भगवान धनवन्तरि देव ; आयुर्वेद और धन तेरस ; Lord Dhanavantari ; Ayurveda and Dhan teras


दीपावली भारत के लोगों के लिये एक महत्व पूर्ण त्योहार है / इस त्योहार की अपनी विशेषतायें भारत के विभिन्न प्रान्तों में धर्म के आधार पर, प्राचीन काल में घटित विशेष घटनाओं के आधार पर अपने अपने रीति रिवाजों के अनुसार मनाते हैं /

दीपावली के मुख्य त्योहार के पहले छोटी दीपावली मनाते है और उससे पहले “धन तेरस” मनाते हैं / हिन्दू मान्यताओं में बताया गया है कि इस दिन समुद्र मन्थन में स्वास्थ्य और आरोग्य के देवता भगवान धन्वन्तरि देव का पृथ्वी पर पदार्पण हुआ था / यानी इस दिन भगवान धनवनतरि देव एक हाथ में शन्ख, एक हाथ मॆं चक्र और एक हाथ मॆं अमृत कलश तथा एक हाथ मॆं जलूका लेकर समुद्र मन्थन के द्वारा आयुर्वेद का विग्यान लेकर अवतरित हुये /

ठीक दीपावली के दिन धन की देवी लक्षमी जी का जन्म हुआ अर्थात समुद्र मन्थन में  जिस दिन और जिस मुहूर्त में  दीपावली मनायी जाती है उसी  दिन लक्षमी जी का इस पृथ्वी पर आगमन हुआ या अवतरण हुआ / इस कारण से धनवनतरि देव को लक्ष्मी जी का बड़ा भाई  मानते है / धनवन्तरि देव जी का आगमन जहां एक ओर “स्वास्थय और जीवन रक्षा ” से जुड़ा हुआ माना जाता है , वही दूसरी ओर “धन और सम्पदा”  के लिये भगवती लक्षमी जी को जुड़ा हुआ मानते हैं /

मेरा निजी अनुभव है कि स्वास्थय रहने और आरोग्य प्राप्ति के लिये तथा धन और सम्पदा की प्राप्ति और कर्जों से मुक्ति के लिये प्रत्येक  हिन्दू  को भगवान धनवन्तरि देव की पूजा के साथ साथ लक्ष्मी जी की पूजा अर्चना करने से समुचित लाभ अवश्य मिलता है और दरिद्रता से मुक्ति मिलती है / पूजा स्थल में धनवन्तरि देव और माता लक्ष्मी को एक साथ भाई बहन की भावना स्वरूप मानकर साथ साथ पूजा अर्चना करना चाहिये /

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