ठन्डक के दिनों में रात को सोते समय सावधानी बरतें


जाड़े के दिनों में रातें बहुत लम्बी होती है / दिन छोटे होते है और सुबह तथा शाम को ठन्ड होने लगना एक कुदरती स्तिथि है / मनव शरीर का बाहरी तापमान ९६.५ से लेकर ९८.५ तक होता है / मानव के अन्दर मरकज का तापमान १०२ डिग्री के आसपास होता है / यह शारीरिक गर्मी शरीर के अन्दर होने वाली मेटाबालिक गतिविधियों के कारण से होती है /

लगातार सर्दी लगते रहने से अन्दर का केन्द्रीय तापमान कम होने लगता है / शरीर के अन्दर के घटते ताप्मान के कारण शरीर का ताप्मान जब घटना शुरू होता है , तब हाइपोथरमिया की स्तिथि बनती है / हाइपोथर्मिया यानी सरीर का तापमान का घटना और घटते जाना होता है / शरीर के अन्दर और बाहर बहुत अधिक ठन्ड का अहसास होना , ऐसा लगना कि शरीर बर्फ जैसा ठन्डा हो रहा है, ऐसा महसूस होना जैसे बहुत ठन्डे पानी से स्नान कर रहे हों / हाथ पैरों के साथ साथ धड़ का बर्फ जैसा ठन्डा हो जाना आदि बातें सामने आती है /

इस तरह की स्तिथि में शरीर का Basic Metabolic Rate बिगड़ता है /

यह स्तिथि तब पैदा होती है, जब ऐसे वाहन से सफ़र कर रहे हों, जिनमें हवा बहुत तेज लग रही हो और शरीर को गर्म रखने के साधन न हों / ऐसी परिस्तिथि हो, जहां शरीर को गर्म रखने के कोई उपाय न हों और ठन्डक में कई घन्टॊं तक बैठना पडे या रात में सोना पडे़ / रात में सोते समय शरीर को गर्म रखने के लिये रजाई जैसे साधन न हों और रात भर ठिठुरना पडे़ /

ऐसे महौल में शरीर को सर्दी expose कर जाती है और हाइपोथरमिया की स्तिथि पैदा हो जाती है /

जिन लोगों को हृदय में रक्त का थक्का बनने की शिकायत हो अथवा Brain Stroke के मरीज हों , जिनको रक्त में थक्का बनने की शिकायत हो , ऐसे रोगी बहुत सावधान रहें / ठन्डक के exposure से उनकी तकलीफें बढ सकती है /

क्या करें ?

१- जहा सोने का स्थान हो , वह वायु के झोन्को से निर्वात हो /
२- सोते समय शरीर को गर्म रखने के लिये उपयुक्त रजाई, कम्बल, ऊनी वस्त्र आदि का इन्तजाम कर ले
३- शरीर को ठन्डक से बचाने के लिये शरीर को गर्म रखने वाले वस्त्रों का उपयोग करे /
४- ठन्डे पानी का उपयोग मत करें / पीने के लिये पानी में थोड़ा सा गर्म पानी मिला ले और तब पानी पियें /
५- अधिक ठन्डा पानी पीने से पेट का सामान्य तापमान कम होता है, जिससे अधिक ठन्डक का अनुभव होता है /
६- कमरे को गर्म बनाये रखने के लिये हीटर आदि का उपयोग करें /
७- ठन्डक लग जाने की स्तिथि में अपने दोनों पैर गरम और गुन्गुने पानी में १० मिनट तक रखे / यह काम बन्द कमरे में जहां हवा का झोन्का न आ रहा हो वहां करें, जिस समय पैर को गरम पानी में सेन्क के लिये रखें, उस समय शरीर को ऊनी शाल से ढक लें /
८- Cold Exposure की स्तिथि में अपने पारिवारिक चिकित्सक से सलाह लें और उचित उपचार लें /

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