दिन: अक्टूबर 17, 2012

आयुर्वेद में वर्णित प्रकृति के त्रिगुणात्मक तत्व ; सत्व रज और तम [ तीन गुण ] का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन द्वारा शरीर में उपस्तिथि आन्कलन


आयुर्वेद का क्रान्तिकारी आविष्कार ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के प्राप्त डाटा अध्ध्य्यन के पश्चात यह सुनिश्चित हो गया है कि इस तकनीक द्वारा प्रकृति के तीन गुणों यथा सत्वज तत्व, रजस तत्व और तमस तत्व का कितना अन्श शरीर के अन्दर उपस्तिथि है और इसका क्या combination बनकर व्यक्ति की क्या mental capabilities है , mental qualities है , इन सबका पता लगाया जा सकता है /

The subject matter is related to SANKHYA PHILOSOPHY , which is in actually not related to Ayurvedic fundamental philosophy in any way, because the concept is differs from Ayurveda philosophy to Sankhya philosophy, it also differs from Bhagvat Gita Sankhya philosophy.

In Ayurveda , Satva, Raj and Tam are for the diagnosis purposes and not for the philosophical use. By assessing these three basics Prakrati Guna, Mental Qualities of the sick person is assessed accordingly in view of selection of remedies and management of the case.   ( Copy of the PAGE  from report of  ETG AyurvedaScan  )

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