दिन: अक्टूबर 25, 2011

दीपावली मनाइये…… लेकिन…..सावधानी के साथ….!!!!!


दीपावली त्योहार का भारतीय लोगों मे बहुत उत्साह के साथ मनाए जाने का सदियों पुराना रिवाज है और परम्परा है / त्योहार को प्रसन्न्ता तथा राजी खुशी और सुरक्षा के साथ मनाये जाने के लिये सतत प्रयत्न शील होना चाहिये / एक थोड़ी सी लापरवाही त्योहार की खुशियों का मजा बेकार कर सकती है /

कुछ सावधानियां जो इस त्योहार को सुरषा की दृष्टि से जरूरी हैं, अमल में लाना चाहिये, जिनका जिक्र नीचे किया जा रहा है /

१- जिन्हे उच्च रक्त चाप हो, जिन्हे हृदय रोग हो, जिन्हें मस्तिष्क सम्बन्धी बीमारियां हों, वे शोर शराबे , तेज आवाज वाले पटाखों और अधिक ध्वनि पैदा करने वाले अतिश्बाजी के आइटमों को देखने और सुनने से बचना चाहिये / आवाज और धमाका आपको नुकसान पहुन्चा सकता है /

२- Pregnents , गर्भवती महिलाओं को भी शोर शराबे और तेज आवाज से अपने आप को दूर रखना चाहिये / तेज आवाज के धमाकों से गर्भ पात जैसी स्तिथि आ सकती है /

३- मिर्गी के दौरे, दिमागी दौरे, कमजोर मन मष्तिष्क और कमजोर दिल वाले लोगों को पटाखे और अधिक उत्तेजना पैदा करने वाले आइटमों से अपने आप को दूर रखना चाहिये /

४- छॊटे बच्चों को पटाखों की आवाज से दूर रखना चाहिये / तेज आवाज से बच्चे अधिक प्रभावित होते है /

५- जिन बच्चों को अस्थमा या ब्रान्काइटिस जैसी शिकायते हों, उनको पटाखे या अतिश्बाजी से दूर रखना चाहिये / ऐसे बच्चों को दमा या खान्सी का दौरा पड़ सकता है /

६- आतिशबाजी में अशुध्ध गन्धक, कलमी शोरा, कोयला के अलावा अल्यूमूनियम, पॊटाश तथा अन्य धातुयें और केमिकल का उप्योग रन्ग को पैदा करने, चमक को पैदा करने, तेज रोशनी पैदा करने आदि के लिये उपयोग करते हैं / ये केमिकल तथा धातुयें वायु मन्डल को दूषित करती है तथा स्वास्थय के ड्रूष्टिकोण से भी खतरनाक हैं / इसलिये आतिश्बाजी के उपयोग से हमेशा दूर रहें, विशेष कर उनको, जिनको Respiratory system से सम्बन्धित बीमारियां हों /

७- आतिश्बाजी आग का खेल है / जाहिर है , जरा सी चूक किसी बड़ी घटना को जन्म दे सकती है / इसलिये SAFTY FIRST and RISK SECONDERY का फार्मूला अपनाइये /

सावधानी बरतिये और त्योहार खुशी खुशी मनाइये /

सबको दीपावली शुभ और मन्गल मय हो /