दिन: फ़रवरी 8, 2012

“मृत सन्झीवनी सुरा” ; आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान की एक महान औषधि ::Mrit Sanjivani Sura, A great Medicine of AYURVEDA


आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान के साधकों ने ऐसी ऐसी महान औशधियों के फार्मूले विकसित किये हैं , जिन्हे बीमार व्यक्तियों और गम्भीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों पर आजमाने के बाद यह सत्य प्रतीत होता है कि हमारे आयुर्वेद के महान साधकों ने इस दुनियां को कैसी अमूल्य निधियां प्रदान की हैं ?

जहां आयुर्वेद के ग्रन्थों में असीमित फार्मूले दिये गये हैं , वहीं कुछ ऐसे है जो बीमारियों के इलाज करने में हमेशा सफलता देते हैं / मृत सन्जीवनी सुरा आयुर्वेद की एक ऐसी औषधि है जो वाकई में किसी भी बीमारी के कारण मरने वालों के लिये “सन्जीवनी” जैसा काम आती है /

इस औशधि का फार्मूला शास्त्रों में इस प्रकार से दिया गया है /

नया गुड़ सवा ६ सेर, बबूल की छाल, बेर की छाल, सुपारी प्रत्येक १ सेर, लोध २० तोला, अदरख १० तोला, कूट पीस कर तथा गुड़ को ८ गुना सादे पानी में घोलकर किसी बडे बरतन में डाल दें और इस बरतन का मुख बन्द करके २० से ३० दिन तक सन्धान के लिये एकान्त में रख दें /

सन्धान के समय बीतने के बाद इस सारे द्रव्य में सुपारी, एल्वालुक, देवदारू,लौन्ग, पद्माख, खस, सफ़ेद चन्दन, सोया, अजवायन, काली मिर्च, सफ़ेद जीरा, स्याह जीरा, कचूर, जटामन्सी, दाल्चीनी, इलायची, जायफल, नागर्मोथा, गठिवन, सोन्ठ, मेथी, मेढासिन्गी, चन्दन , ये सब द्रव्य ढाई तोला लेकर मिला लें और इसमें ५ सेर पानी और मिलाकर सारी ऊपर की बतायी दवायें घोल दें /

अब इस सभी द्रव्य को अर्क निकालने वाले “भबका” यन्त्र में डाल कर इसका सुरा रूपी अर्क निकाल लें /

वास्तव में यह एक प्रकार की शराब होती है जो इलाज के लिये काम आती है / मै इस सुरा का उपयोग नीचे बतायी गयी बीमारियों में सफलता पूर्वक किया है /

१- ठन्डक यानी जाडा और बरसात के दिनों में होने वाली सभी तरह की बीमारियों में इसका उप्योग करना मरीज की जान बचाने के लिये रामबाण का काम करती है / मै हर मरीज को ५ मिलीलीटर से लेकर दस मिलीलीटर तक मृत सन्जीवनी सुरा को एक या दो उपयुक्त आसव या अरिष्ट के साथ बराबर मात्रा मे मिलाकर खाने के बाद दोपहर और रात में बताता हूं /

२- इस सुरा के उप्योग से बदन के दर्द में , musculo-skeletal problems से पैदा दर्द में बहुत आराम मिलती है / जिन्हे किसी भी तरह की दर्द हो , वे इसका उपयोग उपयुक्त आसव या अरिष्ट के साथ मिलाकर करें /

३- जिन्हे ळीवर , Hepatitis, Pancreas आदि की तकलीफ हो वे इसका उपयोग करके इन सभी अन्गों की सक्रियता को बढा सकते है /

४- जिन्हे सर्दि , जुखाम, खान्सी, सान्स की तकलीफें हों, वे इसका उपयोग कर सकते है /

५- प्रसव के बाद महिलाओं को इस सुरा का अव्शय सेवन करना चाहिये / यह महिलाओं के जननागों पर बहुत सटीक असर करता है और बहुत प्रभाव शाली है / इस सुरा की मालिश करने से बहुत फायदा होता है /

६- गठिया वात या मान्स्पेसियों के दर्द में इसकी मालिश करने से दर्द में बहुत फायदा होता है /

७- जिन्हे नीन्द न आती हो, जिन्हे मानसिक रोग हो, जिन्हे दिमागी काम बहुत अधिक करना रहता हो, वे लोग इसका सेवन अश्वगन्धारिष्ट, सारस्वतारिष्ट, द्राक्षारिष्ट आदि के साथ भोजनोपरान्त करें

इस सुरा के बहुत से प्रयोग मैने किये है / यह नशा लाने वाला पदार्थ है और शराब के बराबर का दर्जा है / इसलिये इसका अधिक उप्योग नशा पैदा करता है / इसकी अधिक्तम मात्रा ५ मिलीलीटर से १० मिली ळीटर तक है, इससे अधिक इसे कभी भी नहीं लेना चाहिये /

यह बाजार में नही मिलती है और न बिकती है , क्योंकि इस पर सरकार द्वारा बैन लगा हुआ है / लेकिन आयुर्वेदिक वैद्य अपने मरीजों के उपयोग के लिये बहुत कम मात्रा में आधा से एक लीटर तक बनाकर उपयोग कर सकते हैं / इसका खुले रूप में बेचना दन्डनीय अपराध है /

कभी कभी इस सुरा के बनाने वाले द्रव्य नही मिलते हैं, इसलिये मौके पर नही मिल पाती है , इसलिये यह जब तक न मिले तो मरीजों के हित में काम चलाने के लिये बहुत अच्छे ब्रान्ड वाली अन्ग्रेजी शराब “रम” का उपयोग कर लेना चाहिये / “रम” शीरे से बनती है और मृत सन्जीवनी सुरा गुड़ तथा औषधियों के मिश्रण से बनायी जाती है, जिसमें दवाओं के गुण भी शामिल हो जाते है /

मानव शरीर दो द्रव्य बहुत शीघ्रता से हजम करता है और हजम किये गये पदार्थ को सीधे सीधे खून में मिला देता है , ये दो द्रव्य हैं अल्कोहल और ग्लूकोज / स्पष्ट बात है कि जब आसव अरिष्ट सुरा जैसी वस्तु के साथ मिलाकर लिये जायेन्गे तो शरीर में प्रभाव भी शीघ्रता से करेन्गे /

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