रीढ की हड्डी के दो हिस्सों का दर्द ; एक सर्वाइकल तथा दूसरा लम्बर यानी पहला गर्दन और दूसरा कमर का पीडादायक मर्ज ; Painful condition of SPINAL PROBLEMS


मानव शरीर में रीढ की हड्डी का बहुत महत्व है / वैसे तो सभी अन्गों का अपनी अपनी जगह बहुत महत्व है और मानव शरीर के सभी अन्ग एक दुसरे से जुड़े होने के कारण स्वाभविक है कि ये एक दूसरे को सपोर्ट करते है और इसी वजह से सभी जिन्दा हैं /

रीढ की हड्डी भी पान्च हिस्सों मे बान्टी गयी है / जिसमें पहला हिस्सा सर्वाइकल है जिसमें सात वरटेब्रा vertebra होते है / पहला वर्टेब्रा एटलस कहलाता है जिसके ऊपर खोपड़ी रखी हुयी होती है / सातवां वरटेब्रा महत्व्पूर्ण इसलिये होता है क्यों कि यह पहले थोरसिक या डारसल वरटेब्रा के ऊपर आकर स्थान पाता है जहां शरीर की पहली पसली और गरदन तथा कन्धे की हड्डियों को यथा स्थान देता है ताकि शरीर के महत्व पूर्ण अन्ग सुरक्शित रहें , यह सब कुदरती व्यवस्था है /गर्दन तथा मनव मस्तिष्क के साथ साथ खोपड़ी का भार इसी junckcher पर सबसे अधिक पड़ता है / बारह पसलियों की वजह से तथा मान्स्पेशियों के सपोर्ट से मानव धड़ human torso गर्दन और खोपड़ी को सम्भाले रखता है /

रीढ का Lumber region इसके नीचे से शुरू होता है / इसमें पान्च वरटेब्रा होते है / आखिरी का पान्चवां वरटेब्रा सैक्रल वेर्टेब्रा के पहले वेर्टेब्रा के ऊपर होता है /

कुदरत ने सर्वाइकल, थोरेसिक और लम्बर वेरटेब्रा को अलग अलग करके उपस्तिथि किया है लेकिन सैक्रल और काक्सीजियल वेरेतेब्रा को आपस में fuse करके उपस्तिथि किया है / इन fused vetebra से कमर की हड्डी और फिर दोनों पैरों की हड्डियां मिलती हैं /

शरीर का सारा भार सैक्रल वेरेटेब्रा के ऊपर आता है / धरती की Gravitational force के कारण शरीर जब vertical position में होता है तो शरीर के कुल अन्गों का यह भार कमर में ही पड़्ता है /

जब दोनों हाथों से काम लेते है तो शरीर का सर्वाइकल वाला हिस्सा अधिक activate होने के कारण मान्स्पेशियों के साथ तनता है / गर्दन का दर्द इसी तनाव के कारण होता है / ऐसा अकेला नही होता है, गर्दन के Ligaments, tendons तथा दूसरे articulations सब साथ साथ affected होते हैं / इसी कारण से गरदन का दर्द पैदा होता है / हलाकि यह प्रारम्भिक कारण है जो नई उम्र के लोगों में देखने में बहुत आता है / अधिक उम्र के लोगों में दर्द होने कई और दूसरे कारण होते हैं /

मोटर साइकिल चलाने, बहुत देर तक कम्प्य़ूटर पर काम करने , अधिक देर तक बिना गरदन हिलाये एक्ल दिशा में काम करने से गर्दन का दर्द बहुत होता है /

कमर के दर्द के कई कारण हैं / यदि पुरुषों में कमर का दर्द है तो ऐसा दर्द भारी वजन उठाने, मोटर साइकिल चलाने, कार ड्राइव करने, बोझा उठाने, कमर के बल गिरने या चोट खाने के कारं होता है/ ज्यादा उमर वालों को हड्डियों के आकार में परिवर्तन या मन्स्पेशियों इत्यादि के कड़े हो जाने या नरम हो जाने के कारण कमर का दर्द होता है /

स्त्रियों में गर्भाशय की बीमारियों, पेल्विक इन्फ्लेमेटरी डिसार्डर्स आदि के कारण कमर का दर्द हो सकता है /

कमर के दर्द का कारण पता करने से ही इसका जड़ मूल से उपचार सम्भव है / पेन किलर खाने से ततकाल आराम मिल जाता है , जिससे रोगी यह समझता है कि उसकी तकलीफ ठीक हो गयी है और मरीज उसी धुन में अधिक काम करने लगता है , जिसका नतीजा यह होता है कि उसकी दर्द की जगह की टूट फूट और अधिक हो जाती है और दर्द के स्थान के टीश्यूज टूट करके inflammatory condition पैदा करते है / यह स्तिथि बहुत खतरनाक होती है / अगर इसी स्तिथि को ठीक नहीं किया गया तो कु हफ्तों में चलना फिरना तक बन्द हो सकता है /

इलाज से बीमारी की यह स्तिथि ठीक हो सकती है / विश्राम करने, कम चलने, उपयुक्त दवा खाने से रोगी ठीक होते है /

य़दि एलोपैथी की चिकित्सा कराना चाहते हैं तो अपने नजदीक के Orthopeadic Surgeon से सलाह लेकर रोग-निदान के लिये एक्स-रे, एम०आर०आई०, सी०टी० स्कैन, रक्त परीक्षण आदि करा लेना चाहिये , ताकि बीमारी का निदान किया जा सके और तदनुकूल चिकित्सा व्यवस्था की जा सके /

यदि आयुर्वेदिक इलाज कराना चाहते है तो ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण सबसे श्रेष्ठ है / ETG AyurvedaScan Findings पर आधारित इलाज हमेशा फलदायी होते हैं /

यदि होम्योपैथी का इलाज कराना चाहते है तो ई०एच०जी० होम्योपैथीस्कैन E.H.G.HomoeopathyScan कराना चाहिये और फिर इसकी फाइन्डिन्ग्स पर आधारित दवायें repertorise करके सेवन करने से अवश्य लाभ होता है /

य़ुनानी चिकित्सा में भी बहुत सटीक इलाज इस बीमारी का है, लेकिन किसी सिध्ध हस्त हकीम से परामर्श करना चाहिये /

य़ोग और प्राकृतिक चिकित्सा, मैगनेट थेरेपी, आकूपन्कचर, फीजियोथेरापी और जीवन शैली के बदलाव, खान-पान में परहेज इत्यादि के सम्मिलित प्रयोग से रीढ की हड्डियों के रोगों को दूर किया जा सकता है /

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