दिन: मई 21, 2012

गर्मी से कफ दोष के पीड़ित रोगियों को कैसे राहत मिलती है ? ETG AyurvedaScan studies shows , how KAPHA dosha is cured by PITTA dosha, at the commencement of SUMMER SEASON


CONTACT ; Dr D.B.B.ajpai, Ayurvedic Diagnostician and Inventor & Chief ETG AyurvedaScan Investigator, KANPUR Mobile; 09336238994

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आयुर्वेद चिकित्सा विग्यान बताता है कि किस सीजन में कौन सा दोष कुपित होता है अर्थात बढता है और यह बढे हुये दोष किस सीजन में कम हो जाते हैं /

जाड़ा अथवा ठन्डक के दिन “कफ” दोष को बढाते हैं , ऐसा आयुर्वेद का सिध्धान्त कहता है / कफ दोष चूकि जल और आकाश के योग से मिलकर बना है, इसलिये यह शरीर में ठन्ड अथवा शीत के कारण बढता है और शरीर में कुपित होता है / ठन्ड अथवा शीत का प्रभाव गर्मी से कम होता है अथवा गर्म पदार्थ अथवा गर्म मिजाज के खाद्य पदार्थों के खाने से ठन्डक का प्रभाव शरीर को बचाता है / इसीलिये ठन्डक वाले शीत प्रधान देशों में गर्म पदार्थ खाने का रिवाज है जैसे विभिन्न प्रकार के मान्स खाना या शराब पीना ताकि शरीर को ठन्डक से बचने के लिये जरूरी उष्मा मिलती रहे /

रहन सहन के स्तर पर शरीर को गर्म रखने के लिये रहने के स्थान को गर्म बनाये रखने का रिवाज है / इसी कारण ठन्ड पड़ने वाले मुल्कों मे लोगों के मकान शीत प्रतिरोधी होते हैं / भारत में जहां जहां शीत अधिक पड़ती है जैसे हिमान्चल प्रदेश अथवा उत्तरान्चल प्रदेश अथवा काश्मीर जैसे इलाकों में ठीक वही स्तिथि है जैसी कि ठन्ड पड़ने वाले देशों में है /

फिल हाल बात करते हैं कफ दोष की / लुब्बेलुआब यह है कि ठन्ड से कफ दोष बढता है तो उसकी काट करने के लिये गरंम पदार्थॊ का सेवन , गरम जगह रहने और सोने का इन्तजाम करना होता है जिससे “क्फ” दोष शान्त होकर स्वास्थय को नार्मल कर देता है / लेकिन जिनको बहुत अधिक कफ की तकलीफ हो जाती है जैसे बृध्धावस्था का कफ की बीमारी, तब गर्मी का सीजन आरोग्य प्राप्ति के दॄष्टिकोण से सबसे अच्छा होता है / जितनी ही अधिक गरमी पडेगी कफ सम्बन्धित विकार शान्त होते है / इसका कारण यह है कि ठन्ड से पित्त की गर्मी उतनी नहि हो पाती जितने मे वह शरीर को गर्म रख सके / गर्मी के सीजन में कम्जोर पित्त सबल हो जाता है और इसी कारण से कफ सम्बन्धी रोग दूर हो जाते है /

चूकि रन्जक पित्त दोष-भेद लीवर और तिल्ली को प्रभावित करता है ्तथा इसके साथ ही भ्राजक पित्त सम्पूर्ण शरीर को प्रभावित करता है इससे कफ दोष को शान्त करने मे मदद मिलती है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के डाटा के अध्ध्यन से यह पता चला है कि जब भ्राजक पित्त सामान्य से अधिक हो जाता है और Nervous system में Parietal Brain का measurement कम होता है तो व्यक्ति को “Exposure of Cold” अधिक होता है और उसे Thermal Sensitivity का जिस intensity का mesurement डाटा प्राप्त होता है उसी हिसाब से उसको Cold अथवा Heat का exposure होता है /

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