दिन: फ़रवरी 6, 2012

कैन्सर जैसी लाइलाज बीमारी का आयुर्वेदिक उपचार ; Ayurvedic treatment of incurable disease condition CANCER


कैन्सर जैसी बीमारी के मरीजों का बड़ी सन्ख्या में इलाज करने के पश्चात जितना भी अनुभव हुआ है , उसमे कुछ बातें मै सबसे शेयर करना चाहता हूं /

पहला अनुभव मेरी समझ में यह आया है कि अगर मरीज अपनी बीमारी का इलाज आयुर्वेदिक चिकित्सा का सहारा लेकर कराना चाहता है और कैन्सर की तकलीफ का पता रक्त की जान्च कराने और FNAC परीक्षण कराने से हो जाता है तो फिर उसे बायोप्सी परीक्षण से बचना चाहिये / बायोप्सी परीक्षण करा लेने के बाद आयुर्वेदिक चिकित्सा सफल नही होती है /

दूसरा अनुभव यह है कि आयुर्वेद की आधुनिक निदान ग्यान की तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्शण का सहारा लेकर जब कैन्सर के रोगियों की चिकित्सा करते हैं तो सफलता अवश्य मिलती है /

तीसरा अनुभव यह है कि चिकित्सा ऐसी होनी चाहिये जो कैन्सर की तेजी से बढने की प्रवृत्ति को धीमा करे और रोग की बढने की गति पर लगाम लगाये / इस “growing tendency” को दवाओं के उपयोग से जितना धीमा कर लेन्गे, मरीज की उम्र उतनी ही अधिक बढ़ जाती है /

चौथा अनुभव यह है कि मरीज की समान्य स्वास्थय अवस्था यानी General Health Condition को improve करने के लिये जितने प्रयास हो सके उसे करना चाहिये /

पान्चवां अनुभव यह है कि ETG AyurvedaScan हर महीने या हर दो माह में कर लेना चाहिये और जैसी फाइन्डिन्ग्स हों, उस पर base करके इलाज करना चाहिये /

छठा अनुभव यह है कि आयुर्वेदिक इलाज कराने से प्रथम अवस्था के मरीज को ९५ प्रतिशत पूर्ण आरोग्य और द्वितीय अवस्था के कैन्सर के मरीजों को कुछ तकलीफ के साथ आरोग्य कई सालों के लिये जीवन दायी होते हैं /

सातवां अनुभव यह रहा कि आयुर्वेदिक इलाज से मरीज के दर्द या रक्त बहने की tendency बन्द हो गयी या न के बराबर कष्ट बना रहा /

सर्जरी कराने के बाद आये कुछ सेलेक्टेड मरीजों का मैने उपचार किया है जो अधिकतम दस साल तक जीवित रहे हैं /

कैन्सर की गान्ठों का इलाज;

शरीर मे हो रही गाठों या गिल्टियों या ग्लैन्ड्स Glands से हमेशा सतर्क रहना चाहिये / ऐसा नही है कि सभी गान्ठें कैन्सर का स्वरूप ले लें य सभी तरह की गान्ठें कैन्सर मे ही तब्दील हो जायें / वास्तविकता यह है कि सभी तरह की गान्ठें कैन्सर नही होती / कैन्सर के हिसाब से glands  को दो भागों मे समझते है, एक वह जो कैन्सरस होती है और इन्हे malignent tumour अथवा glands के नाम से जानते है और दूसरा वह गान्ठें , जिन्हे benign tumour अथवा glands कहते हैं /  इसमें निदान या diagnosis करने में कि कौन सी गान्ठे कैन्सरस हैं और कौन सी नही, यह बहुत मुश्किल काम है / हमेशा निदान करने मे चूक बनी रहती है / कोई कोई गान्ठ tubercular भी होती है और कोई koch’s infection वाली , तथा कोई कोई किसी अन्ग की inflammatory condition  के कारंण “as a metastasis result” पैदा हो जाती है जैसे कि उदाहरण के लिये गले की बीमारियों जैसे tonsillitis, pharyngitis, laryngitis से गर्दन के चारों तरफ adenoids या lymphadenitis पैदा हो जाती है /

मैने पाया है कि जिन बच्चों को अक्सर tonsillitis या गले का इन्फेक्सन या ई०एन०टी० से सम्बन्धित तकलीफें होती है और इनको अधिक मात्रा में anti-biotics देकर लम्बे समय तक इलाज करते रहते है तो फेफड़ों मे गान्ठें हो जाने की सम्भावना बनी रहती है, ऐसा metastasis के कारण होता है /

मुझे कई साल पहले एक चार साल के बच्चे का X-ray देखने को मिला, जिसमे उसके दोनों फेफड़ॊ  मे chicken pox जैसे दानों के धब्बे पूरे फेफड़ों मे छाये हुये थे /  उन दिनों कानपुर में चेचक बहुत फैली हुयी थी / एलोपैथी के जो चिकित्सक बच्चे का इलाज कर रहे थे , वे तेज़ बुखार जो १०४ के आस्पास था उसको कम करने के लिये anti-pyeretic दवायें और anti-biotics के अलावा दूसरी दवायें दे रहे थे / पान्च छह दिन बाद बच्चे की सान्स फूलने लगी तब X-ray कराया गया / हुआ यह कि chicken pox का infection , suppress होकर फेफड़ॊ मे चला गया, जिससे जो दाने त्वचा में निकलने चाहिये थे , वे सब inward होकर फेफड़ॊ मे चले गये /

आयुर्वेद और होम्योपैथी में गान्ठों का बहुत सटीक इलाज है , यदि दोनों तरह की औषधियों का उपयोग इलाज के लिये किया जाता है तो सभी तरह की गान्ठों Glands  / tumour  का इलाज प्रभाव्कारी तरीके से किया जा सकता है / 

 

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