महीना: जुलाई 2012

गुर्दों का डायबिटीज बीमारी के कारण कार्य करने मे असफलता की दिशा ; Failure of Kidney Normal functions due to Diabetes


डायबिटीज के रोगियों में गुर्दों की यानी किडनी की स्तिथि क्या और कैसे खराब होती है , इसका सटीक जवाब तो नही दिया जा सकता लेकिन मानव क्रिया शारीर के अध्धयन से इस बात का अब्दाजा जरुर लगा सकते हैं की किडनी कैसे खराब हो सकती है मधुमेह् के कारण से /

पहले समझ लें की मानव शारीर में किडनी का क्या काम है ? किडनी का मुख्य काम शरीर के रक्त को छानना है यानी जो भी गन्दगी शारीर के अन्दर मेटाबालिज्म क्रिया की वजह से खून के अन्दर गन्दगी पैदा कराती है उस गन्दगी को किडनी छान देती है और तब शुध्ध किया गया खून हृदय की ओर पहुचा दिया जाता है जहां आक्सीजन मिलकर रक्त शरीर के सेलों तक पहुचा दिया जाता है /

renal system ; गुर्दों की स्तिथि शरीर में इस तरह से होती है

खून में शक्कर  यानी रक्त सूगर के कारण शरीर की अन्गों की रिपेयरिन्ग कमजोर हो जाती है और इन्फ्लेमेटरी कन्डीशन पैदा होने के कारण सेलूलर डैमेज पैदा हो जाता है जिसके कारण गुर्दॊं में रक्त छाननेवाली छलनी जिसे नेफ्रान कहते है , की स्तिथि नेफ्राइटिस में बदल जाती है / बस यहीं से गुर्दों की कार्य क्षमता कमजोर होने लगती है / क्षति ग्रस्त अन्ग डायबिटीज के कारण रिपेयर नही हो पाते / क्योंकि डायबिटीज के बारे मे कहा गया है कि अगर शरीर में एक हजार बीमारियों की मौजूदगी है और उसमे से एक “डायबिटीज” है  तो सबसे पहले डायबिटीज को ठीक करो / इससे यही निष्कर्ष निकलता है कि बिना डायबिटीज को कन्ट्रोल किये दूसरी बीमारियां ठीक नही हो सकती हैं /

अब यह साफ है कि अगर डायबिटीज को कन्ट्रोल नही किया गया तो कीडनी inflamed होकर खराब होने लगेगी और फिर इस अन्ग में तरह तरह की बीमारियां पैदा हो जायेन्गी /

गुर्दा अगर बचाना है तो हमेशा डायबिटीज को कन्ट्रोल करो /

ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन आधारित इलाज से डायबिटीज ठीक हो जाती है और डायबिटीज के साथ पैदा होने वाली अन्य सभी बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं , चाहे उस बीमारी का कोई भी नाम डाक्टरों नें बताया हो  या declare किया हो   और बीमारियों के नाम चाहे कैसा भी भयावह हो  और डर पैदा करने वाले हों / आयुर्वेद की इस आधुनिक तकनीक से अवश्य लाभ होता है //

मारत में रिसर्च करने वालों की स्तिथि ; Fate of RESEARCHERS in INDIA


भारत देश में रिसर्च करने वालों का क्या हाल होता है ? इसका प्रत्यक्ष हाल मुझसे ज्यादा और कौन जान सकता है , आइये आप भी इन सबका मुलाहजा फरमाइये /

उपरोक्त पत्र को देखिये , यह मेरे  १८ साल की मेहनत के बाद मिला हुया परिणाम है /

भारत सरकार के कई  विभागों और अनुसन्धान सन्सथानों में ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का परीक्षण किया जा  चुका  है , इसकी Pilot Study  भी की जा चुकी है /  मुझे इसकी मशीन बनानी है , जिसके लिये मैने National Innovation Foundation  को मदद करने के लिये लिखा था, जिसका मजमून देखिये जो ऊपर वाले पत्र में लिखा गया है /

यह उत्तर देखकर मै हैरान हूं और सोचता हू कि अगर मै कहीं “महा मूर्ख ” या “झोला छाप ” या  Quack Doctor  या ” गधा डाक्टर” या “घोड़ा डाक्टर”  होता , तो सबसे अच्छा और बेहतर होता / मै तो अल्प सन्ख्यक मुसलमान अथवा क्रिश्चियन अथवा जैन आदि अल्प सन्ख्यक समुदाय से भी नही हूं /  मै पिछड़ा , अति पिछड़ा , शेड्य़ूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब जैसे वर्ग से भी  नही हूं / मै सवर्ण हूं इसलिये मेरे लिये इस देश में कोई सुविधा रिसर्च कार्य और रिसर्च के विकास के लिये नही है ???????भारत सरकार को ऐसे ही सन्ग्या वाले और वर्ग भेद और वर्ग विभेद वाले वैग्यानिकों की जरूरत भी है , जो अधिक से अधिक  उनके वोट बैन्क बनें /

वास्तविकता यह है कि मै अपने आपको  आयुर्वेद और होम्योपैथी के प्रैक्टीशनर के अलावा प्राचीन और आधुनिक चिकित्सा विग्यान का छात्र और विद्यार्थी के अलावा अपने आप को और कुछ ज्यादा नही समझता , लेकिन लोग मुझे बहुत निकृष्ठ कोटि का वैग्यानिक भी मानते है /  हमारे जैसे बहुत छोटे किस्म के वैग्यानिकों का जब यह हाल है कि बिना किसी सहायता के अपने व्यक्तिगत प्रयासॊ से जितना भी किया और किन किन मुश्किलों को पार करके किया और मन में यह विचार कि इसकी मशीन बनी तो सारे विश्व के गरीब से लेकर अमीर तक इसका फायदा उठायेन्गे , ऐसा मै “वसुधैव कुटुम्बकम” की भवना कि सारा विश्व या इस धरती पर रहने वाले सभी लोग मेरा परिवार है  , इस आविष्कार का सारी दुनियां फायदा उठायेगी , यह मै विचार करता हूं /

लेकिन हालात दूर दूर तक पाजिटिव नजर नही आते क्योंकि मेरे पास पैसे और साधन दोनों ही नही हैं , ऐसे में न तो ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की मशीन बन पायेगी और न ही इसका फायदा कोई उठा पयेगा / मै जैसी मुश्किलें झेल रहा हूं उससे तो मै अन्दाजा लगा सकता  हू , उन  वैग्यानिकों के बारे में जो मुझसे ज्यादा हज़ार गुना बेहतर काम करना चाहते हैं लेकिन उनको मौका कोई नही  मिलता  है और मौका भी कोई नही देता है ??????

R.T.I. – Right to Information under cover, any person can get information concerned about E.T.G. AyurvedaScan Technology from Government of India , New Delhi


R.T.I. – Right to Information under cover, any person can get information about E.T.G. AyurvedaScan Technology from below mentioned Government of India Offices, concerns to Examination & Trial & Pilot studies & Technical verification & Medical Scientific evaluation & Approval & Accreditation & Recognition including all other ETG AyurvedaScan concerned information, which any body desirous to procure, should apply with reference to ;

1- Department of AYUSH –Ayurveda,Yoga & Naturecure, Unani,Siddha,Homoeopathy,
Ministry of Health and Family Welfare, Government of India, Opposite Parliament gate no. 3, Indian Red Cross Society Building, Red Cross Road, NEW DELHI


2- Central Council for Research in Ayurveda and Sidhdha
Ministry of Health and Family Welfare, Government of India, Jawahar Lal Neharu Anusandhan Bhavan, 61-64, Janak Puri, NEW DELHI


3- Central Research Institute Ayurveda, Ministry of Health and Family Welfare,
Government of India, Road No; 66, Panjabi Bagh, NEW DELHI

4- National Innovation Foundation, Ministry of Science and Technology, Gevernment of India, Satellite town, Prem Chand Nagar Road, Jodhapur Tekara, AHAMADABAD , Gujarat

भारत सरकार , नई दिल्ली द्वारा ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक का परीक्षण  और इस तकनीक को जान्चने का सिलसिला सन २००४ से लेकर २००९ तक सिल्सिलेवार आवश्यकतानुसार सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा  किया जाता रहा है / तकनीक से सम्बन्धित बहुत सी बातें PATENT  के दायरे में आती हैं  जिन्हे सार्वजनिक नही किया जा सकता है /

विश्व का कोई भी व्यक्ति या नागरिक  या किसी भी देश का निवासी  ऊपर बताये गये विभागों से ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक से सम्बन्धित सभी तरह की सूचनायें निर्धारित शुल्क अदा करके प्राप्त कर सकता है / Interested person should apply directly to the concerned department.

होम्योपैथी में रिसर्च की हालत बहुत खराब Very poor condition of Homoeopathic Research


भारत हो या विश्व का कोई भी हिस्सा , जहां भी होम्योपैथी चिकित्सा पध्ध्यति द्वारा चिकित्सा की जा रही है उन स्थानों पर कोई भी उल्लेखनीय होम्योपैथी का चिकित्सा शोध हुआ हो , जो डाकटरों की क्लीनिक तक पहुचा हो , ऐसा मेरी निगाहों में कोई भी नही आया है यह शर्म करने की बात है / होम्योपैथी के बुध्धिजीवियों के लिये, होम्योपैथी के सरकार में बैठे हुये अधिकारियों और सरकार चलानेवाले ज्नता के प्रतिनिधियों के लिये न्ही / अब युग इस बात का है कि कोई भी विग्यान आगे तभी बढ सकता है, जब उसमें निरन्तर शोध होते रहे हों और उस शोध कार्य में निरन्तर नये नये शोध होकर बहुत कुछ जोड़ा जाता रहा हो /

वर्तमान में कुच होम्योपथी के चिकित्सकों ने अपने बल बूते पर बिना किसी की बैसाखी लेकर और उधार की बैसाखी लिये बगैर अपने कन्धे पर सारा बोझ उठाते हुये कुछ achievement जरूर किये हैं , जिनमें कहा जा सकता है कि कुछ न तो जरूर  किया गया / इसमे यही कहा जा सकता कि यह सारे प्रयास एक सीमित दायरे में ही बन्ध कर रह गये जब तक किये गये research  का फायदा मरीजों तक नही पहुचता और  रोगी को फायदा जब तक  कारगर और प्रभावी तरीके से नही मिलता तब तक होम्योपैथी चिकित्सा विग्यान की बहुत बुरी हालत रहेगि / आज की आवश्यकत यह है कि जैसे आधुनिक चिकित्सा विग्यान में शोध कार्य लगातार किये जा रहे है, जब तक स तर्ज़ पर होम्योपैथी मं शोध कार्य नही किये जयेन्गे तब तक कुच नही होगा / मैने १९७० के दशक में <strong>BLOOD FLOCCULATION TEST FOR IDENTIFICATION OF HOMOEOPATHIC REMEDIES</strong> टेस्ट करना शुरू किया था और यह कई साल तक अपनी क्ळीनिक में करता रहा / इसके लिये मुझे एक छोटी सी लैबोरेटरी बनानी पड़ी /मैने इसके लिये  अपना पैसा खर्च किया /

इस टेस्ट के लिये मरीज का Intravenous रक्त लगभग २.५ मिलीळीटर निकालकर  centrifuge  करते है / से्न्टरीफ्यूज होने के बाद रक्त का थक्का और सिरम दोनों ही अलग अलग हो जाते हैं / अलग किये गये सिरम में एक विशेश प्रकार के develop किये गये liquid  को एक निश्चित रेशियो मेम मिलाते है / दूसरी तरफ टेस्ट की जाने वाली होमियोपैथिक दवाओं को एक विशेष स्केल में बनाते हैं जो मरीज के सिरम और दवा की पावर से मैच कर जाये / एक निश्चित माप की Test tube में सिरम और दवा का मिश्रण मिलाकर एक निश्चित तापकम पर incubator में रखते हैं /२४ घटे बाद इसकी रीडिन्ग करते हैं / Test Tube मे देखने में रुई जैसी तलछट  पड़ जाती है , इसे read  कर लेते है कि तलछट किस दवा में कितनी intensity level की है / इस प्रकार से match की गयी दवा को देने से मरीज को अवश्य फायदा होता था / इलाज विश्वास और आस्था के साथ हो जाता था /

लेकिन प्रोत्साहन के अभाव में मै इसे अधिक दिन तक लगातार जारी नही कर सका और बाद में आयुर्वेद की तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के लिये शोध कार्य में समय देने लगा /हलाकि मैने Homoeopathy  के लिये इसी scanning and mapping का सहारा लेकर  ELECTRO HOMOEO GRAPHY ; EHG HomoeopathyScan तकनीक का आविष्कार कर दिया है  और इसकी research practice  हमारे केन्द्र मे बराबर चल रही है और इस तकनीक को और अधिक foolproof बनाने के लिये कार्य चल रहा है और हमारी कोशिश है कि एक बेहतर होम्योपैथी के लिये परीक्षण तकनीक को विकस्त करके सारी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाये / ऐसा नही है कि होम्योपैथी चिकित्सा  विग्यान के लिये शोध के लिये कोई तैयार नही है / विडम्बना यह है कि जो शोध करना चाहते है उनको कोई facility नही मिलती और न ही उनको शोध के लिये कोई प्रोत्साहन,  इतना धन भी नही होता कि शोध  कार्य कर  सके / ऐसे लोगो के मन में होम्योपैथी में रिसर्च करने की बहुत तमन्ना है /

मै एक उदाहरण देता हूं मुम्बई के डा० जवाहर शाह का, जिन्होने HOMPATH  Homoeopathy Software  का निर्माण किया / मै और डा० जवाहर शाह एक ही गुरू के चेले है / मै मुम्बई में Institute of Clinical Research के summer school मे सन १९८० और १९८१ में डा० जवाहर शाह का batch mate रहा हूं / डा० एम०एल० धावड़े हमारे Director थे / मेरे बैच में पूने के डा० फन्सालकर, जिनके साथ मै चौपाटी जूहू  में कई बार जाकर भेल पूड़ी खा चुका हूं / मेरे बैच में डा० किशोर मेहता, डा० विश्पाला पार्थ सारथी आदि विद्यार्थी थे/ नागपुर के डा० शिरीष करनाड मेरे  Guide और इन्स्ट्रक्टर थे और जितना भी शोध का काम था मै उनके अन्डर में रहक्रर करता था / Institute of Clinical Research की पूरी टीम और जितने भी पढने वाले और पढाने वाले दोनों हॊ बहुत मेहनत और दिलचस्पी के होम्योपैथी चिकित्सा विग्यान के लिये research work  बिना किसी gain  या बिना किसी appreciation  या बिना किसी स्वार्थ के कर रहे थे / डा० के० एन० कसाद जैसे दिग्गज Allopathy  के चिकित्सक कैन्सर जैसी बीमारी के लिये होम्योपैथी की दवा Misteleto  के ऊपर काम कर रहे थे /

आज होम्योपैथी के चिकित्सकों को देखता हू तो वे सिवाय पालिटिक्स के और कुछ करना नही जानते हैं /

“दवा बाज़ार” मासिक पत्रिका जुलाई २०१२ के अन्क में ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक पर प्रकाशित लेख ; Research paper published in DAVABAZAR monthly magazine July, 2012 issue on ETG AyurvedaScan





Details of the DAVABAZAR monthly magazine ;

DAVABAZAR  monthly magazine

Editor; Shri Kuwar Devendra Pratap Singh

Office; 344, Purawa Karehava,

P.S. Kareli,

ALLAHABAD

PIN; 211012

Mobile; o9454781994 / 09455768904

E-mail; dawabazarmagazine@gmail.com

Thanks READERS ; Ayurveda, Ayushmen : E.T.G. AyurvedaScan have crossed over 500000 {five Lac} hits today on 19th July 2012


Blog AYURVEDA : AYUSHMEN : ETG AyurvedaScan have crossed 500000 – Five Lac- hits on 19 -07- 2012.

This is the beliefs of the readers of this blog that have popularized all over the world. This achievement is totally based on the HONESTY and correct presentation of the subject matters related to health in true sense, which is our policy.

We don’t try to misguide any one and what we have truly confirmed each and every statements or presentation as correct as we understand.

We thanks our visitors , who likes this blog .

Thanks

Dr DBBajpai
Ayurvedic Dignostician & Chief ETG AyurvedaScan Investigator
BMS [Lucknow]    Ayurvedacharya [Delhi]  Diplom-hom[Germany Munchen] MICR [Mumbai]
M.D. [Medicine] Ph.D. [kriya sharir- Human Physiology] C.R.C. [Cardio-vascular]
and etc etc

पित्त की थैली की बीमारियां ; Gall Bladder anomalies



आयुर्वेद मे पित्त की थैली को यानी पित्ताशय को पित्त भेद का एक भेद पाचक पित्त के अन्तर्गत माना है / वैसे पाचक पित्त दो अन्गों को मिलकर बनाया अथवा मान्य किया गया है जिसमें पिताशय Gall Bladder के अलावा पैन्क्रियाज यानी क्लोम अथवा तिल यानी Pancreas दोनों ही अन्ग शामिल किये गये हैं / “पाचक पित्त” भेद इन दोनों की कार्य प्राणाली को सहायक मानकर ्प्राचीन आचार्यों ने शायद इसकी महत्ता को देखते हुये और समझते हुये , नाम सन्ग्या दी गयी है /

इस नाम सन्ग्या के पीछे के कारण क्या हो सकते हैं ? यह समझने के लिये अगर आधुनिक चिकित्सा विग्यान की फीजियोलाजी physiology और आयुर्वेद की निदान ग्यान की पहली और विश्व की एकदम अकेली परीक्षण विधि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की फाइन्डिन्ग्स के साथ अध्य्यन करें तो बहुत कुछ आयुर्वेद के मनिषियों के ग्यान की पुष्टि हो सकती है /

आधुनिक मेडिकल साइन्स कहता है कि Gall Bladder और pancreas ये दोनों ही पाचन सन्सथान के दो अलग अलग अन्ग हैं / जब ये दो अलग अलग अन्ग है, ऐसा मान लिया गया है , तो इनके कार्य भी अलग अलग है , यह भी आधुनिक काल के चिकित्सा विग्यानियो द्वारा अध्ध्यनित किया जा चुका है /

पित्ताशय के कामों का अध्धयन बताता है कि इसका श्राव या Gall bladder juice भोजन के साथ खायी गयी सभी प्रकार की चर्बी को soapify बनाता है यानी पित्त का रस खाये गये भोजन  मे मिलकर न ह्जम होने वाली चर्बी को इतना पतला करके मुलायम बना देता है ताकि उसकी स्तिथि हजम होने लायक बन जाये /

जबकि पैन्क्रियाज का काम तुलनात्मक तौर पर तीन स्तर का होता है /

आयुर्वेद के शरीर रचना विग्यान और शरीर क्रिया विग्यान का अध्ध्यन करने वाले मनीषियों ने इन दोनों अन्गों की अन्तिम स्तिथि को देखकर और परख कर यह निष्कर्ष निकाला होगा कि इन दोनों अन्गों के अन्तिम छोर एक ही जगह  बहुत थोड़े से अन्तराल में स्तिथि हैं और इसीलिये शायद इनका काम पाचन क्रिया में सहयता देना होगा, ऐसा समझ कर इन दोनों अन्गों को एक में मिलाकर यह तय किया गया होगा कि “पाचक पित्त भेद” सन्ग्या देना सर्वथा उचित होगा / इसी कारण ” पाचक पित्त को पित्त भेद” कहा जाता है/

पित्त की थैली की मुख्य बीमारियां जो आयुर्वेदिक और यूनानी और होम्योपैथी की औषधि करने या चिकित्सा करने से अवश्य ठीक हो जाती है;

१- Sludge deposits  या तलछट का जमना

२- पित्त की थैली का सन्क्रमण

३- पित्त की थैली की दीवालों का मोटा हो जाना

४- पित्त की थैली में  सूजन आ जाना

५- पित्त की थैली का सिकुड़ जाना

६- पित्त की थैली का छोटा हो जाना

७- पित्त की थैली का दर्द करना

८- पित्त की थैली में पथरी पड़ना या Gall Bladder stone होना जिनका साइज अधिकतम ८ मिलीमीटर तक हो , इतनी बड़ी पथरी घुलकर और छोटी होकर निकल जाती है /

अधिक बड़े साइज की पथरी नही निकल पाती है /इसके अलावा पथरी अगर चर्बी यानी कोलेस्टेराल की बनी होगी तो ऐसी पथरी बहुत सख्त होती है और गल नही पाती / इसलिये इसका अन्तिम उपाय आपरेशन करा लेना ही उचित होता है /

इसके अलावा पित्त की थैली से सम्बन्धित अन्य बहुत सी अवस्थायें तथा समस्याये या बीमारिया होती हैं जिनके इलाज के लिये आयुर्वेदिक चिकित्सक या अपनी रुचि के किसी भी चिकित्सक से परामर्श करके औषधियों के सेवन से अवश्य आराम मिल  जाती है /

आपरेशन कराना एक अन्तिम विकल्प reserve कर रख लेना चाहिये/ इससे पहले दवाओं का उपयोग करके और थोड़ा कष्ट उठाकर इलाज करने से पथरी अवश्य ठीक होती है /

Gall Bladder शरीर का एक बहुत उपयोगी अन्ग है / इसके आपरेशन करा लेने के बाद प्राय: लोगों को पाचन समबन्धि तथा दूसरी अन्य व्याधियां हो जाती हैं, इसलिये जहां तक सम्भव हो इसे बचाने का प्रयास करें /

LIVER DONOR patient’s ETG AyurvedaScan mapping and scanning ; लीवर प्रत्यारोपण के लिये लीवर का हिस्सा दान करने वाले मरीज की मैपिन्ग और स्कैनिन्ग


On 12th July 2012 , we received 26 years old ,  a patient of LIVER Donor for transplanting purposes, donated his part of  Liver to his nearest relative last year  in September 2011.  While I was going to record the traces, I saw cut  marks on abdomen, but I did not ask  the patient , what happened to him earlier. When I recorded traces from torso organs, I noticed that in traces Gall Bladder and complete Liver is not recorded well and some thing is wrong with the patient , which is not clear. This was unusual, rare and strange recording for me. It never happens earlier since birth of ETG AyurvedaScan before over 26 years.

I called my colleague and  patient’s relative and asked them that “patient’s Gall Bladder is seems to be absent and part of Liver is not well recorded, what happened to patient, whether he have got any serious problem like GB Stone or Liver anomalies, where immediate removal of  the Liver part was decided by Surgeons ?”

In reply the relatives narrated all about the patient, which I have earlier  described.

Patient have problem of Mild ALLERGIC REACTIONS, Colitis, Bradycardia, Skin eruptions and Circulation towards head and Baldness etc etc.

Observe the traces of the patient.

Discussion about recorded traces;

Among the several recorded traces , we selected few for the analysis. Traces are widen in their horizontal and vertical degree of bending both positive and negative deflection. some waves are absent and their positive and negative deflection level is very low and their amplitude is not up to the mark level.

In absence of Gall badder . ETG AyurvedaScan traces shows  legitimately absence or curved “e” and “s” waves with “klmno”  waves. The Liver area traces shows an irregular gap of the left side. This leads that Left Lobe might possible not present.

This is the first ever case of  LIVER DONATION, which I recorded, earlier we have recorded case of Kidney transplant, knee joint replacements and several other Orthopedic disorders etc.

नाड़ी-परीक्षण का माया जाल ; नाड़ी परीक्षण का दावा करने वाले वैद्य या आयुर्वेदिक चिकित्सक अपने मरीजों को बेवकूफ बनाते हैं ; Vaidya befooling patient in view of NARI-PARIKSHAN


अक्सर लोग और मरीज बताते हैं कि उस शहर में या इस शहर में या उस कस्बे में या उस गांव में बहुत बड़े वैध हैं ’ जो नाड़ी परिक्शण में बहुत माहिर हैं और नब्ज को पकड़्ते ही तोते की तरह बोलने लगते है कि उनको क्या क्या बीमारी है ? वैद्य जी यहां तक बता देते हैं कि आपने कल क्या खाया था और आगे क्या खाना चाहते है या आगे आपकी खाने की क्या इच्छा होगी ? यह सब वैद्य जी इस तरह बताते हैं जैसे चिकित्सक महोदय वैद्य न होकर कोई महान ग्यानी ध्यानी हों /

मै ऐसे चमत्कारिक गुण रखने वाले और सटीक नाड़ी परीक्षण करने वाले वैद्य की तलाश में हमेशा रहता हूं / लेकिन मुझे पिछले ५० साल से कोई भी नाड़ी वैद्य नही मिला, जो पूरी तरह से सही हो और इस तरह के सटीक और सही दावों पर खरा उतरता हो जैसा कि आयुर्वेद मे बताया गया है /

नाड़ी विग्यान का अध्ध्यन और नाड़ी का परिक्षण करने की विधि का मैने बहुत गहरायी से practice मनोयोग के साथ किया है / आज भी बहुत मनोयोग के साथ कर रहा हूं / अब तो आयुर्वेद की नई तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्वारा नाड़ी परिक्शण की सभी बातें और नाड़ी विग्यान का सभी ग्यात नप कर उसकी मौजूद intensity के साथ हो जाता है, ऐसी गूढ बातों का ग्यान ढून्ड़ने का प्रयास बराबर चलता रहता है / इन्जीनियरिन्ग के बहुत से छात्र नाड़ी परिक्षण यन्त्र बनाने का प्रयास कर रहे हैं , उनको मै बताता हूं कि अपने यन्त्र में वे यह परिवर्तन करे जो दूसरे नही बना पाये है और इसे मेरे बताये गये ideas को लेकर यन्त्र को इस तरह से बनायेन्गे तो जबर दस्त कामयाबी मिलेगी और यह विश्व का सर्वोत्तम नाड़ी यन्त्र बन जायेगा / आई०आई०टी० कानपुर के छात्र तथा कुछ दूसरे इन्जीनियरिन्ग सन्स्थानों के छात्र ऐसे प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं /

मुझको जहां भी लोगों ने या मरीजों ने बताया कि अमुक स्थान पर नाड़ी परीक्शन करने वाले बहुत माहिर और expert वैद्य है, मै ऐसे expert से मिलने के लिये उनके पास दूर दूर तक की यात्रा करके और अपना समय बरबाद करके वहां जाता हूं ,वैद्य जी के ग्यान को परखता हूं, लेकिन जैसा दावा मरीजों ने या लोगों ने किया और बड़ी बड़ी बातें की वे सब झूठ और झूठ का पुलिन्दा निकली और कुछ भी ऐसा नही था जो चमत्कारिक लगे / बताये गये दावे की हकीकत सही नही था / सब कुछ गलत निकला / बाद में मैने उन सब मरीजों और अन्य लोगों की तलाश की जो इस तरह का भ्रामक प्रचार करते हुये मिले थे / मैने उनको फटकारा और ताकीद की कि इस तरह का दावा और प्रचार न करें /

दर असल मेरी आदत है कि जब कोई कहता है कि फलाने डाक्टर ने इलाज करके मरीज को  यह चमत्कार दिखाया या वह चमत्कार , इसे  मै केवल सुन लेता हूं और अपनी कोई प्रतिक्रिया नही व्यक्त करता / इसका कारण यह है कि बताने वाले सिर्फ लफ्फाजी करते है और कोई भी व्यक्ति बह्त गम्भीर नही होता है, यह हम सब देश वासियों  की मानसिक आदत है / एक अच्छे श्रोता होने के नाते मै मरीजों की ऐसी बकवास सुनता रहता हूं जिसमे कुछ भी वास्तविक नही होता / लेकिन जब मै इन सब दावों को वैग्यानिक परीक्षण की कसौटी पर कसता हू तो बहुत बेरहमी के साथ दावों को पुष्ट करने के लिये वह सभी तकनीक अपनाता हू जो दावों कि सत्यता को परखने  के लिये जरूरी होते है / ऐसे कड़े परिक्षणों की स्तिथि में नड़ी विग्यान के दवे करने वाले सभी खोखले निकलते हैं /

इसके पीछे की मानसिकता यह है  कि लोग जिस वैद्य के पास नाड़ी दिखाने के लिये आते हैं , वे उस वैद्य को नीचा दिखाने के लिये एक बड़ी लकीर खींचते हैं और super-seedकरने की कोशिश करते हैं कि फलां वैद्य तो ऐसे देख कर बताते थे कि क्या मर्ज है / यह सब वैद्यों की कमजोरी की नस पकड़ कर मरीज करते हैं /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के परीक्षण के बाद यह सब धान्धली नही चलती है /

हकीकत यह है कि नाड़ी परीक्षण करना वैद्य की नौटन्की के अलावा और कुछ भी नही है / आयुर्वेद चिकित्सक इसमें कोई कुछ खास करता हो , ऐसा कुछ भी नही है / ये सब आयुर्वेद में बतायी गयी बातों को समझ कर केवल बताते रहते हैं / इसे कोई भी कर सकता है, यदि उसे आयुर्वेद के निदान ग्यान प्रकृति, दोष आदि के बारे में अध्ध्यन हो / हां, यह जरूरी है कि आयुर्वेद चिकित्सक बहुत घाघ किस्म का हो, बातों मे बहुत चतुर हो,दूसरे को बेवकूफ बनाने मे बहुत माहिर हो और शास्त्र का ग्यान हो या न हो , लेकिन परिस्तिथियों को कैसे अपने अनुकूल बना ले यह गुण जरूर होने चाहिये /

सत्य तो यह है कि सभी 96 percent महिलायें “पित्त” प्रकृति की होती हैं,बाकी की 04 percent चार प्रतिशत महिलाये मिश्रित प्रकृति की होती हैं,ऐसा ही पुरुषों के साथ है , ९६ प्रतिशत पुरुष “कफ” प्रकृति के होते हैं और चार प्रतिशत मिश्रित प्रकृति के होते हैं/ इसमें दूसरे दोष की मिश्रित intensity कितनी होगी इसे ब्यक्ति या जिसका परीक्षण किया जा रहा है उसे देखने से ही पता चल पाता है /

असली नाड़ी परीक्षण Radial Pulse examination से केवल  [१] व्यति जीवित है या मर चुका है [२] प्रति मिनट नाड़ी  की चाल कितनी है [३] नाड़ी की गति कैसी है [४] नाड़ी का प्रेशर कितना है [५] आयुर्वेद के हिसाब से नाड़ी परीक्षित करने के लिये उनगलियों का दबाव रेडियल पल्स पर देने से  किस अन्गुली के नीचे throbbing sensation  अधिक या कम महसूस होता है, इतना ही ग्यात कर सकते हैं / इसके अलावा अगर कोई दावा करता है तो सिवाय बेवकूफ बनाने के और कुछ नही करता /


मरीज को गुमराह और गलत सलाह देने से बचें ; Do not misguide or wrong advise to patient


पिछले कुछ सालों से ऐसा देखने में आया है कि बहुत से चिकित्सक मरीज को उनकी बीमारी के बारे मे सही जानकारी नही देते और अगर देते भी हैं तो गुमराह करने वाली जानकारी , जिससे मरीज का भला होने की बजाय उसका नुकसान ही अधिक होता है /

ऐसे सैकड़ों उदाहरण है जिन्हे मैने चिन्हित किया है कि उन मरीजों की चिकित्सा करने वाले चिकित्सकों ने उनको अपने फायदे के लिये गुमराह किया और सही सलाह नही दी / इन सब केसेस में ऐसा नही है कि छोटे स्तर के चिकित्सक गण ही शामिल हो बल्कि ऐसा भी देखने मे आया है कि शीर्ष स्तर के गण मान्य चिकित्सक, जिनको समझा जाता है कि वे ईमान्दारी से सलाह देते है, ये भी शामिल हैं /

हलान्कि सलाह देना और उसको मान लेना कि सलाह सही है या गलत , यह depend  करता है कि जिसे सलाह दी जा रही है उसका क्या reaction है  और वह दी जाने वाली सलाह को किस स्वरूप में देखता है /

मै एक वास्तविक उदाहरण देता हूं / मेरे पास बहुत से उदाहरण हैं, जिन्हें मै ्समय समय पर पेश करने की कोशिश  करून्गा / मेरा एक कर्मचारी जिसकी उमर लगभग ३७ साल है , मेरे दवाखाने का सारा कम सम्भालता रहा है / बज़ार से दवायें लाना, उनको कूटना पीसना, साफ सफाई रखना, देखभाल, घर के बाहर का काम यथा मुकदमों की पैरवी करना और रिश्तेदारों के यहा जाकर उनको सामान देना , मेरे साथ मेरा ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की मशीन और अन्य accessories  लेकर टूर पर जाना आदि काम शामिल रहे है / एक तरह से वह मेरा हाथ रहा है / मैने उसको अपने एक अन्य मकान में सेवा करने की एवज में मुफ्त रहने की जगह मुहैया करा दी है / पिछले साल यही कर्मचारी एक मन्जिला छज्जे पर खड़ा था, अचानक वह imbalance  होने से नीचे जमीन पर गिर ग्या / आसपास के लोग उसे उठाकर चारपाई पर लिटा दिया और दवा करने लगे / उसका पाखाना पेशाब रुक गया / यह स्तिथि उसकी थी / मुझे इस घटना के बारे मे एक सप्ताह बाद पता चला, जब उसे तकलीफ हुयी / इससे पहले मै अनभिग्य था कि वह कहां है और क्या कर रहा है / अक्सर वह १० या १५ दिनों के लिये नही आता था, क्यों कि कभी कभी मै स्वयम बाहर चला जाता हू /

मुझे मोबाइल फोन से मेरे करमचारी ने आठवें दिन  सारा वकया बताया और कहा कि मुझे किस तरह की तकलीफ है / मैने कर्मचारी के घरवाले घबारये कि क्या किया जाये सलाह दी कि रीढ की दिक्कत है और इसका X-ray और MRI  जान्च करा लेना चाहिये / दोनों जान्चे हो गयी और इन दोनों ही रिपोर्ट में केवल मान्स्पेशियों के compact हो जाने के अलावा कोई अन्य anomalies नही निकली / मैने कहा कि इसकी मान्स्पेशियों का सिकुड़ कर एक गुच्छा जैसा बन गया है जिसकी वजह से आटो नरवस सिस्टम द्वरा भेजे जाने वाले और ग्रहण करने वाले signal ्बाधित हो रहे है और इसीलिये अन्दर के विसरा काम नही कर पा रहे है / यह एक inflammatory stage  है , अभी तजा ताजा चोट लगी है इसलिये inflammatory condition excited stage में है, धीरे धीरे जब यह अपने आप repair करेगी  और जैसे जैसे repairing होती जायेगी, मरीज की हालत सुधरती चली जायेगी / इसको केवल आराम की जरूरत है और  औषधि उपचार की आवश्यकता है / मरीज के घर वाले  मेडिकल कालेज ले गये , वहां भी दुबारा जान्च की गयी औए यही सलाह दी गयी कि चार महीने तक बिस्तर पर आराम करे और फिर फीजियोथेरापी करा ले, जिससे धीरे धीरे आराम मिलेगा / कानपुर के कई नामी गिरामी  neuro surgeons को दिखया गया , सबने इसी सलाह को ditto किया और कहा कि ऐसे माम्ले में Surgical Intervention की फिलहाल कोई जरूरत नही  है /

लेकिन उसके घर वालों को किसी डाक्टर ने सलाह दे दी कि इसका आपरेशन करादो, यह ठीक हो जायेगा और आपरेशन के बाद यह चलने फिरने और दौड़ने लगेगा / फिर क्या था, घर वाले इस मृग मरीचका में फन्स गये और तुरत ताव आपरेशन का  खर्च जोड़ने की जुगाड़ में जमीन का प्लाट और गहना जेवर बेच दिये गये / मैने उन सबको मना किया और कहा कि अगर आपरेशन करा लोगे तो इसकी हालत अभी जितनी ठीक है  आपरेशन करा लेने के बाद इससे  भी अधिक खराब और बुरी हो जायेगी / लेकिन मेरी बात सुनी नही गयी / कई अन्य दूसरे डाक्टरों ने भी कहा कि सर्जरी मत करायें, लेकिन उसके  Family physician  उसका आपरेशन कराने पर अड़े हुये थे / मै समझ गया कि इसमे “दलाली का चक्कर” है /

बहर हाल उसका आप्रेशन कर दिया गया / कैसा ौर किस तरक का आपरेशन हुआ या किया गया , यह मैने जानने की कोशिश तो मुझे साफ साफ किसी ने नही बताया / जिस family physician ने आपरेशन कराने की सलाह दी थी और बड़े बड़े दावे आपरेशन कराने के बाद मरीज को दौड़ाने के लिये किये जा रहे थे , उनका अता पता नही है /

आज उसकी हालत यह है कि आपरेशन से पहले वह जितना उठ बैठ लेता था , चारपायी से उठ कर कुर्सी में घन्टा आध घन्टा बैठ लेता था, पाखान पेशाब के लिये थोड़ा चल फिर लेता था , वह सब आप्रेशन कराने के बाद खत्म हो गया, उल्टे हाल यह हो गया है कि अब उसने पिचले आठ महीने से बिस्तर पकड़ लिया है और दिनों दिन उसकी दुर्दशा होती जा रही है / पाखाना पेशाब बिस्तर पर कर रहा है /

ऐसे एक नही सैकड़ों  उदाहरण मौजूद है / लेकिन मुझे ताज्जुब लगता है और आश्चर्य होता है कि लोग जानते हुये भी इस तरह का कार्य करते हैं / मुझे  घुटने बदलवाने वाले मरीज मिले / इसमे से ९९ प्रतिशत का कहना है कि वे पहले ज्यादा अच्छे थे जब उन्होंने घूटना नही बदलवाया था, घुटना बदलवाने के बाद उनको और अधिक दिक्कते पैदा हो गयी हैं /

घूटना बदलवाने के अच्छे या खराब परिणामॊ और अनुभवों को जानने और समझने के लिये सबसे अच्छे मरीज पूर्व प्रधान मन्त्री अटल बिहारी बाजपेयी हो सकते है /