दिन: मई 8, 2012

कन्ट्कार्यावलेह ; आयुर्वेद की फेफड़ों और गले मे जमा कफ या बलगम निकालने की औषधि ; Expectorant Remedy KANTKARYAVALEH


भारतीय ज़डी-बूटी कन्टकारी solanum nigrum  से तैयार की जाने वाली , जो इस औषधि का मुख्य घटक है, इस औषधि के साथ जब अन्य कार्यकारी औशधियों को मिलाकर अवलेह या प्राश तैयार करते हैं, तब यह आयुर्वेद की एक मगत्व पूर्ण औषधि तैयार हो जाती है /

साधारण भी और विशेष तौर पर इसे सभी तरह की श्वास, दमा, COPD जैसी अवस्थाओं में तथा सभी प्रकार की खान्सी, गले की खराश, गले की खसखसाहट , cough, laryngitis, pharyngitis, tracheal anomalies, pulmonary anomalies  सभी में उपयोग करते हैं / जिन्हे फेफड़ों मे कफ जम जाने की दिक्कत हो, जिन्हे trachea, bronchus, alveoli  आदि आदि अन्गों में कफ पैदा होने, कफ न निकलने, बार बार खखारने के बाद भी कफ न निकले, बहुत मुश्किल से कफ निकले, कफ न निकलने से खानसते खान्सते मरीज बेदम हो जाये, उन्हे यह औशधि सेवन करने से कफ नरम और ढीला होकर निकल जाता है /

कटेली का कवाथ बनाकर इसमें गुर्च, चव्य , चित्रक, नागर मोथा, ककड़ा सिन्घी, पीपल, काली मिर्च,  सुन्ठी, जवसा, भारनगी, रास्ना और कचूर का चुर्ण करके तिल का तेल, घी और शह्द , बन्सलोचन , पीपल का चूर्ण मिलाकर इसे बनाया जाता है /

इसकी सेवनीय मात्रा ६ ग्राम से  लेकर २५ ग्राम तक है / इसे दिन मे दो बार सुबह और शाम को सादे पानी से या रोगानुसार अनुपान से लेना चाहिये /

अनुपान के साथ कनटकारी अवलेह सेवन करने से इसकी आरोग्य कारी शक्ति कई गुना बढ जाती है / जिनको पुरानी खान्सी हो और न ठीक हो रही हो तो अभ्रक भस्म १५० मिलीग्राम, रूदन्ती चूर्ण १ ग्राम, शहद मे मिलाकर पहले सेवन करे बाद में कनटकारी अवलेह ६ ग्राम सादे पानी के साथ सेवन करें / इसे तीन चार बार खाना चाहिये / 

Solanum Nigrum is used since centuries for mucolytic purposes. The expectoration of mucous becomes easy after the use of kantakaryavaleh..

 If this avaleh is used as anupan, it boosts the action of main medicine.

The remedy is indicative in all sorts of repiratory problems and COPD disorders. Kantakaryavaleh have no side effects  and is totaly safe for use of all ages including pregnent womens.

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