“डाक्टर्स डे” दिनान्क १ जुलाई २०१२ के अवसर पर


सबसे पहले मै अपने सभी चिकित्सक बन्धुओं को इस दिवस की बधायी देता हूं, वे चाहे किसी भी चिकित्सा पध्ध्यति से इलाज कर रहे हों , डाक्टर्स डे पर उन सबको बधायी और अभिनन्दन /

मेरे पिता जी आयुर्वेदिक चिकित्सक और होम्योपैथी दोनो का चिकित्सा कार्य करते रहे / मुझे जहां तक अपने गांव और बड़े बुजुर्गों से पता चला है, जिन्होने यह बताया कि चिकित्सा कार्य मेरे परिवार का  Traditional profession पारम्परिक व्यवसाय रहा है और मुझे पता चला है कि मुझसे पहले मेरी छह या सात पीढी के बड़े बुजुर्ग यानी लकड़्बाबा से लेकर उनके पहले के पीढी वाले सभी आयुर्वेद चिकित्सा द्वारा गांव और आस पास के क्षेत्रों में सेवा भावना के साथ चिकित्सा करते चले आ रहे थे /

मेरे पिता जी भारत के बटवारे के पहले के राज्यों यथा बन्गाल राज्य के एक हिस्से के पूर्वी पाकिस्तान बन जाने से पहले जिला मैमन सिन्घ और नदी पार के कनाई घाट मे रहे / बटवारे के बाद में कलकत्ता आ गये और फिर बाद मे अपने गांव जिला ऊन्नाव और फिर  यहां से कानपुर शहर मे बस गये /

हम सभी भाई और बहन उनको चिकित्सा करते हुये देखते रहते थे / जब वे मरीज को  बताते थे कि वैद्य का पहला काम मरीज की तकलीफ को दूर करना है / मरीज जब किसी चिकित्सक के पास जाता है तो उसको अपने हृदय से विश्वास होता है और full faith होती है कि उसका इलाज करने वाला डाक्टर अगर उसे छू भी देगा तो वह ठीक हो जायेगा / मेरे पिता जी बहुत सेवा भाव से मरीजों की चिकित्सा करते थे / उस समय पैसों का बहुत महत्व नही था / न ही पैसों के पीछे कोई भागता था / उस समय दवायें वैद्य अपने खुद के सन्साधनों से अपनी आवश्यकतानुसार औषधियों का निर्माण करते थे / दवाओं को बनाने मे बहुत मेहनत और समय लगता था / दवा की गुण्वत्ता बनाये रखने के लिये शास्त्रोक्त विधियों का सहारा लिया जाता था और जब दवायें बनायी जाती थी तो उनकी processing हम सभी बहुत ध्यान से देखते थे /
मेरे पिता जी के साथ के समकालीन सभी वैद्य भी ऐसा ही करते थे / यह वह समय था जब वैद्यनाथ ब्रान्ड की दवायें बाज़ार में मिलती थी /गुणवत्ता सबसे बेहतर हो, ऐसा सबका मानाना था  और इसी पर जोर दिया जाता था / दवाओं की गुणवत्ता जितनी अच्छी होगी , दवायें उतना ही तेजी से काम करेन्गी , ऐसा सभी का मनना था / चालिस पचास और साठ के  दशक में आयुर्वेद के अलावा बहुत कम लोग एलोपैथी कि दवायें उपयोग में लाते थे /

मुझे लगभग 50 साल आयुर्वेद और होम्योपैथी की चिकित्सा कार्य करते हुये बीत चुका है / पचास साल पहले और पचास साल बाद जब स्वयम द्वारा किये गये चिकित्सा कार्य और तत्कालीन बड़े बुजुर्ग चिकित्सकों पर दृष्टिपात करता हूं तो बहुत बड़ा परिवर्तन देखने में आता है /

साठ साल पहले एलोपैथी के चिकित्सक ठीक उसी तरह प्रैक्टिस करते थे जैसे आयुर्वेदिक चिकित्सक करते थे / फर्क इतना था कि एलोपैथी के डाक्टर “कार्मिनटिव मिक्सचर” एसीडिटी या पेट गैस से सम्बन्धित सभी तकलीफों  को  दूर करने के लिये देते थे और वैद्य लोग कोई अर्क / एलोपैथी के डाक्टर कई दवाओं के मिक्सचर मरीज की तकलीफ के अनुसार बनाकर देते थे , जिनमें सिम्प्टम के अनुसार दवायें मिला दी जाती थी / मुझे आज भी बहुत से फार्मूले याद हैं /

परीक्षण के नाम पर उस समय X-Ray होता था और खून की जान्च में TLC, DLC, Hb%, ESR तथा मूत्र और मल परीक्षण तक ही सीमित था / B.C.G. का टीका लगाकर जान्चा जाता था कि TB है या नही / Blood Sugar का टेस्ट बहुत जटिल होता था / बहुत कम लोग पैथोलाजी के टेस्ट कराते थे / अधिकतर डाक्टर अपने ग्यान और बुध्दि कौशल का उपयोग करके और शारीरिक जान्च करके रोग-निदान करते थे / डाक्टरों को अपने ग्यान की प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता था और चिकित्सकों के बीच में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी बन जाती थी / सही निदान करने वाले डाक्टर की सभी चिकित्सक प्रसन्शा करते थे और उनका बहुत सम्मान करते थे / डाक्टर लोग उच्च कोटि की टेक्स्ट बुक का हवाला देकर रोगों के निदान ग्यान पर होने वाले वाद विवाद पर कहते थे कि “Book will decide what is correct ?” / ऐसे चिकित्सकों को दूसरे डाक्टर अपने मरीजों को रिफर किया करते थे /

चिकित्सक अपनी क्लीनिक मे मरीज की जान्च के लिये स्टेथोस्कोप, थर्मामीटर, टार्च, जीभ देखने का टन्ग-डिप्प्रेसर, टायफाइड की जान्च के लिये magnifying glass यही रखते थे / उस समय ब्लड प्रेशर देखने का Sphygmomanometer instrument आया ही नही था और उपलब्ध भी नही था / ECG मशीन का कहीं नामों निशान नही था/

सर्जरी भी बहुत सीमित थी / हार्निया, बवासीर, हाइड्रोसील, फोड़ॊं का इलाज जब जरूरत होती थी तब करते थे / ऐसे आपरेशन बहुत मेजर किस्म के आपरेशन कहे जाते थे / मोतिया बिन्दु के आपरेशन बहुत जटिल आपरेशन समझा जाता था / इसका management मरीज के लिये भयन्कर तकलीफ देह होता था / ऐसे restrictions थे जिन्को सुनकर ही लोगों की रूह काम्प जाती थी /

60 साल बाद चिकित्सा विग्यान में आये हुये बदलावों को देखकर बहुत अचम्भा होता है / साठ साल पहले जो था अब वह कतई नही दीखता /

कहते हैं इतिहास अपने आपको दुहराता है / मुझे ऐसा लगता है कि चिकित्सक गण पुन: उसी दौर मे धीरे धीरे वापस होन्गे लेकिन कुछ इनोवेशन और बदलाव के साथ क्योंकि परिस्तिथियां ऐसी बन रही हैं जहां फिर उसी की जरूरत नये महौल मे महसूस होगी जिसे वे अर्से पहले छोड़ चुके है / यह बदलाव medicine के क्षेत्र में देखने को मिलेन्गे /

Surgery के क्षेत्र में अभी बहुत से आश्चर्य जनक बदलाव आयेन्गे और बहुत सी नई तकनीकें आ जायेन्गी जो नित नये सर्जरी की जटिलताओं को अत्यधिक सरल और सुविधा जनक बनाये जाने के कारण होन्गे / ऊदाहरण के लिये मोतिया बिन्दु के आपरेशन में लेसर का उपयोग /

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