दिन: नवम्बर 23, 2011

खान्सी और गले की खरास तथा श्वास नली की साधारण तकलीफें ; Mild problems of Internal Throat, Cough and Respiratory Tract


जाड़े के दिनों मे जब ठन्डक बढती है या घटती है तब सबसे पहले शुरुआत में गले की खरास, खान्सी और श्वास नली की दिक्कते पैदा हो जाती है / ऐसा इसलिये होता है क्योन्कि घर के अन्दर रहने में और घर के बाहर निकल कर आने में मौसम की हवा का प्रभाव शरीर के श्वसन सन्सथान को सबसे पहले प्रभावित करता है / कारण वही है , हवा के अन्दर समाहित ठन्डक का स्तर और शरीर की गर्मी से उसका ताल्मेल ठीक से न बैठ पाना / यह सीधे सीधे cold exposure की स्तिथि होती है / जैसे ही शरीर की conditioning होने का procedure शुरू होता है, वैसे ही दबी हुयी inflamatory condition precipitate होकर अपना inherent effects सतह पर ला देती है और इस स्तिथि में तकलीफ के लक्षण प्रकट हो जाते है / जिन्हे खान्सी, गले की खरास और श्वास नली से सम्बन्धित विकार समझा जाता है /

बेहतर यही है कि सभी लोग उस कहावत को हमेशा ध्यान मे रखे और वह है “Prevention is better than Cure” / थोडी सी सावधानी से सभी लोग बड़ी तकळीफें होने से बच सकते हैं /
इसलिये जब भी घर से बाहर निकलें शरीर को गर्म बनाये रखने वाले कपड़े चाक चौबन्द होना चाहिये / बहुत ठन्दी हवा में ज्यादा देर बाहर न रहें / मैने observe किया है कि जिनको Cervical spondylitis या रीढ की कोई तकलीफ होती है , उनको ठन्डक बहुत महसूस होती है और इसी कारण से उनका शरीर बहुत अकड़ता है और मान्शपेशियों मे तकलीफ पैदा हो जाती है / ऐसे लोगों को Cold air exposure बहुत जल्दी होता है /

जिन्हे खान्सी हो जाय वे आयुर्वेदिक औषधिया या घरेलू उपचार ले / खान्सी के लिये एक चम्मच अदरख का रस लेकर एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर दिन में कई बार सेवन करना चाहिये / इसमे यदि आधा चम्मच हल्दी का चूर्ण मिला लें तो अधिक प्रभावकारी औषधि हो जाती है / गले की खरास और शवसन सन्सथान की तकलीपॊं में भी यही फार्मूला कामयाब है / लेकिन इसकी मात्रा अधिक कर लेनी चाहिये /

खान्पान मे परहेज करने और आयुर्वेदिक दवा खाने से ऊपर बतायी गयी तकलीफें एक ही दिन में
ही ठीक हो जाती हैं और आराम मिल जाती है / लेकिन यदि Cold exposure की intensity अधिक होगी तो ठीक होने में की दिन लग जाते है /

आयुर्वेदिक दवाये, जिन्हे खान्सी आदि तकलीफों में उपयोग कर सकते हैं /
१- त्रिभुवन कीर्ति रस
२- गोदन्ती रस
३- आनद भैरव रस
४- तालीशादि चूर्ण
५- सीतोपलादि चूर्ण
६- चित्रक हरीतकी
७- वासावलेह

आयुर्वेद में हजारों की सन्ख्या में खान्सी जैसी तकलीफों के लिये फार्मूले दिये गये है / उक्त दवाये किसी वैध या आयुर्वेद डाक्टर से जानकारी प्राप्त करके प्रयोग करे तो सबसे अच्छा होगा /