महीना: अगस्त 2012

आयुर्वेद की एकदम नयी खोज ; “आयुर्वेद थर्मल मैपिन्ग और स्कैनिन्ग” [ए०टी०एम०एस० तकनीक]; आविष्कार किया भारतीय चिकित्सक डा० देश बन्धु बाजपेयी ने ; New & Latest Discovery and Invention of Ayurveda ; “Ayurveda Thermal Mapping & Scanning” [A.T.M.S. Technology] ; Discovered and Invented by an Indian Ayurveda Practitioner Dr Desh Bandhu Bajpai


भूतकाल के समय के साथ साथ किये गये परीक्षणों के लम्बे अन्तराल के बाद आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तों के निदान ग्यान और व्याप्त शारीरिक रोगों के निदान के लिये एक नई तकनीक का जन्म भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सक डा० देश बन्धु बाजपेयी द्वारा किया जा चुका है / इसके प्रारम्भिक trial हो चुके है जो सफल रहे हैं और उनका उअप्योग चिकित्सा कार्य में किया जा रहा है /

Thermal यानी तापमान पर आधरित इस तकनीक से लिये गये डाटा को एक विशेष तरह की क्म्प्य़ूटर साफ्ट्वेयर की मदद से निकाले जा रहे डाटा द्वारा आयुर्वेद के निम्न सिध्धान्त प्राप्त किये जा सकते है /

१- प्रकृति
२- त्रिदोष
३- त्रिदोष भेद
४- ओज
५- स्वेद
६- मूत्र
७- पुरीष
८- अग्नि बल

उपरोक्त के अलावा अन्य कुछ मौलिक सिध्धन्तों का पता चल जाता है

/

इन आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तों के status quantification के अलावा शरीर के  स्कैन किये गये अन्य सभी सेक्टर्स के अध्ध्यन द्वारा शरीर में व्याप्त बीमारियों का पता चल जाता है /

अभी इस तकनीक का उपयोग रिसर्च और development तथा क्लीनिक मे आने वाले मरीजों के परीक्षण के लेवेल पर है / साथ ही  इसके विकास और further investigation का काम एक टीम द्वारा लगातार जारी है /

अब आयुर्वेद के पास निदान ग्यान और मौलिक सिध्धान्तों को नापने ले किये दो तकनीक हो गयी है / पहली तकनीक इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफी ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के नाम से जानते है और आयुर्वेद की यह दूसरी तकनीक जो  थरमल मैपिन्ग और स्कैनिन्ग पर आधारित है ,के लिये कहा जा सकता है कि यह दुनिया की ऐसी दूसरी तकनीक है जो आयुर्वेद के सिध्धान्त और रोग निदान दोनों के लिये है /

इस तकनीक के बारे में समय समय पर इसी ब्लाग के माध्यम से पाठकों को बताया जायेगा /

LEUCOPLAKIA and ORAL CANCER including Oro-facial Fibrosis can be cured by Ayurvedic treatment ; मुख का कैन्सर, गालों का कैन्सर, जीभ का कैन्सर, फाइब्रोसिस का सटीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित आयुर्वेदिक इलाज


Leucoplakia second grade patient diagnosed after Biopsy, photo taken before start of treatment

Leucoplakia second grade patient diagnosed after Biopsy, photo taken before start of treatment

मुख के कैन्सर, गालों के कैन्सर और साथ में फाइब्रोसिस से पीडित कुछ मरीजों का आयुर्वेदिक और होम्योपैथी सम्मिलित इलाज ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित फाइन्डिन्ग्स को लेकर हमारे दवाखाने द्वारा किया जा रहा है /

उक्त रोगी ने लगभग तीन माह पहले बायोप्सी कराकर और एलोपैथी के चिकित्सकों द्वारा लाइलाज बीमारी बताकर इस रोगी को विटामिन की कुछ गोली खाने को कहकर इलाज की इति-श्री कर दी थी / यह मरीज कानपुर से २५० किलोमीटर दूर  से इलाज कराने आता है / जालौन जिले मुख्ज्यालय से ६० किलोमीटर दूर रहने वाले इस व्यक्ति को वही के एक मरीज ने , जो पहले अपने  ट्य़ूमर का इलाज करा चुका था, उसने मेरे यहां उक्त रोगी को अपने मुख के कैन्सर के इलाज के लिये भेज दिया  / मैने उसको सलाह देकर  कहा कि सबसे पहले एक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण कराये फिर इलाज करायेन्गे तो अवश्य फायदा होगा / मरीज ने ईओय़ीओजीओ आयुर्वेदास्कैन फाइन्डिन्ग्स के आधार पर परीक्षण कराकर इलाज कराया और उसे दो महीने में बहुत आराम मिला है /

इस मरीज का २० दिन पहले का लिया गया चित्र देखिये और इसके improvement को देखिये / इसके दोनों गालों के ऊपर सफेद मलाई जैसी पर्त एकदम ठीक हो गयी है और मुख जो फाइब्रोसिस के कारण कम खुलता था , अब अधिक खुलना शुरू हो गया है /

             

                  उपरोक्त मुख के कैन्सर का मरीज कई साल से होम्योपैथी का इलाज करा रहा था, लेकिन उसे कोई फायदा नही मिला / लगभग छह माह पहले यह मरीज मेरे पास इलाज के लिये आया था / यह ऊपर कॊ फॊटॊ उसी समय की ली गयी हैं / इसे कुछ माह पहले Blood sugar  अचानक मेरे द्वारा किये गये टेस्ट से detect  हुयी है / मुझे ताज्जुब हुआ कि किसी भी डाक्टर नें blood sugar  की तरफ ध्यान ही नही दिया /

इसे antidiebetic treatment आयुर्वेद का दिया जा रहा है / साथ में होम्योपैथी की दवा इलाज के लिये उपयोग किया जा रहा है/ नीचे लिये गये फॊटॊ से मिलान करिये / इसके जीभ तथा मुख का कैन्सर का फैलाव बिल्कुल रुक गया है और मौजूदा मुख के कैन्सर-घाव अब heal  हो रहे हैं / नीचे के फोटॊ देखिये /

                                                                  

                                                             

दोनों मरीज अपना अपना व्यापार कर रहे है और साथ साथ उपचार के लिये आयुर्वेदिक और होम्योपैथिक की दवाये पथ्य परहेज के साथ ले रहे हैं /

अब निष्कर्ष यही निकलता है कि आयुर्वेद के क्रान्तिकारी आविष्कार ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की बदौलत किये जाने वाले इलाज हमेशा प्रभावकारी, सटीक, अचूक और विश्वसनीय होते है /

दर्द को शमन करने और दर्द को दूर करने और दर्द को रोग मुक्त करने की आयुर्वेदिक औषधियां : Pain relievers and pain killers and pain curers of Ayurveda


ऐसा समझने की भूल कभी नही करना चाहिये कि आयुर्वेद अथवा होम्योपैथी अथवा यूनानी अथवा अन्य चिकित्सा विग्यान मे दर्द को दूर करने या दर्द को शमन करने वाली दवायें नही है / इन सभी चिकित्सा विग्यानों में दर्द दूर करने वाली दवाये है और उनका उपयोग यथा स्तिथि में सभी चिकित्सक करते हैं /

आयुर्वेद में भी दर्द के management  के लिये बहुत से तरीके दिये गये है और इसके अलावा बहुत सी दवाओं के सेवन करने के निर्देश और व्यवस्था की गयी है /

मुख्यतया आये दिन मरीज लोग प्रैक्टिस में  तरह तरह के दर्द की शिकायत  करते है, इन दर्दों की श्रेणियां निम्न प्रकार की होती हैं /

१- सिर का दर्द ; ऐसा दर्द नाक की सूजन यानी sinusitis, Migarin , cervical spondylitis , high blood pressure , insomnia आदि रोगों के साथ जुड़ा हुआ होता है /  

२- बदन का दर्द ; ऐसा दर्द सर्दी , जुखाम की तकलीफ के साथ या अत्यधिक थकान या डायबिटीज या मान्स्पेशियों की आर्थ्राइटिस, Muscular Arthritis या शरीर की किसी metabolic anomalies  के कारण से  भी होता है

३- जोड़ॊं का दर्द ; यह दर्द Musculo-skeletal  समस्याओं के साथ होता है / जोड़ॊ मे कैल्सियम की कमी या अन्य विकृतियों के कारण से दर्द होते हैं /

४- नसों का दर्द ; इसे nerological , neuralgia आदि की वजह से होता है/ चेहरे के trigeminal neuralgia  उदाहरण के लिये ले सकते हैं /

५- पेट का दर्द , गुदों का दर्द आदि दर्द visceral  pain  कहे जाते है

वहुत से दूसरी तरह के दर्द होते है जैसे दान्तों का दर्द, आन्खो का दर्द , कान का दर्द  आदि /

दर्द का mechanism समझने के लिये जरूरी है कि दर्द होते क्यों हैं ? बिना इसका मुकम्मल कारण समझे बगैर दर्द जड़  मूल से कभी भी नही खत्म होते और न पीछा छोड़ते हैं / शरीर में सिर का दर्द  ब्लड प्रेशर, सायनुसायटिस, कान की तकलीफों, सरवाइकल स्पान्डिलाइटिस , गर्दन या रीढ आदि  के तकलीफों के impact  के कारण होते हैं / पेट साफ न होने या कब्जियत या अन्तों की बीमारियों या गुर्दों की बीमारियों और आन्तों की  कोलायटिस से पैदा बुखार और low degree temperature आदि से भी सरदर्द होने लगते है / Heart या Brain की या आन्ख की कोई तकलीफ होने पर भी सिर दर्द होने लगता है / दर्द का कारण यही होता है कि मुख्य स्थान पर यदि किसी तरह का inflammation होता है तो उससे पैदा  toxic substance का impact  nerve impulses बढा देती हैं जो सामान्य nerve impulses की तुलना से अधिक होता है / ये impulses  जितनी ही अधिक तेजी से पैदा होन्गी और  इनकी  जितनी ज्यादा तेज़ फड़्कने की स्पीड होगी,  दर्द की तकलीफ की तेज़ी की इन्टेन्सिटी भी उतनी ही अनुपात में ज्यादा होगी /

पेन किलर्स इसी फड़फड़ाहट की  इन्टेन्सिटी को कम कर देते है / ऐसा इसलिये होता है क्योकि कुछ पेन किलर्स खाने के बाद दर्द को पैदा करने वाले throbbing  या  pulsating movement  की सक्रियता वाली जगह को पैला देते है जिससे उस स्थान का stress थोड़ा सा कम हो जाता है और जो  obstacles होते हैं जैसे उस स्थान की  पैदा हुयी सूजन को कम करते हैं / इस कारण से नया oxigenated blood आकर उस inflammation वाले स्थान की जमा cellular metabolism से पैदा toxines को हटाकर उस स्थान को repaire कर देता है / जिससे दर्द  वाली जगह का stress कम होता है फिर धीरे धीरे दर्द से  राहत मिल जाती है /

पेन किलर्स की दूसरी श्रेणी मे muscle relaxant आते है / यह मान्सपेशियों की hardness, stiffness, rigidity, कड़ापन को relax  यानी अपने प्रभाव से फैला देते है, जिससे नया oxigenated Blood  उस स्थान पर पहुचता है और  वहा इकठ्ठा रक्त को replace करके अपने साथ toxines को बहा ले जाता है / इस प्रक्रिया में दर्द पैदा करने वाले सब्सटेन्स भी हट जाते है और दर्द दूर होता है /

पेन किलर्स की तीसरी श्रेणी में sedative या localised sedatives alkalides  वाली या opiates अफीम के लवणों से तैयार की गयी दवायें होती हैं जिन्हे दर्द की अति उग्र  अवस्था में उपयोग करते हैं / 

इसके बाद अगर ये दर्द दूर करने वाली दवायें फेल हो जाती है  या दर इन दवाओं के खाने के बाद भी नही ठीक होता है तो  यह स्वाभाविक है कि दवा की एक निश्चित और निर्धारित की गयी मात्रा कुछ दिनों के बाद resist  हो जाती है और फिर इसी दबा की मात्रा   दुगनी या तिगनी करनी पड़ जाती है /

दर्द दूर करने की अब STEROIDS युक्त दवाये भी हैं , लेकिन इनकी उपयोगिता पर  बहुत कुछ डाक्टर का निर्णय और उसके अनुभव की छमता पर निर्भर करता है कि मरीज के लिये किस तरह उपयोगी हो सकती है /  अधिक steroid की मात्रा खाने से लीवर, गुर्दा, हड्डियों, दिमाग,हार्मोनस आदि बिगड़ जाते हैं / 

बहरहाल  आयुर्वेद मे दर्द के लिये बहुत सी शास्त्रोक्त दर्द निवारक दवायें  हैं जिनके सेवन से दर्द की तकलीफ दूर हो जाती है /

१- सिर दर्द के लिये ; चाहे जैसा सिर दर्द हो और किसी भी वजह से हो आयुर्वेदिक औषधि “शिर: शूलादि वज्र रस”  सेवन करने से सिर और गर्दन से ऊपर के अन्गों के सभी दर्द ठीक हो जाते हैं /

२- शूल वर्जिनी  रस [वटी] ; पेट whole abdomen के सभी दर्द इसके उपयोग से दूर हो जाते हैं

३- दशमूलरास्ना काढा पीने से बदन का दर्द और जोडो का दर्द अवश्य ठीक हो जाता है / इस काढे को सभी दर्द में उपयोग कर सकते हैं / इसमे निर्गुन्डी मिला देने से इसकी दर्द दूर करने की क्षमता और अधिक बढ जाती है /

उपरोक्त सभी बतायी गयी दवाये मैने अपने हजारों मरीजों पर उपयोग की है और अभी भी कर रहा हू / ये सभी दवाये tested हैं /

लेकिन मै एक बात फिर सबसे कहना चाहून्गा कि दर्द दूर करने के लिये और दर्द की तकलीफ से बचने के लिये मूल रोग या original disease condition  का ठीक होना बहुत जरूरी है / अगर मूल रोग नही ठीक होगा तो दर्द भी नही ठीक होगा /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण कराकर आयुर्वेदिक इलाज कराने के बाद सभी तरह के दर्द जो ऊपर बताये गये है , वे सब के सब ठीक होते है या उनमें राहत मिल जाती है, दर्द की इन्टेन्सिटी में धीरे धीरे कमी आती है और रोग मुक्त होता है /

बच्चा पैदा होने के बाद महिलाओं में कम दूध पैदा होने की शिकायत ; problems in Lactation after child birth


प्रसव के पश्चात यानी बच्चा पैदा होने के बाद लगभग ९० प्रतिशत महिलाओं को इस बात की शिकायत पैदा हो जाती जै कि उनके स्तनों मे बच्चे को यानी नवजात शिशु को लालन पालन करने के लिये sufficient quantity  मे दुध नही पैदा होता है, जिसके कारण नवजात शिशु का भूख लगने पर पोषण के लिये जितना दूध की आवश्यकता होती है , वह नही मिल पाता /

शिशु के जन्मते ही माता का दूध पिलाना पहला काम होता है / माता के दूध में पोषण  के लिये जितने भी जरूरी तत्व होते है , वे सब के सब बच्चे को मिलते हैं / यह इतना balanced  होता है कि इसे पीने के बाद शिशु के पाचन सन्स्थान को दूध को पचाने के लिये कोई अतिरिक्त जरूरत पड़्ती हो / माता का स्वयम अपने शिशु को दूध पिलाने से जितनी psychology और अपना पन का अहसास शिशु को होता है, वह शायद बाहरी या किसी दूसरे जानवर का दूध पिलाने से नही प्राप्त होता है /

इसलिये सबसे अच्छा और बेहतर माता का दूध होता है क्योण्कि यह मानव शरीर का कुदरती दूध है जिसे कुदरत द्वारा प्रदान किया गया है और जिससे जनम्ते ही बच्चे को अपने शरीर के विकास के लियेवह सभी पोषक तत्व चाहिये जो मानव के लिये जरूरी है / एक पूर्ण diet  में carbohydrate, protein, fat, minerals, vitamins और पानी का सम्मिलित  combination की जरूरत होती है / यह सभी चीजें दूध में होती हैं /वह सभी पोषक तत्व चाहिये जो मानव के लिये जरूरी है / एक पूर्ण diet  में carbohydrate, protien, fat, minerals, vitamins और पानी का सम्मिलित  combination की जरूरत होती है / यह सभी चीजें दूध में होती हैं /

बच्चे की या शिशु की भूख के बारे मे पता करना बहुत मुश्किल होता है / कुदरती तौर पर बच्चे या शिशु जब भूखे होते हैं तो चिल्लाने लगते हैं , रोते है , अपने मुख में उन्गलियां लेकर चूसते है या जिसके पास होते है उसकी उन्गली या उसकी त्वचा को चाटने लगते हैं / समझदार लोग पहचान लेते है कि बच्चे को भूख लगी है और उसे दूध पीना चाहिये / कुछ बच्चे जोर जोर से रोते है , कुछ शान्त रहते है, कुछ बोलते ही नही है और चुप्चाप पड़े रहते हैं /

खान पान और कुछ एलोपैथी की दवाओं के उपयोग से और अधाधुन्ध बिना सोचे समझे एलोपैथी की दवाओं के खिलाने से छोटे छोटे बच्चों में सफेद दाग VITILIGO  ल्य़ूकोडेर्मा LEUCODERMA  जैसी भयानक बीमारियां हो रही है /

खान पान और कुछ एलोपैथी की दवाओं के उपयोग से और अधाधुन्ध बिना सोचे समझे एलोपैथी की दवाओं के खिलाने से छोटे छोटे बच्चों में सफेद दाग VITILIGO ल्य़ूकोडेर्मा LEUCODERMA जैसी भयानक बीमारियां हो रही है /

बहरहाल महिलाओं को दूध बढाने के लिये आयुर्वेद और होम्योपिथी में कुछ दवायें हैं जिनके उपयोग से महिलाओं में दूध की बढोतरी होती है /

आयुर्वेद के  कुछ प्रयोग नीचे दिये जा रहे है जिन्के उपयोग से इस समस्या का निदान सम्भव  होता है /

१- ३ ग्राम शतावर का चूर्ण एक कप दूध और एक कप पानी मिलाकर एक उबाल  आने तक पका लें , उसके बाद इसको गुन्गुना होने तक रख दें / गुन्गुना होने पर इसमें चार चम्मच शहद मिला ले / अब इसे पी ले /  दिन में दो तीन बार पीने से स्तनों में बहुत दूध उतरता है /

२- शतावर्यादि चूर्ण २ ग्राम दूध के साथ पीने से दूध बहुत पैदा होता है

३- अश्वगन्ध का चूर्ण दूध के बनाने में सहायता करता है

४- दूध पिलाने वाली महिलाओं को चाहिये कि वे जितना दूध पियेन्गी , उतना ही अधिक दूध का उत्पादन उनके स्तनों में होगा , इसलिये महिलाओं को दूध बढाने के लिये दूध का सेवन करना चाहिये

५- बहुत सी महिलाओं को दूध की गन्ध अच्छी नही लगती, किसी किसी को दूध पीना अच्छा नही लगता , ऐसी महिलाओं को दूध से बने पदार्थ खने चाहिये जैसे, खीर, पनीर, छेना आदि

५- महिलाओं को पानी खूब पीना चाहिये / प्यास लगने पर पानी अवश्य पियें और प्यास को किसी भी हालत में रोकना नही चाहिये / प्यास को रोकने से शरीर दूध पानी वाले हिस्से को अव्शोषित कर लेता है / अगर ज्यादा देर तक पानी न पियें तो दूध सूख कर स्तनों मे गान्ठे बना देता है / इसलिये पानी पीते रहना जरूरी है /

किसी किसी महिला को दो या तीन बच्चे हो जाते हैं , ऐसी  स्तिथि में बच्चो को समुचित दूध नही मिल सकता , इसके लिये दुध बढाने के उपाय करना चाहिये जैसाकि ऊपर बताया जा चुका है / इसका एक alternative यह भी है कि दूध पीने वाले बच्चों को माता के दूध के साथ साथ बकरी का दूध भी दिया जाये / माता का दूध और बकरी के दूध के contents  में थोड़ी सी similarity  है इसलिये  यह बच्चों को मुआफिक आता है / मैने कई बार ऐसी स्तिथियों में बच्चों को बकरी का दूध पिलाया है जिससे बच्चे बहुत  स्वस्थ्य और बलवान हुये हैं / 

शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिये माता का दूध बहुत जरूरी है या साथ साथ बकरी का दूध का पिलाना दोनों ही लाभदायक है /

Mental and Psychological problems detection and benefit of AYURVEDA’s ETG AyurvedaScan examination system


{  Presently E.T.G.AyurvedaScan  is consists of  over 100 page report. }

Mind or mental or psychological related problems and disease conditions  are increasing day by day, as we have seen in our daily practice. Treating successfully after large number of these psychology based problems, we have found many factors , which are responsible for the causing disease conditions.

Mental disorders are of the various types from Mania to hypo-mania, depression of different varieties, sad, grief, mental emotional, intellectual abnormal behavior in appearance are found in general, may be the hundreds of the kinds of the Psychological disorders, but their nature are same and reflections could be differ from individusl to individual.

ETG AyurvedaScan examination system perfectly provides the results of the examination of patient after””mapping “”and “”trace recording””, the data sheet provides the results in nut shell and in wide range also.

The general recorded traces are often seen with the following problems in patient;

1- The Circulation of blood is seen towards the Head , which is normally should be to torso side or abdomen side., this abnormal condition is often seen in the depressive patients from any reason . could be related to Psychosomatic problems or Somatopsychic problems , persists with the patient

2- Majority of patients are suffering from COLITIS, or Irritable Bowel syndromes or gastrointestinal or large or small intestines anomalies , areas controled by Autonomic Nervous system

3- Sometimes pulse becoms rapid and sometimes pulse becomes slow, the reason is behind that mental exitement sudden grow up and sudden comes down with the emotins of the patient, which weekens due to functioning of ANS

ETG AyurvedaScan examination, under cover of Ayurvedic Fundamentals views, finds that mental disorders happen due to ;

1- Due to imbalance of PRAKRUTI intensity,set-up by nature at the time of immediate birth , not proper matching the level of TRIDOSHA for example if a man’s prakaruti have Vata is within normal limit, pitta is in normal limit and kapha is below normal limit, which he have got just after birth, when imbalances with the Tridosha and tridosha bhed , in this case the TRIDOSHA are Vata in Normal limit, Pitta is below normal limit and Kapha is below normal limit. Below level of Pitta is causing problem in this case

 

मुख और जीभ के कैन्सर ORAL CANCER के एक रोगी का इलाज मेरे द्वारा किया जा रहा है / लगभग दिसम्बर २०११ से   इस मरीज का इलाज शुरू किया गया था / उस समय जीभ और गाल तथा दोनों होठों के किनारे पर कैन्सर का असर था / इसकी बायप्सी हो चुकी है और इसके कैन्सर बताया जा चुका है / यह उस समय का चित्र है /

मुख और जीभ के कैन्सर ORAL CANCER के एक रोगी का इलाज मेरे द्वारा किया जा रहा है / लगभग दिसम्बर २०११ से इस मरीज का इलाज शुरू किया गया था / उस समय जीभ और गाल तथा दोनों होठों के किनारे पर कैन्सर का असर था / इसकी बायप्सी हो चुकी है और इसके कैन्सर बताया जा चुका है / यह उस समय का चित्र है /

 

2- TRIDOSHA BHED ; we have observed that UDAN VAYU is generally in high level in Psychological problems that means it produces pathophysiology / pathology related to mechanism of respiration, breathing, regulation of respiration, boosts the higher function of Autonomic nervous system which controlling speech with the affects of the muscular system involvements of speech and talking etc

इसी रोगी का जून २०१२ का लिया गया चित्र / इस रोगी के जीभ का अधिकान्श कैन्सर ग्रस्त हिस्सा ठीक हो चुका है / होठॊं के और गाल के सभी कैन्सर ग्रस्त हिस्से ठीक हो गये हैं / जीभ में यह घाव भी ठीक हो रहा है / इस रोगी को  अचानक ही डायबिटीज जून २०१२ ्को परीक्षण करने के दरमियान डिटेक्ट हुयी थी / इसका आयुर्वेदिक और होम्योपैथी का सम्मिलित इलाज चल रहा है /

इसी रोगी का जून २०१२ का लिया गया चित्र / इस रोगी के जीभ का अधिकान्श कैन्सर ग्रस्त हिस्सा ठीक हो चुका है / होठॊं के और गाल के सभी कैन्सर ग्रस्त हिस्से ठीक हो गये हैं / जीभ में यह घाव भी ठीक हो रहा है / इस रोगी को अचानक ही डायबिटीज जून २०१२ ्को परीक्षण करने के दरमियान डिटेक्ट हुयी थी / इसका आयुर्वेदिक और होम्योपैथी का सम्मिलित इलाज चल रहा है /

3- SADHAK PITTA, one of the Tridosha Bhed related to Pitta Dosha, is a very important Ayurvedic fundamentals , which reflects the mental and physical correlative factors like courage, emotions, intellect

4– KLEDAN KAPHA ;One of the Tridosha Bhed Ayurvedic Fundamentals of  KAPHA Dosha related to the brain and brain faculties of different physiology, have effects and impact in Mental and physical behaviours

5- SAPTA DHATU and Oaj and SampUrn Oaj are also considered for producing anomalies related to Autonomic Nervous system and Circulation.

In our studies on the basis of the Ayurvedic Fundamentals and ETG AyurvedaScan findings correlating to Modern Western science have got clue to conclude the individual problems of individual patient, which requires specific medication according to the problems patient is individually have .

We have not found any common treatment of the ailments of the Psychosomatic or Somatopsychic illness , just like in Allopathic practitioner manages the cases.

We have found that each patient have his own specific problems and these problems differs each other in their intensities and are not equalize to others. Scientific Selection of Ayurvedic medicines are  based on the findings of the ETG AyurvedaScan report solely with their intensities, definitely cures / relieves the ailing conditions for very long period.

Viral Infection in Rainy season ; बरसात का मौसम और वायरल इन्फेक्शन


हर साल बरसात का मौसम वायरल इन्फेक्शन लेकर आता है / इस साल भी कमोवेश उसी तरह के इन्फेक्शन दुबारा आ रहे है जैसे की पहले हुआ करते रहे है /

इस सीजन में भी जो इन्फेक्शन के मरीज  क्लीनिक में इलाज के लिये आये हैं उनमें [१] वायरल बुखारViral fever [२] कनाजन्क्तिवायातिस conjunctivitis [ ३] खाज खुजली herpes zoster  [४] त्वचा के इन्फेक्शन [५] कोलायातिस colitis[६] आव आना   mucous colitis [७] पतले दस्त या डायरिया [८] पाचन सम्बंधित विकार Gastro Intestinal Tract disorders [९] जुखाम आदि गर्मी ठंडक के मिश्रण से होने वाली तकलीफे [१०] मान्शपेशियों, जोड़ों के दर्द, रीढ की हड्डी के रोग , कमर दर्द इत्यादि देखने में आई है /

तकलीफे है तो उनके इलाज भी है आयुर्वेद और होम्योपैथी दोनों में ही इन सब व्याधियों का इलाज है /

१- बुखार के लिए इसी ब्लाग में कई स्थानों पर होम्योपैथी की दवाओं का मिश्रण बताया गया है , उसे ही नियमानुसार  सेवन करना चाहिये
२- वायरल बुखार या कोई अन्य बुखार हो,  बुखार से बचने के लिए और बुखार का इलाज करने के लियेआयुर्वेद की “सप्त पर्ण” बटी की एक गोली और प्रवाल पंचामृत रस की एक गोली भोजन करने के बाद या खाने के बाद दिन में एक या दो खुराक लेने से वायरल बुखार और पेट से सम्बंधित बहुत सी तकलीफों से बचाव हो जाता है / जो लोग चाहते है की उनको वायरल बुखार से बचाना है , वे इस का उपयोग रोजाना एक बार या दो बार कर सकते हैं /
३- पतले दस्त या डायरिया होने पर किसी चिकित्सक से सलाह लेकर दवा शुरू करें / एक या दो या तीन पतले दस्त हो जायें तो चिंता की कोई बात नहीं होती , यदि अधिक दस्त होने लगे तो अपने नजदीक के चिकित्सक से परामर्श करके दवा लेना शुरू कर देना चाहिये / आयुर्वेदिक की कुटज घन वटी लेने से दस्त रुक जाते हैं
४- बरसात के सीजन में निम्बू का रस दाल और सब्जी में मिलाकर तथा हरा मिर्चा भोजन के साथ अवश्य खाने  का प्रयास करना चाहिये / आन्तो के  अन्दर होने वाले इन्फेक्शन को यह दोनों वस्तुएं रोकती है, जिससे वायरल इन्फेक्शन के बढने से रोकने में मदद मिलती है /
५- कन्जन्क्टीवाइटिस  के लिए या आँख की किसी अन्य  बीमारी के लिए आन्खों में डालने का ड्राप eye drops उपयोग करना चाहिये
६- जुखांम आदि तकलीफों में गरम भोजन और ताजा भोजन करना चाहिये और अदरक तुलसी की चाय  का सेवन करे , ठंडी चीजो और ठंडक से बचे

[७] मान्श्पेशियों के दर्द के लिये या जोड़ॊं के दर्द के लिये या पानी मे भीन्ग जाने के कारण या बदन में दर्द होने की स्तिथि में आयुर्वेद के क्वाथ या अन्य औषधियों का सेव करना चाहिये, दर्द की अत्यधिक अवस्था में कोई सामान्य सा पेन किलर उपयोग करें /

ज्यादा तकलीफ हो तो अपने नजदीक के किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेकर पूरा उपचार करें

Is it possible that every disease condition is treatable by ETG AyurvedaScan system ? क्या ई०टी ०जी० आयुर्वेदा स्कैन तकनीक का सहारा लेकर सभी बीमारियों का इलाज करते हैं ?


क्या ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का सहारा लेकर और इसके डाटा पर आधारित इलाज से सभी बीमारियों का इलाज सम्भव है ?

हां है और बिलकुल है / ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की तकनीक पिछले २६ सालों से हजारों मरीजों पर आजमाने के बाद हमारा निष्कर्ष यही है कि यह सही है कि शरीर की चाहे जो भी बीमारी हो या उसका जो भी नाम दिया गया हो या उसका कोई भी निदान किया गया हो , ऐसी सभी प्रकार की बीमारियों का इलाज ETG AyurvedaScan सिस्टम द्वारा आयुर्वेद चिकित्सा अथवा होम्योपैथी चिकित्सा वयवस्था या य़ूनानी अथवा प्राकृतिक चिकित्सा दवारा सफलता पूर्वक किया जा सकता है / अब तक के प्राप्त अनुभवों और निरन्तर इस दिशा में किये जा रहे रिसर्च कार्य से अब यह दावा  शत प्रतिशत ्विश्वास के साथ  और confidence के साथ कहा जा सकता है कि आयुर्वेद की  इस तकनीक से शरीर के अन्दर की सभी बीमारियों, pathophysiological disease conditions या pathological disease conditions या metabolism  के कारण से पैदा या किसी अन्य कारणॊं से पैदा हुयी बीमारी को इलाज द्वारा दूर करके सामान्य स्वास्थय के स्तर पर लाया जा सकता है /

ETG AyurvedaScan से यह सब होता कैसे है ?

किसी भी तरह के Galvanic recorder से, यह किसी भी तरह का गैलवनोमीटर रिकार्डर हो सकता है या कोई दूसरा एलेच्ट्रिकल सिग्नल रिकार्डर यदि है तो भी उव्ससे रिकार्द कर सकते है /

पहले शरीर का अक्शा बनाते है / यह नकशा बनाना काम की आवश्यकतानुसार शरीर का बनाते है . इसे मैपिन्ग कहते हैं / Mapping  जरूरत के हिसाब से बनाते हैं जैसे उदहरण के लिये दिमाग की बीमारी के हिसाब से Encephalogram करते हैं इसलिये इसके लिये केवल दिमाग का नक्शा बनाते हैं जिससे दिमाग की कुछ बीमारियों का पता चल जाता है . Heart की बीमारियों का पता लगाने के लिये ई००सी०जी० करते हैं /  मास्नपेशियों के लिये E.M.G. test  / Electro myography test  करते है / आन्ख के लिये Electro Retino gram test करते हैं / इसी प्रकार से आयुर्वेद का सम्पूर्ण शरीर के परीक्षण का Test जिसे ETG AyurvedaScan अथवा Electro Tridosha Graphy / Graph / Gram कहते हैं / जिसमे शरीर के आयुर्वेद के बताये गये हिस्सों  का नक्शा बनाते हैं , इसे mapping कहते हैं /

Mapping  के बाद electrical scanning  करते हैं / यह उस मशीन से करते हैं जो galvanic recorder हो अथवा कोई दूसरा रिकार्डर, इसका उद्देश्य यही है कि शरीर के हिस्सों के signal record कर लिये जायें / यह काम काग्ज पर किया जाये अथवा सीधे सीधे अन्य किसी दूसरी storage device  पर यह investigator  की सहूलियत पर निर्भर करता है  /

Mapping and scanning  के बाद सभी Traces  का मूल्यान्कन करते हैं / ऐसा मूल्यान्कन जरूरत के हिसाब से करते हैं / जिसकी जैसी जरूरत , क्या निदान और कैसा निदान चाहते है, यह रिसर्च की demand  के अनुसार होता है /

Manual या  Computer  software की मदद से रोग निदान और दूसरे  आन्कड़े निकालते है /

सारे शरीर का परीक्षण होने के नाते और लगभग  500 से अधिक waves का अध्ध्यन करने के बाद यह आवश्यक है कि शरीर के सभी अन्गों के आन्कड़े और उनकी नाप जोख बहुत बड़ी सन्ख्या मे होगी / आंकड़े जितने अधिक होन्गे, रोग निदान उतना ही अचूक होगा और निदान किये गये रोगों की चिकित्सा उतनी ही सरल सटीक और स्पष्ट  हो जाती है /

Inspiring by  Electro Tridosha Graphy / ETG AyurvedaScan system whole body electrical mapping and scanning procedure from INDIA, many globally reputed research institutes are now experimenting for gaining the potentials of the electrical scanning. Some of the Medical Device manufacturer have introduced marketing of Electrical scanner for different use and purposes are available for the use of medical practitioners in foreign markets.

Inspiring by Electro Tridosha Graphy / ETG AyurvedaScan system whole body electrical mapping and scanning procedure from INDIA, many globally reputed research institutes are now experimenting for gaining the potentials of the electrical scanning. Some of the Medical Device manufacturer have introduced marketing of Electrical scanner for different use and purposes are available for the use of medical practitioners in foreign markets.

सारे शरीर का परीक्षण होने के नाते सास्त शरीर के अन्गों और प्रत्यन्गों की स्तिथि का पता चल जाता है कि वर्तमान बीमारी कहां से शुरू हुयीहै और उसकी जड़ बुनियाद कहां से पैदा हुयी है / बीमारी का चाहे जो भी नाम दिया गया हो , बीमारी का यह नाम तो उसके लक्षणॊं  के  अथवा syndromes को समझ करके ही  निर्धारित किया गया है / इसे तो consider  करते ही हैं साथ में प्रत किये गये आन्कड़ॊं को मिलाकर जब इलाज करते हैं तो अव्श्य ही सफलता मिलती है /

इसी लिये ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण कराकर इलाज क्रा चुके  सभी रोगी कहते है कि Every Disease condition is treatable and curable by E.T.G. AyurvedaScan system findings and Ayurveda treatment यानी ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परिक्षण कराकर इलाज कराते हैं तो शरीर की सभी  बीमारियों का इलाज सम्भव है /

”आर०टी०आई०” ; “सूचना के अधिकार” – भारत सरकार द्वारा दी गयी सुविधा के अन्तर्गत इलेक्ट्रो त्रिदोष ग्राफ / ग्राम : ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के बारे मे तकनीक के आविष्कारक, तकनीक का परीक्षण, तकनीक द्वारा आयुर्वेद के सिध्धन्तों का आन्कलन करने की विधि, तकनीक द्वारा रोग निदान, तकनीक का चिकित्सा कार्य में उपयोग, तकनीक की मान्यता आदि आदि जिग्यासा का समाधान पाने का अधिकार सम्भव



आयुर्वेदिक भस्म के बारे में झूठा प्रचार अभियान ; False and Baseless allegations of the use of AYURVEDIC BHASMA and Bhasma based remedies


आयुर्वेदिक भस्म का उपयोग आयुर्वेद के जन्म के साथ साथ ही किया जाता रहा है , ऐसा तथ्य आयुर्वेद के प्राचीन compile किये गये ग्रन्थों में मिलता है / किसी खास बीमारी में या अनुपान भेद के साथ भस्मों का उपयोग करते रहे हैं, अभी भी कर रहे हैं और आगे भी करते रहेन्गे/

भस्मों के शरीर में होने वाले अच्छे प्रभावों के कारण ही भस्मों का उपयोग अकेले या दवाओं के फार्मूले में मिलाकर किया जाने लगा / आज भी कर रहे हैं , उदाहरण के लिये हजरुल यहूद भस्म का उपयोग कुल्थी के काढे या पुनर्नवाष्टक कवाथ के साथ करने से चाहे कितनी बड़ी गुर्दे की पथरी हो melt होकर या धीरे धीरे गलकर निकल जाती है /

ETG AyurvedaScan ; your " Health Horoscope " in 100 pages

ETG AyurvedaScan ; your ” Health Horoscope ” in 100 pages

इसी प्रकार अभ्रक भस्म का उपयोग अनुपान भेद से जितनी भी शरीर में बीमारियां हि, उनमे उपयोग करते हैं / इन बीमारियों का चाहे कोई भी नाम दिया गया हो या नाम हो जो दरावना सा लगता हो, वे भी इसके उपयोग से ठीक होती है /

किस व्यक्ति ने या किस शख्स  ने आयुर्वेदे की भस्मों के उपयोग को लेकर और आयुर्वेद को सीधे सीधे  बदनाम करने के लिये ऐसा कुचक्र किया है , इसके पीछे की मन्शा का पता करना बहुत जरूरी है / आज तक न तो दुनियां के किसी हिस्से मे आयुर्वेद की भस्मों को लेकर कहीं कोई वैग्यानिक शोध हुआ है और इ इसकी   efficiency  के बारे में कोई वैग्यानिक अध्ध्य्यन भी, इसलिये मेरा मानना है कि जो भी ऐसा कह रहे हैं उसके पीछे ऐसा कहने वालों का क्या फायदा हो सकता है इसे केवल समझा जा सकता है /

फिर भी मै सबको बताना चाहता हूं कि आयुर्वेद की शास्त्रोक विधि पूर्वक बनायी गयी भस्मों का शरीर पर कोई भी बुरा प्रभाव नही पड्ता है , ऐसा मै कई बार ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित अध्ध्य्यन अपनी टीम के साथ कर चुका हूं और इसके परिणाम भी प्रकाशित किये जा चुके हैं / मेरा निष्कर्ष यही है कि आयुर्वेद की शास्त्रोक्त विधि से बनायी गयी भस्में रोगों में उपयोग के लिये शत प्रतिशत सुरक्षित हैं और इनके कोई भी side effects नही होते हैं /

ऐसे लोगों को इस तरह का आयुर्वेद को बदनाम करने वाला झूठा अभियान फौरन बन्द कर देना चाहिये / आव्श्यकता पड़ने पर किसी भी न्यायालय में ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की रिपोर्ट जो भस्मों के अध्ध्य्यन से सम्बन्धित है , अनकड़ों समेत प्रस्तुत की जा सकती है , उन लोगों के खिलाफ जो इस तरह का प्रचार और प्रसार करते हुये पाये जा सकते हैं

ऐसे सवालों का क्या जवाब दिया जाय ????????? How to reply these ABSURD questions??????


Jagdish Patel

sipsdr@yahoo.co.in

112.110.218.8

meri bahena ke fefde ka cancer hai aur unake sare sarir me dard hota hay kaun se dava leni chahiye unaka cancer 4th stej me hay

01/08/2012 at 09:55 AM

इस जैसे या इससे भी बदतर सवाल पूछे जाते हैं , जिनके लिये मुझे सोचना पड़ता है कि मै क्या करूं ? मै जनता हूं कि सवाल किस नियत से पूछे जा रहे है और उनके पीछे का मकसद क्या है ? मेरे observation  मे कुछ बाते हैं , जो मै नीचे सभी के साथ share करना चाहताहूं :

१- पहला यह कि सवाल पूछने वाला व्यक्ति 99.9999 %  प्रतिशत यह समझ कर सवाल पूछता है कि इन्टर नेट पर आये है थोड़ा टाइप कर लिया जाय और कुछ न कुछ  मुफ्त में पूछ लिया जाय , इसमें कौन सा पैसा खर्च होना है ? यह समझ कर वह सवाल पूछ  डालता है /

२- ऐसे व्यक्ति कतई गम्भीर प्रकृति के नही होते और बहुत लापरवाह किस्म के होते है

३- सवाल करने वालों की उम्र अधिकतर 95 प्रतिशत 12 साल से लेकर 24 साल तक होती है / कुछ अधिक् भी हो सकती है , लेकिन मेरा अन्दाजा इसी तरह की उम्र सीमा का है /

४- अधिकतर सवाल वास्तविकता से दूर होते है और उनमें कोई  reality या वास्तविकता नही होती है /

५- बहुत से सवाल absurd type के होते है जो छोटी उम्र के  किशोरॊ द्वारा पूछे जाते है , उदाहरण के लिये ” मै अपना लिन्ग 5 foot पान्च फुट का  बनाना चाहता हूं , दवा बताइये “

कहने का तात्पर्य यह कि अगर ऊपर किये गये  सवाल का जवाब देना हो तो क्या दिया जाये ? ये सज्जन तो ऐसे दवा पूछ रहे हैं जैसे किसी के चेहरे पर एक थप्पड़ रसीद कर दे या  जड़ दे और फिर  कहे की लकवा हो गया है और उसकी दवा बताइये ??

मै सभी को सलाह नही देता . इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि मेरा इलाज करने का तौर तरीका दूसरे आयुर्वेदिक चिकित्सकों से भिन्न किस्म का है / मै सबसे पहले आयुर्वेद की तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन कराने के लिये कहता हू और फिर इलाज के लिये जिस तरह का डाटा मिलता है और निदान ग्यान होता है उस पर आधारित होकर इलाज की वयव्स्था करता हूं / यह एक सही और वैग्यानिक तथा evidence based treatment  की व्यवस्था तथा  बीमारी का इलाज करने का सही रास्ता है जिसमे इलाज करने में किसी प्रकार की चूक अथवा गलती या deviation की सम्भावना नही के बराबर होती है , चाहे वह कैसी  भी बीमारी क्यों न हो ?

इसी कारण से मै सभी को सलाह नही देता कि वे क्या करें ? एक तो मै बहुत व्यस्त रहने वाला व्यक्ति हूं सुबह अपनी क्ळीनिक और बाद में पन्चकर्म अस्पताल मे जाकर काम करता हूं और दोपहर बाद वापस आकर अप्नी क्लीनिक देखता हू / शाम ५ बजे से लेकर रत १० बजे अक यही सिल्सिला चलता रहता है /

ऐसे मे मै कोशिश करता हूं कि ऐसे absurd सवालों का जावाब न देना ही सबसे अच्छा रास्ता है /

आर०टी०आई० यानी सूचना के अधिकार के अन्तर्गत देश अथवा विदेश का कोई भी मारतीय मूल का व्यक्ति ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तकनीक के बारे में भारत सरकार के उक्त विभागों में आवेदन करके सूचना प्राप्त कर सकता है / यह सूचना, तकनीक से जुड़ी हुयी सभी विधाओं यथा, परीक्षण , परीक्षण के परिणामों, पाइलत अध्ध्य्यन Pilot studies , मान्यता acredition , recognition आदि से सम्बन्धित हो सकती हैं /