सेक्स शिक्षा ग्यान माला – प्रथम विचार ; First lecture on Sex Education


बहुत से लोगों को कहते हुये सुना कि आजकल के नौजवानों को SEX के ग्यान के बारे मे अधिकृत जानकारी नही है / कुछ दशक पहले प्रधान मन्त्री श्री राजीव गान्धी ने सेक्स एजूकेशन के लिये अपने विचार प्रकट किये थे कि इसे स्कूलों में पढाया जाना चहिये / लेकिन इसका क्या स्वरूप हो यह तय न होने के कारण इसे लागू नही किया जा सका /

मै इस ब्लाग के माधयम से अपनी भरसक कोशिश करून्गा कि नवयुवकों और नवयुवतियों दोनों को सेक्स की शिक्षा के बारे मे कई स्तर का ग्यान इस तरह से देना चाहिये जिससे उनके मन के अन्दर सेक्स के प्रति व्याप्त धरणायें सही सही स्थान ले सकें / ऐसा मै अपनी नैतिक और चिकित्सकीय जिम्मेदारी समझते हुये समाज के भले के लिये कर रहा हूं / मुझे उम्मीद है कि इस लेखमाला के माध्यम से सेक्स के प्रति सभी को सही मार्ग दर्शन मिलेगा /

Sex को कैसे समझा जाना चाहिये ?

इस धरती पर यदि गहनता पूर्वक observe करें तो इस धरती पर पाये जाने वाले हर कण में , हर वस्तु में , धरती पर पाई जानेवाली हर चीज पर , एक तरह का आकर्षण मौजूद है / यह आकर्षण कुछ भी हो सकता है / चुम्बकीय आकर्षण अथवा विद्युतीय शक्तियां या सागर की लहरों का चन्द्रमा की बदलती कलाओं के साथ उछाल मार कर मौसम की अठखेलियां करना भी तो आकर्षण ही तो है , इसे और क्या कहेन्गे ?

पेड़ पौधे, पशु पक्षी, बड़े या छोटे जानवर, मनुष्य जाति के लिये सेक्स की भावना या सेक्स करना या नर और मादा का मिलना यही बताता है कि सभी के लिये सेक्स एक आवश्यकता है /

यह सेक्स की भावना की आवश्यकता का उद्देश्य इस धरती पर किस लिये है ? इसका एक मात्र उद्देश्य इस धरती को वीरान होने से बचाना है ? कैसे ? सेक्स नर और मादा के बीच होने वाला वह कार्य कलाप है जिससे आगे की generation बढे और उसके ही जैसा नया जीव या नई वनस्पति या नया पौधा या नया फूल जन्म ले / इस धरती की हर वस्तु का एक समय निर्धारित है , एक अवधि निर्धारित है, उतने समय तक वह जिन्दा रह सकता है, इसके बाद वह मृत हो जाता है / कल्पना करें कि कोई ऐसी खतरनाक बीमारी इस पृथ्वी पर फैल जाय जो केवल महिलाओं को ही हो या मादाओं को ही हो जिससे वे पूर्ण वयस्क होने से पहले ही इस दुनियां से विदा हो जायें, तो क्या होगा ? इस्का उत्तर यही है कि यह धरती १०० साल के अन्दर वीरान हो जायेगी / मनुष्य जाति के अलावा बहुत से पशु पक्षियों का नामो निशान मिट जायेगा / इससे क्या निष्कर्ष निकाला जाता है, यही न कि सेक्स की प्रथम जरूरत मानव या अन्य उन सभी चीजों का reproduction यानी बार बार और लगातार उत्पादन करना ताकि इस धरती के सारे कार्य कलाप जिन्दा रहे और बराबर सुचारु रूप से चलते रहे /

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