महीना: जनवरी 2012

अन्ना हजारे का पुणे मे डा० सन्चेती द्वारा इलाज किये जाने को लेकर बाबा राम देव…………………??


अन्ना हजारे का पुणे मे डा० सन्चेती द्वारा इलाज किये जाने को लेकर बाबा राम देव तथा अन्न्ना टीम के उनके सहयोगी लोगों द्वारा डा० सन्चेती के ऊपर गलत इलाज को लेकर की गयी टिप्पणियों से मै कतई सहमत नही हूं / मुझे इस तरह का शक करने वालों पर कतई सहानुभूति नही है / यह केवक बकवास है और इसके अलावा और कुछ भी नही है /

मै चिकित्सकों की मानसिकता को बहुत अच्छी तरह से समझता हूं / इस दुनिया का कोई भी चिकित्सक यह कभी नही चाहेगा कि उसके पास दवा और इलाज कराने के लिये आने वाले किसी भी रोगी का वह अहित सोचे / हर चिकित्सक चाहता है कि उसका रोगी जल्दी ठीक हो , जल्दी स्वस्थ्य हो / ऐसा वह अपनी कार्य निपुणता और कार्य दक्षता को परकहने के लिये भी करता है / एक मात्र उद्देश्य यह नही होता कि मरीज की जेब साफ कर दी जाय / कुछ व्यावसायिक उशूल भी होते है , जिन्हें मै समझता हूं यह सभी चिकित्सक पालन करते है / आने वाला हर रोगी उसे व्यावसायिक सफ़लता के साथ साथ उसकी रोजी रोटी के लिये परोक्ष अथवा अपरोक्ष स्वरूप में अपना योग दान करता है /

इसलिये किसी भी चिकित्सक पर ऐसा आरोप लगाना सत्य नही है /

मुझे जो सही बात का आनकलन करने का अन्दाजा है , वह कुछ इस प्रकार हो सकता है /

Respiratory Tract की बीमारियों में जब infection बढता है तो सिवाय anti-biotics , anti-allergic , anti-spasmodic दवायें देने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नही होता / मरीज की तकलीफ के management के लिये आक्सीजन देना या वेन्टीलेटर का उपयोग करना भी आवश्यक हो जाता है / कभी कभी steroid देने की जरूरत पड़ जाती है / यह सब कुछ मरीज की जान बचाने के लिये किया जाता है /

मेरा ख्याल है , डाक्टरों नें कमी बेसी यही किया होगा और जब तकलीफ कन्ट्रोल में आ गयी तो फिर कुछ दवायें कुछ हफ्ते तक लेने के लिये कहा जाता है /

यह दवाओं और मरीज की दिन चर्या और खान्पान पर निर्भर करता है कि वह अपने घर पर किस तरह का व्यवहार करता है / कभी कभी मरीज दो दफा दवा खाने के बजाय एक बार खाने लगता है , जिससे होता यह है कि मौका पाकर infection फिर जोर पकड़ लेता है / दवाओं के साइड इफेक्ट भी होते है जो बिल्कुल एलर्झि जैसे असर करते हैं / शरीर में सूजन आ जाना, सान्स लेने में तकलीफ होना, पेशाब में जलन होना, पेशाब कम होना, मल सूख्ना होना, कब्ज हो जाना, मान्स्पेशियो की कमजोर हालत आदि आदि तकलीफें होती हैं /Proper rest न करने से भी तकलीफें होती है /

मुझे लगता है कि अगर डा0 सन्चेती को “पद्म” पुरस्कार न दिया जाता , तो शायद इस तरह की बात न होती / यह सन्योग की बात है कि सब कुछ और सारा घटना क्रम इस तरह से हुआ है , जिससे किसी लिन्क को मिलाए जाने का ही शक अधिक होता है / भले ही कोई कितना भी ईमानदारी और बिना लालच के काम क्यों न कर रहा हो , लेकिन शक करने वाले तो शक के नजरिये से ही हर बात को देखेगे /

 

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ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन सिस्टम अब पुर्णतया: कम्प्य़ूटराज्ड : ETG AyurvedaScan system Now completely Computerised


विश्व की आयुर्वेद की पहली और अकेली सम्पूर्ण शरीर का परीक्षण करने की तकनीक इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ; ई० टी० जी० आयुर्वेदास्कैन सिस्टम तकनीक अब पूर्णरूपेण कम्प्य़ूटेराइज्ड हो गयी है / इसकी रिपोर्ट के द्वारा [१] आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तों का शरीर में उपस्तिथि आंकलन और [२] रोग-निदान अथवा शरीर के सभी अन्गों के समान्य अथवा असामान्य अवस्था के ग्यान और pathophysiological और pathological बीमारियों का पता चल जाता है /

कम्प्य़ुटेराइज्ड तकनीक हो जाने से अब ETG AyurvedaScan Report कुछ मिनट में बन जाती है / इसका सबसे बडा फायदा आयुर्वेद के चिकित्सकों को यह होगा कि चिकित्सक रिपोर्ट के आधार और प्राप्त डाटा फाइन्डिन्ग्स को लेकर मरीज का तुरन्त इलाज शुरू कर सकते हैं /

ETG AyurvedaScan system की रिपोर्ट में समाहित Instant selection of Ayurvedic Remedies हिस्सा, आयुर्वेदिक चिकित्सकों को मरीज की आवश्यकता और उसके symptoms और बीमारी के हिसाब से दवाओं के चुनाव की सुविधा देता है जिससे चिकित्सक आयुर्वेद की सही और कारगर औषधियों का तुरन्त चुनाव करके मरीज का इलाज शुरू कर सकते हैं /

TDR [Drug Resisted Tuberculosis] यानी “औषधि बाधित राजयक्षमा” ; आयुर्वेदिक औषधियां ऐसी रोग अवस्था में कारगर और रोग-उन्मूलक


किसी समय और अब भी वर्तमान में बचपन से सुनते चले आ रहे थे कि कानपुर शहर में दुनिया के सबसे ज्यादा टी०बी० यानी राजयक्षमा यानी Tuberculosis के मरीज पाये जाते है / जब स्ट्रेप्टोमायसिन और पेन्सिलीन जैसी दबाओं का आविष्कार तक नही हुआ था, मेरे पिता जी टी०बी० के मरीजों का इलाज आयुर्वेदिक दवाओं से किया करते थे / उस समय टी०बी० रोग से ग्रसित होने का मतलब होता था जैसे आज कैन्सर जैसी लाइलाज बीमारी से कोई ग्रसित हो जाय यानी कि मृत्यु निश्चित और जीवन की आशा का कम होना /

लेकिन आधुनिक चिकित्सा विग्यान से एक फायदा लोगों को यह अवश्य हुआ कि टी०बी० के रोगियों का जीवन काल काफी बढ गया / शुरू शुरू के एलोपैथी के इलाज वास्तव में ब्रम्हास्त्र साबित हुये, लेकिन धीरे धीरे लोग दवाओं के प्रभाव से resistent होने लगे / तभी कुछ नयी दवायें आनी शुरू हुयी और उसके बाद कई सालों से इन्ही दवाओं द्वारा इलाज किया जाता रहा है / आज भी किया जा रहा है /

ऐसा नही है कि TDR के केसेज अभी अभी सरकार के सन्ग्यान मे आये हों / GSVM Medical College and Hospital कानपुर मे डाक्टर / प्रोफेसर और private चिकित्सक समाज ने काफी पहले TDR के मरीज देखे हैं /

मुझे भी कई मरीज देखने को मिले जिन्हे TB के इलाज की दवाओं से फायदा मिलना बन्द हो गया था / इस अवस्था में मैने मरीज को सलाह दी कि [ पहला -१] वह अपना TB के इलाज के लिये जो भी एलोपैथी की दवायें ले रहा है , उसे कतई न बन्द करे और उसे चालू रखे / [दूसरा-२] वह अपनी general health condition के improvement के लिये प्रयास करे, जिसमे व्यक्तिगत स्वच्छता, पौषटिक भोजन, खुली हवा में दिन में बैठना, sex से दूरी बनाये रखना, आराम करना और अपनी ताकत भर मेहनत करना आदि आदि [तीसरा-३] आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करना /

आयुर्वेदिक दवायें खाने के बाद धीरे धीरे मरीज की हालत सुधरने लगती है और वह पुन: अपना स्वास्थय प्राप्त कर लेता है / अधिकतर मरीज आयुर्वेदिक दवा की खुराकें लेते रहते है, इस भय से कि कहीं उनकी तकलीफ फिर से relapse न हो जाये /

मेरा अनुभव है कि TDR के मरीजों में चिकित्सकों को समन्वित चिकित्सा यानी combined treatment आजमाना चाहिये / आयुर्वेद मे ऐसी बहुत सी औषधियां हैं जो मरीज की बीमारी के साथ साथ उनकी General Health Condition को इम्प्रूव करके रोग मुक्त करती हैं /

होम्योपैथिक दवाओं की Lower पोटेन्सी का प्रभाव


होम्योपैथिक दवाओं की Lower पोटेन्सी का प्रभाव मानव शरीर में बहुत तेजी से होता है , उसी तेजी से जैसे आयुर्वेद या एलोपैथी की दवाओं के असर होते है /

लोवर पोटेन्सी से तात्पर्य सेन्टीसमल स्केल की ३ और ६ पोटेन्सी से है और डेसिमल स्केल की 2X या 3X या 6x पोटेन्सी से है /

क्ळीनिक में आये मरीजों पर किये गये प्रयोगों से प्राप्त निष्कर्ष को conclude करके देखा गया है कि अगर लोवर पोटेन्सी की दवाओं को मरीज के symptoms की totality के अनुसार मिलान करके कई दवाओं के combination को alternate करके उपयोग करते है तो मरीज का इलाज बहुत confidence के साथ कर सकते है / ट्राइटुरेशन वाली दवाओं को mixture बना कर दिया जा सकता है /

उदाहरण के लिये ; यदि किसी मरीज को Ulcerative Colitis के साथ पेट में गैस बनने की शिकायत है, पेट में ऐठन होती है और उसे हल्का बुखार है तो निम्न फार्मूला उपयोगी होता है /

Merc sol 3X
Carbo veg 3x
Magnesia Phos 3x
Kali Muriaticum 3x

इन चारों दवाओं को यदि २ या ३ या चार घन्टे के अन्तर से देते है तो मरीज की तकलीफ पहली खुराक खाने के बाद से ही सुधरने लगती है /

यदि होम्योपैथिक दवाये डायल्यूशन मे उपयोग करते हैं तो ३ या ६ पोटेन्सी की दवायें लेना चाहिये /
उदाहरण के लिये सभी तरह की टान्सिलाइटिस, फैरिन्जाइटिस, ळैरिन्जाइटिस के रोगियों के लिये निम्न फार्मूला उपयोगी होता है /

Phytolacca 3
Balladonna 3
Bryonia 3
Merc cor 3
Lachesis 3

इन सभी दवाओं की २ – २ बून्दे मिलाकर दिन में कई बार देने से बहुत सी respiratory tract की बीमारियों में आराम मिलता है और पहली खुराक खाने के बाद से ही आराम मिलनी शुरू हो जाता है /

होम्योपैथी की लोवर पोटेन्सी हमेशा बहुत तेजी से फायदा पहुचाती है और इसे Acute या sharp acute या semi acute या emergent painful condition में विश्वास के साथ मरीजों मे उपयोग करना चाहिये /

सभी लोगों को सबसे पहले यह समझना बहुत जरूरी है कि वे जिस बीमारी का इलाज क्रराने के लिये विचार कर रहे है, उसका सबसे अच्छा और बेहतरीन इलाज क्या हो सकता है ? Every Patient must understand that the treatment , he is willing to take, what will be the best …….?


हर मरीज यह चाहता है कि उसे जो भी बीमारी है , उसका इलाज सबसे बेहतर किस सिस्टम में है / उसे आयुर्वेद का इलाज कराना चाहिये या एलोपैथी का इलाज कराना चाहिये या होम्योपैथी का इलाज कराना चाहिये या यूनानी का अथवा प्राककृतिक चिकित्सा या योग का या सर्जिकल बीमारियों की कौन कौन सी स्तिथियां किन किन बीमारियों को ठीक करने के लिये उप्युक्त हैं /

सधारण तौर पर मै वर्षों से यह observe करता चला आ रहा हूं कि शायद ही किसी व्यक्ति को यह पता हो कि उसे जो भी तकलीफ हुयी है , उसका सही इलाज कहां पर हो सकता है ? मैने अक्सर देखा है कि यह पहले भी देखता था और आज भी देखता हूं कि लोग गलत इलाज का शिकार होकर अपनी मौत अपने आप बुला रहे हैं और अपनी अन्तिम अवस्था के लिये खुद को गले लगा रहे हैं / बहुत से ऐसे मरीज देखे हैं जिनको डाक्टर साहब कभी टायफाइड बता रहे है, कभी unknown infection , कभी आन्तों की टी०बी०, कभी फेफड़े का न्य़ूमोनिया, कभी कुछ कभी कुच और जब मरीज मर गया तो सब्से बाद मे बता डाला कि इसे hepatitis B हो गयी थी, इसलिये मर गया /

वास्तविकता यह है कि लोग गलत इलाज से मर रहे हैं / गलत diagnosis से मर रहे है / एक उदाहरण देता हूं / एक सज्जन अपना इलाज किसी हकीम से करा रहे थे / हकीम साहब ने जो भी दवा दी हो यह मुझे नही पता है, लेकिन एक दिन यह सज्जन बेहोश होकर गिर पड़े , दोस्तों और सहयोगियों ने मोबाइल पर हकीम साहब को बुरा भला कहा, हकीम साहब ने हाथ खड़े कर दिये कि अब मै इनका इलाज नहीं करून्गा / बाद मेम यह मेरे पास आ गये / मैने उनका इलाज किया और उस इलाज से वह काफी ठीक हो गये / यह सज्जन अपना व्यापारिक काम भी कर रहे थे और दवा भी कर रहे थे / सब कुछ सामान्य जैसा था / मुझे उनकी घर की स्तिथि पता थी / मरीज के तीन लड़्कियां हैं जिनमें एक तो शादी लायक है और दूसरी शादी के लिये तैयार है / म्ररीज का काम ब्याह शादियों में मडप सजाने का है / ब्राम्हण परिवार से हैं / मैने इनका ई०टी०जी० परिक्षण किया था , जिसमें इनको Psychosomatic Disorders निकला था / मैने मरीज से कहा कि उसे दिमागी उलझन के कारण शारीरिक बीमारियां हैं / इस पर मरीज मेरे ऊपर बहुत नाराज हुआ और कहा कि आप तो मुझे पागल बताये दे रहे हैं / मैने समझाया कि उसे दिमागी चिन्ता , आर्थिक दबाव से उतपन्न विषाद आदि के कारण तकलीफ है / बाद मे मैने परिवार वालों के कहने पर मरीज की तसल्ली के लिये उसे दूसरे डाक्टरों के पास जाने के लिये कहा /

परिवार के लोग उसे एक Heart specialist के पास ले गये / उसने ECG, TMT , Blood test . Ultrasound, Xray सभी करा दिये / सभी Normal सामन्य निकले और स्पेशियलिस्ट्ने कहा कि उसे कोई हृदय से सम्बन्धित बीमारी नही है / मरीज के यह पूछने पर कि जब ्बीमारी नही है तो वह अब क्या करे? Heart specialist ने कहा कि वह किसी MD डाक्टर को दिखाकर सलाह ले / मोहल्ले के लोगों नें मरीज को सुझा दिया कि वह किसी हड्डी वाले को दिखा दे / हड्डी वाले ने कहा कि उसको कोई हड्डी की बीमारी नही है , वह भी बहुत से pathological examination के बाद बताया और कहा कि किसी KIdney specialist को अपना गुर्दा चेक करा दे / मरीज गुर्दा वाले के पास गया, उसने कहा कि लग रहा है आपको कैन्सर ले लक्शण हो रहे हैं इसलिये कानपुर मे इलाज न करायें, लखनऊ जाकर SGPGI में इलाज करायें /

एक दिन मरीज मेरे पास आया और यह सब राम कहानी बतायी / उसने कहा कि मुझे कहीं से भी आराम नहीं मिली है / आपकी दवा खाकर मुझे बहुत आराम मिली थी, वह भी सब आराम खतम होकर नई नई दूसरी तकलीफें पैदा हो गयी हैं / मुझे दिन पर दिन परेशानी हो रही है , अब आप फिर से इलाज करिये / मुझे ढेर सारी दवायें खानी पड़ रही है , जिससे मेरा पेट खराब हो गया है मैने उससे कहा कि अभी वह अपने डाक्टर की दवा का कोर्स पूरा कर ले / जब यह कोर्स पूरा हो जाये उसके चार महीने बाद इलाज के लिये आना /

मेरा मरीज से यह कहने का मकसद था कि वह तमाम तरह की प्रेस्क्राइब की गयी Antibiotics, Minerals, Steroids युक्त दवायें ले रहा था जिसके साइड इफ़ेक्ट्स लग रहे थे / अगर मै इस समय आयुर्व्दिक या होम्योपैथिक इलाज शुरू करता तो उसकी सभी तकलीफें एक्दम से उभर कर जानलेवा बन जाती और मेरे लिये अनावश्यक मुसीबत बन जाती, इसलिये मैने उसको मना किया कि वह जब भी मेरे पास इलाज के लिये आये , वह चार महीने तक कोई भी दवा न ले और उसके बाद इलाज के लिये आये / चार महीने में एलोपैथी की दवाओं के असर कम हो जाते हैं और इस समय आयुर्वेदिक या होम्योपैथिक का इलाज करना सबसे ज्यादा सुर्क्षित और लाभदायक होता है /