होम्योपैथी में रिसर्च की हालत बहुत खराब Very poor condition of Homoeopathic Research


भारत हो या विश्व का कोई भी हिस्सा , जहां भी होम्योपैथी चिकित्सा पध्ध्यति द्वारा चिकित्सा की जा रही है उन स्थानों पर कोई भी उल्लेखनीय होम्योपैथी का चिकित्सा शोध हुआ हो , जो डाकटरों की क्लीनिक तक पहुचा हो , ऐसा मेरी निगाहों में कोई भी नही आया है यह शर्म करने की बात है / होम्योपैथी के बुध्धिजीवियों के लिये, होम्योपैथी के सरकार में बैठे हुये अधिकारियों और सरकार चलानेवाले ज्नता के प्रतिनिधियों के लिये न्ही / अब युग इस बात का है कि कोई भी विग्यान आगे तभी बढ सकता है, जब उसमें निरन्तर शोध होते रहे हों और उस शोध कार्य में निरन्तर नये नये शोध होकर बहुत कुछ जोड़ा जाता रहा हो /

वर्तमान में कुच होम्योपथी के चिकित्सकों ने अपने बल बूते पर बिना किसी की बैसाखी लेकर और उधार की बैसाखी लिये बगैर अपने कन्धे पर सारा बोझ उठाते हुये कुछ achievement जरूर किये हैं , जिनमें कहा जा सकता है कि कुछ न तो जरूर  किया गया / इसमे यही कहा जा सकता कि यह सारे प्रयास एक सीमित दायरे में ही बन्ध कर रह गये जब तक किये गये research  का फायदा मरीजों तक नही पहुचता और  रोगी को फायदा जब तक  कारगर और प्रभावी तरीके से नही मिलता तब तक होम्योपैथी चिकित्सा विग्यान की बहुत बुरी हालत रहेगि / आज की आवश्यकत यह है कि जैसे आधुनिक चिकित्सा विग्यान में शोध कार्य लगातार किये जा रहे है, जब तक स तर्ज़ पर होम्योपैथी मं शोध कार्य नही किये जयेन्गे तब तक कुच नही होगा / मैने १९७० के दशक में <strong>BLOOD FLOCCULATION TEST FOR IDENTIFICATION OF HOMOEOPATHIC REMEDIES</strong> टेस्ट करना शुरू किया था और यह कई साल तक अपनी क्ळीनिक में करता रहा / इसके लिये मुझे एक छोटी सी लैबोरेटरी बनानी पड़ी /मैने इसके लिये  अपना पैसा खर्च किया /

इस टेस्ट के लिये मरीज का Intravenous रक्त लगभग २.५ मिलीळीटर निकालकर  centrifuge  करते है / से्न्टरीफ्यूज होने के बाद रक्त का थक्का और सिरम दोनों ही अलग अलग हो जाते हैं / अलग किये गये सिरम में एक विशेश प्रकार के develop किये गये liquid  को एक निश्चित रेशियो मेम मिलाते है / दूसरी तरफ टेस्ट की जाने वाली होमियोपैथिक दवाओं को एक विशेष स्केल में बनाते हैं जो मरीज के सिरम और दवा की पावर से मैच कर जाये / एक निश्चित माप की Test tube में सिरम और दवा का मिश्रण मिलाकर एक निश्चित तापकम पर incubator में रखते हैं /२४ घटे बाद इसकी रीडिन्ग करते हैं / Test Tube मे देखने में रुई जैसी तलछट  पड़ जाती है , इसे read  कर लेते है कि तलछट किस दवा में कितनी intensity level की है / इस प्रकार से match की गयी दवा को देने से मरीज को अवश्य फायदा होता था / इलाज विश्वास और आस्था के साथ हो जाता था /

लेकिन प्रोत्साहन के अभाव में मै इसे अधिक दिन तक लगातार जारी नही कर सका और बाद में आयुर्वेद की तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के लिये शोध कार्य में समय देने लगा /हलाकि मैने Homoeopathy  के लिये इसी scanning and mapping का सहारा लेकर  ELECTRO HOMOEO GRAPHY ; EHG HomoeopathyScan तकनीक का आविष्कार कर दिया है  और इसकी research practice  हमारे केन्द्र मे बराबर चल रही है और इस तकनीक को और अधिक foolproof बनाने के लिये कार्य चल रहा है और हमारी कोशिश है कि एक बेहतर होम्योपैथी के लिये परीक्षण तकनीक को विकस्त करके सारी दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाये / ऐसा नही है कि होम्योपैथी चिकित्सा  विग्यान के लिये शोध के लिये कोई तैयार नही है / विडम्बना यह है कि जो शोध करना चाहते है उनको कोई facility नही मिलती और न ही उनको शोध के लिये कोई प्रोत्साहन,  इतना धन भी नही होता कि शोध  कार्य कर  सके / ऐसे लोगो के मन में होम्योपैथी में रिसर्च करने की बहुत तमन्ना है /

मै एक उदाहरण देता हूं मुम्बई के डा० जवाहर शाह का, जिन्होने HOMPATH  Homoeopathy Software  का निर्माण किया / मै और डा० जवाहर शाह एक ही गुरू के चेले है / मै मुम्बई में Institute of Clinical Research के summer school मे सन १९८० और १९८१ में डा० जवाहर शाह का batch mate रहा हूं / डा० एम०एल० धावड़े हमारे Director थे / मेरे बैच में पूने के डा० फन्सालकर, जिनके साथ मै चौपाटी जूहू  में कई बार जाकर भेल पूड़ी खा चुका हूं / मेरे बैच में डा० किशोर मेहता, डा० विश्पाला पार्थ सारथी आदि विद्यार्थी थे/ नागपुर के डा० शिरीष करनाड मेरे  Guide और इन्स्ट्रक्टर थे और जितना भी शोध का काम था मै उनके अन्डर में रहक्रर करता था / Institute of Clinical Research की पूरी टीम और जितने भी पढने वाले और पढाने वाले दोनों हॊ बहुत मेहनत और दिलचस्पी के होम्योपैथी चिकित्सा विग्यान के लिये research work  बिना किसी gain  या बिना किसी appreciation  या बिना किसी स्वार्थ के कर रहे थे / डा० के० एन० कसाद जैसे दिग्गज Allopathy  के चिकित्सक कैन्सर जैसी बीमारी के लिये होम्योपैथी की दवा Misteleto  के ऊपर काम कर रहे थे /

आज होम्योपैथी के चिकित्सकों को देखता हू तो वे सिवाय पालिटिक्स के और कुछ करना नही जानते हैं /

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