दिन: मई 1, 2012

अस्थमा यानी सी०ओ०पी०डी० यानी क्रानिक आब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिसोर्डर ; ASTHAMA or C.O.P.D. or Chronic Obstructive Pulmonary Disorders


Dr DBBajpai is working with the ETG AyurvedaScan machine

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किसी भी नाम से पुकारे चाहे दम फूलना कहिये या दमा कहिये या सान्स का फूलना या श्वांस या सांस का उखड़ना कहिये अथवा Rapid respiration or Asthama or Dyspnea या कुछ और मतलब यही है कि अगर उठने अथवा बैठने अथवा चलने या कोई थोड़ा  सा भी काम करने से मनुष्य की सांस फूलने लगे और बेदम हो जाय , तो साफ साफ समझना चाहिये कि जिसे यह लक्षण होते है , वह दमा का मरीज है / 

आयुर्वेद के अलावा दूसरी अन्य चिकित्सा विधियों यथा सिध्द और यूनानी चिकित्सा विग्यान मे दमा का बहुत अच्छा इलाज बताया गया है /

दमा श्वसन सन्स्थान से सम्बन्धित बीमारी है / देखा गया है कि जिनके परिवार में श्वास के रोगी होते है उनके बच्चों में भी यही तकलीफ होने की बहुत समभावना होती है / इसलिये कहा जा सकता है कि यह वन्शानुगत बीमारी भी होती है /

लेकिन यह जरूरी नही कि यह केवल मात्र वन्शानुगत हो , यह अन्य कारणों से भी हो जाती है जैसे धूल और धुआं और धूप और कुछ शारीरिक व्याधियां, जो बाद मे श्वांस की बीमारी मे तब्दील हो जाती है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित दमा के मरीजों के अध्य्यन मे कुछ बातें पता चलीं हैं , जिनसे दमा के अटैक को बार बार पैदा होनें का खतरा बढ जाता है / हमारी टीम  द्वारा किये गये अध्ध्य्यन से निम्न बातें पता चलीं हैं जिन्के कारण दमा की तकलीफ बढती है /

१- दमा के रोगी में “Bowel’s Pathophysiology” की intensity बहुत हाई होती है अथवा बहुत लो होती है / इन्टेन्सिटी हाई होने से बडी और छोटी आन्त में कार्य विकृति के कारण सूजन पैदा होती है और आन्तों की म्यूकस सीक्रीसन में बदलाव पैदा होते है / इन्टेन्सिटी लो होने पर कब्जियत और पेट साफ न होने और कई कई दिन पाखाना न होने जैसी तकलीफें होने लगती हैं / इसके परिणाम स्वरूप शरीर की mucous linings affected  होती हैं और एक स्थान की कार्य विकृति का असर दूसरे अन्गों में भी होने लगता है /

साथ ही आन्तों के parastalitic movement में भी फर्क पड़्ता है, यह अधिक अथवा कम दोनों ही हो सकती है /

२- अध्ध्यन मे एक बात यह भी प्रमाणित होती है कि महर्षि चरक ने “श्रोतो दुष्टि” [ pathophysiology or pathology of the Channels of human body] की बात करके यह बताया है कि “रस धातु” के विकृति होने से “आम” पैदा होता है / हमने अध्य्यन मे यह जानने की कोशिश की है कि यह आम  किस प्रकार से एक अन्ग से दूसरे अन्ग को प्रभावित करता है / यह ठीक उसी तरह से होता है जैसे की metastasis की प्रक्रिया होती है / हमने पाया कि श्वांस के कुछ मरीज alternative problems से परेशान थे / इस मरीजों मे जब Colitis / IBS / ICB उभर कर आन्तों की तकलीफ पैदा कर देती है, तब दमा की तकलीफ एक तरफ कम होती जाती है और ठीक दूसरी तरफ आन्तों की तकलीफें बढती चली जाती हैं / यह एक तरह से alternative sybernative stage होती है /

३- अध्ध्यन मे हमने कुछ बातें विशेष तौर पर नोट की है और इस पर विचार करके जब मरीजों का इलाज किया गया तो उन्हे अवश्य लाभ मिला /

४- मरीजो के ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन में प्राप्त फाइंडिन्ग्स को लेकर सारे शरीर का इलाज करने पर बहुत अच्छे रिजल्ट्स मिले हैं / हमारा मानना है कि जब  पूरे शरीर के विभिन्न अन्गो तथा अन्य अवयवों का evaluation करके इलाज करते है तो दमा की बीमारी दूर करने में अवश्य सफलता मिलती है / क्योंकि शरीर की कोई भी तकलीफ हो, यह पूरा शरीर एक ईकाई स्वरूप में है और इसे ईकाई समझ कर ही इलाज करना चाहिये, क्योंकि सारा शरीर एक दूसरे से जुड़ा हुआ है जैसे कि महर्षि चरक ने चरक सम्हिता में “श्रोतो दुष्टि” द्वारा इन्गित किया है /

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