दर्द को शमन करने और दर्द को दूर करने और दर्द को रोग मुक्त करने की आयुर्वेदिक औषधियां : Pain relievers and pain killers and pain curers of Ayurveda


ऐसा समझने की भूल कभी नही करना चाहिये कि आयुर्वेद अथवा होम्योपैथी अथवा यूनानी अथवा अन्य चिकित्सा विग्यान मे दर्द को दूर करने या दर्द को शमन करने वाली दवायें नही है / इन सभी चिकित्सा विग्यानों में दर्द दूर करने वाली दवाये है और उनका उपयोग यथा स्तिथि में सभी चिकित्सक करते हैं /

आयुर्वेद में भी दर्द के management  के लिये बहुत से तरीके दिये गये है और इसके अलावा बहुत सी दवाओं के सेवन करने के निर्देश और व्यवस्था की गयी है /

मुख्यतया आये दिन मरीज लोग प्रैक्टिस में  तरह तरह के दर्द की शिकायत  करते है, इन दर्दों की श्रेणियां निम्न प्रकार की होती हैं /

१- सिर का दर्द ; ऐसा दर्द नाक की सूजन यानी sinusitis, Migarin , cervical spondylitis , high blood pressure , insomnia आदि रोगों के साथ जुड़ा हुआ होता है /  

२- बदन का दर्द ; ऐसा दर्द सर्दी , जुखाम की तकलीफ के साथ या अत्यधिक थकान या डायबिटीज या मान्स्पेशियों की आर्थ्राइटिस, Muscular Arthritis या शरीर की किसी metabolic anomalies  के कारण से  भी होता है

३- जोड़ॊं का दर्द ; यह दर्द Musculo-skeletal  समस्याओं के साथ होता है / जोड़ॊ मे कैल्सियम की कमी या अन्य विकृतियों के कारण से दर्द होते हैं /

४- नसों का दर्द ; इसे nerological , neuralgia आदि की वजह से होता है/ चेहरे के trigeminal neuralgia  उदाहरण के लिये ले सकते हैं /

५- पेट का दर्द , गुदों का दर्द आदि दर्द visceral  pain  कहे जाते है

वहुत से दूसरी तरह के दर्द होते है जैसे दान्तों का दर्द, आन्खो का दर्द , कान का दर्द  आदि /

दर्द का mechanism समझने के लिये जरूरी है कि दर्द होते क्यों हैं ? बिना इसका मुकम्मल कारण समझे बगैर दर्द जड़  मूल से कभी भी नही खत्म होते और न पीछा छोड़ते हैं / शरीर में सिर का दर्द  ब्लड प्रेशर, सायनुसायटिस, कान की तकलीफों, सरवाइकल स्पान्डिलाइटिस , गर्दन या रीढ आदि  के तकलीफों के impact  के कारण होते हैं / पेट साफ न होने या कब्जियत या अन्तों की बीमारियों या गुर्दों की बीमारियों और आन्तों की  कोलायटिस से पैदा बुखार और low degree temperature आदि से भी सरदर्द होने लगते है / Heart या Brain की या आन्ख की कोई तकलीफ होने पर भी सिर दर्द होने लगता है / दर्द का कारण यही होता है कि मुख्य स्थान पर यदि किसी तरह का inflammation होता है तो उससे पैदा  toxic substance का impact  nerve impulses बढा देती हैं जो सामान्य nerve impulses की तुलना से अधिक होता है / ये impulses  जितनी ही अधिक तेजी से पैदा होन्गी और  इनकी  जितनी ज्यादा तेज़ फड़्कने की स्पीड होगी,  दर्द की तकलीफ की तेज़ी की इन्टेन्सिटी भी उतनी ही अनुपात में ज्यादा होगी /

पेन किलर्स इसी फड़फड़ाहट की  इन्टेन्सिटी को कम कर देते है / ऐसा इसलिये होता है क्योकि कुछ पेन किलर्स खाने के बाद दर्द को पैदा करने वाले throbbing  या  pulsating movement  की सक्रियता वाली जगह को पैला देते है जिससे उस स्थान का stress थोड़ा सा कम हो जाता है और जो  obstacles होते हैं जैसे उस स्थान की  पैदा हुयी सूजन को कम करते हैं / इस कारण से नया oxigenated blood आकर उस inflammation वाले स्थान की जमा cellular metabolism से पैदा toxines को हटाकर उस स्थान को repaire कर देता है / जिससे दर्द  वाली जगह का stress कम होता है फिर धीरे धीरे दर्द से  राहत मिल जाती है /

पेन किलर्स की दूसरी श्रेणी मे muscle relaxant आते है / यह मान्सपेशियों की hardness, stiffness, rigidity, कड़ापन को relax  यानी अपने प्रभाव से फैला देते है, जिससे नया oxigenated Blood  उस स्थान पर पहुचता है और  वहा इकठ्ठा रक्त को replace करके अपने साथ toxines को बहा ले जाता है / इस प्रक्रिया में दर्द पैदा करने वाले सब्सटेन्स भी हट जाते है और दर्द दूर होता है /

पेन किलर्स की तीसरी श्रेणी में sedative या localised sedatives alkalides  वाली या opiates अफीम के लवणों से तैयार की गयी दवायें होती हैं जिन्हे दर्द की अति उग्र  अवस्था में उपयोग करते हैं / 

इसके बाद अगर ये दर्द दूर करने वाली दवायें फेल हो जाती है  या दर इन दवाओं के खाने के बाद भी नही ठीक होता है तो  यह स्वाभाविक है कि दवा की एक निश्चित और निर्धारित की गयी मात्रा कुछ दिनों के बाद resist  हो जाती है और फिर इसी दबा की मात्रा   दुगनी या तिगनी करनी पड़ जाती है /

दर्द दूर करने की अब STEROIDS युक्त दवाये भी हैं , लेकिन इनकी उपयोगिता पर  बहुत कुछ डाक्टर का निर्णय और उसके अनुभव की छमता पर निर्भर करता है कि मरीज के लिये किस तरह उपयोगी हो सकती है /  अधिक steroid की मात्रा खाने से लीवर, गुर्दा, हड्डियों, दिमाग,हार्मोनस आदि बिगड़ जाते हैं / 

बहरहाल  आयुर्वेद मे दर्द के लिये बहुत सी शास्त्रोक्त दर्द निवारक दवायें  हैं जिनके सेवन से दर्द की तकलीफ दूर हो जाती है /

१- सिर दर्द के लिये ; चाहे जैसा सिर दर्द हो और किसी भी वजह से हो आयुर्वेदिक औषधि “शिर: शूलादि वज्र रस”  सेवन करने से सिर और गर्दन से ऊपर के अन्गों के सभी दर्द ठीक हो जाते हैं /

२- शूल वर्जिनी  रस [वटी] ; पेट whole abdomen के सभी दर्द इसके उपयोग से दूर हो जाते हैं

३- दशमूलरास्ना काढा पीने से बदन का दर्द और जोडो का दर्द अवश्य ठीक हो जाता है / इस काढे को सभी दर्द में उपयोग कर सकते हैं / इसमे निर्गुन्डी मिला देने से इसकी दर्द दूर करने की क्षमता और अधिक बढ जाती है /

उपरोक्त सभी बतायी गयी दवाये मैने अपने हजारों मरीजों पर उपयोग की है और अभी भी कर रहा हू / ये सभी दवाये tested हैं /

लेकिन मै एक बात फिर सबसे कहना चाहून्गा कि दर्द दूर करने के लिये और दर्द की तकलीफ से बचने के लिये मूल रोग या original disease condition  का ठीक होना बहुत जरूरी है / अगर मूल रोग नही ठीक होगा तो दर्द भी नही ठीक होगा /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण कराकर आयुर्वेदिक इलाज कराने के बाद सभी तरह के दर्द जो ऊपर बताये गये है , वे सब के सब ठीक होते है या उनमें राहत मिल जाती है, दर्द की इन्टेन्सिटी में धीरे धीरे कमी आती है और रोग मुक्त होता है /

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