Viral Infection in Rainy season ; बरसात का मौसम और वायरल इन्फेक्शन


हर साल बरसात का मौसम वायरल इन्फेक्शन लेकर आता है / इस साल भी कमोवेश उसी तरह के इन्फेक्शन दुबारा आ रहे है जैसे की पहले हुआ करते रहे है /

इस सीजन में भी जो इन्फेक्शन के मरीज  क्लीनिक में इलाज के लिये आये हैं उनमें [१] वायरल बुखारViral fever [२] कनाजन्क्तिवायातिस conjunctivitis [ ३] खाज खुजली herpes zoster  [४] त्वचा के इन्फेक्शन [५] कोलायातिस colitis[६] आव आना   mucous colitis [७] पतले दस्त या डायरिया [८] पाचन सम्बंधित विकार Gastro Intestinal Tract disorders [९] जुखाम आदि गर्मी ठंडक के मिश्रण से होने वाली तकलीफे [१०] मान्शपेशियों, जोड़ों के दर्द, रीढ की हड्डी के रोग , कमर दर्द इत्यादि देखने में आई है /

तकलीफे है तो उनके इलाज भी है आयुर्वेद और होम्योपैथी दोनों में ही इन सब व्याधियों का इलाज है /

१- बुखार के लिए इसी ब्लाग में कई स्थानों पर होम्योपैथी की दवाओं का मिश्रण बताया गया है , उसे ही नियमानुसार  सेवन करना चाहिये
२- वायरल बुखार या कोई अन्य बुखार हो,  बुखार से बचने के लिए और बुखार का इलाज करने के लियेआयुर्वेद की “सप्त पर्ण” बटी की एक गोली और प्रवाल पंचामृत रस की एक गोली भोजन करने के बाद या खाने के बाद दिन में एक या दो खुराक लेने से वायरल बुखार और पेट से सम्बंधित बहुत सी तकलीफों से बचाव हो जाता है / जो लोग चाहते है की उनको वायरल बुखार से बचाना है , वे इस का उपयोग रोजाना एक बार या दो बार कर सकते हैं /
३- पतले दस्त या डायरिया होने पर किसी चिकित्सक से सलाह लेकर दवा शुरू करें / एक या दो या तीन पतले दस्त हो जायें तो चिंता की कोई बात नहीं होती , यदि अधिक दस्त होने लगे तो अपने नजदीक के चिकित्सक से परामर्श करके दवा लेना शुरू कर देना चाहिये / आयुर्वेदिक की कुटज घन वटी लेने से दस्त रुक जाते हैं
४- बरसात के सीजन में निम्बू का रस दाल और सब्जी में मिलाकर तथा हरा मिर्चा भोजन के साथ अवश्य खाने  का प्रयास करना चाहिये / आन्तो के  अन्दर होने वाले इन्फेक्शन को यह दोनों वस्तुएं रोकती है, जिससे वायरल इन्फेक्शन के बढने से रोकने में मदद मिलती है /
५- कन्जन्क्टीवाइटिस  के लिए या आँख की किसी अन्य  बीमारी के लिए आन्खों में डालने का ड्राप eye drops उपयोग करना चाहिये
६- जुखांम आदि तकलीफों में गरम भोजन और ताजा भोजन करना चाहिये और अदरक तुलसी की चाय  का सेवन करे , ठंडी चीजो और ठंडक से बचे

[७] मान्श्पेशियों के दर्द के लिये या जोड़ॊं के दर्द के लिये या पानी मे भीन्ग जाने के कारण या बदन में दर्द होने की स्तिथि में आयुर्वेद के क्वाथ या अन्य औषधियों का सेव करना चाहिये, दर्द की अत्यधिक अवस्था में कोई सामान्य सा पेन किलर उपयोग करें /

ज्यादा तकलीफ हो तो अपने नजदीक के किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लेकर पूरा उपचार करें

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एक टिप्पणी

  1. पेन किलर का प़योग ना बताया करो ये अछा नही होता है

    ………..reply by Dr DBBajpai………..पेन किलर बताने से यह मतलब न निकाले कि मरीज को “एलोपैथी” के पैन किलर लेना है / पेन र्लीवर आयुर्वेद में भी है और होम्योपैथी तथा यूनानी में भी हैं / कोई पेन किलर तुरन्त असर करेगा कोई आधाघन्टा बाद , लेकिन असर सभी करते हैं / शत प्रतिशत मरीजों के ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की फाइन्डिन्ग्स के आधार पर इलाज करने के बाद का यही अनुभव है कि जब “मूल रोग” का इलाज होकर बीमारी ठीक हो जाती है तो चाहे जैसा दर्द हो अवश्य जड़्मूल से ठीक हो जाता है अथवा दर्द में भारी कमी हो जाती है /

    जहां पेन किलर की सलह दी जाती है वहा यही समझना चाहिये / एक बात और कहून्गा कि एलोपैथी के पेन किलर बहुत अधिक मात्रा मे और बहुत अधिक समय तक नही खाना चाहिये / इससे हमेशा नुकसान होता है /

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