महीना: मार्च 2012

CONSTIPATION ; a general health problem


Improper evacuation of feacal matters or stool per day , if not satisfactory and it seems that some stool is remained inside the Large Intestine and thus causes problem, this could be a constipation condition.

Constipation causes many ailments and is called the mother of disease condition. The infection theory of today can be correlated with the function of Intestines in the reference way that B coli or E coli bacteria plays an improtant role for the proper functioning of Intestines physiology. Bacteria of intestnes are always keeps themselves in a natural quantity required accordig to the need of body. By any means, whether they could be external or internal , the flora of bateria mbalances and then causes health problems . The first impression could be a CONSTIPATION stage.

Anyhow, CONSTIPATION can be over rid by the following instructions;

1- Take a plenty of water, this keeps the consistency of stool, mild and soft. Hard stool always causes constipation. To make soften stool, drink plenty of water and when thirst, take immediate liquids.

2- Fruite Salad, Vegetable salad should be included in Food and diet. Take pleny of salad and fruits.

3- Vegetables and raw food should be included in main meals

4- AMALTAS , an ayurvedic herb, is beneficial in removeing constipation, so is ISABGOL, NISHOTH, HARAD and others

5- There is sso many medications , in Ayurveda, that can be used for the purpose of Constipation removal after proper consultation of your nearest Ayurvedic physician.

Summer season causes more constipation because of the dry ness, so take plenty of water to avoid constipation.

A glass of water in early morning and before bed may help to remove constipation

AVASCULAR NECROSIS Post-operative allied complications Case ; Treated successfully by Ayurvedic Medicine accompanied by Panchakarma, Electrotherapy and other mode of Therapeutic applications simultaneously


Avascular Necrosis is a disorder related to the Rheumatism and Arthritis categories. It is well known all over the globe that this is an incurable disease condition and have no specific treatment available sofar in Modern Western Medicine, exept the Surgical Interventions. Surgery have limitations to provide total cure or partial cure or relief.

We have recieved a case of Post Operative Avascular Necrosis of Femur head on 02nd March 2012. The Male patient provides the reports as shown earlier.

We suggested him to go for an ETG AyurvedaScan Examination, if he desires for best Ayurvedic treatment and prescription.

We concluded that patient is having the following physical problems, which tends to the disease conditions.

1- Bowel’s Pathophysiology and Colitis
2- Epigastritis wth swelling and hardness
3- Excited Brain Faculties
4- Eyes and ENT anomalies present
5- Lower spine Musculo-skeletal anomalies present
6- Lumber spondylitis
7- Tendency of High Blood pressure
8- Tachycardia

Patient was unable to walk without any help. His both lower limbs was stiffend with muscular swellings. He brought to our Panchakarma Center by his helpers.

We concluded that the SHROTAS are choked by anyway and thus unable to supply the proper nutrition to the joints and assembly. ETG AyurvedaScan report shows the “Metabolism” and “Assimilation” process of the patient is higher than the normal limit.

Ayurvedic diagnosis shows that VATA is very high than the normal limit, while PITTA and KAPHA are within normal limit.The Sapt Dhatus was higher than the normal limit and among them Ras dhatu is 185.85 e.v, Mans dhatu 181.56, Med dhatu 199.30, Majja107.40, were recorded.

We advised patient to take PACHAKARMA and allied therapies therapeutical methods for fastest recovery, which includes Electrotherapy, physiotherapy, Accupuncture, Magnet therapies etc to support the main Medicinal and Panchakarma treatment.

After a day patient improved and his swelling was reduced to half on second day. Within three days patient walks on his own Limbs without any support.

He is taking AYURVEDA treatment at our PANCHAKARMA center still, while his other complaints are now normal and patient feels better than before.

MEMORY Increaser Ayurvedic Formula ; याददास्त अथवा याद की हुयी या पढे हुये पाठ को याद रखने मे सहायक आयुर्वेद की औषधियां


आजकल के दिन परीक्षाओं के दिन है, सभी पढने वाले चाहते हैं कि उनकी याद करने की capacity बेहतर से बेहतर हो, इसलिये ऐसे लोग चाहते हैं कि कोई ऐसी औषधि अथवा खान्पान हो जिससे याद करने की क्षमता अच्छी से अच्छी हो जाये /

मै कुछ औषधियां और खान्पान बता रहा हूं, जिनके उपयोग से जल्द भूल जाने की आदत ठीक हो जायेगी और जो भी पढेन्गे , उसे याद्करने की capacity अधिक अच्छी हो जायेगी /

आयुर्वेद की नीचे लिखी औषधियां याद दास्त बढाने में सफल हैं /

१- स्मृति सागर रस ; एक गोली सुबह मलाई मिले दूध के साथ सेवन करना चाहिये / जिन्हे मलाई न पसन्द हो , वे सादे दूध के साथ ले सकते हैं / जिन्हे दूध न पसन्द हो वे शहद से ले सकते हैं / जिन्हे शहद न पसन्द हो वे सादे पानी से सेवन करें / इसे छेने के रसगुल्ले के साथ अथवा पेठे के साथ खा सकते है /

२- ब्राम्ही वटी ; एक गोली सुबह ऊपर बताये गये अनुपान के साथ खाना चाहिये /

३- सारस्वत चूर्ण ; एक से तीन ग्राम चूर्ण सादे पानी अथवा दूध के साथ लेना चाहिये /

४- सारस्वतारिष्ट ; चार चम्मच बराबर मात्रा में सादा पानी मिलाकर दोपहर और रात after Lunch and After Dinner खाने के बाद पी ले /

खान पान में फलों का रस ,दूध दही मलाई रबडी का अधिक उपयोग तथा ताजा और सुपाच्य भोजन लेना चाहिये / रात १० बजे से पहले सो जांय और ्सुबह जल्दी जागकर पढाई करने से जो भी पढा जायेगा , वह तेजी से याद होगा /

पेठा और छेने के रसगुल्ले याद दास्त बढाने मे बहुत सहायक होते है, इसलिये परीक्षा के दिनों में इनका उपयोग अधिक करे /

आयुर्वेद में बहुत सी औषधियां है जो याद दास्त बढाने की क्षमता को अधिक सहायता देती हैं / अपने नजदीक के किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह ले सकते है /

“महायोगराज गूगल” ; जोड़ों के दर्द, सन्धिवात, सन्धि शूल, सन्धि विकृति इत्यादि रोगों में अति उपयोगी ; MAHA YOGARAJ GUGAL ; a great AYURVEDIC REMEDY for Arthritis related anomalies ; for all kinds of Joints MUSCULO-SKELETAL or NEURO-MUSCULO-SKELETAL problems


आयुर्वेद की गूगल या गुग्गुलु योगों पर आधारित औषधियों में यह बहुत प्रचिलित योग है / लगभग सभी वैद्य इस चमत्कारी औषधि से परिचित है / चमतकारी इसलिये है, क्योंकि इसके उपयोग से शरीर के सभी जोड़ॊं के दर्द, चाहे वह मान्स्पेशियों के patho-physiology या pathology के कारण से हों या फिर अन्य कारणों से , यह औषधि जोड़ॊ के दर्द को दूर तो करती ही है साथ मे जोड़ॊ की सूजन और अन्य तात्कालिक तकलीफों को भी कम कर देती है या आरोग्य प्रदान करती है /

इसे बनाने मे निम्न जड़ी-बूटियों का उपयोग करते हैं / यह Herbo-minerals के मिश्रण का अनूठा फार्मूला है, जिसे देख करके आयुर्वेद के मनीषियों की

विलक्षण प्रतिभा का लोहा मानना पड़्ता है, कि उनका ग्यान जड़ी बूटियों और मिनरल्स के बारे में कितना गहरा अध्ध्य्यन किया गया हुआ था और उनहोनें किन किन बीमारियों में उनका कैसे उपयोग करके उन बीमारिओं के इलाज के अनुरूप इस तरह के फार्मूलों को विकसित किया /

महायोग राज गूगल भी ऐसी ही आयुर्वेद की एक महान औषधि है ,्जिसमें निम्न औषधियों का मिश्रण करके इसे एक अचूक और प्रभाव्शाली औशधि बनाने का प्रयास आयुर्वेद के मनीषियों द्वारा किया गया /

इस औषधि को बनाने के लिये निम्न बनौशधियों का फार्मूला है /

घटक; सोन्ठ, छोटी पीपल, चव्य, पीपलामूल, चित्रक, घी में पकाई गयी हीन्ग,अजवायन, पीली सरसों, सफेद और कालाजीरा, रेणुका, इन्द्रजव, पाठा, वायविदन्ग, गज्पीपल, कुटकी, अतीस, भारन्गीमूल, मूर्वा, बच प्रत्येक तीन तीन ग्राम, हरड,बहेदा, आवला १०० ग्राम, गिलोय और दशमूल से शोधित गूगल १५० ग्राम, वन्ग भस्म, चान्दी भस्म, लोह भस्म, रस सिन्दूर, अभ्रक भस्म सब १-१ ग्राम लेकर चूर्ण बनाने वाली औषधियों का चूर्ण बना लें और गूगल को लोहे के बडे खल्लर में डालकर अन्डी के तेल के छीटॆ देकर मूसल से कूटें / जैसे जैसे गूगल पतला होता जाये इसमें चूर्ण की गयी औषधियां थोडा थोड़ा करके डालते जायें, अन्डी के तेल का छींटा मारते जांय और खल्लर से कूत्टते जांय /

पुराने वैद्य बताया करते थे और अब भी कहते हैं कि महायोगराज गूगल को बनाने में एक लाख मूसल की चोट देकर यदि दवा बनाते हैं तो इसका प्रभाव अति आशुकारी होता है /

इस तरह से तैयार की गयी दवा को निम्न बीमारियों में उपयोग करते है ;

१- असाध्य वात रोग इसके उपयोग से अवश्य ठीक होते है / अनुपान भेद से इस औषधि को सभी शारीरिक और मानसिक व्याधियों में उपयोग करते है

२- वात व्याधि के उपचार के लिये इसे वातनाशक औषधियों के साथ सेवन करना चाहिये, इसी प्रकार पित्त व्याधि में पित्त नाशक और कफ व्याधि में कफ़ नाशक औषधियों के क्वाथ के साथ इसका सेवन लाभ्कारी होता है /

३- मानसिक व्याधियों यथा भय, चिन्ता, उन्माद, अवसाद तथा अन्य मनोविकारों के लिये इसका सेवन अनुपान भेद से करने से मान्सिक व्याधियां अवश्य कम होती है और धीरे धीरे आरोग्य प्राप्त हो जाता है /

४- जिन्हे Arthritis , Rheumatism, Muscular Arthritis, Musculo-skeletal anomalies हों या neuro-musculo-skeletal anomalies हों या all kinds of painful joints condition जैसी स्तिथि हो अथवा नसों का दर्द neurological pai अथवा  undefined pain या दर्द कहां है, जसी स्तिथि हो वहां इस दवा का प्रयोग आरोग्य कारी होता है /

जैसा कि मैने बताया है कि इस औषधि का उपयोग अनुपान भेद से सभी बीमारियों में किया जा सकता है, तो सब्से बेहतर है कि इसके लिये अपने नजदीक के किसी आयुर्वेद के चिकित्सक से सलाह लेकर और पथ्य तथा परहेज का पालन करने से आरोग्य प्राप्त कर सकते है /

इस औषधि की मात्रा ३५० मिलीग्राम से लेकर ७०० मिली ग्राम है और इसे रोग की तीव्रता के अनुसार दिन में ३-३ घन्टे से लेकर दिन में केवल एक खुराक सुबह खाकर काम चला सकते हैं / इसके लिये किसी नजदीक के आयुर्वेदिक चिकित्सक से सम्पर्क करें तो सबसे बेहतर है /

बवासीर, अर्श, Piles या Hemorrhoids ; Curable by Ayurvedic treatment


 

Piles अथवा बवासीर का मर्ज जिसके होता है, उससे पूछिये कि उसका सुबह पाखाना करते समय अथवा उसके बाद उसका क्या हाल होता है ?

यह बहुत ही लापरवाह बीमारी है, जिसके हो जाती है , वह यह रोगी की लापरवाही का फायदा उठाकर बेपरवाह तरीके से बढती है और फिर जिन्दगी भर परेशान करती है /

आधुनिक चिकित्सा विग्यान में इस रोग का कोई सटीक इलाज नही है / अधिक बढ जाने पर आपरेशन कराना ही एक मात्र उपाय बच जाता है , लेकिन खान पान और जीवन शैली में परहेज न करने से यह फिर उसी स्वरूप में हो जाता है जैसा कि आपरेशन कराने के पहले था /

प्राकृतिक चिकित्सा, होम्योपैथी दोनों चिकित्सा विग्यान में इस रोग का अच्छा इलाज है / यदि रोग की प्रारम्भिक अवस्था हो तो इन दोनों चिकित्सा विग्यान की औषधियों का उपयोग करने से रोग का निर्मूलन अथवा रोग शान्ति अवश्य हो जाती है /

रोग के अधिक बढ जाने की अवस्था में प्राकृतिक उपचार के साथ साथ यदि होम्योपैथी की दवायें सेवन करता रहे तो बवासीर का रोग काबू में आ जाता है / लेकिन इसके लिये अपने नजदीक के किसी अधिक expert qualified physician के पास जाकर अथवा प्राकृतिक चिकित्सालय में रहकर इलाज कुछ दिन तक कराना चाहिये / बाद में जीवन शैली को लम्बे समय तक अपनाना चाहिये /

आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान में बवासीर रोग के इलाज के लिये हजारों योग और औषधियां और पन्चकर्म की विधियां दी गयी हैं , जिनके द्वारा रोगी का इलाज करके उसे आरोग्य प्रदान किया जा सकता है / किसी किसी को सम्पूर्ण ९९.९९ प्रतिशत और किसी को ९५ प्रतिशत तक आरोग्य प्राप्त हो जाता है, लेकिन सभी रोगी ठीक हो जाते है / यहां भी वही बात दोहराना चाहून्गा कि यह सब कुछ expert qualified Ayurvedic Physician की काबीलियत पर आधारित होता है कि इलाज करने वाला वैद्य कितना निपुण है /

मै यहां सामान्य और विशेष दोनों प्रकार की बवासीर के लिये tips और दवायें बता रहा हूं, जिनके उपयोग से बवासीर की चाहे जैसी तकलीफ हो अवश्य ठीक हो जाती है /

१- पहला प्रयोग “स्वमूत्र चिकित्सा” से सम्बन्धित है / रोजाना सुबह सबेरे उठकर पहले अपने पेशाब / मूत्र को किसी शीशे के बर्तन या प्लास्टिक के बर्तन मे इकठ्ठा करके सन्चित कर लें / जितना अधिक मात्रा में मूत्र का सन्चय कर लेन्गे उतना ही ठीक होगा / इसके लिये चाहे आपको सुबह काफी मात्रा में अतिरिक्त सादा पानी क्यों न पीना पडे, क्योंकि जब आप अतिरिक्त पानी पियेन्गे तो पेशाब भी ज्यादा होगी / आपको जब पाखाना की हाजत लगे तब पाखाना कर लें , लेकिन गुदा ANUS / RECTUM को सादे पानी से धोने की बजाय आप इसी एकत्र किये गये मूत्र से गुदा को धो डालिये / मूत्र से गुदा को धोने के बाद , गुदा को सादे पानी से मत धोइयेगा / अगर धोने का या साफ करने का मन करे तो एक या दो घन्टे बाद सादे पानी से गुदा को धो डालिये / वैसे सबसे अच्छा है , इसे न धोयें / इससे बवासीर बहुत शीघ्रता से ठीक होती है और इस प्रयोग से असाध्य से असाध्य बवासीर ठीक हो चुकी हैं /

२- आयुर्वेद की औषधि “अर्श कुठार रस” की दो गोली सुबह और शाम मठे के साथ अथवा दही की पतली नमकीन लस्सी के साथ रोजाना १२० दिन तक ले अथवा सेवन करें /

३- भोजन के बाद आयुर्वेद की शास्त्रोक्त दवा ” अभयारिष्ट” और “रोहितिकारिष्ट” चार चम्म्च लेकर इसके बराबर चार चम्मच सादा पानी मिलाकर lunch और dinner के बाद दोनों समय सेवन करें /

भोजन में परहेज करें / परहेज के लिये अपने नजदीक के किसी आयुर्वेद के चिकित्सक से सम्पर्क करें क्योंकि वही आपको सही सही बता सकता है कि आपको क्या खाना चाहिये और क्या नहीं ?

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित आयुर्वेद चिकित्सा करने से बवासीर के रोगी अवश्य ठीक होते हैं , चाहे उनकी कैसी भी स्तिथि हो / आधुनिक मशीन और विकसित किये गये ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन साफ्ट्वेयर की मदद से अब ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन की रिपोर्ट १५ मिनट के अन्दर बन कर मरीज को दे दी जाती है /