महीना: जून 2012

Ayurvedic Herbs, which increasing interest in SEXUAL INTERCOURSE


Like others medical systems, prevalent all over globe , Ayurveda have many recorded herbs , duly used in SEXUAL POWER INCREMENT and sexual intercourse interest in males.

The well known fact is that males are in general very easily and sudden excited and be ready for any time for sexual intercourse with females. Therefore it happens most of the time they face the problems of early ejaculation or lose semen before any act of sexual preparation. This is natural fact with the males. That depend upon the functioning of Auto Nervous system of males, in which degree it is strong. The over all function of the male organs is discussed many times in this blog and its posts. Males are quickly excited to see the face , eyes, cuts of mammary gland, border line and elevation of mammary glands and chest of the females and of course their hips and below front easily hypnotic effects to their voice quality and style of walking and movement of bending, walking and this and that . Males see and observes the females qualities and thus they excited all of sudden, which is a natural instinct .

But comparatively Females have no effects of the males observations and  calling. They excited for sex almost late and very slowly and very gradually. When male excited and touches females parts , females have no sexual inclination at this movement. Its a general property they think, because most of the females think that touching of a part  have no means and this is a general practice almost followed by their male partners.

Females have very strong SIXTH SENSE in relation to any SEX related  acts done and offered  by the males, which is natural and god gifted. In a survey done by me, I asked several questions to females in  this context. In reply most of the females accepted that they can segregate and analyses the malice idea of the males , who want to have sex relation with them. If some one have accidentally done any behave , they can also judge it with the intentions. Most of the women accepted that they can easily recognize the idea of the person, how he will behave with them.

Asking about the sexual potency of their male partner or husband , almost all females accepted that they feels anxiety  about the weak sexual power of their husbands, they suggested their husbands that they should increase their sexual  power by taking Aphrodisiac medications.

Anyway AYURVEDA have recognized that maintaining of sex power is essential for a male and also for a female for happier life.

Ayurveda have many formula for this condition. Some of the herbs are mentioning here for treatment of the condition.

1- ASHVAGANDHA   is one of the herb which is used in sexual problems. In my opinion, ASHVAGANDHA should be used in those cases, who are mentally impotent and where problem of Autonomic nervous system is persists

2- SHATAVAR is another herb , which is used in sexual problems. In my opinion this herb should be used in those cases, where it seems that semen is producing in lesser quantity or insufficient semen is producing. Condition of Azoospermia can be treated successfully with this herb

3- KAUNCH is one of the herb, which prevent the early ejaculation and helps to make semen thick. Those persons who have watery semen , this herb make their semen thick and strong thick

4-TALMAKHANA is a herb used in semen anomalies. It prevents early ejaculation and helps to make more and more semen. This herb produce strong desire for sexual acts

5- Vidarikand, Shilajit and many other herbs are used to treat this condition according to the need.

It is better to use these herbs under an expert Ayurvedic Physician, who will decide according to your problem, how much quantity of these herbs should be used.

शोध पत्र का प्रकाशन ; “दवा बाजार” हिन्दी मासिक पत्रिका , जून २०१२ के अन्क में ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की महत्वपूर्ण खोज के परिणामों का आन्कलन प्रकाशित ; Research paper about ETG AyurvedaScan system published in DAVA BAZAR monthly magazine June 2012 issue


ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक द्वारा सिर के बालों के गिरने से पैदा गन्जापन का आयुर्वेदिक मौलिक सिद्धान्तों के द्रूष्टिकोण का पुष्टिकरण ; Confirmation about the trueness of Ayurvedic Fundamentals in BALDNESS Cases based on the studies of ETG AyurvedaScan


आयुर्वेद के मौलिक सिध्धन्त शाश्वत है और यह सिध्धान्त जिनका प्रतिपादन आयुर्वेद की चिकित्सा व्यवस्था के लिये किया गया है आदि काल में भी सत्य थे, आज भी है और आगे भी रहेन्गे /

ETG AyurvedaScan maps and scans of the area of KAPHA DOSHA always shows the Normal configeration of traces r

ETG AyurvedaScan maps and scans of the area of KAPHA DOSHA always shows the Normal configeration of traces r

मैने और मेरे सहयोगी टीम के सदस्य हकीम मोहम्मद शरीफ अन्सारी जी ने ऐसे बहुत से रोगियों का समय बध्ध होकर आबजर्वेशन किया है, जिनके सिर के बाल नदारत होकर गन्जे हो गये थे और उनमें तरह तरह की बनावटॆ पैदा हो गयी थी /

Circulation towards head is an abnormal condition according to ETG AyurvedaScan , which means problems related to MENTAL, INTERNAL BRAIN, EXTERNAL HEAD, EMOTIONAL and PSYCHOLOGICAL DISORDERS etc

Circulation towards head is an abnormal condition according to ETG AyurvedaScan , which means problems related to MENTAL, INTERNAL BRAIN, EXTERNAL HEAD, EMOTIONAL and PSYCHOLOGICAL DISORDERS etc

हमने ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन डाटा आधारित निदान्ग्यानात्मक आबजरवेशन में निम्न बातें पायी हैं ;

१- गन्जापन उन्ही रोगियों में देखने को मिला है जिनको यह निदान किया गया कि उनको Circulation towards Head की तकलीफ है /
२- यह उन रोगियों में कम देखने को मिला जिनका Circulation सामान्य रहा और पैरों की तरफ रहा है /
३- जो रोगी “पित्त” दोष से affected रहे , उनको माथे की ओर यानी फ्रन्टल रीजन से लेकर दोनों कानों की सिर की ओर मिलाती हुयी मिडिल लाइन तक “गन्जापन” की शिकायत रही /
४- जो रोगी ” कफ” दोश से affected रहे , उनको “गन्जापन” सिर के पिछले हिस्से, जिसे चान्द भी कहते है, में देखने को मिला /
५- जो रोगी “वात ” दोष से affected रहे , उनको Forehead के ऊपर बाल एक गुच्छे के रूप में मौजूद रहे हैं / यह बालों के गुच्छे वात दोष की intemsity  की उपस्तिथि के अनुसार साइज में छोटी अथवा बड़ी दिखाई देती है /

BALDNESS areas shown in the sketch for easy understading. Diagnosis of disorders either physical or mental becomes easy  in view of treatment and also for studies and confirmation of PRAKRUTI, TRIDOSHA, TRIDOSHA BHED , SAPTA DHATU  and many other features

BALDNESS areas shown in the sketch for easy understading. Diagnosis of disorders either physical or mental becomes easy in view of treatment and also for studies and confirmation of PRAKRUTI, TRIDOSHA, TRIDOSHA BHED , SAPTA DHATU and many other features

६- भ्राजक पित्त जो पान्च पित्त के भेदों मे से एक है , ऐसे रोगियों मे हमेशा कम इन्टेन्सिटी लेवल पर पाया गया है , यह लेवल २० या ३५  ई०वी० के दर्मियान पाया गया है /

७- स्नेहन कफ , जो कफ दोश का एक भेद है , वह भी बहुत अधिक इन्ट्न्सिटी में पया गया है /

८- व्य़ान वायु , जो बात दोष का एक भेद है, सामान्य से अधिक अवस्था में पाया जाता है /

८- अस्थि धातु, जो सप्त धातुओं में से एक धातु भेद है,  का इन्टेन्सिटी लेवल बहुत हाई लेवल पर पाया गया है /

सारे डाटा लेकर जब ऐसे रोगियों का इलाज किया गया तो उनको गन्जेपन की अवस्था में अवश्य आराम मिला /

हम इस दिशा में और अधिक रिसर्च कार्य कर रहे हैं , ताकि आयुर्वेद के दृष्टिकोण से र ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन आधारित डाटा के सम्मिलित सहयोग से  Baldness के इलाज में अपेक्षित सफलता मिल सके /

अश्वगन्धा पाक ; Ashvagandha Pak ; Ayurvedic Aphrodisiac


आयुर्वेद की अवलेह अथवा प्राश अथवा पाक प्रक्रिया द्वारा बनाये जाने वाले औषधियों की कल्पना का यह एक उतकृष्ट योग है /

अश्वगन्धा जिसे लेटिन में Withania somniferra कहते हैं, एक ऐसी भारतीय जड़ी-बूटी है जो सदियों से शरीर को पुष्ट करने, वीर्य उत्पादन करने, देह के दर्द, मान्स पेशियों के दर्द और जोड़ों के दर्द को दूर करने में बनाये जाने वाले योगों में मिलाकर उपयोग की जा रही है /

ऐसा ही एक शास्त्रोक्त योग है पाक कल्पना का, जिसे “अश्वगन्धा पाक” के नाम से ्जानते हैं / इसे बनाने के लिये निम्न प्रकार की प्रक्रिया को अपनाते हैं /

४०० ग्राम अश्वगन्धा चूर्ण को ६ किलो दूध में पकाते हैं / जब दूध गाढा हो जाये तब इसमें दाल्चीनी, इलायची, तेज्पत्ता और नागकेशर का चूर्ण १२ ग्राम, जायफल, केशर, बन्सलोचन, मोचरस, जाटामान्सी, चन्दन, खैरसार, जावित्री, पीपलामूल, लौन्ग, कनकोल, पाढ, अखरोट की गिरी, भिलावा की मीन्गी, सिन्घाडा, गोखरू, रस सिन्दूर, अभ्रक भस्म, नाग भस्म, वन्ग भस्म, लौह भस्म प्रत्येक ६ ग्राम लेकर चूर्ण बना लें और उपरोक्त गाढे किये गये दूध में मिला दें / साथ ही ३ किलो शक्कर मिलाकर धीमी और मन्द आन्च पर रखकर रबड़ी जैसा गाढा होने तक पका कर रख लें /

इस तरह से बनाये गये पाक को अश्वगन्धा पाक कहते हैं /

यह खाने में बहुत स्वादिष्ट होता है / इसको एक या दो चाय चम्मच भर लेकर सुबह शाम दूध या शहद या सादे पानी के साथ सेवन करना चाहिये /

जिन लोगों को

[१] शुक्र विकार हों यथा हस्त मैथुन करके अपना शरीर बर्बाद कर चुके हों
[२] अत्यधिक वीर्य क्षय के कारण दुर्बल हो गये हों
[३] अत्यधिक स्वप्न दोष के कारण मानसिक अथवा शारीरिक स्वास्थ्य बर्बाद कर चुके हों
[४] वीर्य की कमी से सम्भोग करने मे सक्षम न हों
[५] अन्य कोई वीर्य दोष हो गये हों

इसके अलावा यह Arthritis, joints pain, musculoskeletal, neurological problems की बहुत अच्छी दवा भी है / जिन्हे जोड़ों के दर्द हो खास कर बूढे हो चुके लोगों के लिये , उन्हे यह पाक बहुत लाभ दायक है /

इस पाक का स्वाद jam जैसा मीठा होता है , इसलिये इस पाक को सेन्की हुयी Bread slice पर पतला पतला लगाकर नाश्ते में खा सकते है और ऊपर से चाय या दूध या पान का सेवन कर सकते हैं /