महीना: फ़रवरी 2013

A case of CANCER post operative stage of Uterus removal complications ; ETG AyurvedaScan treatment approach ; गर्भाशय कैन्सर के एक महिला रोगी का आपरेशन करने के बाद पैदा हुये कामप्लीकेशन्स का ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन आधारित इलाज


चार साल पहले एक ५२ साल की महिला को गर्भाशय का कैन्सर हुआ था / कैन्सर युक्त गर्भाशय का आपरेशन करके removal कर दिया गया / आपरेशन कराने के कुछ दिन के बाद से महिला को योनि मार्ग से discharges होना शुरू हो गये / इस तकलीफ का इलाज एलोपैथी चिकित्सा की लगभग सभी विधियों से किया गया और जो भी सम्भव इलाज और उपाय हो सकते थे सब के सब किये गये, लेकिन महिला की तकलीफ कम नही हुयी, बल्कि उसकी तकलीफ में और अधिक इजाफा हो गया /

महिला के लिये यह एक ऐसी असहाय की स्तिथि थी कि उसकी समझ में नही आ रहा था कि वह करे तो क्या करे ? किसी ने इस महिला को होम्योपैथी का इलाज करने की सलाह दी/ मरता क्या न करता वाली हालत थी / महिला का सारा धन और जमा पूंजी आपरेशन कराने और इलाज कराने में ही खर्च हो गयी / ऊपर से तकलीफ जैसे जैसे दवा और इलाज करते जा रहे थे वैसे ही वैसे बढती चली जा रही थी और कन्ट्रोल होने का नाम नही ले रही थी / कुछ न करने से अच्छा था कि कुछ इलाज किया जाये / जिसने होम्योपैथिक के डाक्टर को दिखा कर इलाज करने की सलाह दी थी, वह उसी डाक्टर के पास गयी /

होम्योपैथी की दवा खाने और इलाज करने से महिला को बहुत आराम मिली और उसके discharge तथा अन्य दूसरी तकलीफों में कमी आ गयी / होम्योपैथी का इलाज चालू रहा, लेकिन जो डाक्टर इलाज कर रहे थे , उनकी अचानक मृत्यु हो गयी / महिला ने दूसरे होम्योपैथी के डाक्टर को दिखाया लेकिन उसको इस दूसरे होम्योपैथी के डाकटर की दवा से कोई खास आराम नही मिली / किसी ने बताया कि कोई बाबा जी आश्रम में आयुर्वेदिक दवा देते है, वह वहां चली गयी और बहुत दिनों तक इलाज करती रही, लेकिन उसको आराम नही मिली बल्की उसकी तकलीफ और अधिक बढ गयी /

यह वह स्तिथि थी जब इस महिला को मेरे द्वारा किये जा रहे एक कैन्सर के रोगी को, जो अब रोग मुक्त हो चुका है , सलाह दी कि वह अपना इलाज कराने के लिये मुझसे समपर्क करे /

महिला दिसम्बर २०१२ के महीने में जानकारी लेने आयी कि मेरा इलाज करने का क्या तौर तरीका है ? मैने उसको बताया कि पहले मै ETG AyurvedaScan का परीक्षण करता हूं, इसके साथ अन्य बहुत सी स्क्रीनिन्ग तथा जान्चे की जाती है और जब सारी फाइन्डिन्ग्स आ जाती है तो उसके आधार पर इलाज करते हैं/ महिला दिसम्बर २०१२ के दूसरे सप्ताह में जानकारी करने और पूछने के लिये आयी थी /

इसी बीच उसे कोई दूसरा सलाह देने वाला मिल गया / वह वहां इलाज के लिये चली गयी / महिला की तकलीफ और बढ गयी / यह वह स्तिथि थी जब वह दुबारा मेरे पास इलाज कराने के लिये आयी /

मैने उसको बताया कि मेरा इलाज करने का तरीका दूसरे आयुर्वेदिक और आयुष चिकित्सकों से अलग है / सबसे पहले मै ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का परिक्शण करता हू और इसके साथ साथ अन्य दूसरे परीक्षण भी होते है, जिनमे करीब एक या दो घन्टे का समय लग जाता है / इसके बाद परीक्षण की रिपोर्ट जब मिल जाती है और सारे परीक्षण के परिणाम मिल जाते हैं तब तीन डाय्मेन्शनल यानी 3 Dimentional तकलीफ को निष्कर्ष निकाल कर देखते हैं कि [१] मुख्य तकलीफ़ की क्या स्तिथि है [२] मुख्य तकलीफ कहां से generate होकर आ रही है और [३] मुख्य तकलीफ को पैदा करने वाले कौन कौन से organs involve हैं / जब तक यह पता नही चलेगा कैन्सर जैसी बीमारियों का इलाज जटिल हो जाता है /

मरीजा भी यही चाहती थी कि उसकी तकलीफ की जड़ बुनियाद क्या है , यह पता करना चाहिये और वह चाहती थी कि उसका इलाज सही सही हो / मरीजा अपने साथ कुछ डाकूमेन्ट्स लेकर आयी थी जो उसके कैन्सर ग्रस्त Uterus के Operation से समबन्धित थे और जिसमे उसके शरीर के अन्दर कैन्सर होने की पुष्टि की गयी थी साथ मे इलाज कराने के पर्चे आदि थे /

मरीजा का लगभग चार साल पहले गर्भाशय का आपरेशन किया गया था जिसमे उसका कैन्सर युक्त गर्भाशय काट कर निकाल दिया गया था / इस आपरेशन के कराने के बाद उसको डेढ साल बाद योनि मार्ग से पानी निकलने की शिकायत होने लगी / पहले एलोपैथी का इलाज किया गया जिसमे कोई कामयाबी नही मिली , बाद मे दूसरे उपचार किये गये, जिनका जिक्रा ऊपर किया जा चुका है /

महिला का ETG AyurvedaScan examination किया गया, जिसका अवलोकन कीजिये /

malatigupta53years
malatigupta53yearssecond

Comments by Dr DBBajpai, Chef ETG AyurvedaScan investigator;
In cancer patient, it is observed that the recorded traces from different locations of the body seems very dull and of the weak equal level of diffussion of body electrical behaviour. This almost happen might be due to metastatsis of the inflammatory condition of the visceras spreading almost every part of the body by Lymphatic system and spleen or by blood stream.

This lady on physical examination of Abdomen areas shows very tender almost below from the Lowest rib upto pubic area, even a slight touch or slight pressure caused her untolerable pain.

One weak medication of AYURVEDA + AYUSH gave her relief from tenderness of the abdomen. After a week, abdomen examination shows relief in tenderness and relief from pain. She also have some relief in her discharge.

FOLLOW-UP; on 13 May 2013
The patient’s swewlling on abdomen and of some part of the body and her permanent body temperature , including pain in various parts and lazyness, like syndromes are almost gone , her discharges are changes and bleeding is stopped. She was almost feeling pain in her lumber region , which is now relieved and she is very active than before and feeling well.

I estimated after examination of blood by AYURVEDA HEAMO METER and assessed that she is almost 60 percent relieved.

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खून की खराबी से होने वाले रोगों के लिये विशिष्ट आयुर्वेदिक योग ; त्रिजात्यादि चूर्ण ; An Ayurvedic blood purifier ; Trijaatyaadi churn


शताब्दियों पुराने भारतीय चिकित्सा विग्यान प्राचीन काल में और अर्वाचीन काल में इसी कारण से बराबर जिन्दा बना रहा क्योंकि इसमे बताये गये फार्मूले उस ठोस बुनियाद पर प्रस्तुत किये गये हैं जिन्हे लाखों बार उपयोग किया गया और इसी वजह से इन फार्मूलों के कारगर असर से बीमारियॊ पर प्रहार किया गया तो ये फार्मूले आज भी उसी तरह से समीचीन उपयोग के लिये उअसी तरह से हैं जैसे वे पहले काम किया करते थे /

“त्रिजात्वादि चूर्ण” एक ऐसा चूर्ण है जिसकी कार्य क्षमता और रोग हरण क्षमता देखकर आश्चर्य होता है / यह किन रोगों मे काम करता है इसकी बानगी देखिये /
१- इसके उपयोग से दाद यानी eczema का cure होता है
२- रक्त कोप यानी खून की गर्मी जिसके कारण कोई भी रक्त विकार पैदा हो गया हो any blood anomalies from any physiological / pathological reasons
३- पित्त के प्रकोप यानी any ailments from Bile disorders / Gall Bladder pathological / physiological disorders
४- कुष्ठ यानी Leprosy / Leucoderma / Vitiligo / White spots
५- अम्ल पित्त यानी Hyper acidity of any level
६- खुजली यानी Itching / scabies
७- कैन्सर के घाव यानी Cancerous wounds / Skin Cancer / Black spots / Meleninioma
८- सोरियासिस / Psoriasis
९- समस्त त्वचा / चर्म के विकार जितने भी हो सकते है all kinds and all nature of SKIN DISORDERS, whatever their nomenclature / title or may be diagnosed

इस चूर्ण का फार्मूला आयुर्वेद की बेहतरीन किस्म की herbs को चुनकर बनाय गया है / यह आयुर्वेद के शास्त्रों मे दिया गया फार्मूला है , जो “योग चिन्तामणि” शास्त्रीय ग्रन्थ से लेकर यहां प्रस्तुत किया गया है /

चूर्ण को बनाने के लिये सभी द्रव्यों को बराबर मात्रा में लेना चाहिये / द्रव्य इस प्रकार है: इलायची, दाल्चीनी, तेजपात, सोन्ठ, हर्र, बहेड़ा, आमला, वाय विडन्ग, मुनक्का, हल्दी, दारू हल्दी, नीम के पत्ते,पीपल, गिलोय, सौन्फ, मेढा सिन्घी, पुराने साठी चावल / यह सभी द्रव्य लेकर महीन चूर्ण बना ले /

रोगों में सेवन करने के लिये dose या मात्रा इसकी एक ग्राम से लेकर तीन ग्राम तक की है / इसे शहद या गुनगुने पानी के साथ दिन में दो बार ; सुबह और शाम ; लेना चाहिये /

कार्य विकृति और विकृति pathophysiology and pathology के दृष्टिकोण से देखा जाय तो यह चूर्ण रक्त विकारों से समबन्धित सभी रोगों के इलाज के लिये उपयुक्त औषधि होती है / शरीर में रक्त विकार Liver, Gall Bladder , pancreas, spleen, kidney, small intestines , Large intestines की कार्य विकृतियों के कारण से ही उतपन्न होती है, ऐसा ETG AyurvedaScan आधारित परिक्षनॊ से प्राप्त आन्कड़ों से पता चलता है / उक्त अन्गों के अलावा EPIGASTRIUM की inflammatory condition भी Blood anomalies पैदा करती है / इपीगैस्ट्रियम एरिया में स्टमक, ड्यूडिनम, जेजुनम तथा अन्य अन्गों के हिस्से शामिल हो जाते हैं / इन अन्गों की विकृति लेवल कितना है यह पता करना एक मुश्किल और दुरूह कार्य है / रक्त विकारो के इलाज के लिये इन सभी अन्गों की विकृति इन्ट्नेसिटी लेवल का पता करना बहुत आवश्यक होता है / क्योकि अन्ग विशेष का इलाज करना भी बहुत जरूरी होता है तभी चिकित्सा और रोगों को आरोग्य करने में सफलता मिलती है /

आयुर्वेद की क्रान्तिकारी निदान ग्यान की तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन में सभी अन्गों की इन्टेन्सिटी लेवल का अन्कलन होने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि कौन अन्ग कितना विकार ग्रस्त है और इन विकार ग्रस्त अन्गों को कितने लेवल का इलाज चाहिये /

Pinus sylvestris ; homoeopathic remedy ; multi dimentional action drug


This is one of the best remedy for those who have lower limbs musculo skeletal problems particularly WEAK ANKLES and feeling of TIRDENESS IN WALKING. EMACIATION OF LOWER LIMBS is also a cardinal active symptom of this drug.

Thus going through the syndromes of this drug related to LOWER LIMBS, it seems that the actions of this drug is on the lower extremeties – musculoskeletal system and thus produces related pathophysiological or pathological conditions, which produces RHEUMATISM either muscular or osteological.

The syndromes of this drug shows STIFFNESS AND GOUTY PAIN IN ALL JOINTS ESPECIALLY FINGER JOINTS with CRAMPS OF THE CALVES OR CALF MUSCLES.

A peculiar symptom is of the skin which is NETTLE-RASH WITH ITCHING ALL OVER BODY specially on the affected joints and parts and inside the NASAL CAVITY.

The pathogenesis of this remedy affects LIVER and SMALL AND LARGE INTESTINES.

Electro Homoeo Graphy ; E.H.G HomoeopathyScan based studies shows that drug acts on the Liver, Gall Bladder, Bowels simulteneously and produces pathophysiology of these organs. Due to pathophysiological actions , the blood anomalies arised and the ratio of pH in blood became imbalanced caused by CARBOHYDRATE and FAT metabolism producing URIC ACID in excess, which is unable to convert in UREA as a catabolic end product.

8 Lacs visiters visited Ayurveda Ayush Blog ; Thanks to visitors


eightlacss

I personally thanks to the all visitors of this blog on completion of 8 LACS visiting steps.

We are very HONESTLY keeping the entire informations as true as it could be , without any malice or prejudice to any practicing medical science and medical therapy.

We try to bring the goodness and badness, harmful and beneficial effects, advantages and disadvantages to any therapy, after collecting wide information based research and observational data in their original forms.

AND THIS IS THE RESULT THAT VISITORS ALL OVER THE WORLD TRUSTED ON THIS BLOG.

THANKS TO ALL

HAVE A NICE DAY
signatureDBBajpai

Dr. DBBajpai
http://www.etgayurvedascan.com

सफेद दाग के रोगियों के रोग निदान और चिकित्सा में नये यन्त्रों का उपयोग ; Use of Latest devises in the Diagnosis and treatment of VITILIGO / LEUCODERMA


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सफेद दाग के रोगियों के रोग निदान और रोग चिकित्सा के सटीक, अचूक और सही इलाज के लिये कनक पालीथेरापी क्लीनिक और रिसर्च केन्द्र में नये अनुसन्धान करने की परम्परा के अन्तरगत ्कुछ विशेष सुविधायें विकसित की गयी हैं / इन सुविधाओं में रोग निदान के ग्यान करने के लिये ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन तो पहले से ही मौजूद है ही , इसके अलावा अन्य यन्त्र का उपयोग रोग को मानीटरिन्ग करने के लिये लिये जाते हैं /

इसी प्रकार चिकित्सा में काम करने वाले यन्त्रों का भी उपयोग किया जा रहा है जिससे सफेद दाग की चिकित्सा में ज्यादा लगने वाले समय को कम करने में मदद मिल रही है /

अनुभव यही बताता है कि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की फाइन्डिन्ग्स के साथ साथ निदान ग्यान और रोग चिकित्सा के नये यन्त्रों का उपयोग करते है तो सफेद दाग अवश्य बहुत जल्दी ठीक होते है /

E.T.G. AyurvedaScan’s Innovation ; ” Treadmill ETG AyurvedaScan examination” ; ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन का अन्य नवोदित अनुसन्धान ; “ई०टी०जी० आयुर्वेदस्कैन ट्रीडमिल परीक्शण और जान्च


आयुर्वेद की क्रान्तिकारी रोग निदान और शरीर परिख्शण की विधि ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन के वर्तमान स्वरूप में ्शरीर के रोगों के निदान ग्यान को और अधिक सूच्छ्म सवरूप में जान लेने और आयुर्वेद के मौलिक सिध्धान्तों को और अधिक गहरायी से समझ लेने और अधिक जान लेने की उत्कन्ठा से प्रभावित होकर ई०टी०जी० ायुर्वेदास्कैन का नवोदित अनुसन्धानात्मक स्वरूप “ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन ट्रीडमिल परीक्षण जान्च” पर अनुसन्धानातम्क कार्य का प्रारम्भ हमारे कानपुर स्तिथि अनुसन्धान केन्द्र में कर दिया गया है /

पिछले बहुत से वर्षों से ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन परीक्षण और जान्च शरीर को लिटाकर resting position मे किया जाता रहा है / टेस्ट बहुत अधिक सेन्सिटिव होने के कारण मरीज को चुपचाप बिना हिले डुले तनाव रहित स्तिथि में परीक्षण के लिये हिदायत की जाती रही है, जिससे कि ट्रेस रिकार्ड बहुत बेहतर स्तिथि के प्राप्त हो ताकि रोग निदान और रोग चिकित्सा मे उच्च कोटि के परिणाम प्राप्त हो जायें /

ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन पर किये जा रहे परीक्षणॊं और प्राप्त चिकित्सा परिणामों और मरीज की जीवन शैली के अध्ध्यन के पश्चात यह पता चला कि मरीजों में कुछ शारीरिक बीमारियां अपने चरम शारीरिक कार्य कलापों और शारीरिक श्रम करने के बाद ही उत्कृष्ट स्वरूप में manifest या express करती हैं / यह manifestations या expressions शरीर की आराम अवस्था में नही प्राप्त होती हैं /

यह विचार ही वह प्रेरणा श्रोत बना जिसने यह राह दिखाई कि कैसे इस विचार को मूर्त स्वरूप में साकार किया जाये / इसके लिये पहले मरीज को कुछ व्यायाम कराकर और फिर ETG AyurvedaScan examination करने से कुछ बात बनी /शारीरिक श्रम कराकर जब ETGAS परीक्शण किये गये तब पता चला कि बहुत सी शरीर की अन्दरूनी हालात का expressin और बहुत सी hidden anomalies जिन्हे सामान्य अवस्था में जान्च करते समय पता नही चलता था या पता नही चल पाता था उनके बारे में intensity level मे बहुत से बदलाव पता चलने लगे /

इस प्रकार प्रयोगों में किये गये परिणामों को देखकर इस नये विचार को मूर्त रूप में परिवरतित किया गया और परीक्षण के लिये रिसर्च केन्द्र में Treadmill की व्यवस्था की गयी / इस ट्रीड मिल के साथ जान्च के लिये अन्य इलेक्ट्रानिक मीटरों का उपयोग करते हैं जिनसे वात दोष, पित्त दोष और कफ दोष का विभिन्न आयामी अध्ध्यन और अनुसन्धान सही और सटीक और अचूक रूप में किया जा सके /

World CANCER Day 4th February ; Ayurveda answer to Cancer ; विश्व कैन्सर दिवस ४ फरवरी ; आयुर्वेद आयुष चिकित्सा विग्यान द्वारा भी कैन्सर रोग का सटीक उपचार


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ऐसा कहना और ऐसा विपरीत प्रचार करना इस विश्व के लोगों के लिये घातक होगा कि कैन्सर जैसी बीमारी का एलोपैथी के अलावा और किसी चिकित्सा विग्यान में इलाज नही है / “और किसी चिकित्सा विग्यान ” से मतलब आयुर्वेद और होम्य्पैथी और यूनानी चिकित्सा विग्यान से है /

आयुर्वेद की निदान ग्यान और रोग की पकड़ और रोग की जड़ तक मालूम कर लेने वाली आयुर्वेद की क्रान्तिकारी तकनीक ई०टी०जी० आयुर्वेदास्कैन की बदौलत अब यह समभव हो गया है कि शरीर के अन्दर की विकृतियां यानी कार्य विकृति और अन्ग विकृति यानी pathophysiology और pathology किस स्तर की है और कहां कहां है, इनका pathway किस तरफ से मुख्य तकलीफ की तरफ गया है अथवा जा रहा है आदि आदि महीन बातों का पता चल जाता है ,जब इस findings को लेकर और इस पर आधारित होकर इलाज करते है तो मर्ज चाहे जो भी हो और चाहे जैसा हो, ये सब अवश्य ठीक होते हैं चाहे वह कैन्सर ही क्यों न हो या वह कोई भी तकलीफ हो जिसका बड़ा लम्बा चौड़ा नाम दिया गया हो और यह सुनकर जो लोगों को भयभीत और दहशत से भर देता हो /

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लगभग ३० साल पहले तक जब कैन्सर की बीमारी का कोई इलाज नही था, न आज की तरह सर्जरी का विकास हुआ था तो लोग कैन्सर का इलाज होम्योपैथी और आयुर्वेद के चिकित्सकों द्वारा कराते थे / उस समय भी कुछ किसम के कैन्सर की चिकित्सा में रोगी को आन्सिक या अर्ध आन्शिक या पूर्ण आन्सिक अथवा पूर्ण लाक्षणिक आराम मिल जाता था / आज के हालात यह है कि सरजरी कराने के बाद भी कैन्सर उसी तरह फिर पैदा हो जाता है बल्कि उससे अधिक उग्र अवस्था मे फैलता है जिसे रोक पाना मुश्किल होता है /

दुर्भाग्य की बात यह है कि कैन्सर के लिये की गयी सर्जरी या केमोथेरपी या रेडियेशन या अन्य नये तरीकों के after effects या post anomalies या post problems के प्रभाव या complications पर अध्ध्यन नही किये गये और न कोई रिसर्च / जो भी अध्ध्यन है वे सब पुराने पड़ चुके है / सभी वही लकीर के फकीर की स्तिथि का इलाज कर रहे है ं /

आधुनिक चिकित्सा विग्यान का ग्यान कैन्सर के इलाज को लेकर बहुत बढ गया है / अब समय आ गया है कि इसे नये विचारों के साथ नये innovation के साथ आजमाया जाये ताकि पीड़ित मानवता की सही मायने में सेवा की जा सके और सही तथा सुरक्षित सेवा उपलब्ध कराई जा सके /