महीना: अक्टूबर 2011

पाली-आर्थ्राइटिस से पीडित महिला को आयुर्वेद चिकित्सा से आरोग्य प्राप्ति ; A CURED case of Female Patient suffering from POLY-ARTHRITIS, treated successfully with Ayurvedic Medicines


एक महिला उम्र ४० वर्ष , जिसको Poly-artheritis की तकलीफ हो गयी थी और एलोपैथिक चिकित्सा करा रही थी / इसने वह सभी रक्त के परीक्षण और अन्य स्कैन करा लिये थे, जो उसके एलोपैथी के चिकित्सक ने उसको बताये थे / महिला एलोपैथी की दवा का सेवन कर रही थी, लेकिन उसको कोई आराम नहीं मिल रही थी / उसके शरीर के सभी छोटे और बड़े जोड़ों में बहुत जोरों का दर्द होता था, पेन किलर्स और दूसरी दर्द निवारक दवायें एक दो घन्टे तक दर्द दूर करती थीं लेकिन दर्द और बुखार की स्तिथि पिछले दर्द से अधिक हो जाती थी और उसे फिर बार बार दर्द कम करने के लिये पैन किलर्स खाने पड़्ते थे / उसे धीरे धीरे बुखार आने लगा / इस बुखार को कम करने के लिये , उसे एन्टीबायोटिक दवा खानी पड़ रही थी / कई महीने इलाज कराने के बाद जब स्वास्थ्य की हालत बद से बदतर होने लगी और जान पर आ बनी जैसे हालात पैदा हुये , तब किसी एलोपैथी के चिकित्सक ने मेरे बारे मे बताया और इलाज के लिये रिफर किया /

महिला को उसके तीन परिजन लेकर आये / उसकी हालत यह थी कि वह चल नहीं पा रही थी, शरीर मोड़ नही पा रही थी, ठीक से बैठ नही पा रही थी / परिजनों नें उसके सारे चिकित्सा सम्बन्धी पर्चे, रिपोर्ट , फाइल दिखाई / कौन सी दवायें सेवन कर रही थी, यह सब बताया /





मैने समझ लिया कि यह सब mal-treated case   है / कई चिकित्सकों ने उसका इलाज किया था / मैने महिला से कहा कि वह पहले पन्द्रह दिन तक कोई भी दवा ना खाये और उसके बाद एक E.T.G. AyurvedaScan  परीक्षण कराये तभी पता चलेगा कि उसके क्या और किस तरह की तकलीफ है?

 15  दिन बाद मरीज का ETG AyurvedaScan  का परीक्षण किया गया/ जिसमें निम्न बातों का निदान हुआ /

             

           

                   

                

                    

                   

                   

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की रिपोर्ट देखने के बाद निष्कर्ष स्वरूप निम्न बातें सन्ग्यान में ली गयी / इससे रोगी के रोग के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुयी /

 १- रोगिणी को Anxiety Neurosis यानी अति चिन्ता और अधिक फिक्र करने की Psychopathophysiology पायी गयी /

२- रोगिणी की बड़ी आन्तों में सूजन और inflammatory condition  की उपस्तिथि है /

३- रोगिणी का Uterus Bulky निकला है /

४- Epigastrium  में inflammation, swelling उपस्तिथि है /

५- ईसे Hormonal imbalance मौजूद है /

६- रोगिणी को सारे शरीर  में सूजन पायी गयी /

७- Musculo-ligamento-skeletal anomalies उपस्तिथि है /

८- ‘ i ‘  Trace Record  के negative deflection से पता चला कि इस मरीज का gall-bladder का operation हो चुका है /

उपरोक्त व्याधियों का निदान मरीज के रिकार्ड किये गये ट्रेसेस से प्राप्त हुये/

 Computer software की मदद से प्राप्त डाटा से मरीज की Inflammatory condition के साथ dull pathophysiology वाले शरीर के हिस्सो के बारे में भी पता चल गया / हीमोग्लोबिन सामान्य से कम मिला और कैल्सियम लेवल सामान्य से अधिक प्राप्त हुआ /

 रोग के निदान के लिये यह अति आवश्यक है कि आयुर्वेदिक चिकित्सा शुरू करने से पहले यह निष्कर्ष निकालना बहुत आवश्यक है कि रोगी को “शमन” और “ब्रन्घन” चिकित्सा की कहां कहां  और क्यों जरूरत है ?

Overall Ayurvedic medicines selected on the background of the findings of ETG AyurvedaScan report, supports her very quickly and after three days she was able to work without any persons help. She cooked food after three days and her swelling was reduced to over 60 percent. She visited clinic without any persons help. Her temperature and other complaints was under controle.

She was given again seven days medications with the instructions, what she have to do and not to do icluding restriction of diet.

CONCLUSION ;

We have observed that ETG AyurvedaScan based treatment are always result oriented. This type of INCURABLE DISEASE CONDITION , when treated on the basis of the findings of ETG AyurvedaScan, we becomes confident about the implimentation of the findings into the translation of the selection of the correct  & effective and  quick responsive medications.

However we experinece much confident and accurate in the practice of AYURVEDA, while we are using the newly invented technology in the field of the practice of classical AYURVEDA.

UPDATED ON 18/12/2011;

Patient is cured from her all phyisical complaints and is living normally, doing her all domestic and field work as ususal since last three weeks. I have advised her to take regular classical Ayurvedic treatment for few weeks.

Dhanavantari Divas Presentation



Speakers expressing their views [1] Vaidya Shri Shiv Prasad Singh Sengar , Birahana Road, Kanpur [2] Dr. D.B.Bajpai. Bhusatoli Road, Kanpur [3] Naturopath & Yoga Practitioner Dr. Om Prakash Anand , Gita Nagar, Kanpur.
Shri Shahid Sultan, a freelance journalist, covered the entire statements and views of the speaker.
धनवन्तरि जयन्ती के दिन फ्रीलान्स पत्रकार श्री शाहिद सुल्तान द्वारा आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान के विभिन्न आयामों को लेकर एक प्रस्तुति की गयी /
इस प्रस्तुति के लिये कानपुर शहर के वैद्यों और चिकित्सकों से बहुत से सवाल किये गये / इस वार्ता में [१] वैद्य श्री शिव प्रसाद सिन्ह सेन्गर, बिरहाना रोड, कानपुर [२] डा० डी०बी० बाजपेयी, भूसाटोली रोड, कान्पुर और [३] प्राकृतिक अवम योग चिकित्सक श्री ओम प्रकाश आनन्द, गीता नगर, कानपुर , ने हिस्सा लिया और अपने अपने विचार प्रस्तुत किये /

Dhanavantari Divas Presentation


Speakers expressing their views [1] Vaidya Shri Shiv Prasad Singh Sengar , Birahana Road, Kanpur [2] Dr. D.B.Bajpai. Bhusatoli Road, Kanpur [3] Naturopath & Yoga Practitioner Dr. Om Prakash Anand , Gita Nagar, Kanpur.
Shri Shahid Sultan, a freelance journalist, covered the entire statements and views of the speak.

http://www.youtube.com/watch?v=E37Vz4UTW_c

धनवन्तरि जयन्ती के दिन फ्रीलान्स पत्रकार श्री शाहिद सुल्तान द्वारा आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान के विभिन्न आयामों को लेकर एक प्रस्तुति की गयी /

इस प्रस्तुति के लिये कानपुर शहर के वैद्यों और चिकित्सकों से बहुत से सवाल किये गये / इस वार्ता में [१]  वैद्य श्री शिव प्रसाद सिन्ह सेन्गर, बिरहाना रोड, कानपुर [२] डा० डी०बी० बाजपेयी, भूसाटोली रोड, कान्पुर और [३] प्राकृतिक अवम योग चिकित्सक श्री ओम प्रकाश आनन्द, गीता नगर, कानपुर , ने हिस्सा लिया और अपने अपने विचार प्रस्तुत किये /

दीपावली मनाइये…… लेकिन…..सावधानी के साथ….!!!!!


दीपावली त्योहार का भारतीय लोगों मे बहुत उत्साह के साथ मनाए जाने का सदियों पुराना रिवाज है और परम्परा है / त्योहार को प्रसन्न्ता तथा राजी खुशी और सुरक्षा के साथ मनाये जाने के लिये सतत प्रयत्न शील होना चाहिये / एक थोड़ी सी लापरवाही त्योहार की खुशियों का मजा बेकार कर सकती है /

कुछ सावधानियां जो इस त्योहार को सुरषा की दृष्टि से जरूरी हैं, अमल में लाना चाहिये, जिनका जिक्र नीचे किया जा रहा है /

१- जिन्हे उच्च रक्त चाप हो, जिन्हे हृदय रोग हो, जिन्हें मस्तिष्क सम्बन्धी बीमारियां हों, वे शोर शराबे , तेज आवाज वाले पटाखों और अधिक ध्वनि पैदा करने वाले अतिश्बाजी के आइटमों को देखने और सुनने से बचना चाहिये / आवाज और धमाका आपको नुकसान पहुन्चा सकता है /

२- Pregnents , गर्भवती महिलाओं को भी शोर शराबे और तेज आवाज से अपने आप को दूर रखना चाहिये / तेज आवाज के धमाकों से गर्भ पात जैसी स्तिथि आ सकती है /

३- मिर्गी के दौरे, दिमागी दौरे, कमजोर मन मष्तिष्क और कमजोर दिल वाले लोगों को पटाखे और अधिक उत्तेजना पैदा करने वाले आइटमों से अपने आप को दूर रखना चाहिये /

४- छॊटे बच्चों को पटाखों की आवाज से दूर रखना चाहिये / तेज आवाज से बच्चे अधिक प्रभावित होते है /

५- जिन बच्चों को अस्थमा या ब्रान्काइटिस जैसी शिकायते हों, उनको पटाखे या अतिश्बाजी से दूर रखना चाहिये / ऐसे बच्चों को दमा या खान्सी का दौरा पड़ सकता है /

६- आतिशबाजी में अशुध्ध गन्धक, कलमी शोरा, कोयला के अलावा अल्यूमूनियम, पॊटाश तथा अन्य धातुयें और केमिकल का उप्योग रन्ग को पैदा करने, चमक को पैदा करने, तेज रोशनी पैदा करने आदि के लिये उपयोग करते हैं / ये केमिकल तथा धातुयें वायु मन्डल को दूषित करती है तथा स्वास्थय के ड्रूष्टिकोण से भी खतरनाक हैं / इसलिये आतिश्बाजी के उपयोग से हमेशा दूर रहें, विशेष कर उनको, जिनको Respiratory system से सम्बन्धित बीमारियां हों /

७- आतिश्बाजी आग का खेल है / जाहिर है , जरा सी चूक किसी बड़ी घटना को जन्म दे सकती है / इसलिये SAFTY FIRST and RISK SECONDERY का फार्मूला अपनाइये /

सावधानी बरतिये और त्योहार खुशी खुशी मनाइये /

सबको दीपावली शुभ और मन्गल मय हो /

“आयुर्वेद दिवस” के रूप में भगवान धन्वन्तरि देव का जन्म दिन ‘धन-तेरस’ सम्पूर्ण विश्व मे मनाया जाना चाहिये ” ; डा० डी०बी० बाजपेयी ने नेक्स्ट टी०वी० चैनल के टेलीकास्ट मे सुझाव दिया


दिनान्क २४ अक्टूबर २०११ को नेक्स्ट टी०वी० चैनल ने सुबह ०७:३० बजे भगवान धनवतरि देव के जन्म दिन धन तेरस को एक टेलीकास्ट किया है जिसमे डा०डी०बी० बाजपेयी से एन्कर श्री शाहिद सिद्दिकी ने आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान से सम्बन्धित बहुत से प्रश्न किये थे /

प्रश्न बहुआयामी पूछे गये थे जिनमें धनवन्तरि देव का धरती पर आगमन, आयुर्वेदिक औषधियों के मूल्य, ऐड्स जैसी लाइलाज बीमरियों, आयुर्वेद को केवल मात्र सेक्स के रोगों के इलाज तक के लिये सीमित समझने, अति आधुनिक मौलिक सिध्धान्त और रोग निदान की आयुर्वेद तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के बारे में आम लोगों को न पता होने इत्यादि के बारे मे सवाल पूछे गये थे /

इसी साक्षात्कार में डा० डी०बी० बाजपेयी ने नेक्स्ट टी०वी० चैनल के माध्यम से सम्पूर्ण वैद्य समाज को सन्देश और सुझाव देने का प्रयास किया कि भगवान धनवन्तरि देव का जन्म दिन सम्पूर्ण विश्व में “आयुर्वेद दिवस” या AYURVEDA DAY के स्वरूप में मनाया जाना चाहिये /

NEXT TV Channel Telecasted Dr. D.B.Bajpai interview on the occasion of Lord Dhanavantry Birth Day DHAN TERAS on 24th October, 2011 at 07:30 AM. Dr. D.B. Bajpai suggested Dhan teras should be celebrated as AYURVEDA DIVAS or AYURVEDA DAY in the interview.


Today on 24th October 2011, NEXT TV Channel telecasted Dr. D.B.Bajpai interview on the occassion of Dhanavantary birth day , morning at 07:30.


Several questions asked by the anchor Shri Shahid Sultan on the recording, viewing many aspects of Ayurveda, Dr. Bajpai replied and suggested that Dhanavantary birth day should be celebrated as AYURVEDA DIVAS or AYURVEDA DAY all over the world.

Readers can tune on NEXT TV Channel to listen the telecast.

तिल सप्तक चूर्ण ; एक बहु-उपयोगी आयुर्वेदिक सरल और सफ़ल औषधि ; Til Sapatak Churna ; a multi-usable Ayurvedic Remedy


जैसा कि मै हमेशा कहता हूं कि आयुर्वेद एक पूर्ण चिकित्सा विग्यान है, यह कहना गलत नहीं होगा कि आयुर्वेद का एक योग अनुपान भेद या औषधियों में मिलाये जाने वाले द्रव्यों के कारण अनेक रोगॊं की स्तिथि में उपयोग किये जाते है /

ऐसा ही एक योग है ; तिल सप्तक चूर्ण Til Saptak churn

इस चूर्ण को बनाना बहुत आसान है / इसको बनाने के लिये निम्न द्रव्यों की आवश्यकता होती है /

१- तिल
२- चीता यानी चित्रक
३- सोन्ठ
४- मिर्च काली
५- पीपल छोटी
६- वाय विडन्ग
७- बडी हरड़

इन सभी द्रव्यों का चूर्ण बना लें / चूर्ण बनाने के लिये पहले सभी द्रव्यों के छोटे छोटे टुकडे कर लें फिर मिक्सी अथवा इमाम दस्ते या खरल में डालकर महीन चूर्ण बना लें /

ईस प्रकार से महीन चूर्ण किया गया पदार्थ औषधि के उपयोग के लिये तैयार है /

“तिल सप्तक चूर्ण” को निम्न रोगों में उपयोग करते है /

[अ] बवासीर नाशक यानी Piles / Hemorrhoids / Varicosis of all nature
[ब] पान्डु नाशक यानी Aneamia / Jaundice and like syndromes
[स] कृमि नाशक यानी De-wormicular/ Vermifugal / Anti-helmenthesis
[द] कास नाशक / खान्सी नाशक यानी Anti-tussive
[च] अग्निमान्द्य / मन्दाग्नि / भूख का खुलकर न लगना यानी Loss of Appetite / weak appetite
[छ] ज्वर / साधारण बुखार यानी Fever, Pyrexia
[ज] गुल्म रोग

चिकित्सा के उपयोग के लिये इस चूर्ण को ३ ग्राम से लेकर ६ ग्राम की मात्रा मे बराबर गुड़ मिलाकर सुबह और शाम सेवन करना चाहिये / आयु के हिसाब से मात्रा घटाई जा सकती है /

यह बहु-उपयोगी चूर्ण ४० से साठ दिन तक सेवन करना चाहिये / उपयुक्त पथ्य और परहेज करने से बतायी गयी सभी रोग अवस्थाओं में फायदा मिलता है /

आयुर्वेद के औषधि योग बहु-आयामी और बहु-रोग नाशक होते हैं / सम्पूर्ण शरीर के आरोग्य के लिये ऐसे योगों का निर्माण करके आयुर्वेद के महर्षियों नें यह बताने का प्रयास किया है कि सारा शरीर एक ईकाई है और जब शरीर बीमार हो जाय तो उसका इलाज एक ईकाई समझ कर किया जाना चाहिये, यही आयुर्वेद चिकित्सा का उद्देश्य भी है /