पुरुषों मे “सम्भोग शक्ति” का ह्रास किस उम्र में………..


अक्सर यह सवाल मुझसे मेरे मरीज करते हैं, जिसे मै पहले नजर अन्दाज कर जाता था / क्योंकि ऐसे सवाल मुझे absurd लगते थे / जो सवाल पू्छते थे, वे मुझे किसी बेवकूफ से कम नही लगते थे / ऐसे सवालों का जवाब देने की मै आवश्यकता नही समझता था, पहले भी और अब भी / लेकिन एक सवाल यह जरूर उत्तर देने के योग्य बनता है कि “पुरुष की सम्भोग शक्ति” का ह्रास किस उमर मे होने लगता है / ४० की उमर के बाद या ५० की उमर के बाद या ६० की उमर के बाद या अधिक /

मेरे विचार से एक स्वस्थय व्यक्ति की स्त्री के साथ रमण करने या सम्भोग शक्ति करने की छमता का आन्कलन करना कोई मुश्किल भरा काम नही है / मुझे बहुत से लोग मिले है , जिनकी उमर ५५ से लेकर ७० साल तक के दर्मियान है और वे उसी तरह से स्त्री सम्भोग का आनन्द ले रहे हैं जैसे कि एक नौजवान और युवा व्यक्ति लेता है /

वहीं दूसरी तरफ ऐसे नवयुवकों की बहुत बड़ी सन्ख्या देखने में आयी जो २५ साल से लेकर ४० साल मे ही सम्भोग करने की क्षमता खो बैठे है और नपुन्सकों की लाइन में आ गये हैं /

दोनों ग्रुप के लोगों में बहुत कुछ ऐसा देखने को मिला है जिससे स्त्री रमण की क्षमता प्रभावित होती है / कुछ ऐसे कार्य कलाप भी सामने आये जिनके पालन करने से सम्भोग की शक्ति को बढावा मिलता है और सम्भोग करने की क्षमता को विस्तार मिलता है /

ऐसे सभी लोगों ने जिन्होने बताया कि उनकी रमण करने की क्षमता क्यों अधिक उम्र तक बनी हुयी है, इसके पीछे उनका “ब्रम्ह्चर्य व्रत” की लम्बे समय तक पालन करने की वजह से उतपन्न शारीरिक क्षमता के विकास का रियक्सन मात्र है / ऐसे लोग जब तक उनकी शादी नही हुयी थी तब तक अपने वीर्य की रक्षा करते रहे यानी १८ से लेकर २५ साल तक या अधिक उम्र तक ऐसे लोगों नें स्त्री रमण या सम्भोग से अपने को दूर रखा और वीर्य रक्षा करने के सभी उपाय किये थे / दूसरी तरफ वर्तमान नौजवानों की हालत यह है कि किशोरावस्था में जैसे ही पदार्पण हुआ और ऐसे कच्ची उमर के और किशोरावस्था मे आते ही जैसे लिन्गोत्थान से उतपन्न सेक्स से सम्बन्धित विचार मष्तिष्क में आने शुरू हुये कि कोई हस्त्मैथुन का सहारा लेकर वीर्य पात कराने लगता है और कोई दूसरा रास्ता अपनाने लगता है /

अब जब कच्ची उमर में वीर्य्पात कराओगे तो शरीर की विकास करने की स्तिथि कमजोर होती है / मन, मष्तिष्क, शरीर के सभी अन्ग बेकार हो जाते है और शरीर के अधिकान्स सिस्टम बाधित होते है /

आयुर्वेद इसीलिये निर्देश करता है कि सेक्स से सम्बन्धित सारे कार्य कलापों के लिये क्या करना चाहिये ताकि सम्भोग करने की क्षमता बहुत लम्बी उम्र तक वैसी ही बनी रहे जैसी कि उनके जवानी के दिनों में होती रहती थी /

आयुर्वेद बताता है कि जीवन शैली, खान पान, आयुर्वेदोक्त आचरंण को adopt करने से सम्भोग करने की शक्ति बढाने के अलावा वीर्य रक्षा आदि आदि कैसे की जा सकती है ?

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