दिन: सितम्बर 7, 2012

गुदा-कैन्सर की एक रोगिणी ; जिसे केमोथेरापी और रेडियेशन दिया जा चुका था………?????? A case of Ano-rectal Cancer Post Radiation and Chemotherapy treated patient ………..?????? ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज से राहत ; ETG AyurvedaScan based treatment relieved problems


एक रोगिनी जिसे गुदा का कैन्सर हुआ था और जिसकी बायोप्सी के बाद chemotherapy और Radiation का इलाज दिया जा चुका था / इलाज के कुछ समय बाद उसे फिर से तकलीफ होने लगी थी / उसकी गुदा में दर्द और उठने बैठने में गुदा पर जब दबाव पड़्ता था , तब दर्द होने लगता था / जिस डाक्टर ने उसका इलाज किया था उससे तकलीफ का समाधान न ठीक से हो पाने के कारण उसी चिकित्सक ने सलाह दी कि अब इनका आपरेशन करना पडेगा और यह समझाया कि पेट में छेद करके पाखाना का मुकाम बना दिया जायेगा, जिससे अब आगे से सारा काम यानी मल त्याग का कार्य पेट से ही करना होगा /

Her pathological investigation reports and Scans and BIOPSY report and RADIATION / CHEMOTHERAPY  are given below  ;

यह सुनकर घर वालों की जो भी राय बनी हो, उसके बारे में मै कुछ नही कह सकता / लेकिन एक पूर्व परिचित मरीज जो पहले ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज करा चुका था, उसने सलाह दी कि मुझसे सलाह ले कि ऐसी स्तिथि में क्या किया जा सकता है / मरीजा के एक समबन्धी सभी prescriptions और medical treatment  की व्यवस्था के कागज और रिपोर्ट और scan  की रिपोर्ट लेकर सलाह के लिये आये , मैने सारा विवरण देखकर उनको सलाह दी कि आपरेशन कराने के बाद शरीर की स्तिथि और अधिक बिगड़ती है / इससे बेहतर है कि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित findings  पर यदि treatement  होगा तो  रोग का बढाव होने की स्तिथि थोड़ा कम हो जायेगी ,तो अवश्य लाभ होने की सम्भवना बनी रहती है /

मैने उस रोगिणी का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण किया जिससे उसकी findings मे पता चला कि उसके लीवर, दोनों आन्तों में , प्लीहा और अन्य आनतरिक अवयवों की patho-physiology या तो सामान्य लेवल से अधिक थी या फिर सामान्य लेवल से बहुत कम थी / उसकी जन्म के समय की प्रकृति कफ कम और पित्त अधिक की established थी लेकिन बीमारी के ई०टी०जी० परीक्षण के समय उसका त्रिदोष level पित्त कम और वात अधिक निकल आया / त्रिदोष भेद भी अधिक थे / रसादि धातुओं के भी विकृति मिली / 

The ETG AyurvedaScan Data of the Ayurvedic Fundamentals are given below in sheet ;

Above data shows that PITTA dosha is prominent in this case. Prakrauti intensity of pitta and Pitta Dosha are not matching in the similar intensities. Pitta is below than comparatively from Prakruti. At the same time the Pitta bhed are not within normal limits.  Bhrajak pitaa is severely low in intensity. Rakta  dhatu in  general  is increased.

The basis of the selection of  Ayurvedic and Homoeopathic remedies are  [1] that Pitta intensity in Prakruti is in Normal limit while in Tridosha Pitta intensity is lower to Normal, this concludes that Pitta is the causative facor of the complaints [2] Tridosha bhed of VATA like Udan and APAN is in higher level than normal value , confirms the sites of Ailments in body.

Diagnosis of disorders which patient have, are given below.

मरीजा को निम्न बीमारियों के syndromes  पाये गये ;

1- Abnormal Body Temperature
2- Tachycardia
3- Hepato-spleenomegaly
4- Chole-pancreatic pathophysiology observed
5- Bowel’s pathophysiology with irregular bowel habits
6- Blood anomalies with skin pathology present
7- Tendency of High level blood sugar

रोगिणी को आयुर्वेदिक और homoeopathic  इलाज करने की व्यव्स्था की गयी / कुछ दिन की दवा से रोगिणी का दर्द जिससे उसको सबसे ज्या्दा तकलीफ थी , उसमें आराम मिला /

FOLLOW-UP ON 03.10.2012 ;

She is almost have no problem of pain or any disturbances symptoms  and she is liiving her NORMAL LIFE. Her “” Ayurvedic andHomoeopathic combination“” treatment is still going on and is advised to continue for atleast few months.

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