www.healthkartplus.com ; published article on Allopathic Doctor’s MALPRACTICES examples

Malpractices in the Healthcare sector

[ Original article is puiblished in www.healthkartplus.com /  The copy  and contents are publishing here  for the benefits of the global readers without permission of the Websites owners ]

“I was admitted in hospital due to severe pain in my stomach, “said Amrit Paudwal, 42. “As my family doctor was travelling, I had to visit the doctor of a local hospital. He asked me to go for a kidney transplant immediately else I would not survive. When I wanted to verify the same from a similar doctor, he referred me one who also produced the same diagnosis. Still unbelieving, I called up my family doctor. After proper diagnosis, he found out that the pain was simply due to trivial gastric issues.”

Malpractices are rampant today in the Indian Healthcare industry. Basically, an act of negligence committed by a medical provider is known as Medical Malpractice which can cause injuries or death of the patient, Medical Malpractice can also be defined as “Doing something a medical provider of ordinary skill would not have done, or failing to do that which a medical provider of ordinary skill would have done.”

Anyone seeking medical help can be a victim of these malpractices. These range from anything as simple as not putting the rails of hospital bed in an upright position to something as complex as a blunder committed during an open heart surgery. In this context, we can only relate those issues where the patient’s prior consent was not taken or he was not informed of the risk/details/benefits involved. If he/she had consented to it, then it wouldn’t be categorized under malpractice.

Laws exist to support the claims of victims of such situations. The plaintiff can demand for an attorney who will fight for compensation due to the damage caused. A person can only register a claim, if there has been an injury/damage caused to the patient directly due to negligence. It is shocking to note that most of such cases go undetected or overlooked.

The last few decades have changed the relationship of a doctor with a patient, which is built on mutual trust. Due to various scientific technological advances, there has been a decrease in the mortality rates and improvement in quality of overall health. While one section of the Indian population regards doctors as living Gods, another section is afraid of them due to their scarred past.

What can be the reason?

•Various fraudulent practices such as false claim regarding need for an operation
•A plethora of expensive tests without need
•Cut practices and commission
•Scaring patients to relent to unnecessary as well as expensive operation

The Indian population fishes out almost 60% of its medical expenses from its own pocket. In this condition where we already need a better healthcare system, the unscrupulous practice of doctors forms a wrong public image. There are various alleged cases against The Medical Council of India (MCI) which talk about its blatant corrupt practices. For instance, there are villages in Andhra Pradesh where uteri of women have been removed forcefully. Research also shows that though malpractices are rampant, MCI has not cancelled even a single doctors’ license since 2008!

A few shocking pointers have come to attention with research:

•AIIMS, the country’s premier medical institute is severely understaffed
•Drugs are approved without clinical trails
•There are alleged nexus between doctors and drug control agencies
•National Urban Health Mission, an initiative by Government of India which provides healthcare to urban poor is ready but still not launched.
•Full amounts allocated in budget are not even spent.

Various alleged cases about Doctor-chemist nexus have been reported. Doctors would prescribe various tests and diagnoses which are basically unnecessary, and increase the cost of total bill. The doctors would, in return, get a certain sum of commission for prescribing those fake tests. These are also known as cut-practices. A website defines cut-practice as “All doctors qualified to practice modern medicine take the classical Hippocratic Oath before beginning their professional career. However, when they start practicing in real life, they start making so called “practical adjustments during their clinical and therapeutic decisions. Sometimes they get open offers of referral of patients for a predetermined and regularized practice of fee-sharing.”

As the relationships between patients and doctors continue to dampen, dozens of hospitals are ransacked every year by local people attempting to get back at ‘the system’ for malpractices & the loss thereof. There are sections in Indian constitution which talks about criminal liability for Medical Malpractices, which cover deaths, caused due to negligence, causing hurt by endangering life etc. but the victims rarely receive any justice. It is indeed ironic that such practices happen within the country which is internationally renowned for having some of the world’s most robust healthcare services and professionals.

[article taken from www.healthkartplus.com with obligations]

Comments by Dr DBBajpai डा० डी०बी०बाजपेयी द्वारा किये गये कमेन्ट्स…………..

यद्यपि यह बहुत खेद की बात है कि डाक्टरों द्वारा इस तरह की प्रैक्टिस की जा रही है, जिसे कोई भी भारतीय नागरिक स्वीकार नही करेगा और  ऐसे किये जा रहे अनियमित कार्यों को किसी भी व्यक्ति को  स्वीकार भी नही करना चाहिये / मैने स्वयम कई बार अपने इसी ब्लाग में डाक्टरों द्वारा की जा रही mal-practices के बारे मे लिखा है और लोगों का ध्यान इस तरफ खीचने का प्रयास किया है / मै फिर एक बार अपना observation और अनुभव आप सभी लोगों को बताने का प्रयास कर रहा हूं /

[१] सबसे पहली बात यह सामने आयी है कि अधिकान्श भारतीय लोग बीमार होने पर “डाक्टर”  के पास दवा लेने नही जाते हैं, पता नहीं ऐसे लोगों को डाक्टरों से किस बात की allergy है  / ऐसे लोग  किसी मेडीकल स्टोर में जायेन्गे और दवा बेचने वाले से अपनी तकलीफ बताकर दवा मान्गते है / दवा बेचने वाला कुछ टिकिया या गोली या इन्जेक्शन लेने की सलाह देता है जो दवा बेचने वाले की  समझ में आता है / पैसे के लालच में दवा बेचने वाले दुकान्दार इस तरह से combination  बनाकर अपनी कमाई करते हैं / यहां मेरी समझ से ऐसा मसला money matters  से जुड़ा है / लोग डाक्टर के पास  इसीलिये नही जाते क्योन्कि उनको लगता है कि डाकटर को लम्बी फीस देनी होगी और वह महन्गी दवा लिखेगा / Medical stores  से दवा लेने से फीस भी बचेगी और सस्ती दवा  भी मिल जायेगी / ऐसी मानसिकता लोगों की बन रही है /

[२] कुछ दुकानदार जब ऐसे लोगो का इलाज दो चार दिन करता है और मरीज नही ठीक होता है तब वही दूकान्दार सलाह देता है कि किसी डाक्टर को दिखा लो / मरीज उसकी सलाह को नकार कर कहता है कि वही दवा समझ कर दे दे / दूकान्दार यह  समझता है कि अगर मै इस्को दवा देने से मना करता हू तो यह किसी दूसरे दवा बेचने वाले के पास चला जायेगा और उसकी दूकान्दारी का नुकसान होगा, इसलिये ग्राहक बचाने के चक्कर में वह दवा जो भी समझ में आती है, देता चला जाता है / हाई ब्लड प्रेसर से ग्रसित मरीज सिर दर्द की दवा खाते खाते “ब्रेन हेम्रेज” के शिकार हो गये, ऐसा मैने बहुत से रोगियों को देखा है / अब ऐसे मरीजों को कौन समझाये और कैसे समझाये कि उनका दवा लेने और खाने का तरीका कितना गलत है ?  

[३] मरीजों की भी मानसिकता बहुत अजीब किस्म की है / कुछ अपने को डाक्टर से अधिक intelligent  समझते है / उनको लगता है कि वे जिस डाक्टर के पास आये है, वे उनकी बात नही समझ पा रहे है, डाक्टर उनकी पूरी बात नही सुन रहे हैं, जब वह मेरी बात नही सुन रहे हैं तो इलाज क्या करेन्गे ?  यह एक मानसिक स्तिथि  मरीज अपने आप बना लेता है , जिसको दूर करने का क्या रास्ता हो सकता है ? इस पर विचार करना होगा / हलान्कि डाकटरों के इस तरह और ऐसा व्यवहार करना कुछ हद तक सही है / बहुत से डाक्टर मरीज के साथ सहयोग नही करते, अब इसकी क्या वजह है , इस पर कोई  शोध  कार्य होना चाहिये / बहुत से मरीज अपनी बीमारी ठीक से बताते नही हैं और अपनी बीमारी से जुड़े बहुत सी बातें छुपा जाते हैं, जिससे गलत और उलटा सीधा इलाज करने की गुन्जायश बनी रहती है / मरीज अपनी बीमारी का सही हाल नही बताते /

[४] एक मानसिकता मरीजों की बड़ी बुरी तरह से पनपने लगी है / डाक्टर  अगर मरीज की बीमारी का  सही सही रोग निदान करता है और उसको बताता है कि उसे फलाना रोग हो गया है ? मरीज को डाक्टर पर विश्वास ही नही होता कि डाक्टर साहब यह कैसे बता रहे है कि उसको फलाना रोग है ? जब डाक्टर साहब पैथोलाजिकल जान्च और एक्स रे और अल्ट्रा साउन्ड और सी०टी० स्कैन और एम०आर०आई० जैसी महगी जान्च करा देता है , तब जाकर मरीज को विश्वास होता है कि डाक्टर साहब जितना बता रहे थे , वह सब सही निकला / मरीज जब तक अपनी “पैसे की गर्मी ” बाहर न निकाले तब तक मरीज को चैन नही आता / पैसे वाले मरीज या जिनके पास आसानी से हजारों या लाखों रुपया खर्च करने की हैसियत है ऐसे मरीज अपने पैसे के बल पर इलाज कराने के लिये डाक्टरों को प्रभावित करते है / डाक्टर भी इन्सान हैं , वे भी मिल रहे धन को क्यों जाने दें, आखिर लक्षमी जी आ रही हैं,  पैसा किसी को काटता नही है , इसीलिये डाक्टर भी मरीज की मानसिकता को भाम्प कर पैसा बनाने का काम करने की स्कीम मरीज को लालच के कारण बताना शुरू कर देते हैं / जब मरीज पैसा खुद खर्च करने के लिये फड़्फड़ा रहा है और पैसे की गर्मी निकालना  चाहता  है तो डाक्टर को क्या एतराज हो सकता है ?

[५] बहुत से ऐसे रोग हैं जिनका इलाज एलोपैथी चिकित्सा मे नही है / लेकिन जितने भी रोग एलोपैथी के चिकित्सक ला-इलाज बताते हैं, उनका इलाज आयुर्वेद या होम्योपैथी या यूनानी या प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा सम्भव होता है / कुछ ऐसे रोग जरूर हैं जिनका सरजरी के इलाज Surgical interventions के अलावा दूसरा कोई विकल्प नही है /  यह एक प्रकार की चिकित्सकों की अग्यानता कही जायगी कि जिस चश्मे से वे एलोपैथी का नजरिया पढते हैं , उस चश्मे  से वे दूसरे चिकित्सा विग्यान की उपलब्धियों को नकारते हैं / यही वह जटिल स्तिथि है जिससे मरीज को सही इलाज क्या है, उसके बारे में सही और सतीक जानकारी नही मिल पाती, जिसके कारण वह गलत इलाज का शिकार होता है / मेरे पास रोजाना गलत शिकार के मरीज आते रहते हैं / वास्तविकता और हकीकत यह है कि एलोपैथी के चिकित्सक जिस बीमारी को लाइलाज बताते है, उन बीमारियों का इलाज दूसरे चिकित्सा विग्यान में मौजूद है / अब इसे जानकारी का अभाव ही कहेन्गे कि सही सलाह के अभाव में मरीज की दुर्दशा नही होगी तो किसकी होगी ? जब गलत इलाज होगा तो दवाओं के साइड प्रभाव और नयी नयी बीमारियों का आविष्कार अपने आप होने लगेगा ? इसी कारण से अब तरह तरह की नयी नयी बीमारियों का जन्म होने लगा है जो आज से पचास साल पहले तक नही थी /

यह कब तक चलता रहेगा, मै इसके बारे मे कुछ नही कह सकता / इसे रोकने का क्या उपाय है , इसके बारे में जब तक सामूहिक तौर पर विचार नही होगा, तब तक कुछ नही किया जा सकता और यह जैसे चल रहा है, फिल्हाल ऐसे ही चलते रहने की सम्भावना अधिक लग रही है /

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