दिन और रात के २४ घन्टे मे आयुर्वेद के दोषों का कुपित होना ; Aggravation or Dosha effects within 24 hours a day according to Ayurveda


रात और दिन मिलकर २४ घन्टे होते हैं / यह सभी जानते हैं / एक वर्ष में ३६५ दिन होते है जिसे एक सौर वर्ष कहते हैं / एक पूरा का पूरा सौर वर्ष १२ महीनों में सुविधा के हिसाब से बान्ट दिया गया है / भारतीय मास गणना का तरीका अन्ग्रेजी माह की गणना से अलग है / भारतीय मास चैत्र, बैसाख, जेठ, अषाढ, सावन, भान्दों, कुवार, कार्तिक, अगहन, माघ, पूस, फाल्गुन कहे जाते है / एक माह में दो पखवारे होते है जिसे शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष कहा  जाता है / एक पक्ष लगभग १४ या पन्द्रह दिन का होता है / इस पक्ष के दो सप्ताह होते हैं / जो सात दिन का होता है /

वास्तव में इन माहों का निर्माण प्रकृति के स्वभाव को देखते हुये किया गया है / आयुर्वेद इन बारह माहीनों को चौमासा के हिसाब से चार चार महीने में बान्ट देता है / इस प्रकार से जाड़ा, गर्मी और बरसात मुख्य रितुयें होती हैं / लेकिन इन तीन मुख्य रितुओं को विभाजित करके छह रितुओं में आरोग्य के दृष्टिकोण से बान्ट दिया गया है , जिन्हे शिशिर,हेमन्त,बसन्त के नाम से जानते हैं /

आयुर्वेद ने इन रितुओं मे observe किया है कि शरद रितु में कफ का प्रकोप, गर्मी या ग्रीष्म में पित्त का प्रकोप और वर्षा काल में वात का प्रकोप बह्धा: होता है /

इसी प्रकार आयुर्वेद ने यह observe किया कि दिन के २४ घन्टे में कौन सा दोष प्रकुपित होता है /

कफ का प्रकोप सुबह ६ बजे से लेकर दोपहर पहले १० बजे तक रहता है  और इसी प्रकार शाम ६ बजे से लेकर रात १० बजे तक होता है /

पित्त का प्रकोप दोपहर १० बजे से लेकर दिन के २ बजे तक तथा रात १० बजे से लेकर रात २ बजे तक पित्त का कोप बना रहता है /

वात का प्रकोप दिन २ बजे से लेकर शाम ६ बजे तक रहता है और इसी प्रकार रात २ बजे से लेकर सुबह ६ बजे तक कोप रहता है /

अगर आयुर्वेद की बतायी गयी इस timings को आधुनिक वैग्यानिकों द्वारा खोज की गयी Body Clock से correlate करते हैं तो इन दोनों मे बहुत सी समानतायें मिलती हैं / 

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