दिन: जुलाई 28, 2012

मारत में रिसर्च करने वालों की स्तिथि ; Fate of RESEARCHERS in INDIA


भारत देश में रिसर्च करने वालों का क्या हाल होता है ? इसका प्रत्यक्ष हाल मुझसे ज्यादा और कौन जान सकता है , आइये आप भी इन सबका मुलाहजा फरमाइये /

उपरोक्त पत्र को देखिये , यह मेरे  १८ साल की मेहनत के बाद मिला हुया परिणाम है /

भारत सरकार के कई  विभागों और अनुसन्धान सन्सथानों में ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का परीक्षण किया जा  चुका  है , इसकी Pilot Study  भी की जा चुकी है /  मुझे इसकी मशीन बनानी है , जिसके लिये मैने National Innovation Foundation  को मदद करने के लिये लिखा था, जिसका मजमून देखिये जो ऊपर वाले पत्र में लिखा गया है /

यह उत्तर देखकर मै हैरान हूं और सोचता हू कि अगर मै कहीं “महा मूर्ख ” या “झोला छाप ” या  Quack Doctor  या ” गधा डाक्टर” या “घोड़ा डाक्टर”  होता , तो सबसे अच्छा और बेहतर होता / मै तो अल्प सन्ख्यक मुसलमान अथवा क्रिश्चियन अथवा जैन आदि अल्प सन्ख्यक समुदाय से भी नही हूं /  मै पिछड़ा , अति पिछड़ा , शेड्य़ूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब जैसे वर्ग से भी  नही हूं / मै सवर्ण हूं इसलिये मेरे लिये इस देश में कोई सुविधा रिसर्च कार्य और रिसर्च के विकास के लिये नही है ???????भारत सरकार को ऐसे ही सन्ग्या वाले और वर्ग भेद और वर्ग विभेद वाले वैग्यानिकों की जरूरत भी है , जो अधिक से अधिक  उनके वोट बैन्क बनें /

वास्तविकता यह है कि मै अपने आपको  आयुर्वेद और होम्योपैथी के प्रैक्टीशनर के अलावा प्राचीन और आधुनिक चिकित्सा विग्यान का छात्र और विद्यार्थी के अलावा अपने आप को और कुछ ज्यादा नही समझता , लेकिन लोग मुझे बहुत निकृष्ठ कोटि का वैग्यानिक भी मानते है /  हमारे जैसे बहुत छोटे किस्म के वैग्यानिकों का जब यह हाल है कि बिना किसी सहायता के अपने व्यक्तिगत प्रयासॊ से जितना भी किया और किन किन मुश्किलों को पार करके किया और मन में यह विचार कि इसकी मशीन बनी तो सारे विश्व के गरीब से लेकर अमीर तक इसका फायदा उठायेन्गे , ऐसा मै “वसुधैव कुटुम्बकम” की भवना कि सारा विश्व या इस धरती पर रहने वाले सभी लोग मेरा परिवार है  , इस आविष्कार का सारी दुनियां फायदा उठायेगी , यह मै विचार करता हूं /

लेकिन हालात दूर दूर तक पाजिटिव नजर नही आते क्योंकि मेरे पास पैसे और साधन दोनों ही नही हैं , ऐसे में न तो ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की मशीन बन पायेगी और न ही इसका फायदा कोई उठा पयेगा / मै जैसी मुश्किलें झेल रहा हूं उससे तो मै अन्दाजा लगा सकता  हू , उन  वैग्यानिकों के बारे में जो मुझसे ज्यादा हज़ार गुना बेहतर काम करना चाहते हैं लेकिन उनको मौका कोई नही  मिलता  है और मौका भी कोई नही देता है ??????

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