महीना: अप्रैल 2013

Placebo treatment in United Kingdom ; प्लैसिबो ट्रीट्मेन्ट की शुरुआत अब इंगलैन्ड में भी


होम्योपैथी के जनक डा० हहनेमान ने मरीजों की चिकित्सा के लिये उनकी सुविधा के अनुसार जब दवा नही देने की जरूरत समझते थे, तो वे मरीजों को खाली sugar of milk अथवा pilules अथवा शक्कर की गोली का सेवन कराते थे, ताकि मरीज यह समझे कि वह अपने रोग के इलाज के लिये दवा खा रहा है /

अब यही काम ब्रिटिश चिकित्सक अपने मरीजों के लिये कर रहे है / दवा बाज़ार पत्रिका में प्रकाशित यह रिपोर्ट पढिये /

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इस तरह से दवा देने के भ्रम का सबसे पहले जिक्र जरमनी के होम्योपैथी के डाक्टर हाहनेमान ने अपनी होम्योपैथी के शोध के समबन्ध में प्रकाशित शोध ग्रन्थ आर्गेनान आफ मेडिसिन मे किया है, जिससे सारी दुनियां को इस बारे मे जानकारी मिली कि placebo treatment भी इलाज करने का एक तौर तरीका भी है /

आयुर्वेद और होम्योपैथी तथा यूनानी में placebo treatment के उपयोग का जिक्र ग्रन्थों में किया गया है / एलोपैथी में placebo treatment की बात किसी भी चिकित्सा ग्रन्थ मे नही कही गयी है / अब इसका कारण कुछ भी रहा हो, यह तो एलोपैथी के चिकित्सा वैग्यानिक ही बता सकते हैं /

आयुर्वेदिक और होम्योपैथी तथा यूनानी और प्राकृतिक चिकित्सा के साथ साथ मै अपने मरीजों में जब आवश्यकता होती है तो एलोपैथी की दवाओं का उपयोग मरीज को राहत देने के उद्देश्य
से करता रहता हूं / मेरी समझ में जब यह आता है कि मरीज को किसी दवा की जरूरत नही है तो मै मरीज को दवा लेनेसे मना कर देता हू / जिन मरीजों की जीवनी शक्ति बहुत प्रबल होती है वे दवा तुरन्त छोड़ देते है, लेकिन जिनकी जीवनी शक्ति कम अथवा रुग्ण अवस्था में होती है उनको दवा छोडने मे हिच्किचाहट होती है, ऐसे लोगों को मै कोई पाचक चूर्ण या sugar of milk की blank doses या सुगर पिल्स देता हूं / आजकल होम्योपैथी की ब्लैन्क डिस्केट्स आ गयी हैं जिनसे doses बनाने मे बहुत सुविधा हो गयी है / इस तरह से इलाज करने मे होम्योपैथिक के चिकित्सक को आसानी हो गयी है/

आयुर्वेदिक के चिकित्सक ब्लैन्क डोज्जेज के लिये आयुर्वेदिक शर्बत, आयुर्वेदिक पेय या शरीर के सामान्य स्वास्थय को बेहतर बनाने वाले चूर्ण, सप्त धातुओं को बढाने वाले पदार्थ और कुछ प्रकार की साधारण प्रतिदिन खाने के काम आने वाले मसाले से सम्बन्धित द्रव्य औषधियो का उपयोग करते है ताकि व्यक्ति का मान्सिक और शारीरिक सन्तुलन बराबर बना रहे और मरीज यह समझता रहे कि वह अपनि बतायी गयी तकलीफ की दवा खा रहा है /

जिन रोगियों मे प्लैसिबो ट्रीट्मेन्ट की आवश्यकता होती है, उनके बारे मे मैने जितना observation किया है उसे मै निम्न प्रकार से मूल्यान्कन करता हूं /

१- कुछ मरीजों को डाक्टरों के पास जाने की और उनसे सलाह लेने की प्रबृत्ति होती है / उनको जैसे ही कोई छींक आ गयी या पैरों में थकान सी मालूम पड़ने लगती है , उनको लगता है कि उन्हे या उनके परिवार के लोगों को कोई गम्भीर बीमारी हो सकने का अन्देशा है / अब ऐसे हालात में अगर मरीज आ जाता है तो चिकित्सक यह समझता है कि इसको दवा दो और इसकी जेब का पैसा अपनी अन्टी मे करो / चिकित्सक भी अपना नुकसान क्यों करे ? जब मरीज दवा का और consultation का पैसा देने को तैयार है तो डाकटर क्या करे ? वह अगर दवा नही देता और मरीज को बोलता है कि तुमको कोई बीमारी नही है तो मरीज किसी दूसरे डाक्टर के पास चला जायेगा, अब डाक्टर उसको दवा नही देकर अपनी रोजी रोटी को क्यों लात मारे / डाक्टर को दवा देनी है तो वह placebo tablets, placebo capsules ही मरीज को देगा और अपना पैसा वसूल करेगा /

२- कुछ मरीजों को डाक्टर से सलाह लेने और उनके chamber में जाने की सनक होती है / यह एक प्रकार का phobia है / बीमारी हो या न हो , तकलीफ हो या न हो , ऐसे मरीजों को शन्का बनी रहती है कि उनको कोई बीमारी हो रही है / ऐसी आशन्का से ग्रसित मरीज डाक्टर क्जे पास आते है जब्कि उनको कोई बीमारी नही होती है / जब डाक्टर के पास आयेन्गे तो डाक्टर अपना नुकसान क्यो करेगा ?

३- बहुत से ऐसे मरीज हैं जिनको डाक्टरों के पास जाने का “शौक” होता है / शहर का सबसे अच्छा और सब्वसे महन्गा डाक्टर के पास जाने का मतलब अब Status symbol से भी जुड़ गया है / जब status symbol बनाना है तो कुछ खुद की भी रन्गबाजी होनी चाहिये / वैसे सभी डाक्टर बहुत intelligent और अपने medical proffession के हिसाब से बहुत devoted होते है और हर मरीज के साथ बहुत मेहनत करते है , लेकिन भाग्य भी कोई चीज है ? किस्मत से शहर का अगर सबसे बेहतर डाक्टर होने का गौरव प्राप्त हुआ तो डाक्टर का भी status symbol बन जाता है / अब अगर कोई पैसे की गर्मी वाला , जिसके पास धन की कोई कमी नही है डाक्टर के पास आता है और बीमारी न होते हुये भी अगर डाक्टर दवा न दे तो डाक्टर साहब की कमायी तो गयी ही , उनको और भी नुकसान उठाना पड़ सकता है / इसलिये डाक्टर भी अपना status symbol बचाने के लिये पचास तरह के test लिख देते है जिनकी कोई जरूरत नही होती / जब सब Test नार्मल आते है तो डाक्टर के पास यह कहने का हक बनता है कि मरीज को कोई बीमारी नही है / यह सब होते हुये मरीज डाक्टर पर विश्वास नही करता और कहता है कि test गलत हुये है/

कई बार ऐसा हो चुका है, डाक्टर ने मरीज का test कराया , सब नार्मल निकला / मरीज नही माना और दूसरे डाक्टर के पास चला गया / दूसरा डाक्टर बहुत चालाक था , उसने सारी कहानी समझ ली / बह फिर क्या था उसने मरीज को यह test और वह Test , यह जान्च और वह जान्च करा के जब बीस पचीस हजार की गर्मी निकाल दी , तब उसने कहा कि आपको तो Fatigue Syndromes की बीमारी है / आप एक हफ्ते हमारे अस्पताल मे रहकर इलाज कराइये / ह्फ़्ते भर मे जब लाखों का बिल बना और मरीज की जेब की गर्मी निकल गयी तब जाकर मरीज सही हुआ /

कुछ किस्म के मरीज बड़े घाघ और चखड़ और चालाक किस्म के होते है / ऐसे मरीज समझते हैं कि वे डाक्टर के ग्यान से अधिक ग्यान वान है और डाक्टर बेवकूफ है / जितना ग्यान उनका बीमारी के बारे मे है शायद डाक्टर ने मेडिकल कालेज में उतना ग्यान भी नही पढा होगा / इस तरह के मरीज अपनी बीमारी के बारे में बहुत बढा चढा कर बताते है . इसलिये क्योंकि हल्की बीमारी होना उनकी Financial तथा Social status को देखते हुये ऐसे मरीजों के लिये शर्म की बात होती है / अब अगर डाक्टर ऐसे मरीजों के लिये उनकी “शर्म” नही दूर करेगा तो क्या करेगा ? कोई एन्टीबायोटिक उनके लिये है नही , कोई दवा डाक्टर किस बात के लिये और कौन सी बीमारी के लिये prescribe करे, डाक्टर का भी परिवार है और उसकी हैसियत है , अब वह खाली दवा की गोली नही देगा तो क्या करेगा, उसके पास दूसरा कोई रास्ता नही बचता ?
मैने पिछले काई साल पहले ऐसा ही यह सब कुछ बहुत बुरी तरह से झेला है और अपना पैसों तथा साख का बहुत बड़ा और बहुत लम्बा नुकसान किया है / कई साल पहले मै ऐसे मरीजों को बहुत ईमान्दारी के साथ समझाता था कि उनको किसी भी दवा की कोई जरूरत नही है और बहुत कड़ाई से व्यवहार करके उनको कतई दवा नही देता था / एक एक करके सभी मरीज मुझे छोड़ते चले गये लेकिन मै अपनी ईमान्दारी पर कायम रहा / एक समय ऐसा आया कि मुझे नौकरी करनी पड़ी और अपनी रोजी रोटी के लाले पड़ने लगे / यह बहुत कठिन काम था / मै कर्ज से घिर गया और मेरी बहुत खराब आर्थिक और सामाजिक हालत हो गयी / एक दिन अचानक मै ईश्वर की कृपा से हकीम मोहम्मद शरीफ अनसारी के पास न जाने कैसे पहुन्च गया, उनको अपने पूरे हालत बताये / हकीम साहब मुझसे कई दश्कों से परिचित थे, उन्होने मेरी बात समझ कर मुझे समझाना शुरू किया कि जमाने की रफ्तार और चलन के साथ चलिये आप्का कल्याण होगा /

उस दिन के बाद से मैने Honesty is the best RULE यानी “ईमानदारी सबसे अच्छा कानून है”, को छोड़्कर Honesty is the best POLICY यानी “ईमानदारी सबसे अच्छी नीति है”, पर उतर आया / अब मै मरीजों के साथ उतनी ही ईमान्दारी से पेश आता हूं जितना कि मरीज मेरी ईमानदारी हजम कर सकें / मै बीच का रास्ता निकलता हू कि मरीज का भी काम बन जाय , उसे अच्छी से अच्छी मेरी सेवा मिल जाये और मेरा धन तथा साख का भी किसी तरह का नुकसान न हो /

अब मै भी जहां जरूरत नही होती , वहां दवा देने लगा हूं, भले ही मरीज को दवा की जरूरत हो या न हो /

Leucoderma ; Vitiligo ; White spots are 100 % totally curable by Ayurveda- Ayush Treatment based on the findings of E.T.G. Ayurvedascan examination and screening


RTI2005-ETGAS
RTI2005-ETGAS-2
RECENTLY among the large number of Vitiligo cases, which are being treated by me, one case of Leucoderma alias SAFED DAAG, VITILIGO, SHWET KUSHTHA of 21 years old young boy have been cured successfully totally 100 percent by the AYURVEDA – AYUSH treatment based on the findings of ETG AyurvedaScan examination report.

To present before as an evidence to whole medical community globally, it could be now time to convey that VITILIGO / LEUCODERMA is curable by AYURVEDA – AYUSH based treatment, which can not be ignored by the modern medical system which claims that there is no cure for VITILIGO or LEUCODERMA in any medical system prevelent in whole world or claims that VITILIGO oir Leucoderma is not a disease condition.

Some photographs of the patient have been taken before the treatment on 09th February 2013 for reference uses. The patient belongs to Bihar State of Navada Distt, which is far away 1400 kilometer and a journey of 18 hrs, from our outdoor clinic at KANPUR, UP, India. A few photographs are given below.
His MICROSCOPIC test of SKIN was done and is given for reference.
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middle right white micro 9 feb 2013
NOrmal skin micro 9 feb 2013
After 60 days of the Ayurveda and ayush treatment patient came for screening test on 12th APRIL 2013, his photographs were taken and other examination were done. See below the microscopic and routine photo of the check-up.
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Rajnikaant (Nevada)12 April 2013OLYMPUS DIGITAL CAMERA
Rajani kant 02
Rajani Kant pith
The whole ayurvedic fratenity should consider about these claims and be confident about the latest developed Ayurvedic diagnostics technology result oriented evidence based mechanism.

CONCLUSION;

The cure of Leucoderma is possible on the findings of ETG AyurvedaScan examination results along with the verification results of the conjoining examination done by the reference sources. The claim is not only for the LEUCoDERMA but it is for the all known or unknown disease conditions applicable to whether they are diagnosed or undiagnosed.

Stellaria media ; Homoeopathic remedy for Rheumatism and neuro-musculo-skeletal related joints problems


arthra
A vey effective Homoeopathic remedies for all nature of Rheumatism and joints related disease conditions belongings to any age and race.

STELLERIA MEDIA , which is known as “Cheekweed”, is used an external application for rheumatism as well as uses internally in lower decimal potencies through oral route.

The most indicative symdroms are stasis and congestion and sluggishness of all functions, which are mostaly aggravates in Morning and just after waking or just leaving the bed.

The main features of the remedy are mostly related to RHEUMATISM of all nature, given below in syndromes;

1- Chronic Rheumatism ;
Charecteristics of pain is sharp, shifting, darting pain with the stiffness of the joints. The affected parts are very sore to touch and very painful on movement

2- Gout disorder with enlarged and inflamed finger joints

3- Psoriasis

4- Cervical spiondylitis

5- Liver conditions engorged, swollen, stitching pain, sensitive to pressure. This is an invaluable remedy for Cirrhosis of Lever and Cancer of Liver of First and second stages.

Conclusively the medicine is useful in all musculo skeletal joints and muscles problems and Liver disorders prominently. There is no side effects of any kinds and totally safe.

If taken and used in mother tincture form , the remedy acts very fast and relieves problems sometimes instantly specially painful conditions.

ayurvedakrantikari