MAMMERY GLANDS CANCER; मैमरी ग्लैन्ड्स अथवा स्तन का कैन्सर


महिलाओं की यह खास तरह की बीमारी है / सभी महिलाओं को यह होता हो , ऐसा नहीं है, फिर भी यह दिक्कत उन महिलाओं को अधिक होने की सम्भावना अधिक होती है, जिनके परिवार में स्तन कैन्सर होने का इतिहास हो / सबसे ज्यादा इसी ग्रुप यानी tendency to prone mammary gland cancer स्तन कैन्सर होने का झुकाव, की महिलाओं को दिक्कत पैदा होने की सम्भावना बलवती होती है /

दूसरे अन्य कारणों में से एक है सतनों में चोट लग जाना / किसी बाहरी दुर्घटना से स्तनॊं पर चोट लग जाय, जोरों से दब जाय या इसी तरह की कोई हरकत , जिससे स्तन अत्यधिक स्वरूप में दब जायें, उनमें दर्द हो , सूजन आ जाये, गान्ठ पड़ जाये /

मासिक धर्म होने के ह्फ्ता या दस दिन पहले या हफ्ता दस दिन बाद के समय अन्तराल में किसी किसी महिला को स्तनों में सूजन आ जाती है / यह सूजन इतनी सख्त होती है जिससे कोई कोई महिला अधिक दर्द से परेशान होती है / किसी किसी के गान्ठें हो जाती है / जो मासिक के पहले पैदा होती है और फिर बाद में जब मासिक पूरे हो जाते हैं तब ठीक होने लगते है / रोग की यह स्तिथि महिला के शरीर में हार्मोन की सक्रियता से पैदा होते है /

एक और कारण है जो गर्भाशय से सम्बन्धित है / गर्भाशय अर्थात Uterus के किसी विकार से उतपन्न metastasis जब स्तन ग्रन्थि में पहुचते हैं तो यह वहां के तनतुओं में inflammation पैदा करते हैं जो silent रह्ते हुये अपना काम अन्दर ही अन्दर किया करते हैं / यह सब शरीर के Lymphatic system के सहयोग से होता है / Lymph glands inflammation की metastasis को स्तनों तक ले जाती है / जहां छोटी छोटी गान्ठें मिलकर एक साथ एक बड़ी गान्ठ का आकार ले लेती है / पहले भले ही यह बेनाइन स्टेज में हो जो बाद में मैलिग्नेन्ट स्टेज में तब्दील हो जायें और कैन्सर का रूप धारण कर लें /

जो भी कारण हो , इसका निदान जैसे ही शक हो , तुरन्त कराना चाहिये / अगर गान्ठे छोटी हों और कोई विशेष दिक्कत न हो तो आयुर्वेद या होम्योपैथी का इलाज कराना चाहिए / इससे पहली और दूसरी अवस्था की गान्ठें और उनका बढना रुक जाता है और बाद में आरोग्य प्राप्त हो जाता है / लेकिन यहां इलाज के लिये option भी हैं जिन पर चिकित्सकों को ध्यान देना चाहिये / अगर किसी महिला का Uterus का surgical removal कर दिया गया है तो ऐसा देखने में आया है कि इस तरह की महिलाओं को स्तन कैन्सर होने की सम्भावना अधिक होती है / इसलिये यदि इस तरह की शिकायत वाला मरीज हो तो उसका इलाज भले ही होम्योपैथी या आयुर्वेद की दवाओं से किया जाय , लेकिन बाद में उसे surgery करानी ही पड़ती है क्योकि uterus removal से पैदा consiquences किसी दवा से ठीक नहीं होते है /

आयुर्वेद की तकनीक ETG AyurvedaScan की सहायता लेकर यदि इलाज किया जाय तो पहले और दूसरे दर्जे के रोगी के ठीक होने या रोग के शमन होने की सम्भावनायें बहुत ह्ती हैं , लेकिन मरीज को लगातार जीव पर्यन्त औषधियां लेनी होती है /

सर्जरी के बाद भी लगभग सभी मरीजों को बहुत से काम्प्लीकेशन्श पैदा हो जाते है, ऐसी स्तिथि में आयुर्वेद का इलाज सबसे बेहतर होता है / आयुर्वेद के इलाज से काम्प्ळीकेशन्स शान्त रहते है और मरीज को कुछ लम्बी जिन्दगी या जीवन या अधिक उम्र मिल जाती है /

 मैने हजारो महिलाओं के परीक्षण किये है / ई०सी०जी० और ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन के परीक्षण के पश्चात मेरी यह धारणा बनी है कि ९९ प्रतिशत महिलाये अपने स्तनों के स्वास्थय के ऊपर कतई ध्यान नहीं देती है / इसलिये उनके स्तन इतने कुरूप और छूने में अनाकर्षक और बेकार से लगते हैं जैसे यह समझ लिया ग्या है कि  महिलाओं के लिये यह बेकार का अन्ग होते हैं /

१०० महिलाओं मे शायद ही १ प्रतिशत अपने स्तनों के स्वास्थय के बारे में जागरुक हों / इसलिये स्तन कैन्सर होने का एक कारण यह भी है कि महिलाये अपने स्तनों के स्वास्थय के बारे मे ज्यादा जागरुक नहीं है / यह हालात शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बराबर बराबर देखने में आई है /

स्तन से सम्बन्धित रोगों से बचने के लिये महिलाओं में जागरुकता पैदा करना अति आवश्यक है /

जान्च और निदान के लिये क्वालीफाइड महिला अथवा पुरुष चिकित्सक की सहायता लेना चाहिये / मैमोग्राफी, सी०टी० स्कैन, एम०आर०आई० स्कैन, एक्स रे, अल्ट्रासाउन्ड, रक्त परीक्षण इत्यादि एलोपैथिक के निदान ग्यान के लिये परीक्षण अथवा आयुर्वेदास्कैन ई०टी०जी० के द्वारा मैमरी ग्लैन्ड्स या स्तन या mammery gland examination कराया जा सकता है /

जैसा कि पहले बताया गया है कि surgery  का option बहुत बाद के लिये रख लेना चाहिये / बायोप्सी से बचना चाहिये या FNAC  परीक्षण से जहां तक हो सके बचना चाहिये , क्योंकि एक बार यदि यह परीक्षण हो जाते हैं तो operation आवश्यक हो जाता है /

Observation में यह देखने में आया है कि mammery glands के operation के बाद  महिलाओं मे गले, फेफडे़, लीवर, पैन्क्रियाज, गुर्दे, आदि आदि अन्गों में विकृतियां फैल जाती हैं, जिन्हे पुन: आरोग्य के लिये सम्भालना मुश्किल हो जाता है /

इसलिये जहां तक हो सके आपरेशन से बचना चाहिये, लेकिन जब ज्यादा आवश्यक और बहुत ही जरूरी हो तो फिर आपरेशन करा लेना चाहिये /
आपरेशन के बाद कुछ महिलाओं का मैने आयुर्वेदिक इलाज किया है जिनको बहुत से काम्प्लीकेशन पैदा हो गये थे, ये महिलायें कई वर्ष तक जीवित रही, इसमे एक महिला जिसकी उम्र ६० साल थी और जिसके स्तन का  आप्रेशन कर दिया गया था वह आयुर्वेदिक इलाज से दस साल जिन्दा रही और ७० साल की उम्र तक जिन्दा रही /

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