महीना: अक्टूबर 2012

www.healthkartplus.com ; published article on Allopathic Doctor’s MALPRACTICES examples


Malpractices in the Healthcare sector

[ Original article is puiblished in www.healthkartplus.com /  The copy  and contents are publishing here  for the benefits of the global readers without permission of the Websites owners ]

“I was admitted in hospital due to severe pain in my stomach, “said Amrit Paudwal, 42. “As my family doctor was travelling, I had to visit the doctor of a local hospital. He asked me to go for a kidney transplant immediately else I would not survive. When I wanted to verify the same from a similar doctor, he referred me one who also produced the same diagnosis. Still unbelieving, I called up my family doctor. After proper diagnosis, he found out that the pain was simply due to trivial gastric issues.”

Malpractices are rampant today in the Indian Healthcare industry. Basically, an act of negligence committed by a medical provider is known as Medical Malpractice which can cause injuries or death of the patient, Medical Malpractice can also be defined as “Doing something a medical provider of ordinary skill would not have done, or failing to do that which a medical provider of ordinary skill would have done.”

Anyone seeking medical help can be a victim of these malpractices. These range from anything as simple as not putting the rails of hospital bed in an upright position to something as complex as a blunder committed during an open heart surgery. In this context, we can only relate those issues where the patient’s prior consent was not taken or he was not informed of the risk/details/benefits involved. If he/she had consented to it, then it wouldn’t be categorized under malpractice.

Laws exist to support the claims of victims of such situations. The plaintiff can demand for an attorney who will fight for compensation due to the damage caused. A person can only register a claim, if there has been an injury/damage caused to the patient directly due to negligence. It is shocking to note that most of such cases go undetected or overlooked.

The last few decades have changed the relationship of a doctor with a patient, which is built on mutual trust. Due to various scientific technological advances, there has been a decrease in the mortality rates and improvement in quality of overall health. While one section of the Indian population regards doctors as living Gods, another section is afraid of them due to their scarred past.

What can be the reason?

•Various fraudulent practices such as false claim regarding need for an operation
•A plethora of expensive tests without need
•Cut practices and commission
•Scaring patients to relent to unnecessary as well as expensive operation

The Indian population fishes out almost 60% of its medical expenses from its own pocket. In this condition where we already need a better healthcare system, the unscrupulous practice of doctors forms a wrong public image. There are various alleged cases against The Medical Council of India (MCI) which talk about its blatant corrupt practices. For instance, there are villages in Andhra Pradesh where uteri of women have been removed forcefully. Research also shows that though malpractices are rampant, MCI has not cancelled even a single doctors’ license since 2008!

A few shocking pointers have come to attention with research:

•AIIMS, the country’s premier medical institute is severely understaffed
•Drugs are approved without clinical trails
•There are alleged nexus between doctors and drug control agencies
•National Urban Health Mission, an initiative by Government of India which provides healthcare to urban poor is ready but still not launched.
•Full amounts allocated in budget are not even spent.

Various alleged cases about Doctor-chemist nexus have been reported. Doctors would prescribe various tests and diagnoses which are basically unnecessary, and increase the cost of total bill. The doctors would, in return, get a certain sum of commission for prescribing those fake tests. These are also known as cut-practices. A website defines cut-practice as “All doctors qualified to practice modern medicine take the classical Hippocratic Oath before beginning their professional career. However, when they start practicing in real life, they start making so called “practical adjustments during their clinical and therapeutic decisions. Sometimes they get open offers of referral of patients for a predetermined and regularized practice of fee-sharing.”

As the relationships between patients and doctors continue to dampen, dozens of hospitals are ransacked every year by local people attempting to get back at ‘the system’ for malpractices & the loss thereof. There are sections in Indian constitution which talks about criminal liability for Medical Malpractices, which cover deaths, caused due to negligence, causing hurt by endangering life etc. but the victims rarely receive any justice. It is indeed ironic that such practices happen within the country which is internationally renowned for having some of the world’s most robust healthcare services and professionals.

[article taken from www.healthkartplus.com with obligations]

Comments by Dr DBBajpai डा० डी०बी०बाजपेयी द्वारा किये गये कमेन्ट्स…………..

यद्यपि यह बहुत खेद की बात है कि डाक्टरों द्वारा इस तरह की प्रैक्टिस की जा रही है, जिसे कोई भी भारतीय नागरिक स्वीकार नही करेगा और  ऐसे किये जा रहे अनियमित कार्यों को किसी भी व्यक्ति को  स्वीकार भी नही करना चाहिये / मैने स्वयम कई बार अपने इसी ब्लाग में डाक्टरों द्वारा की जा रही mal-practices के बारे मे लिखा है और लोगों का ध्यान इस तरफ खीचने का प्रयास किया है / मै फिर एक बार अपना observation और अनुभव आप सभी लोगों को बताने का प्रयास कर रहा हूं /

[१] सबसे पहली बात यह सामने आयी है कि अधिकान्श भारतीय लोग बीमार होने पर “डाक्टर”  के पास दवा लेने नही जाते हैं, पता नहीं ऐसे लोगों को डाक्टरों से किस बात की allergy है  / ऐसे लोग  किसी मेडीकल स्टोर में जायेन्गे और दवा बेचने वाले से अपनी तकलीफ बताकर दवा मान्गते है / दवा बेचने वाला कुछ टिकिया या गोली या इन्जेक्शन लेने की सलाह देता है जो दवा बेचने वाले की  समझ में आता है / पैसे के लालच में दवा बेचने वाले दुकान्दार इस तरह से combination  बनाकर अपनी कमाई करते हैं / यहां मेरी समझ से ऐसा मसला money matters  से जुड़ा है / लोग डाक्टर के पास  इसीलिये नही जाते क्योन्कि उनको लगता है कि डाकटर को लम्बी फीस देनी होगी और वह महन्गी दवा लिखेगा / Medical stores  से दवा लेने से फीस भी बचेगी और सस्ती दवा  भी मिल जायेगी / ऐसी मानसिकता लोगों की बन रही है /

[२] कुछ दुकानदार जब ऐसे लोगो का इलाज दो चार दिन करता है और मरीज नही ठीक होता है तब वही दूकान्दार सलाह देता है कि किसी डाक्टर को दिखा लो / मरीज उसकी सलाह को नकार कर कहता है कि वही दवा समझ कर दे दे / दूकान्दार यह  समझता है कि अगर मै इस्को दवा देने से मना करता हू तो यह किसी दूसरे दवा बेचने वाले के पास चला जायेगा और उसकी दूकान्दारी का नुकसान होगा, इसलिये ग्राहक बचाने के चक्कर में वह दवा जो भी समझ में आती है, देता चला जाता है / हाई ब्लड प्रेसर से ग्रसित मरीज सिर दर्द की दवा खाते खाते “ब्रेन हेम्रेज” के शिकार हो गये, ऐसा मैने बहुत से रोगियों को देखा है / अब ऐसे मरीजों को कौन समझाये और कैसे समझाये कि उनका दवा लेने और खाने का तरीका कितना गलत है ?  

[३] मरीजों की भी मानसिकता बहुत अजीब किस्म की है / कुछ अपने को डाक्टर से अधिक intelligent  समझते है / उनको लगता है कि वे जिस डाक्टर के पास आये है, वे उनकी बात नही समझ पा रहे है, डाक्टर उनकी पूरी बात नही सुन रहे हैं, जब वह मेरी बात नही सुन रहे हैं तो इलाज क्या करेन्गे ?  यह एक मानसिक स्तिथि  मरीज अपने आप बना लेता है , जिसको दूर करने का क्या रास्ता हो सकता है ? इस पर विचार करना होगा / हलान्कि डाकटरों के इस तरह और ऐसा व्यवहार करना कुछ हद तक सही है / बहुत से डाक्टर मरीज के साथ सहयोग नही करते, अब इसकी क्या वजह है , इस पर कोई  शोध  कार्य होना चाहिये / बहुत से मरीज अपनी बीमारी ठीक से बताते नही हैं और अपनी बीमारी से जुड़े बहुत सी बातें छुपा जाते हैं, जिससे गलत और उलटा सीधा इलाज करने की गुन्जायश बनी रहती है / मरीज अपनी बीमारी का सही हाल नही बताते /

[४] एक मानसिकता मरीजों की बड़ी बुरी तरह से पनपने लगी है / डाक्टर  अगर मरीज की बीमारी का  सही सही रोग निदान करता है और उसको बताता है कि उसे फलाना रोग हो गया है ? मरीज को डाक्टर पर विश्वास ही नही होता कि डाक्टर साहब यह कैसे बता रहे है कि उसको फलाना रोग है ? जब डाक्टर साहब पैथोलाजिकल जान्च और एक्स रे और अल्ट्रा साउन्ड और सी०टी० स्कैन और एम०आर०आई० जैसी महगी जान्च करा देता है , तब जाकर मरीज को विश्वास होता है कि डाक्टर साहब जितना बता रहे थे , वह सब सही निकला / मरीज जब तक अपनी “पैसे की गर्मी ” बाहर न निकाले तब तक मरीज को चैन नही आता / पैसे वाले मरीज या जिनके पास आसानी से हजारों या लाखों रुपया खर्च करने की हैसियत है ऐसे मरीज अपने पैसे के बल पर इलाज कराने के लिये डाक्टरों को प्रभावित करते है / डाक्टर भी इन्सान हैं , वे भी मिल रहे धन को क्यों जाने दें, आखिर लक्षमी जी आ रही हैं,  पैसा किसी को काटता नही है , इसीलिये डाक्टर भी मरीज की मानसिकता को भाम्प कर पैसा बनाने का काम करने की स्कीम मरीज को लालच के कारण बताना शुरू कर देते हैं / जब मरीज पैसा खुद खर्च करने के लिये फड़्फड़ा रहा है और पैसे की गर्मी निकालना  चाहता  है तो डाक्टर को क्या एतराज हो सकता है ?

[५] बहुत से ऐसे रोग हैं जिनका इलाज एलोपैथी चिकित्सा मे नही है / लेकिन जितने भी रोग एलोपैथी के चिकित्सक ला-इलाज बताते हैं, उनका इलाज आयुर्वेद या होम्योपैथी या यूनानी या प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा सम्भव होता है / कुछ ऐसे रोग जरूर हैं जिनका सरजरी के इलाज Surgical interventions के अलावा दूसरा कोई विकल्प नही है /  यह एक प्रकार की चिकित्सकों की अग्यानता कही जायगी कि जिस चश्मे से वे एलोपैथी का नजरिया पढते हैं , उस चश्मे  से वे दूसरे चिकित्सा विग्यान की उपलब्धियों को नकारते हैं / यही वह जटिल स्तिथि है जिससे मरीज को सही इलाज क्या है, उसके बारे में सही और सतीक जानकारी नही मिल पाती, जिसके कारण वह गलत इलाज का शिकार होता है / मेरे पास रोजाना गलत शिकार के मरीज आते रहते हैं / वास्तविकता और हकीकत यह है कि एलोपैथी के चिकित्सक जिस बीमारी को लाइलाज बताते है, उन बीमारियों का इलाज दूसरे चिकित्सा विग्यान में मौजूद है / अब इसे जानकारी का अभाव ही कहेन्गे कि सही सलाह के अभाव में मरीज की दुर्दशा नही होगी तो किसकी होगी ? जब गलत इलाज होगा तो दवाओं के साइड प्रभाव और नयी नयी बीमारियों का आविष्कार अपने आप होने लगेगा ? इसी कारण से अब तरह तरह की नयी नयी बीमारियों का जन्म होने लगा है जो आज से पचास साल पहले तक नही थी /

यह कब तक चलता रहेगा, मै इसके बारे मे कुछ नही कह सकता / इसे रोकने का क्या उपाय है , इसके बारे में जब तक सामूहिक तौर पर विचार नही होगा, तब तक कुछ नही किया जा सकता और यह जैसे चल रहा है, फिल्हाल ऐसे ही चलते रहने की सम्भावना अधिक लग रही है /

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Electro Homoeo Graphy ; EHG HomoeopathyScan ; A case analysis with Homoeopathic remedy selection


Below is a case of 16 years old male boy, suffering from Psychological disturbances. The Gaurdians of the boy narrated all the problems , he have. The boy was treated by Allopathic medications , but without any result.

I advised him to go for an ETG ayurvedaScan and EHG HomoeopathyScan combined examination for proper diagnosis of INNER COMPLAINTS.

Here only selection of the appropriate Homoeopathic remedy is selected on the basis of the data and report.

                               

EHG HomoeopathyScan system is the only mechanical system, which is providing accurate selection of the Homoeopathic remedies of the person scanned, in scientific way. The diagnosis of the disease condition and the huge data is recieved after scanning of body for Homeopathic purposes. The scanned areas are differed and evaluated according to the Homoeopathic philosophy laid down by the Master Hahanemann.

In this case the evaluation of the Psora and other miasm , mentioned in Organon of Medicine is quantified , with their intensity presence. This eases the selection of remedy for patient successfully without any deviation and with strong confidence.

वेदों में आयुर्वेद का उल्लेख ; अथर्व वेद और रिग वेद की सूक्तियों में आरोग्य के लिये प्रार्थना ; Hindu Veda “ATHARVA VEDA” and “RIG VEDA” mentions Ayurveda


आयुर्वेद की उतपत्ति के पहले इस विग्यान के बारे में भारतीय वेदों में जिक्र किया गया है / वेदों में आयुर्वेद के विषय में “अथर्व वेद” में रोग निवारण सूक्त दिये गये हैं , जिनसे पता चलता है कि जो लोग बीमार हो जाते थे, वे उस समय रोग-अवस्था से निजात पाने के लिये क्या क्या करते थे और किस पर depend होते थे /

चार वेदों मे सबसे अधिक अथर्व वेद में रोग निवारण सूक्तियां दी गयी है / अथर्व वेद के चतुर्थ कान्ड का १३ वां सूक्त तथा रिग वेद के दशम मन्डल का १३७ वां सूक्त “रोग निवारण सूक्त” के नाम से जानते हैं /

अथर्व वेद में सूक्तों को compile रिषि शन्ताति तथा देवता चन्द्रमा और विश्वेदेवा हैं / जबकि रिग वेद में प्रथम मन्त्र के रिषि भारद्वाज, द्वितीय के कश्यप, तृतीय के गौतम, चतुर्थ के आत्रि , पन्चम के विश्वामित्र, षष्ट के जमदाग्नि, सप्तम के रिषि वशिष्ठ जी हैं और देवता विश्वे देवा हैं /

इस सूक्त के जप पाठ से रोगों से मुक्ति अर्थात आरोग्यता प्राप्त होती है / रिषी ने रोग मुक्त होने के लिये देवताओं से प्रार्थना की है /

उत देवा अवहितं देवा उन्न्यथा पुन : /
उतागश्च्कुषं देवा देवा जीव यथा पुन : //1//

अर्थात हे देवो, हे देवो, आप नीचे गिरे हुये को फिर निश्चय पूर्वक ऊपर उठायें / हे देवों, हे देवो, और पाप करने वाले को भी फिर जीवित करें , जीवित करें /

द्वाविमौ वातौ वात आ सिन्धोरा परावत : /
दक्षं ते अन्य आवातु व्यन्यौ वातु यद्रप : // २ //

अर्थात ये दो वायु हैं / समुद्र से आने वाला पहला वायु है और दूर भूमि पर से आने वाला दूसरा वायु है / इनमे से एक वायु तेरे पास बल ले आये और दूसरा वायु जो दोष है , उसको दूर करे /

आ वात वाहि भेषजं वि वात वाहि यद्रप: /
त्वं हि विश्व भेषज देवानां दूत ईयसे // ३ //
अर्थात हे वायु, औषधि यहां ले आ ! हे वायु जो दोष हैं, वह दूर कर दे / हे सम्पूर्ण औषधियों को साथ रखने वाले वाय ! नि:संदेह तू देवों का दूत जैसा होकर चलता है, जाता है, प्रवाहित है /

त्रायन्तामिमं देवास्वायन्तां मरुतां गणा: /
त्रायन्तां विश्वा भूतानि यथायमरपा असत //४//
अर्थात हे देवो ! इस रोगी की रक्षा करें / हे मरुतों के समूहो ! रक्षा करें / जिससे यह रोगी रोग दोष रहित हो जाये /

आ त्वागमं शन्ताति भिरिथो अरिष्टतातिभि: /
दक्षं त उग्रमाभारिषं परा यक्ष्मं सुवामि ते //५//
अर्थात आपके पास शान्ति फैलाने वाले तथा अविनाशी साधनों के साथ आया हूं / तेरे लिये प्रचन्ड बल भर देता हूं / तेरे रोग को दूर कर भगा देता हूं /

अयं मे हस्तो भगवानयं मे भगवत्तर: /
अयं में विश्व भेषजो~यं शिवाभिमर्शन: //६//
अर्थात मेरा यह हाथ भाग्यवान है / मेरा यह हाथ अधिक भाग्यशाली है / मेरा यह हाथ सब औषधियों से युक्त है और मेरा यह हाथ शुभ स्पर्श देने वाला है /

हस्ताभ्यां दशशाखाभ्यां जिव्हा वाच: पुरोगवी /
अनामयीत्रुभ्यां हस्ताभ्यां ताभ्यां त्वाभि मृशामसि //७//

दस शाखा वाले दोनों हाथों के साथ वाणी को आगे प्रेरणा करने वाली जीभ है / उन नीरोग करने वाले दोनों हाथों से तुझे हम स्पर्श करते हैं /

 

वेदों में व्यक्त की गयी सूक्तियों से यह तो प्रमाणित ही है कि आयुर्वेद की नींव यहीं से शुरू हुयी और इस बुनियाद के बल पर किये गये निरन्तर विकास से “स्वस्थ्य वृत्त” यानी शरीर को स्वस्थय कैसे रखा जाय या रखा जा सकता है , इसके नियम विकसित किये गये जो मनीषियों नें अपने keen observation  से प्राप्त किये थे /

 

हजारों साल के नियमित अभ्यास से आयुर्वेद का विकास हुआ और इसका उदगम अथर्व वेद तथा रिग वेदों की सूक्तियों से हुआ /

आयुर्वेद में वर्णित प्रकृति के त्रिगुणात्मक तत्व ; सत्व रज और तम [ तीन गुण ] का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्वारा शरीर में उपस्तिथि आन्कलन


आयुर्वेद का क्रान्तिकारी आविष्कार ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के प्राप्त डाटा अध्ध्य्यन के पश्चात यह सुनिश्चित हो गया है कि इस तकनीक द्वारा प्रकृति के तीन गुणों यथा सत्वज तत्व, रजस तत्व और तमस तत्व का कितना अन्श शरीर के अन्दर उपस्तिथि है और इसका क्या combination बनकर व्यक्ति की क्या mental capabilities है , mental qualities है , इन सबका पता लगाया जा सकता है /

The subject matter is related to SANKHYA PHILOSOPHY , which is in actually not related to Ayurvedic fundamental philosophy in any way, because the concept is differs from Ayurveda philosophy to Sankhya philosophy, it also differs from Bhagvat Gita Sankhya philosophy.

In Ayurveda , Satva, Raj and Tam are for the diagnosis purposes and not for the philosophical use. By assessing these three basics Prakrati Guna, Mental Qualities of the sick person is assessed accordingly in view of selection of remedies and management of the case.   ( Copy of the PAGE  from report of  ETG AyurvedaScan  )

Severe INFANTILE HEPATO-SPLEENOMEGALY with Nephrotic Syndromes ; a rare problem of Children ; 03 years old female children’s ETG AyurvedaScan traces exposes the hidden allied problems ; तीन साल की लड़्की का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्वारा परीक्षण, जिसे यकृत-प्ळीहोदर के साथ “नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम्स ” है और ऐसी बीमारी के साथ बहुत सी अन्य तकलीफॊ का निदान


बिहार राज्य से चौबीस घन्टे का सफ़र करके पहुचे एक चिकित्सक अपनी ३ साल की बेटी जिसे चिकित्सकों ने “नेफ्रोटिक सिन्ड्रोम्स”  और पेशाब में प्रोटीन जाने का इलाज कर रहे थे और जब यह लड़्की नही ठीक हुयी तो इस लड़्की का इलाज कराने और परामर्श के लिये कानपुर आये, जिन्होने पटना, दिल्ली और दुसरे शहरों में जाकर इलाज कराया पर सब निष्फल साबित हुआ / सारे परीक्षण normal निकले, लेकिन लड़्की को कोई आराम नही मिला /

रोगी के गांव के एक सज्जन अपना ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन कराकर इलाज करा रहे हैं / उन्होने ही सलाह दी कि बच्ची को सही इलाज के लिये कानपुर ले जायें /

दिनान्क १० अक्टूबर २०१२ को मरीज के परिजन ३ साल की लड़्की को ले आये / Observation मे आया कि इसके सारे शरीर में severe सूजन है और बच्ची के योनि मार्ग में सूजन आ गयी है / एलोपैथी के चिकित्सक उसको एन्टीबायोटिक और diuretic दवायें दे रहे थे , लेकिन कोई लाभ नही मिला / मरीज की हालत दिन पर दिन खराब हो रही थी /

मैने सलाह दी कि एक ETG AyurvedaScan करना पड़ेगा , उसके बाद ही पता चलेगा कि उसको क्या क्या तकलीफ है और उस तकलीफ की जड़ बुनियाद कहां पर है /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण के ट्रेसेस नीचे दिये गये हैं

अध्ध्यन के बाद निम्न बीमारियों का पता चला / इसके शरीर के अन्य अन्गों का intensity लेवेल का पता चला और आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तों का अन्कलन करके आयुर्वेद की दवाओं का चयन किया गया /

Ayurvedic medicines साथ में होम्योपैथी के कुछ mother tinctures का mixture भी दिया गया जिससे मरीज को जल्दी और तेजी से फायदा हो /

Follow-up comments by Dr D.B.Bajpai [ 27/10/2012] ;

When the baby  came for the treatment on 11.10.2012, her Urine Albumin level was ++++ [four plus] , now after 15 days of the Ayurvedic and Homoeopathic combination treatment , her whole body swelling is reduced  about 60 percent and her Urine albumin Level comes down to  ++  [two plus]. Still her treatment is continue. 

Follow-up progress ; as on 02/11/2012

Urine Albumin is in traces and her whole body swelling is now gone and the baby is in normal body get-ups. She have almost no problem of any NEPHROTIC SYNDROMES. But I advised her parent to continue Ayurvedic and Homoeopathic medications as usual. In view of Parent, she is now seeing normal.

 

This is another example of the efficiency and effectiveness of the revolutionised newly invented Ayurvedic Diagnosis technology ETG AyurvedaScan based  treatment  of INCURABLE DISEASE CONDITIONS.

Aletris Ferinosa ; a Homoeopathic Remedy for Women ; एलेट्रिस फेरीनोसा ; महिलाओं के लिये एक अमृत तुल्य औषधि


This is one of the Female remedy of Homoeopathic medical system, used almost in many clinical conditions in the ailments related to Female Genital systems.

1- It is well suited to those who are aneamic and feels tired all the times with the complaints of profuse Leucorrhoea
2- Digestive disorders , week digestion with aversion to food

3- a safer remedy for Vomitting during pregnancy

4- Menstruation with severe pain as if happened in labour

5- Prufuse and heavy Menstruatuion flow

6- Premature Menstruation with any complaints

7- Habitual Tendency of Abortion

8- Prolapses of Uterus or like syndromes

Those who are suffering with these complaints / syndromes, they should think over use of this valuable Homoeopathic remedy.

ALETRIS FERINOSA should be taken in ” Mother Tincture ” or “Q” potency. The Mother tincture or Q doses are 05 to 10 minims / drops with one or two spoonful of fresh and clean water three or four times a day in general but repeatition of doses can be frequent depending upon  the intensity of the complaints and problems patient have.

A safe and without any side effects remedy for women.

1x, 2x,3x, 6x decimal potencies or 30 and 200 centicimal scale potencies can be taken for stable cure with the consultation of a Homoeopathic physician.

FREE Scans and Remedies Prescriptions with every ETG AyurvedaScan examination ; अब हर एक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण के साथ दूसरे परिक्षण और दवाओं का प्रेस्क्रिप्शन मुफ्त


अब ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परिक्षण कराने पर होम्योपैथी और आयुर्वेदिक थरमल स्कैन और इलेक्ट्रो कार्डियो ग्राम का परीक्शन फ्री यानी मुफ्त में कर दिया जाता है / इसके अलावा आयुर्वेदिक अवाओं और होम्योपैथिक दवाओं का prescription फ्री कर दिया गया है / होम्योपैथिक दवाओं का repertorisation क्म्प्यूटर द्वारा भी किया जाता है /

हमारे यहां किये गये शोध और research से यह माना गया है कि जितनी अधिक से अधिक मरीज के शरीर के बारे में जान्च करके जानकारी प्राप्त की जायेगी, उतनी ही बेहतर से बेहतर दवाओं का चुनाव मरीज की तकलीफ के लिये किया जा सकेगा , जो सटीक और अचूक और विश्वनीय हमेशा साबित होती हैं / इसीलिये हमारा प्रयास होता है कि मरीज के शरीर की अधिक से अधिक जानकारी विभिन्न तरह के परीक्षणों के जरिये प्राप्त की जाय / हम ऊपर बताये गये  परीक्षण  इसीलिये “फ्री” करते हैं ताकि मरीज पर अधिक आर्थिक बोझ न पड़े /

हमारी इस सेवा का लाभ देश तथा विदेश के लोगों द्वारा उठाया जा रहा है /

Six Lac Hits got “ayurvedaintro.wordpress.com” today on 06.10.2012 ; आयुर्वेदाइन्ट्रो.वर्डप्रेस.काम वेब ब्लाग के छह लाख हिट्स आज दिनान्क ०६.१०.२०१२ को पूरे हो गये



ayurvedaintro.wordpress.com वेब ब्लाग के आज छह लाख हिट्स पूरे हो गये हैं / मै व्यक्तिगत तौर पर सभी विजिटर्स का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं और कामना करता हूं कि वे स्वच्छ सुझाव भी दें और वे क्या चाहते हैं ? यह भी बतायें / हम अपनी तरफ से पूरी कोशिश्स करके बहुत ईमान्दारी के साथ सही बात बताने का प्रयास करते है/ आयुर्वेद या होम्योपैथी या य़ुनानी या प्राकृतिक चिकित्सा और योग के काम्बीनेशन से यह वेब ब्लाग लोकप्रियता प्राप्त करता जा रहा है / यह वेब ब्लाग जितना भारत देश में देखा और पढा जाता है उतना ही यह सम्पूर्ण विश्व में , विदेश में भी लोकप्रियता के साथ देखा और पढा जाता है / मै सभी को धन्यवाद देता हूं /

Paralysed Right Lung case ; Trace Record of the patient with other cardinal Visceral problems ; दाहिने फेफड़े का पैरालाइसिस ; मरीज का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन ट्रेस रिकार्ड जिसमें अन्य शारीरिक बीमारिया भी सामने आ गयीं


A female aged 50 years came for consultation on 05th October 2012 ,with the following symptoms;

1- Rapid Respiration, severe dyspnoea
2- Can not walk, sits after four five steps
3- always wants to lie on bed

Pt came to clinic from 380 kilometers away. She was taking treatment of Asthma by allopathic doctors.

Her trace record was taken, which is given below.

After recorded trace study, it is found that she is having the following complaints.

[a] All traces are not smooth and straight and are “saw tooth like” and in “zig zag irregular” shape, indicative of POOR OXIGINATION IN BLOOD,  this confirms Pulse Oximeter SpO2 measurement giving  88 % oxygen presence in blood stream.

[b] Trace “k” belongs to Pulmonary Organ, its texture, recording pattern shows paralysed condition of Lung

[c] All other Torso leads shows Liver, kidney, spleen,intestines,regional spine’s parts anomalies – enlarged , swelled, hard, mal-functioning etc

[d] Tachycardia / over 120 pulse per minute

[e] swelling in whole body including hydro-musculosis

Her Ayurvedic Fundamentals values are ;

Patient is given proper and effective Ayurvedic medicine for treatment with to  follow management instructions.

It can be concluded that for effective Ayurvedic treatment it is necessary to have maximum information about the condition of patient, that eases the treatment in effective way without any deviation. Maximum data always pin pointed the problem patient  have and on this ground treatment is given always effective and fruitful with positive results.