दिन: फ़रवरी 20, 2012

मानव पुरूष का लिन्ग की लम्बाई कितनी होनी चाहिये ? What should be size of a human penis ?


रोजाना आये दिन बहुत बड़ी सन्ख्या मे लोग बाग फोन अथवा व्यक्तिगत तौर पर या पत्र लिखकर यह सवाल पिछले कई साल से पूछ रहे हैं कि ………….? श्लील अथवा अश्लील और absurd सवाल मानकर और समझ्कर मैने ऐसे प्रश्नों का उत्तर देना लगभग बन्द कर दिया है, लेकिन कुछ लोगों के आग्रह पर मैने मर्यादा के भीतर रहकर इस प्रश्न का उत्तर देने का प्रयास कर रहा हूं /

मानव पुरुष का लिन्ग पूर्ण यौवन अवस्था में कितना लम्बा होना चाहिये , यह सवाल कुछ पेचीदा किस्म का है / यदि नियम या सिध्धान्त की बात करें तो मेरा ऐसा मानना है कि इस बारे में कोई नियम या सिध्धन्त लागू नही होते, यह मै इसलिये कह रहा हू कि व्यवहारिक अनुभव practical experience कुछ ऐसा ही बताता है /

कोई कहता है कि लिन्ग की लम्बाई और मोटाई व्यक्ति के डील डौल या constitution or Body Built पर आधारित होती है / कोई कहता है कि लिन्ग की लम्बाई व्यक्ति के जेनेटिक लेवल पर आधारित होती है, इसी प्रकार से तरह तरह के कयास लिन्ग की लम्बाई को लेकर लगाये जाते हैं /

मैने ५० साल से अधिक के चिकित्सा अभ्यास कार्य medical practice के दर्मियान जितना भी अनुभव प्राप्त किया है, उससे मुझे यह समझ में आया कि बहुत से ऐसे लोग मिले जिनकी लम्बाई साढे ५ फुट से अधिक रही उनके लिन्ग की लम्बाई उत्थित अवस्था में डेढ इन्च से अधिक नही थी / कुछ ऐसे पुरुष मिले जिनकी लम्बाई ५ फुट से कम थी, लेकिन उनके लिन्ग की लम्बाई ६ इन्च से अधिक उत्थित अवस्था में नापा गया / इसलिये यह कहना कि वयक्ति की लम्बाई से उसके लिन्ग का कोई रेशियो बनता है , भले ही academic level पर सही माना गया हो, लेकिन प्रक्टिकल धरातल पर कुछ दूसरा ही है /

अब सवाल यह है कि मानव लिन्ग की लम्बाई स्त्री सम्भोग करने के लिये किस सीमा तक आवश्यक है ताकि यौन व्यापार में बाधा न पैदा हो ? दूसरे शब्दों में लिन्ग की कितनी लम्बाई होनी चाहिये ?

इस सम्बन्ध में मेरी राय यही है कि सम्भोग कार्य के सम्पादन के लिये पुरूष लिन्ग की लम्बाई कम से कम 4.5 inch [four and half inch] और अधिक से अधिक 6 inch के आस पास होनी चाहिये /

ऐसे जटिल प्रश्न का उत्तर प्राप्त करने के लिये मैने बहुत सी महिलाओं से यह सवाल करके जानने की कोशिश की कि पुरूष का लिन्ग कितना बड़ा होना चाहिये जिससे उनको सम्भोग का चरम आनन्द प्राप्त हो / सभी महिलाओं ने वही नाप करीब करीब बतायी है जो मैने ऊपर लिखा है /

अधिकान्श महिलाओं का कहना था कि लिन्ग की ज्यादा लम्बाई से सम्भोग क्रिया के दर्मियान गर्भाशय के cervix पर आघात लगता है जिससे बच्चे दानी पर असर पड़ता है अथवा गर्भाशय से रक्त का श्राव तथा पेट मे दर्द और सूजन के साथ साथ मासिक सम्बन्धी विकार हो जाते है / ऐसे में जिन स्त्रियों के पतियों के लिन्ग दीर्घ होते हैं , वे हमेशा उनके साथ सम्भोग करने से डरती हैं और तकलीफ के कारण सम्भोग से अनिच्छुक होती हैं /

अति-कामुकता यानी सम्भोग करने की लगातार इच्छा ; Excessive SEXUAL Desire disorders


बहुत से लोगों नें जिनमे पुरूष भी है और स्त्रियां भी शामिल हैं, इस बात की शिकायत करती है कि उन्हे अति कामुकता की शिकायत है / अति-कामुकता से मतलब है excessive sexual desire अथवा extra sexual desire / जिन्हे एक्स्ट्रा सेक्सुअल डिजायर यानी सम्भोग करने की बहुत ज्यादा इच्छा होना जैसी शिकायत होती है, वे स्वयम तो परेशान होते ही है , उनके साथ साथ उनके परिजन, पत्नी और पति दोनों ही इस तरह के acts से परेशान हो जाते हैं /

इसे आम लोग साधारण तौर पर बीमारी नही समझते हैं, वे यह समझते हैं कि यह एक तरह का मानव व्यवहार है जो किसी मे अधिक होता है और किसी में अत्यधिक / ठीक उसी तरह से जैसे किसी व्यक्ति में सम्भोग करने की इच्छा साधारण होती है और किसी मे साधारण इच्छा से भी कम और किसी किसी में तो बिल्कुल नही /

लेकिन सम्भोग करने की इच्छा अधिक बलवती होने या अत्यधिक होने का कारण किसी शारीरिक रोग या मानसिक रोग अथवा किसी एलोपैथी की दवा के दुष्परिणाम अथवा कोई विषेश खाद्य पदार्थ खाने से उतपन्न या आयुर्वेद की बाजीकरण से सम्बन्धित औषधियों के सेवन से पैदा जोश आदि आदि हो सकते हैं /

शारीरिक रोगों के कारण अगर अति-कामुकता होती है तो यह Hormonal या Prostate या anal या autonomic nervous system या male reproductive system या पेट में कीड़े होने के कारंण से हो सकती है /

मानसिक रोगों में sizhophrenia या sexual mania या सनक जाना इत्यादि इत्यादि इसी जैसी स्तिथियां बनती हैं , जिनके कारण अति-कामुकता पैदा होती है /

इसी तरह से कुछ दवाओं के बुरे परिणामों के कारण भी इस तरह की शिकायतें पैदा हो जाती हैं /

ऐसे रोगियों के इलाज के लिये मूल कारण का निदान करके चिकित्सा करने से रोग से मुक्ति मिल जाती है / जीवन शैली को बदलने, खान-पान में परहेज करने और आयुर्वेद के पन्चकर्म चिकित्सा आदि के उपयोग से शत प्रतिशत रोगी ठीक हो जाते हैं /