दिन: नवम्बर 20, 2011

सेक्स शिक्षा व्याख्यान माला – दूसरा ; आयुर्वेद का “बाजॊकरण” अन्ग Lectures on Sex Education – part Second ; Astang of Ayurveda “BAJIKARAN”


मुझे कुछ बातों का पता चला कि आज कल के नौजवानों या नवयुवतियों को सही सही सेक्स या सेक्स से सम्बन्धित विषयों के बारे में जानकारी नही है / वे समझते हैं कि सम्भोग करना ही सेक्स है और इसके अलावा कुछ भी नहीं / वास्तविकता यह है कि इस विषय को समझाने की कोशिश भी नहीं कि गयी, जिसके कारण तरह तरह की भान्तियां मन के अन्दर बनती चली गयी / खुलकर भारतीय समाज में सेक्स की बाते करना सिवाय मित्र मन्डली या आपस के दोस्तों तक ही सीमित है / इसकी वजह यह है कि भारतीय समाज एक रूढिवादी समाज है, जहां इस अतरह की बातें करना वर्जित है /

हलांकि आयुर्वेद कहता है कि सेक्स के विषय और सेक्स की कलाओं का ग्यान प्रत्येक बयक्ति को होना चाहिये और इसी भावना के तहत आयुर्वेद के आठ अन्गों में एक अन्ग “बाजीकरण” को जोड़ा गया है जिसका मकसद सेक्स के कार्य कलापों से जुडा है / आयुर्वेद में “बाजीकरण” अध्याय जोड़ने के पीछे आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्त का चिन्तन जुड़े हुये है , आयुर्वेद के दर्शन शास्त्र को समझने के लिये “बाजीकरण” को समझना भी जरूरी है / इसके बारे में किसी अन्य पोस्ट में विस्तार से क्रम् वार चर्चा करने का प्रयास करून्गा /

खेद की बात है कि आयुर्वेद के इस पवित्र विषय को बहुत से लोगों ने व्यावसायिक सवरूप देकर आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान को यह बताने का प्रयास किया है कि आयुर्वेद सेक्स का विग्यान है और जहां सेक्स के इलाज के अलाव दूसरा कुछ भी नहीं है / अफसोस और दु:ख और झोभ तब अधिक बढ जाता है जब यह बात समझदार लोग कहते है / मेरे कई आधुनिक चिकित्सा विग्यान के डाक्टर मित्रों ने जब यह बात कहीं तो मुझे बहुत खेद के साथ उनको बताना पड़ा कि ऐसा समझना बहुत बड़ी भूल है और उनको इस भूल का सुधार करना चाहिये /

वास्तविकता और जमीनी हकीकत यह है कि आयुर्वेद एक पूर्ण चिकित्सा विग्यान है / कमियां हर चिकित्सा विग्यान में हैं . चाहे वह जो भी हो / मैने जब चिकित्सा प्रक्टिस सन १९६८ में शुरू की थी उस समय मै “एलोपैथिक” की दवाओं का टोटल उप्योग करता था / यह सिलसिला कई साल चला / बाद में मै सन १९७३ में पश्चिम जरमनी के म्य़ूनिख शहर चला गया जहां मैने होम्योपैथी की शिक्षा पोस्ट ग्रेजुयट लेवेल की ग्रहण की / भारत लौटने के बाद मैने एलोपैथी की दवाओं के प्रयोग को त्याग दिया और होम्योपैथी की प्रक्टिस शुरू कर थी /

कई साल तक होम्योपैथी की प्रक्टिस करने के बाद जब मुझे पता चला कि आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तों का आन्कलन evidence based presentation द्वारा किया जा सकता है तब मैने एलोपैथी और होम्योपैथी की दवाओं के साथ साथ आयुर्वेद की दवायें भी शामिल करके मरीजों के उपयोग के लिये व्यवहार करना शुरू कर दिया / फिर भी मुझे यह लगा कि चिकित्सा विग्यान में अभी भी बहुत सी कमियां हैं जिन्हे दूर करने के लिये मैने drugless therapies का उपयोग करना शुरू किया /बाद में ETG AyurvedaScan Technology द्वारा आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान में तरह तरह के प्रयोग करने से मुझे ्विश्वास हो गया कि ऎट्घ तकनीक का सहारा लेकर यदि किसी भी रोग का इलाज करते है तो उसमें सफलता अवश्य मिलती है / ई०टी०जी० तकनीक का सहारा लेकर आयुर्वेद के आठ अन्गों का प्रारम्भिक आन्कलन करने से पता चला कि आयुर्वेद के सभी सिध्धन्तों के पीछे एक बहुत बड़ी लाजिक है जिसे समझना धीरे धीरे ही सम्भव है /

आज का आधुनिक सेक्स विग्यान और आयुर्वेद के बाजीकरंण अन्ग और आयुर्वेद के मूल सिध्धन्तों के बीच में बहुत सी समानतायें हैं , जिन्हे सेक्स के सम्बन्ध में जानना और समझना हर उस वयक्ति के लिये जरूरी है , जिन्हे सेक्स विग्यान को जान लेने की आकान्छा है /

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