दिन: अक्टूबर 9, 2011

पेट की तकलीफों से पीड़ित रोगियों के लिये एक लाभकारी आयुर्वेदिक योग


आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान में ऐसे बहुत से सरल और सफ़ल योग रोगों को दूर करने के लिये बताये गये है, जिन्हे देखने और पढने पर बहुत साधारण लगते हैं , लेकिन ऐसा है नहीं / इस योगॊं को जब प्रयोग किया जाता है तो बहुत आश्चर्य जनक परिणाम मिलते है /

नीचे एक योग दिया जा रहा है , जिसके उपयोग से पेट से सम्बन्धित रोगों और तकलीफों मे बहुत फायदा होता है /

योग बनाने की सामग्री ;
जम्बीरी नींबू या कागजी नीबू या नीबू का रस १०० मिलीलीटर, घीकुवार का गूदा १०० मिलीलीटर, मूली का रस १०० मिलीलीटर, अदरख का रस १०० मिलीलीटर, प्याज का रस १०० मिली ळीटर, काला नमक २५ ग्राम, अजवायन का चूर्ण २५ ग्राम, नवसादर १० ग्राम और हीन्ग भूनी हुयी २ ग्राम लेकर एक चीनी मिट्टी या कान्च या प्लास्टिक के पात्र मे भरकर कमरे के सामन्य टेम्परेचर पर रखे और सात दिन तक दिन में धूप के एक्स्पोजर से गर्म करने के लिये दोपहर मे कुछ घन्टे के लिये रख दें /

यह एक हफ्ते में उपयोग के लिये तैयार हो जाता है /

इसकी सेवन करने की मात्रा पूर्ण वयस्क के लिये ५ से १० मिलीलीटर तक है / इसे थोड़े पानी के साथ मिलाकर भोजन के बाद लेना चाहिये /

इसे निम्न तकलीफों में या रोगों की दशा में उपयोग कर सकते है /

१- इसके सेवन से भोजन जल्दी हजम हो जाता है / जिन्हे कमजोर हाजमा हो और भोजन देर से पचने की तकलीफ हो /
२- इसके सेवन से पेट में गैस नही बनती है /
३- इसके सेवन से भूख खुल जाती है और अधिक भूख लगती है
४- पित्त का श्राव अधिक होता है
५- आन्तों की क्रियाशील्ता बढती है जिससे कब्ज जैसी तकलीफे ठीक होती है /
६- पेट का दर्द, शूल जैसी बीमारियां दूर हो जाती है /
७- खट्टी डकारें आना अथवा अम्ल पित्त जैसी बीमारियां दूर हो जाती है /
८- ्बदहजनी दूर होती है /
९- गैस के कारण पेट फूलता हो तो इसके सेवन से दूर हो जाता है /
१०- डकारें आना रुक जाता है /

इसे पानी मिलाकर लेना चाहिये / भोजन के बाद लेने से यह भोजन का शीघ्र पाचन कर देता है / इसे जब जरूरत हो तब ले सकते है, लेकिन पानी जरूर मिला लें / यह पानक बहुत रुचिकर और स्वाद वाला है /