दिन: अप्रैल 14, 2012

मिर्गी यानी Epilepsy या अपस्मार या दौरा पड़ना


Epilepsy या अपस्मार के रोगियों की बीमारी हो जाने की कोई उम्र की सीमा नही होती / यह किसी भी उम्र के लोगों को हो सकती है / इस बीमारी के होने की वजह या कारण बहुत से होते हैं जिन्हे किसी सीमा मे नही बान्धा जा सकता है / ज्यादा उम्र के लोगों को अगर यह तकलीफ है तो उन्हे आटो नर्वस सिस्टम या दिमाग या रीढ की हड्डी से सम्बन्धित बीमारियों की वजह से ऐसे दौरे पड़ सकते हैं / बीच की उमर वालों को भी कमी वेशी मानसिक तनाव, अत्यधिक मानसिक श्रम, शराब का अधिक उपयोग, नशे का आदी होना और नशा न मिलने के कारण प्रतिक्रिया स्वरूप दौरा पड़ जाना आदि बहुत से कारण होते हैं /

उम्र के हिसाब से देखा गया है कि जिन छोटी आयु वाले बच्चों को यह बीमारी होती है , उनमे अधिकान्शत: कृमि रोग की बीमारी पायी जाती है / बड़ी उम्र के किशोरॊं में यह बीमारी उनको होती है जो या तो हस्त मैथुन करते हैं या जो अपने वीर्य को ब्रम्हचर्य द्वारा सुरक्षित नही रख पाते / यह उन किशोरों को भी होती है जिन्हे तम्बाकू खाने या कोई नशा करने की आदत पड़ जाती है / बहुत से किशोरों को रात में जागने या अधिक पढने या अत्यधिक मानसिक श्रम के कारण यह दिक्कत आ जाती है / कई दिन तक न सोने के कारण या रात रात भर जगने और पूरी नींद न लेने और मष्तिष्क से अधिक कार्य करने के कारण भी यह बीमारी हो जाती है / रक्त की कमी से भी दौरा पड़्ने की सम्भवना बनी रहती है / सोडियम या पोटेशियम का blood में imbalance होने से भी यह बीमारी हो जाती है /

अत्यधिक मानसिक परिश्रम करने से भी दौरा पड़ जाता है / यह उन विद्यार्थियों को अधिक सताता है जो रात रात भर पढायी करते हैं और निद्रा बहुत कम लेते हैं /

कुछ बीमारियां ऐसी होती हैं , जिनके प्रभाव से या असर से मिर्गी का दौरा पड़ जाता है / एक बार दौरा पड़ जाने पर फिर यह शरीर का झुकाव या tendency बन जाती है / यह tendency जब एक बार स्थापित हो जाती है तो शरीर इसे बार बार repeat करता है / यही कारण है कि similar circumsatances और similar intensities का जैसे ही तालमेल बनता है , वैसे ही मिर्गी का दौरा पड़ जाता है /

मिर्गी कोई लाइलाज बीमारी नही है / यह ठीक हो जाती है / लेकिन परहेज करने की जरूरत अवश्य होती है / मिर्गी का जैसे ही पहला दौरा पड़े , इसका इलाज शुरू कर देना चाहिये / इलाज करना अथवा कराना व्यक्ति और मरीज के परिजनों के ऊपर निर्भर करता है /

मिर्गी का कोई मुकम्मल इलाज आधुनिक चिकित्सा विग्यान मे नही है / हां, एलोपैथी की दवा खाने से दौरा रुक जाता है अथवा कम हो जाता है और कभी कभी ठीक भी हो जाता है / दवायें लगातार खानी पड़ती है और एक दिन दवा न खाने से मिर्गी का दौरा पड़ जाता है /

आयुर्वेद में मिर्गी का इलाज करने के लिये आयुर्वेद के चिकित्सक की योग्यता और उसके अनुभव के ऊपर सारी चिकित्सा का दारोमदार आश्रित और आधारित होता है / आयुर्वेद की आधुनिक जान्च इलेक्ट्रो
त्रिदोष ग्राफी ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित डाटा द्वारा किये जाने वाले इलाज से मिर्गी रोग को जड़ मूल से ठीक किया जा सकता है /

आयुष की अन्य चिकित्सा विधियों यथा होम्योपैथी चिकित्सा, यूनानी चिकित्सा आदि में मिर्गी का इलाज करने की क्षमता है / यह मिर्गी के रोगी के ऊपर निर्भर है या उसके परिजनों पर कि वे कौन सी चिकित्सा विधि से इलाज कराना चाहते हैं /

हमने अनुभव किया है कि ETG AyurvedaScan परीक्शण करा कर जिन मिर्गी के रोगियों का इलाज आयुर्वेदिक औषधियों द्वारा और साथ में बताये गये “परहेज” और जीवन शैली मे बदलाव के साथ किया गया है, ऐसे मिर्गी के रोगियों को आरोग्य अवश्य मिला है /

आयुर्वेद मे बहुत सी दवायें मिर्गी रोग के लिये है और आयुर्वेद में इसका आरोग्यकारी उपचार मौजूद है /

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