ?

अधिकतर हृदय रोग उन लोगों को होने की सम्भावना रहती है, जिनके परिवार में पिता को यह रोग होता है / यह genetic tendency होती है, इसलिये heart disorders होने की सम्भावना सबसे अधिक इसी group को होती है / लेकिन इसमें अपवाद है, ऐसा सभी के साथ नही होता, अगर mother side से arthritis या skin disorders जैसी कोई metabolic disorders की problem हो जाये तो फिर ह्रूदय रोग की सम्भावना जब तक अनुकूल परिस्तिथियां न बने तब तक नहीं होता है /

एक और कारण हृदय रोग का है जिसे high blood pressure अथवा low blood pressure कहते हैं / अकेले ब्लड प्रेशर की तकलीफ हो तो यह warning signal समझना चाहिये , लेकिन यदि यह Diabeties के साथ हो जाय तो और भी खतरनाक है / डायबेटीज से ब्लड प्रेसर control करने में दिक्कत आती है / हलान्कि यह भी जरूरी नहीं कि जिसे Blood pressure हो उसे डायबेटीज जरूर होगी या जिसे डायबेटीज हो उसे ब्लड प्रेसर जरूर होगा / ऐसा होता नही है और जहां तक मेरा अनुभव है कि यह ratio केवल 40 प्रतिशत [अनुमानित] रोगियों में देखने में आता है / इसलिये ऐसे रोगियों को हृदय रोग से बचने के लिये विशेष ध्यान देना चाहिये /

आयुर्वेद मे बहुत सी औषधियां हृदय रोग के उपचार के लिये उपस्तिथि हैं उनका उप्योग किसी सिद्ध हस्त वैद्य की देख रेख में करना चाहिये / आयुर्वेद में “अर्जुन” की छाल [Latin; Terminalia Arjuna] का गोदुग्ध-नीर मिश्रित क्षीर-पाक तथा अन्य औषधीय द्रव्यों के साथ मिलित क्वाथ अथवा काढा सेवन करने से हृदय रोग की सम्भावना से बचत होती है /

इसी प्रकार होम्योपैथी की दवा Crateagus Oxycantha Q के सेवन से हृदय रोग में आश्चर्य जनक फायदा होता है / यह हृदय के लिये टानिक का कार्य करती है /

जिन्हे हृदय रोग हो वे इसे अन्य दवाओं के साथ [ as a supplementary remedy ] ले सकते है / यह safe बनौषधियां है और इनका कोई side effect नही होता है /

अच्छा होगा ऊपर बताई गयी दवा सेवन करने से पहले अपने नजदीक के किसी आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक चिकित्सक से इन औषधियों के बारे मे अधिक जानकारी प्राप्त कर लें /

अगर किसी महिला के शादी के दो साल के बाद का समय बीतने के बाद प्रेगनेन्सी न हो तो …………..सावधान हो जायें !



अक्सर आये दिन बहुत से विवाहित व्यक्ति consultation के लिये आते हैं कि उनकी शादी को हुये दो साल या दो साल से अधिक हो गये है और उनके बच्चे नहीं हुये है / अगर ऐसा किसी भी विवाहित महिला के साथ हुआ है या हो रहा है तो सावधान हो जाना चाहिये /

हो सकता है पुरुष और महिला दोनों में से किसी एक को अथवा दोनों ही को कोई विकार पैदा हो गये हो / इसलिये दोनों को ही सबसे पहले इस बात का निदान और परीक्षण करा लेना चाहिये कि उनके शरीर के प्रजनन अन्ग ठीक और स्वस्थय हैं या नहीं /

आजकल चिकित्सा क्षेत्र में निदान के लिये कई तकनीकें आ चुकी है, जिनके द्वारा पता कर सकते है कि प्रजनन अन्ग सामान्य है अथवा उनमें कोई विकृति आ गयी है / कुशल चिकित्सक की देख रेख में परीक्षण के उपरान्त जो भी कमियां है , उनका उपचार करने से प्रेग्नेन्सी की उम्मीद बन जाती है /

Normal Female Reproductive Organs

Normal Female Reproductive Organs

अगर महिला या पुरूष को कोई विकृति हो और यदि चिकित्सक सलाह देता है कि आप्रेशन करा लेना चाहिये या बिना आपरेशन कराये तकलीफ ठीक नही होगी तो ऐसी स्तिथि में सबसे बेहतर तरीका है कि आपरेशन से बचें /

आपरेशन यदि किसी भी किस्म का छोटा हो या बड़ा , महिला या पुरूष के प्रजनन अन्गों का किया जाता है तो फिर प्रेगनेन्सी की सम्भावना कम हो जाती है / मैने कई सैकड़ा पुरुष तथा महिलाओं को देखा है जो आपरेशन कराने के बाद बच्चे पैदा करने की सम्भावनाओं को समाप्त कर बैठे है /

जिन महिला और पुरुष को आपरेशन कराने की सलाह दी गयी थी, लेकिन जिन्होने आपरेशन कराने से मना कर दिया या आपरेशन नहीं कराया और इन सभी ने आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक का इलाज कराया , उनके बच्चे हुये, उनको प्रेगनेन्सी हुयी और सुरक्षित प्रसव हुये /

कई कई दम्पत्तियों को शादी होने के तीन साल से लेकर सात या आठ साल बीतने के बाद बच्चे हुये / एक महिला को शादी के पन्द्रह सोलह साल बाद बच्चा पैदा हुआ / जिनके बच्चे हुये है उनको सलाह दी गयी थी कि वे आपरेशन करा ले, लेकिन उन्होने किसी भी किस्म का छोटा आप्रेशन [D & C] या बडा आपरेशन नहीं कराया था /

आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान में बन्ध्यत्व यानी Infertility के लिये पूर्ण चिकित्सा व्यवस्था है / मेरी सलाह है कि महिला को अगर शादी के दो साल के बाद प्रेग्नेन्सी न हो तो कम से कम छह माह से लेकर एक वर्ष तक किसी सिध्ध हस्त आयुर्वेदिक चिकित्सक से इलाज करायें / अवश्य लाभ होगा /

प्रजनन अन्गों के किसी भी तरह के आपरेशन करा लेने के बाद कुदरती प्रेगनेन्सी की सम्भावनाये समाप्त हो जाती है /

रीढ की हड्डी के दो हिस्सों का दर्द ; एक सर्वाइकल तथा दूसरा लम्बर यानी पहला गर्दन और दूसरा कमर का पीडादायक मर्ज ; Painful condition of SPINAL PROBLEMS


मानव शरीर में रीढ की हड्डी का बहुत महत्व है / वैसे तो सभी अन्गों का अपनी अपनी जगह बहुत महत्व है और मानव शरीर के सभी अन्ग एक दुसरे से जुड़े होने के कारण स्वाभविक है कि ये एक दूसरे को सपोर्ट करते है और इसी वजह से सभी जिन्दा हैं /

रीढ की हड्डी भी पान्च हिस्सों मे बान्टी गयी है / जिसमें पहला हिस्सा सर्वाइकल है जिसमें सात वरटेब्रा vertebra होते है / पहला वर्टेब्रा एटलस कहलाता है जिसके ऊपर खोपड़ी रखी हुयी होती है / सातवां वरटेब्रा महत्व्पूर्ण इसलिये होता है क्यों कि यह पहले थोरसिक या डारसल वरटेब्रा के ऊपर आकर स्थान पाता है जहां शरीर की पहली पसली और गरदन तथा कन्धे की हड्डियों को यथा स्थान देता है ताकि शरीर के महत्व पूर्ण अन्ग सुरक्शित रहें , यह सब कुदरती व्यवस्था है /गर्दन तथा मनव मस्तिष्क के साथ साथ खोपड़ी का भार इसी junckcher पर सबसे अधिक पड़ता है / बारह पसलियों की वजह से तथा मान्स्पेशियों के सपोर्ट से मानव धड़ human torso गर्दन और खोपड़ी को सम्भाले रखता है /

रीढ का Lumber region इसके नीचे से शुरू होता है / इसमें पान्च वरटेब्रा होते है / आखिरी का पान्चवां वरटेब्रा सैक्रल वेर्टेब्रा के पहले वेर्टेब्रा के ऊपर होता है /

कुदरत ने सर्वाइकल, थोरेसिक और लम्बर वेरटेब्रा को अलग अलग करके उपस्तिथि किया है लेकिन सैक्रल और काक्सीजियल वेरेतेब्रा को आपस में fuse करके उपस्तिथि किया है / इन fused vetebra से कमर की हड्डी और फिर दोनों पैरों की हड्डियां मिलती हैं /

शरीर का सारा भार सैक्रल वेरेटेब्रा के ऊपर आता है / धरती की Gravitational force के कारण शरीर जब vertical position में होता है तो शरीर के कुल अन्गों का यह भार कमर में ही पड़्ता है /

जब दोनों हाथों से काम लेते है तो शरीर का सर्वाइकल वाला हिस्सा अधिक activate होने के कारण मान्स्पेशियों के साथ तनता है / गर्दन का दर्द इसी तनाव के कारण होता है / ऐसा अकेला नही होता है, गर्दन के Ligaments, tendons तथा दूसरे articulations सब साथ साथ affected होते हैं / इसी कारण से गरदन का दर्द पैदा होता है / हलाकि यह प्रारम्भिक कारण है जो नई उम्र के लोगों में देखने में बहुत आता है / अधिक उम्र के लोगों में दर्द होने कई और दूसरे कारण होते हैं /

मोटर साइकिल चलाने, बहुत देर तक कम्प्य़ूटर पर काम करने , अधिक देर तक बिना गरदन हिलाये एक्ल दिशा में काम करने से गर्दन का दर्द बहुत होता है /

कमर के दर्द के कई कारण हैं / यदि पुरुषों में कमर का दर्द है तो ऐसा दर्द भारी वजन उठाने, मोटर साइकिल चलाने, कार ड्राइव करने, बोझा उठाने, कमर के बल गिरने या चोट खाने के कारं होता है/ ज्यादा उमर वालों को हड्डियों के आकार में परिवर्तन या मन्स्पेशियों इत्यादि के कड़े हो जाने या नरम हो जाने के कारण कमर का दर्द होता है /

स्त्रियों में गर्भाशय की बीमारियों, पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिसार्डर्स आदि के कारण कमर का दर्द हो सकता है /

कमर के दर्द का कारण पता करने से ही इसका जड़ मूल से उपचार सम्भव है / पेन किलर खाने से ततकाल आराम मिल जाता है , जिससे रोगी यह समझता है कि उसकी तकलीफ ठीक हो गयी है और मरीज उसी धुन में अधिक काम करने लगता है , जिसका नतीजा यह होता है कि उसकी दर्द की जगह की टूट फूट और अधिक हो जाती है और दर्द के स्थान के टीश्यूज टूट करके inflammatory condition पैदा करते है / यह स्तिथि बहुत खतरनाक होती है / अगर इसी स्तिथि को ठीक नहीं किया गया तो कु हफ्तों में चलना फिरना तक बन्द हो सकता है /

इलाज से बीमारी की यह स्तिथि ठीक हो सकती है / विश्राम करने, कम चलने, उपयुक्त दवा खाने से रोगी ठीक होते है /

य़दि एलोपैथी की चिकित्सा कराना चाहते हैं तो अपने नजदीक के Orthopeadic Surgeon से सलाह लेकर रोग-निदान के लिये एक्स-रे, एम०आर०आई०, सी०टी० स्कैन, रक्त परीक्षण आदि करा लेना चाहिये , ताकि बीमारी का निदान किया जा सके और तदनुकूल चिकित्सा व्यवस्था की जा सके /

यदि आयुर्वेदिक इलाज कराना चाहते है तो ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण सबसे श्रेष्ठ है / ETG AyurvedaScan Findings पर आधारित इलाज हमेशा फलदायी होते हैं /

यदि होम्योपैथी का इलाज कराना चाहते है तो ई०एच०जी० होम्योपैथीस्कैन E.H.G.HomoeopathyScan कराना चाहिये और फिर इसकी फाइन्डिन्ग्स पर आधारित दवायें repertorise करके सेवन करने से अवश्य लाभ होता है /

य़ुनानी चिकित्सा में भी बहुत सटीक इलाज इस बीमारी का है, लेकिन किसी सिध्ध हस्त हकीम से परामर्श करना चाहिये /

य़ोग और प्राकृतिक चिकित्सा, मैगनेट थेरेपी, आकूपन्कचर, फीजियोथेरापी और जीवन शैली के बदलाव, खान-पान में परहेज इत्यादि के सम्मिलित प्रयोग से रीढ की हड्डियों के रोगों को दूर किया जा सकता है /

AYURVEDIC remedy for DIABETIES : डायबेटीज अथवा मधुमेह या बहुमूत्र के लिये आयुर्वेदिक योग


भारतीय चिकित्सा विग्यान जैसा कि सभी मानते और जानते हैं कि एक पूर्ण चिकित्सा विग्यान है, जो सभी रोगों को पूर्ण आरोग्य अथवा आन्शिक आरोग्य लाभ अथवा अरोग्य लाभ प्रदान करने की क्षमता प्रदान करता है / मधुमेह यानी Diabeties रोग को सबसे पहले आयुर्वेद ने ही पहचाना है , वह भी हजारों साल पहले / इसका जिक्र Text Book of Medicine by McDormat तथा Harrison’s Internal Medicine के relevent chapters मे उपस्तिथि है /

MacDormat की टेक्स्ट बुक आफ मेडिसिन में लिखा है कि भारतीय चिकित्सक चरक और सुश्रुत को मधुमेह के बारे में ग्यान था और उन्होने मोटापे का एक कारण इस बीमारी को माना है /

तो फिर यह तय हुआ कि आयुर्वेद को मधुमेह बीमारी के बारे में पूरा ग्यान था और भारतीय चिकित्सक इस बीमारी का इलाज करना जानते थे / यह सही भी है / आज भी समयानुकूल चिकित्सा करके मधुमेह के रोगियों को आरोग्य, आयुर्वेद के चिकित्सक, आम जन को मुहैया करा रहे है /

Diabeties के लिये आयुर्वेद की एक दवा का जिक्र यहां कर रहा हूं / इस दवा के सेवन से डायबेटीज अवश्य ठीक होती है /

हेमनाथ रस Hemnath Ras
इस औषधि का निर्माण आयुर्वेद की उत्कृष्ट भस्मों और दृव्यों को मिलाकर किया गया है / इसे बनाने का तरीका और योग मिश्रण इस प्रकार है / शोधित पारा, शोधित गन्धक, सोना भस्म, सोनामक्खी भस्म , यह सभी १२ ग्राम / लोहा भस्म, प्रवाल भस्म, कपूर,वन्ग भस्म यह सभी ६ ग्राम / सभी द्रव्यों को खरल में डाल दें / अच्छी तरह घोंटें / अब इसको पोस्त के डोडे के काढा से सात बार भिगो कर सुखा लें यानी एक बार भिगोया और सुखाया फिर दूसरी बार भिगोया और सुखाया / ऐसा ही क्रिया सात सात बार भिगोने और सुखाने का काम केले के फूल का रस और गूलर के फल के रस के साथ भी करें / यह दवा डायबिटीज के इलाज के लिये तैयार है /

इसे गिलोय के रस के साथ १२५ मिलीग्राम की मात्रा में देने से चाहे जसी डायबिटीज हो अवश्य ठीक होती है / इसे किसी भी मधुमेह नाशक चूर्ण अथवा काढा के साथ भी दे सकते है /

इस दवा को सुबह देना चाहिये , एक ही खुराक काफी है / यदि अधिक तकलीफ हो तो शाम को भी एक खुराक दे सकते है /

डायबिटीज ठीक हो जाती है यदि जीवन शैली, खानपान में परहेज और आयुर्वेदिक दवायें सही सही ली जायें / डायबिटीज कम की जा सकती है, यदि स्वास्थय के प्रति जागरुकता बनाये रखी जाये /

लापरवाही करने से मधुमेह की बीमारी बहुत तेजी से बढती है, इसलिये हमेशा और बार बार इसका परीक्षण करते रहना चाहिये और monitor करते रहना चाहिये कि रक्त में यह सामान्य है अथवा नहीं / इलाज के लिये कोई भी दवा किसी भी चिकित्सा पैथी को यदि ले रहे हों तो उसे एकदम न छोड़िये, अगर छोड़ना ही है तो चिकित्सक की सलाह के बगैर न छोड़ें / दवायें धीरे धीरे छोड़े / पर जब तक ठीक न हो कोई न कोई दवा लेते रहें / बीच बीच में यानी हर १५ दिन में रक्त शर्करा की जान्च कराते रहे /

 

MAMMERY GLANDS CANCER; मैमरी ग्लैन्ड्स अथवा स्तन का कैन्सर


महिलाओं की यह खास तरह की बीमारी है / सभी महिलाओं को यह होता हो , ऐसा नहीं है, फिर भी यह दिक्कत उन महिलाओं को अधिक होने की सम्भावना अधिक होती है, जिनके परिवार में स्तन कैन्सर होने का इतिहास हो / सबसे ज्यादा इसी ग्रुप यानी tendency to prone mammary gland cancer स्तन कैन्सर होने का झुकाव, की महिलाओं को दिक्कत पैदा होने की सम्भावना बलवती होती है /

दूसरे अन्य कारणों में से एक है सतनों में चोट लग जाना / किसी बाहरी दुर्घटना से स्तनॊं पर चोट लग जाय, जोरों से दब जाय या इसी तरह की कोई हरकत , जिससे स्तन अत्यधिक स्वरूप में दब जायें, उनमें दर्द हो , सूजन आ जाये, गान्ठ पड़ जाये /

मासिक धर्म होने के ह्फ्ता या दस दिन पहले या हफ्ता दस दिन बाद के समय अन्तराल में किसी किसी महिला को स्तनों में सूजन आ जाती है / यह सूजन इतनी सख्त होती है जिससे कोई कोई महिला अधिक दर्द से परेशान होती है / किसी किसी के गान्ठें हो जाती है / जो मासिक के पहले पैदा होती है और फिर बाद में जब मासिक पूरे हो जाते हैं तब ठीक होने लगते है / रोग की यह स्तिथि महिला के शरीर में हार्मोन की सक्रियता से पैदा होते है /

एक और कारण है जो गर्भाशय से सम्बन्धित है / गर्भाशय अर्थात Uterus के किसी विकार से उतपन्न metastasis जब स्तन ग्रन्थि में पहुचते हैं तो यह वहां के तनतुओं में inflammation पैदा करते हैं जो silent रह्ते हुये अपना काम अन्दर ही अन्दर किया करते हैं / यह सब शरीर के Lymphatic system के सहयोग से होता है / Lymph glands inflammation की metastasis को स्तनों तक ले जाती है / जहां छोटी छोटी गान्ठें मिलकर एक साथ एक बड़ी गान्ठ का आकार ले लेती है / पहले भले ही यह बेनाइन स्टेज में हो जो बाद में मैलिग्नेन्ट स्टेज में तब्दील हो जायें और कैन्सर का रूप धारण कर लें /

जो भी कारण हो , इसका निदान जैसे ही शक हो , तुरन्त कराना चाहिये / अगर गान्ठे छोटी हों और कोई विशेष दिक्कत न हो तो आयुर्वेद या होम्योपैथी का इलाज कराना चाहिए / इससे पहली और दूसरी अवस्था की गान्ठें और उनका बढना रुक जाता है और बाद में आरोग्य प्राप्त हो जाता है / लेकिन यहां इलाज के लिये option भी हैं जिन पर चिकित्सकों को ध्यान देना चाहिये / अगर किसी महिला का Uterus का surgical removal कर दिया गया है तो ऐसा देखने में आया है कि इस तरह की महिलाओं को स्तन कैन्सर होने की सम्भावना अधिक होती है / इसलिये यदि इस तरह की शिकायत वाला मरीज हो तो उसका इलाज भले ही होम्योपैथी या आयुर्वेद की दवाओं से किया जाय , लेकिन बाद में उसे surgery करानी ही पड़ती है क्योकि uterus removal से पैदा consiquences किसी दवा से ठीक नहीं होते है /

आयुर्वेद की तकनीक ETG AyurvedaScan की सहायता लेकर यदि इलाज किया जाय तो पहले और दूसरे दर्जे के रोगी के ठीक होने या रोग के शमन होने की सम्भावनायें बहुत ह्ती हैं , लेकिन मरीज को लगातार जीव पर्यन्त औषधियां लेनी होती है /

सर्जरी के बाद भी लगभग सभी मरीजों को बहुत से काम्प्लीकेशन्श पैदा हो जाते है, ऐसी स्तिथि में आयुर्वेद का इलाज सबसे बेहतर होता है / आयुर्वेद के इलाज से काम्प्ळीकेशन्स शान्त रहते है और मरीज को कुछ लम्बी जिन्दगी या जीवन या अधिक उम्र मिल जाती है /

 मैने हजारो महिलाओं के परीक्षण किये है / ई०सी०जी० और ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन के परीक्षण के पश्चात मेरी यह धारणा बनी है कि ९९ प्रतिशत महिलाये अपने स्तनों के स्वास्थय के ऊपर कतई ध्यान नहीं देती है / इसलिये उनके स्तन इतने कुरूप और छूने में अनाकर्षक और बेकार से लगते हैं जैसे यह समझ लिया ग्या है कि  महिलाओं के लिये यह बेकार का अन्ग होते हैं /

१०० महिलाओं मे शायद ही १ प्रतिशत अपने स्तनों के स्वास्थय के बारे में जागरुक हों / इसलिये स्तन कैन्सर होने का एक कारण यह भी है कि महिलाये अपने स्तनों के स्वास्थय के बारे मे ज्यादा जागरुक नहीं है / यह हालात शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बराबर बराबर देखने में आई है /

स्तन से सम्बन्धित रोगों से बचने के लिये महिलाओं में जागरुकता पैदा करना अति आवश्यक है /

जान्च और निदान के लिये क्वालीफाइड महिला अथवा पुरुष चिकित्सक की सहायता लेना चाहिये / मैमोग्राफी, सी०टी० स्कैन, एम०आर०आई० स्कैन, एक्स रे, अल्ट्रासाउन्ड, रक्त परीक्षण इत्यादि एलोपैथिक के निदान ग्यान के लिये परीक्षण अथवा आयुर्वेदास्कैन ई०टी०जी० के द्वारा मैमरी ग्लैन्ड्स या स्तन या mammery gland examination कराया जा सकता है /

जैसा कि पहले बताया गया है कि surgery  का option बहुत बाद के लिये रख लेना चाहिये / बायोप्सी से बचना चाहिये या FNAC  परीक्षण से जहां तक हो सके बचना चाहिये , क्योंकि एक बार यदि यह परीक्षण हो जाते हैं तो operation आवश्यक हो जाता है /

Observation में यह देखने में आया है कि mammery glands के operation के बाद  महिलाओं मे गले, फेफडे़, लीवर, पैन्क्रियाज, गुर्दे, आदि आदि अन्गों में विकृतियां फैल जाती हैं, जिन्हे पुन: आरोग्य के लिये सम्भालना मुश्किल हो जाता है /

इसलिये जहां तक हो सके आपरेशन से बचना चाहिये, लेकिन जब ज्यादा आवश्यक और बहुत ही जरूरी हो तो फिर आपरेशन करा लेना चाहिये /
आपरेशन के बाद कुछ महिलाओं का मैने आयुर्वेदिक इलाज किया है जिनको बहुत से काम्प्लीकेशन पैदा हो गये थे, ये महिलायें कई वर्ष तक जीवित रही, इसमे एक महिला जिसकी उम्र ६० साल थी और जिसके स्तन का  आप्रेशन कर दिया गया था वह आयुर्वेदिक इलाज से दस साल जिन्दा रही और ७० साल की उम्र तक जिन्दा रही /

A FEMALE case of HYPER-THYROIDISM with other gyneacological disorders एक महिला रोगी की हाइपेर-थायरायड के साथ साथ अन्य गायनोकोलाजिकल बीमारी की समस्या



यह केस एक ३५ साल की महिला का है , जिसको Hyper Thyroidism की शिकायत कई साल से थी / मरीजा ने दिनान्क २६.०६.२०१० को परामर्श किया था /

महिला को निम्न शिकायते थी, जिनके लिये वह परामर्श के लिये आयी थी /

१- अनियमित मासिक धर्म
२- मासिक होने से १० दिन पहले से मानसिक तनाव , अत्यधिक गुस्सा, झगड़ालू प्रवृति
३- मासिक के समय अत्यधिक रक्त श्राव, जिसके कारण रोगिणी बहुत कमजोर हो जाती थी
४- रोगिणी के स्तनॊं में सूजन और गान्ठे पड़ जाती है
५- पेट में सूजन

रोगिणी एलोपैथी का बहुत इलाज करा चुकी थी, उसको एलोपैथी के इलाज से कोई आराम नही मिला / मैने उसको सलाह दी कि अगर वह आयुर्वेदिक इलाज कराना चाहिती है तो वह एक ई०टी० जी० आयुर्वेदस्कैन का परीक्षण करा ले तो उसके सारे शरीर की बीमारियों के बारे मे पता चल जायेगा / दूसरा ऐसा कोई सरल तरीका नहीं है, जिससे उसकी बीमारी के बारे मे पता लगाया जा सके /

रोगिणी ने अपना ई०टी०जी० परीक्षण कराया, जिसकी फाइन्डिन्ग्स निम्न प्रकार से थी /

[अ] त्रिदोष;

कफ १३७.५२
पित्त ६८.७६
वात ५८.१५

[ब] सप्त धातु ;

मान्स १०२.०३
मेद ८१.००

[स] शरीर मे व्याप्त तकलीफॊं का अन्कलन

Mammery Glands 134.00
Lumber spine 122.22
Urinary Bladder 112.50
Mental/emotional/intellect 110.00
Sinusitis 110.00
Thyroid Pathophysiology 106.67
Uterus anomalies 88.50
Pelvic inflammatory disease 88.50
Renal anomalies 80.00
Menstrual anomalies 46.67

[द] रोग निदान ;

Bowel’s pathophysiology
Cervical spondylitis with Lymphadenitis
Epigastritis
Hormonal anomaly
Inflammatory and irritable bowel syndromes
Large intestines anomalies
Lumber pain
Mammary glands anomalies
Nervous temperaments
Tachycardia

इस रोगुणी को बताया गया कि उसे उक्त बीमारियां है / यह देखकर वह घबरा गयी कि इतनी बीमारियां एक साथ हो गयीं है / मैने उसको बताया कि ई०टी०जी० सिस्टम चूंकि सारे शरीर का स्कैन करता है इसलिये जो भी बीमारी या कार्य विकृति होती वह यह सब बता देता है / आयुर्वेद में सम्पूर्ण शरीर की चिकित्सा करने का विधान है, इसलिये जो भी फाइन्डिन्ग्स है उन सबका इलाज एक साथ होगा और आपको सारी तकलीफॊं में एक साथ आराम मिलेगा /

यह सुनकर मरीजा आश्वस्त हो गयी और उसको निम्न चिकित्सा व्यवस्था दी गयी /

अ- कान्चनार गुग्गुल १ गोली ; गले की गान्ठ के लिये
रज: प्रवर्तिनी वटी १ गोली ; मासिक धर्म की अनियमितता के लिये
ब्राम्ही वटी १ गोली ; नरवस्नेस और धड़कन के लिये
पुष्य्यानुग चूर्ण २ ग्राम के साथ दिन में दो बार सादे पानी से

ब- दश्मूलारिष्ट १० मिलीलीटर
कुमारीआसव १० मिलीलीटर
भोजन करने के बाद दोनों समय

मरीजा को १२० दिन दवा सेवन करायी गयी / दवा सेवनोपरान्त वह पूर्ण स्वस्थय है और उसे मासिक सम्बन्धी कोई तकलीफ नहीं है / उसकी थायरायड भी अब सामान्य कार्य कर रही है /