दिन: अप्रैल 10, 2012

“एकान्ग वीर रस” एक तरफ के लकवा मार जाने की आयुर्वेदिक दवा ; one sided PARALYSIS curative Ayurvedic remedy “Ekang Vir Ras”


आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान ने लकवा अथवा इसी तरह की मिलती जुलती बीमारियों के इलाज के लिये कई श्रेष्ठ दवाओं का शाश्त्रों में उल्लेख किया है /

हलान्कि लकवा के रोग के इलाज के लिये आयुर्वेद मे बहुत से योग दिये गये हैं , चिकित्सा के लिये औषधीय प्रयोग के अलावा रक्त मोक्षण, जलूका का प्रयोग, दाह कर्म और पन्चकर्मादि का उपयोग करने का विधान बताया गया है, लेकिन औषधियों मे “एकान्ग वीर रस” का अपना अलग स्थान है /

अधिकान्शतया इस औषधि का उपयोग एक तरफ के पैरालाइसिस की बीमारियों के लिये ही करते हैं, लेकिन इसका उपयोग उन अन्य बीमारियों में भी करते है, जो पैरालाइसिस से मिलती जुलती अन्य रोग की अवस्थायें होती है /

इस औषधि के निर्माण में निम्न प्रक्रिया और सामग्री की आवश्यकता होती है ;

घटक द्रव्य; रस सिन्दूर, शुध्ध गन्धक, कान्त लौह भस्म, वन्ग भस्म, नाग भस्म, ताम्र भस्म, अभ्रक भस्म, तीक्षण लौह भस्म, सोन्ठ, मिर्च, पीपल, सब समान भाग लेकर कूट पीस छानकर पानी के साथ खरल में डालकर अच्छी तरह एक दिन घोण्टे /

बाद में त्रिफला और त्रिकुटा और सम्भालू और चित्रक और भ्रन्गराज और सहजना और कूठ और आवला और कुचला और आक और धतूरा और अदरख के रस अथवा क्वाथ से तीन तीन भावनायें देकर सुखा कर और एक एक रत्ती या १५० मिलीग्राम की गोली बनाकर रख लें /

यह फार्मूला आयुर्वेद शास्त्र बृहत निघन्टु रत्नाकर का है /

इस औषधि की मात्रा १५० मिलीग्राम से लेकर ३०० मिलीग्राम तक है / इसे शहद अथवा किसी वात नाशक अनुपान के साथ देना चाहिये /

यह औषधि पक्षाघात यानी Paralysis, one sided paralysis or complete paralysis, अर्दित, फेसियल परालाइसिस, ग्रध्रसी यानी Sciatica nerve inflammation, एकान्ग वात, अर्धान्ग वात, आदि वात विकारों मे सफलत पूर्वक उपयोग करते है /

यह औषधि शरीर का विकास करती है, शरीर के लिये जीवन दायनी है, कीटाणु नाशक है और शरीर के अन्दर के विजातीय द्रव्य यानी toxines बाहर निकाल देती है /

एकान्वीर रस के बारे में अधिक जानकारी के लिये आयुर्वेद की materia medica का अध्ध्यन करना चाहिये /

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SPECIAL Hahanemann Birth day POST on 10th April 2012 ;; डा० हाहनेमान ने जो Organon of medicine मे बताया , क्या होम्योपैथिक डाक्टर वह सब कर रहे हैं ………?


जो भी डाक्टर होम्योपैथिक की प्रैक्टिस या चिकित्सा कार्य करता है , वह सही मायने मे होम्योपैथिक चिकित्सा के आविष्कारक डा० क्रिश्चियन फ्राइड्रिख साइमुअल हाहनेमान का एक फालोवर मात्र होता है , जैसे कि डा० बोनिघसन. क्लार्क्स, एलन, बोरिक, कैन्ट आदि आदि अतीत के होम्योपैथिक के चिकित्सक थे और उन्होनें अपने अपने तरीके से हाहनेमान के कार्यों और उनकी फिलोसोफी को अधिक विस्तृत व्याख्या की और अपने अपने अनुभवों को शामिल करके जो भी उनकी समझ में आया , उन्होने लिखा और सबको बताया /

लेकिन सभी ने आधा अधुरा सत्य ही हाहनेमान के कार्यों के बारे में बताया / होम्योपैथी के डाक्टर केवल दवा के चुनाव , दवा की पोटेन्सी, दवा के रेपीटीशन और अन्य बातों की तरफ ही उलझे रहे / कौन सा स्केल की दवा दी जाय, डेसिमल, सेन्टीसिमल या ५० मिलेसिमल कौन सी प्रयोग की जाय इसी मे ही सारी उर्जा बरबाद करते चले गये और इसके अलावा कोई भी अन्य constructive कार्य जो हाहनेमान ने Organon of medicine के अन्तिम १० या १२ पैराज में बताया था , अफ्सोस की बात है , कम से कम अपने देश में तो नही हुआ /

Organon of medicine के अन्तिम कुछ पैराज में हाहनेमान ने लिखा है और सबको निर्देशित किया है और यह इशारा किया है कि………….

[अ] होम्योपैथिक के चिकित्सकों को “इलेक्ट्रोथेरापी” का उपयोग करना चाहिये / उस जमाने में किसी ने गैलवेनिक करेन्ट का एक जेनेरेटर तैयार किया था / चिकित्सा क्षेत्र की therapeutic use के लिये , यह शायद पहली मशीन थी , जो गठिया, वात विकार, musculo skeletal anomalies के treatment के लिये उपयोग में लायी जाती थी / इस मशीन के उपयोग के लिये हाहनेमान ने निर्देशित किया है / आज भी यह मशीन उसी कार्य के लिये उपयोग में लायी जा रही है जैसा कि उस जमाने में करते थे /

यह अवश्य हुआ है कि आज के जमाने में चिकित्सा कार्य के लिये , थेरापेउटिक उपयोग के लिये बहुत सी मशीने आ गयीं हैं, जिन्हे Physiotherapy चिकित्सक आज भी उपयोग मे ला रहे हैं /

सवाल यह है कि होम्योपैथी के चिकित्सकों नें इस विधा को क्यों छोड़ दिया और इस पर क्योण ध्यान नही दिया गया ?

[ब] हाहनेमान ने hydrotherapy यानी जल चिकित्सा के बारे में लिखा है / पानी के चिकित्सकीय उपयोग सदियों से मानव समाज कर रहा है / प्राकृतिक चिकित्सा में जल का उपयोग करते हैं जो सर्व विदित है / जब मै म्यूनिख , जरमनी में Krankenhaus fuer Naturhaeilwissen मे homoeopathy पढ रहा था, उस समय वहां पर जल चिकित्सा, इलेक्ट्रो थेरापी, हर्बल थेरापी, मैगनेट थेरपी, साइको थेरपी [हिप्नोटिस्म] आदि आदि Organon में हाहनेमान द्वारा बताये गये चिकित्सा के उपायों को मरीजों के उपयोग के लिये व्यवहार मे लाया जाता था /

सवाल यह है कि होम्योपैथी के डाक्टर और नीति नियन्ता और होम्योपैथी के लीडरान और धुरन्धर और धाकड़ से धाकड़ तथा कथित academicians ने क्या होम्योपैथिक् चिकित्सा विग्यान की इन उपलब्धियों को इन परिवेश में शामिल न करके ये सब किस अग्यानता का परिचय दे रहे है ?