दिन: फ़रवरी 12, 2012

Ayurvedic and Homoeopathic Nutraceutical ; Mixture of Milk+Egg+Mrit sanjivani sura+Homoeopathic Mother tinctures ; आयुर्वेद और होम्योपैथी के टिन्क्चर-मिक्स्चर जिसमें दूध, अन्डा, मृत सन्जीव्नी सुरा द्वारा तैयार खाद्य-औषधि


 

आयुर्वेद के ग्रन्थों मे ऐसे बहुत से खाद्य पदार्थों के साथ मिलाकर खाद्य औषधियों के फार्मूले दिये हुये है जिनका मै अपने मरीजों में बहुतायत से प्रयोग करता हूं / इसका सबसे बडा फायदा मरीजों के हित में होता है/ ऐसे बहुत से रोगी हैं , जो दवायें खाते खाते ऊब चुके हैं और जब अति हो जाती है तो मरीज दवा खाना छोड़ देता है / यह बहुत मुश्किल समय होता है चिकित्सक के लिये भी और मरीज के तीमार दारों के लिये भी /

मेरा मानना है कि ऐसी स्तिथियों के लिये हमारे आयुर्वेद के विद्वानों नें अपने समय मे ही ऐसे मरीजों को देखा होगा और इसी कारण से मरीज की जान बचाने के लिये आयुर्वेद के महान चिकित्सकों ने तरीका भी ढून्ढ निकाला है /

अपने मरीजों मे यही तरीका आजमाता हूं और मुझे सफलता भी मिली है / फिल्हाल इसके बारे में फिर कभी बताऊन्गा /

आज जिस खाद्य पदार्थ से निर्मित औषधि का जिक्र कर रहा हू , यह एक उत्कृष्ट खाद्य पदार्थ है / इसका बनाने का तरीका और सामग्री निम्न प्रकार है /

मन्साहारी लोग जो अन्डा का सेवन करते है, उनके लिये –

एक या दो अन्डा की पीली जर्दी एक बड़े कप में ले , इसमें जितना मीठा स्वाद् चाहते हैं उसके अनुसार शक्कर डाल लें, इसी में एक या दो चम्मच मृत सन्जीवनी सुरा मिला लें / अगर मृत सन्जीवनी सुरा न मिले तो अच्छे किस्म की रम अथवा ब्रान्डी मिला ले / इसे अच्छी तरह फेन्ट लें /

अब इस मिष्रण में डेढ या दो कप गर्म दूध मिला लें और अच्छी तरह इसे चम्मच से हिलाकर मिला लें /

इस तैयार मिश्रण में होम्योपैथी की दवाओं के तीन टिन्क्चर यथा Avena Sative Q, Alfalfa Q और Ashvagadha Q की प्रत्येक टिन्क्चर की दस दस बून्दें मिला लें /

इसे सुबह शाम ताजा बनाकर पीना चाहिये / भोजन के साथ भी ले सकते है /

इस तरह से तैयार खाद्योषधि यानी neutraceutical निम्न मरीजों के लिये लाभ दायक है /

१- शारीरिक रूप से कमजोर मरीज जिन्हे भोजन हजम करने में भी कठिनाइ लगती है , यह हल्का और सुपाच्य भोजन है यानी जल्दी हजम होने वाला पौष्टिक भोजन है /
२- जो कमजोर है जिनके शरीर में मान्स नही चढता है, दुबले पतले हैं, देखने में मिर्गिल्ली या मरियल काया वाले लगते हैं , उनके वजन को यह बढाने में यह सहायता करता है /
३- जिन्हे मानसिक तनाव बना रहता है, जिन्हे जल्दी से काम करने की आदत है, जिनका खाने पीने का कोई निश्चित समय नही है, उनके लिये यह पूर्ण खाद्य पदार्थ का काम करता है
४- इसके लगतार पीने से शारिरिक और मानसिक क्षमता पढती है

5- Very beneficial for those, who are MENTALLY ill and suffering from SLEEPLESS NESS, MENTAL FATIGUE, LOSS OF MEMORY and others similar mental disorders

जो लोग अन्डा या रम या ब्राडी से परहेज करते है , वे लोग केवल दूध के साथ होम्योपैथी के मदर टिन्क्चर मिलाकर तथा एक चम्मच शतावरी घृत मिलाकर अथवा एक या दो चम्मच महानारायन तेल या महामाष तेल मिलाकर सुबह शाम दो बार सेवन करें / यदि तेल अथवा घी किसी को न suite करे तो केवल दूध के साथ होम्योपैथी के बताये गये सभी टिन्क्चर को मिलाकर बनाय गया मिक्ष्चर सेवन करें /